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ऑपरेशन सिंदूर के बाद बढ़ा आकाश मिसाइल का जलवा, इस एयर डिफेंस सिस्टम के ताजिकिस्तान और तुर्कमेनिस्तान भी बने खरीदार

पूर्व डीआरडीओ प्रमुख डॉ. समीर वी. कामत ने हाल ही में दिए अपने बयान में कहा कि भारत ने स्वदेशी आकाश एयर डिफेंस सिस्टम को ताजिकिस्तान और तुर्कमेनिस्तान को निर्यात किया है...

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📍नई दिल्ली | 30 Jul, 2026, 5:55 PM

Akash Missile Export: भारत ने अपने स्वदेशी एयर डिफेंस सिस्टम आकाश को ताजिकिस्तान और तुर्कमेनिस्तान को भी निर्यात किया है। डीआरडीओ के पूर्व अध्यक्ष डॉ. समीर वी. कामत ने कहा है कि ये देश सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल (एसएएम) के नए खरीदार के दौर पर उभरे हैं। अब तक भारत की तरफ से आकाश मिसाइल के सबसे बड़े विदेशी ग्राहक के रूप में आर्मेनिया का नाम सामने आया था। वहीं, मध्य एशिया के दो देशों तक इस सिस्टम का पहुंचना बताता है कि कि भारत की रक्षा उद्योग तेजी से दुनिया में अपनी जगह बना रहा है।

Akash Missile Export: ऑफिशियल डिटेल्स अभी तक सार्वजनिक नहीं

पूर्व डीआरडीओ प्रमुख डॉ. समीर वी. कामत ने हाल ही में दिए अपने बयान में कहा कि भारत ने स्वदेशी आकाश एयर डिफेंस सिस्टम को ताजिकिस्तान और तुर्कमेनिस्तान को निर्यात किया है। हालांकि भारत सरकार की ओर से इन दोनों देशों के साथ हुए संभावित रक्षा सौदे का विस्तृत आधिकारिक ब्यौरा अभी तक सार्वजनिक नहीं किया गया है। हालांकि, डॉ. कामत का बयान भारत के डिफेंस एक्सपोर्ट मिशन के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

क्या है आकाश एयर डिफेंस सिस्टम?

आकाश एक मध्यम दूरी की सतह से हवा में मार करने वाला मिसाइल सिस्टम है। इसे डीआरडीओ ने तैयार किया है, जबकि इसका उत्पादन भारत डायनेमिक्स लिमिटेड (बीडीएल) और भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (बीईएल) सहित भारतीय उद्योग मिलकर करते हैं।

यह सिस्टम दुश्मन के लड़ाकू विमान, हमलावर हेलीकॉप्टर, ड्रोन, यूएवी और क्रूज मिसाइल जैसे हवाई खतरों को रोकने के लिए तैयार किया गया है।

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आकाश मिसाइल की मारक क्षमता लगभग 25 किलोमीटर तक है। यह एक साथ कई एरियल टारगेट्स पर नजर रख सकती है और जरूरत पड़ने पर उन पर कार्रवाई भी कर सकती है। (Akash Missile Export)

आधुनिक रडार और कमांड सिस्टम से लैस

आकाश एयर डिफेंस सिस्टम की सबसे बड़ी ताकत इसका आधुनिक राजेंद्र रडार और ऑटोमेटेड कमांड एंड कंट्रोल सिस्टम है।

राजेंद्र रडार एक साथ कई एरियल टारगेट्स का पता लगा सकता है और उनकी लगातार निगरानी करता है। इसके बाद कमांड एंड कंट्रोल सिस्टम खतरे को एनालिसिस कर मिसाइल को सही टारगेट तक पहुंचाने में मदद करता है। इसी वजह से यह सिस्टम कम समय में कई हवाई खतरों से निपटने में सक्षम माना जाता है।

भारतीय सेना और भारतीय वायुसेना दोनों कई सालों से इस सिस्टम को ऑपरेट कर रहे हैं। (Akash Missile Export)

मध्य एशिया में भारत की बढ़ी मौजूदगी

ताजिकिस्तान और तुर्कमेनिस्तान मध्य एशिया के ऐसे देश हैं, जो लंबे समय से अपनी सैन्य जरूरतों के लिए मुख्य रूप से रूस पर निर्भर रहे हैं।

ऐसे में यदि इन देशों ने भारतीय आकाश सिस्टम को अपनाया है, तो यह भारत के लिए रणनीतिक रूप से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इससे यह संकेत मिलता है कि मध्य एशिया के देशों का भरोसा अब भारतीय रक्षा तकनीक पर भी बढ़ रहा है।

ताजिकिस्तान की सीमा अफगानिस्तान से लगती है। इस कारण वहां हवाई सुरक्षा को मजबूत रखना हमेशा प्राथमिकता रही है। वहीं, तुर्कमेनिस्तान कैस्पियन सागर क्षेत्र के पास स्थित है और वह भी अपनी हवाई सुरक्षा क्षमता बढ़ाने पर काम कर रहा है।

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रक्षा निर्यात में लगातार बढ़ रही भारत की हिस्सेदारी

पिछले कुछ सालों में भारत के रक्षा निर्यात में लगातार वृद्धि दर्ज की गई है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 में भारत का रक्षा निर्यात 38,000 करोड़ रुपये के आंकड़े को पार कर गया।

आकाश के अलावा भारत की कई अन्य स्वदेशी डिफेंस सिस्टम्स भी विदेशों तक पहुंच रहे हैं। इनमें ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल, पिनाका मल्टी बैरल रॉकेट लॉन्चर और अस्त्र हवा से हवा में मार करने वाली मिसाइल प्रमुख हैं।

ऑपरेशन सिंदूर के बाद बढ़ी रुचि

भारतीय एयर डिफेंस सिस्टम्स की क्षमता को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रुचि बढ़ी है। पूर्व डीआरडीओ प्रमुख डॉ. समीर वी. कामत ने भी कहा कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारतीय सिस्टम्स के प्रदर्शन के बाद कई देशों का भरोसा स्वदेशी रक्षा तकनीक पर बढ़ा है।

आकाश सिस्टम विशेष रूप से ड्रोन, कम ऊंचाई पर उड़ने वाले हवाई लक्ष्यों और एक साथ आने वाले कई खतरों का सामना करने के लिए विकसित की गई है। आधुनिक युद्ध में जहां ड्रोन और क्रूज मिसाइलों का उपयोग तेजी से बढ़ रहा है, वहां ऐसी एयर डिफेंस सिस्टम्स की मांग भी लगातार बढ़ रही है। (Akash Missile Export)

कई देशों की नजर आकाश-एनजी पर

भारत पहले ही आर्मेनिया को आकाश-1एस सिस्टम की आपूर्ति कर चुका है। इसके अलावा अफ्रीका और दक्षिण अमेरिका के कई देशों के साथ नई पीढ़ी की आकाश-एनजी सिस्टम को लेकर बातचीत चल रही है।

पूर्व डीआरडीओ प्रमुख डॉ. समीर वी. कामत ने कहा कि भारत का लक्ष्य 2028-29 तक रक्षा निर्यात को 50,000 करोड़ रुपये तक पहुंचाना है। आकाश जैसे स्वदेशी मिसाइल सिस्टम इस लक्ष्य को हासिल करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। (Akash Missile Export)

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