📍नई दिल्ली | 22 Apr, 2026, 12:30 PM
India US defence chiefs visit: भारत और अमेरिका के बीच रक्षा सहयोग को लेकर इन दिनों गर्मजोशी दिख रही है। इसकी वजह है तीनों भारतीय सेना प्रमुखों के अमेरिका दौरे, जो बेहद कम समय के अंतराल में हुए हैं। पहले नौसेना प्रमुख, फिर वायुसेना प्रमुख और अब थल सेना प्रमुख का दौरा, इस बात का संकेत माना जा रहा है कि दोनों देशों के बीच सैन्य स्तर पर बातचीत तेज हुई है।
नवंबर 2025 में भारतीय नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश त्रिपाठी अमेरिका गए थे। इसके बाद इस साल अप्रैल की शुरुआत में वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने अमेरिका का दौरा किया। अब अप्रैल के दूसरे हिस्से में थल सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी भी अमेरिका में हैं। इन लगातार दौरों को हाई-लेवल मिलिट्री-टू-मिलिट्री एक्सचेंज के तौर पर देखा जा रहा है।
India US defence chiefs visit: लगातार दौरों का क्या है मतलब
इन दौरों के दौरान अलग-अलग सैन्य क्षेत्रों पर बातचीत हो रही है। नौसेना प्रमुख के दौरे में समुद्री सुरक्षा, सूचना साझा करने और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में सहयोग पर चर्चा हुई। वायुसेना प्रमुख ने एयर पावर, जॉइंट एक्सरसाइज और लॉजिस्टिक्स सपोर्ट जैसे मुद्दों पर बातचीत की। अब थल सेना प्रमुख का दौरा जमीन आधारित ऑपरेशंस और मल्टी-डोमेन कोऑर्डिनेशन पर फोकस है।
सुरक्षा मामलों से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि इस तरह के दौरे दोनों देशों की सेनाओं के बीच समझ बढ़ाने के लिए होते हैं। इसमें ऑपरेशन के तरीके, ट्रेनिंग सिस्टम और नई तकनीकों को लेकर बातचीत होती है। (India US defence chiefs visit)
हवाई में सेना प्रमुख को मिला गार्ड ऑफ ऑनर
भारतीय सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी इस हफ्ते अमेरिका के हवाई द्वीप स्थित फोर्ट शाफ्टर पहुंचे, जहां उन्होंने यूनाइटेड स्टेट्स आर्मी पैसिफिक यानी यूएसएआरपैक का दौरा किया। फोर्ट शाफ्टर में उन्हें औपचारिक सैन्य सम्मान गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया।
इस दौरान उन्होंने यूएसएआरपैक के कमांडिंग जनरल रोनाल्ड पी क्लार्क और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों से मुलाकात की। इन बैठकों में कई अहम मुद्दों पर चर्चा हुई। इसमें दोनों देशों की सेनाओं के बीच तालमेल बढ़ाना, संयुक्त ट्रेनिंग को बेहतर बनाना और जमीन, हवा, समुद्र, साइबर और स्पेस जैसे अलग-अलग क्षेत्रों में मिलकर काम करने पर जोर रहा। साथ ही इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में बदलते हालात के बीच शांति और स्थिरता बनाए रखने के तरीकों पर भी बातचीत हुई।
एक और अहम विषय टेक्नोलॉजी से जुड़ा रहा। दोनों पक्षों ने डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग, को-प्रोडक्शन और नई तकनीकों पर साथ काम करने की संभावनाओं पर चर्चा की। इसका उद्देश्य यह है कि दोनों देश रक्षा क्षेत्र में एक-दूसरे के साथ मिलकर काम कर सकें। (India US defence chiefs visit)
ओआहू द्वीप का हवाई दौरा
दौरे के दौरान जनरल द्विवेदी ने ओआहू द्वीप का हवाई सर्वे भी किया। इस दौरान उन्हें अमेरिकी सेना के ट्रेनिंग सिस्टम और उनकी ऑपरेशनल तैयारी को करीब से समझने का मौका मिला। खासतौर पर जंगल और समुद्र किनारे वाले इलाकों में होने वाले युद्ध अभ्यास और मल्टी-डोमेन ऑपरेशन पर जानकारी दी गई।
यह दौरा ऐसे समय में हो रहा है, जब हाल के दिनों में भारत और अमेरिका के बीच सैन्य स्तर पर कई बैठकों और बातचीत का दौर चला है। इससे दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग को और मजबूत करने की दिशा में काम जारी है।
हवाई के बाद जनरल द्विवेदी का दौरा वॉशिंगटन डीसी में रहा। जहां भारतीय राजदूत विनय मोहन क्वात्रा ने उन्हें इंडिया हाउस में होस्ट किया। इस दौरान आगे अमेरिकी रक्षा विभाग और सेना के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठकों का कार्यक्रम तय किया गया है।
इन बैठकों में दोनों देशों के बीच सैन्य सहयोग, ट्रेनिंग और साझा ऑपरेशन के अनुभवों पर चर्चा की जा रही है। (India US defence chiefs visit)
पिछले साल नवंबर में अमेरिका गए थे नेवी चीफ
इससे पहले 12 से 17 नवंबर 2025 में नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश त्रिपाठी ने अमेरिका का दौरा किया था। उन्होंने यूएस इंडो-पैसिफिक कमांड और यूएस पैसिफिक फ्लीट के अधिकारियों से मुलाकात की थी। इनमें यूएस इंडो-पैसिफिक कमांड के कमांडर एडमिरल सैमुअल जे. पापारो, यूएस पैसिफिक फ्लीट के कमांडर एडमिरल स्टीफन टी. कोहलर और यूएस मरीन फोर्सेज पैसिफिक के कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल जेम्स एफ. ग्लिन शामिल रहे।
दौरे के दौरान उन्होंने जॉइंट बेस पर्ल हार्बर-हिकम और यूएसएस डेनियल इनोउये का भी दौरा किया। इसके अलावा अमेरिकी नौसेना के अलग-अलग ऑपरेशनल कमांड्स और संस्थानों को करीब से देखा और उनकी कार्यप्रणाली को समझा। उन्होंने अमेरिका में पढ़ रहे भारतीय अधिकारियों से भी मुलाकात की, जो आइजनहावर स्कूल और नेशनल वॉर कॉलेज में ट्रेनिंग ले रहे हैं।
इस पूरे दौरे में भारत और अमेरिका की नौसेनाओं के बीच समुद्री सहयोग को मजबूत करने पर जोर रहा। समुद्री सुरक्षा, जानकारी साझा करने, समुद्री क्षेत्र में नजर रखने की क्षमता और आपसी तालमेल बढ़ाने जैसे मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई। इंडो-पैसिफिक क्षेत्र से जुड़े साझा मुद्दों, जैसे मिलन एक्सरसाइज और कंबाइंड मैरिटाइम फोर्सेज में सहयोग, पर भी बात हुई। इन बैठकों से दोनों नौसेनाओं के बीच तालमेल और ऑपरेशनल सहयोग को और मजबूत करने की दिशा में काम हुआ। (India US defence chiefs visit)
अप्रैल में अमेरिका पहुंचे वायुसेना प्रमुख
6 से 9 अप्रैल तक वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह भी अमेरिका दौरे पर थे। उन्होंने पेंटागन में बैठकों के अलावा अलग-अलग एयरबेस का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने फाइटर जेट ऑपरेशन और स्पेस आधारित सिस्टम के बारे में जानकारी ली।
अमेरिका दौरे के दौरान एयर चीफ मार्शल एपी सिंह का जॉइंट बेस एनाकोस्टिया-बोलिंग पर फुल ऑनर्स के साथ स्वागत किया गया। इसके बाद उन्होंने पेंटागन में अमेरिकी वायुसेना के शीर्ष अधिकारियों से मुलाकात की, जहां यूएस सेक्रेटरी ऑफ द एयर फोर्स ट्रॉय मिंक और यूएस एयर फोर्स चीफ जनरल केन विल्सबैक के साथ अहम बातचीत हुई।
दौरे के दौरान वे पीटरसन स्पेस फोर्स बेस (कोलोराडो) भी पहुंचे, जहां उन्हें नोराड (नॉर्थ अमेरिकन एयरोस्पेस डिफेंस कमांड) की एयरोस्पेस वॉर्निंग, कंट्रोल और मैरिटाइम वॉर्निंग सिस्टम्स के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई। इसके बाद उन्होंने नेलिस एयर फोर्स बेस (नेवादा) का दौरा किया, जहां यूएस एयर फोर्स वारफेयर सेंटर की ऑपरेशनल तैयारियों पर ब्रीफिंग ली।
इसी दौरान उन्होंने एफ-15ईएक्स ईगल-II फाइटर जेट में फेमिलराइजेशन फ्लाइट भी की, जिसे उन्होंने खुद उड़ाकर उसकी क्षमताओं को करीब से समझा। इस पूरे दौरे में दोनों देशों के बीच कम्बाइंड एक्सरसाइज, लॉजिस्टिक्स सपोर्ट और मॉडर्नाइजेशन जैसे अहम मुद्दों पर भी विस्तार से चर्चा हुई। (India US defence chiefs visit)
इंडो-पैसिफिक क्षेत्र पर खास ध्यान
इन सभी दौरों में एक बात समान रही है, और वह है इंडो-पैसिफिक क्षेत्र पर फोकस। इस क्षेत्र में समुद्री रास्तों की सुरक्षा, सैन्य संतुलन और सहयोग जैसे मुद्दों पर लगातार चर्चा हो रही है।
भारत और अमेरिका दोनों ही इस क्षेत्र में अपने सहयोग को बढ़ाने पर काम कर रहे हैं। इसी वजह से अलग-अलग सैन्य शाखाओं के बीच संपर्क बढ़ाया जा रहा है।
रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के दौरे लंबे समय से चल रहे सैन्य सहयोग का हिस्सा होते हैं। इसमें दोनों देशों की सेनाएं एक-दूसरे के अनुभवों को समझती हैं और जरूरत के अनुसार सहयोग बढ़ाने के तरीके तलाशती हैं। इस प्रक्रिया में जॉइंट ट्रेनिंग, ऑपरेशन प्लानिंग और टेक्नोलॉजी से जुड़े मुद्दों पर भी बातचीत होती है। (India US defence chiefs visit)
तीनों सेनाओं के स्तर पर बढ़ा संपर्क
इन दौरों की खास बात यह है कि इसमें तीनों सेनाओं नौसेना, वायुसेना और थल सेना के प्रमुख शामिल रहे हैं। इससे यह साफ होता है कि सहयोग केवल एक क्षेत्र तक सीमित नहीं है, बल्कि सभी सैन्य क्षेत्रों में बातचीत हो रही है। इस तरह के संपर्क से दोनों देशों की सेनाओं के बीच तालमेल बढ़ाने पर काम किया जा रहा है, जिसमें अलग-अलग ऑपरेशन और ट्रेनिंग सिस्टम को समझना शामिल है। (India US defence chiefs visit)





