📍पुंगुक, पूर्वी लद्दाख | 12 Sep, 2026, 9:34 PM
Army ITBP Joint Training Ladakh: भारतीय सेना अब दूसरे बलों के साथ जॉइंटनेस बढ़ाने पर फोकस कर रही है। सीआईएसएफ के बाद भारतीय सेना की फायर एंड फ्यूरी कॉर्प्स और भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) ने जॉइंट ट्रेनिंग में हिस्सा लिया। यह ट्रेनिंग एलएएसी के पास पूर्वी लद्दाख के रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण पुंगुक क्षेत्र में की गई।
इस अभ्यास में जवानों को इन्फैंट्री कॉम्बैट व्हीकल (आईसीवी) की क्षमताओं से परिचित कराया गया और इंटीग्रेटेड मिसाइल सिमुलेटर पर जॉइंट सिमुलेशन फायरिंग कराई गई। सेना के अनुसार इस गतिविधि का उद्देश्य दोनों बलों के बीच ऑपरेशनल समझ, समन्वय और इंटरऑपरेबिलिटी को मजबूत करना था।
Army ITBP Joint Training Ladakh: पूर्वी लद्दाख में बढ़ी संयुक्त तैयारी
यह अभ्यास ऐसे समय में हुआ है जब पूर्वी लद्दाख में भारतीय सेना और आईटीबीपी के बीच तालमेल बढ़ाने पर लगातार जोर दिया जा रहा है। साल 2020 के गलवान संघर्ष के बाद वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) के आसपास सुरक्षा व्यवस्था और सैन्य तैनाती में बड़े बदलाव किए गए हैं।
उस दौरान भारतीय सेना ने पहली बार बड़ी संख्या में मैकेनाइज्ड प्लेटफॉर्म, टैंक और इन्फैंट्री कॉम्बैट व्हीकल्स को 14,000 फीट से अधिक ऊंचाई वाले इलाकों में लंबे समय तक तैनात किया था। ऐसे कठिन वातावरण में सेना और सीमा सुरक्षा बलों के बीच बेहतर तालमेल बनाए रखना एक अहम जरूरत बन गई है।
पूर्वी लद्दाख में सेना और आईटीबीपी के बीच समन्वय बढ़ाने के लिए हाल के सालों में कई संयुक्त अभ्यास आयोजित किए गए हैं। चुमार, चुशुल, चिशुमले और अन्य अग्रिम क्षेत्रों में भी दोनों बलों ने संयुक्त गतिविधियों में हिस्सा लिया है। (Army ITBP Joint Training Ladakh)

पुंगुक इलाका क्यों है महत्वपूर्ण
पुंगुक पूर्वी लद्दाख के चांगथांग क्षेत्र में स्थित एक छोटा लेकिन रणनीतिक गांव है। यह हानले घाटी के पास लगभग 4,300 से 4,500 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। इसके पश्चिम में चुमार है। पुंगुक हानले क्लस्टर का हिस्सा है और एलएसी (चुमार सेक्टर) से इसकी दूरी लगभग 40 किलोमीटर है। यह फॉरवर्ड बॉर्डर जोन है, इसलिए आर्मी यहां मैकेनाइज्ड ट्रेनिंग भी करती है। यह इलाका अपनी खुली तथा पठारी भौगोलिक बनावट के कारण सैन्य गतिविधियों के लिए उपयुक्त समझा जाता है। (Army ITBP Joint Training Ladakh)
अभ्यास में शामिल हुई बीएमपी-2 सारथ आईसीवी
जॉइंट ट्रेनिंग के दौरान जिस बीएमपी-2 सारथ इन्फैंट्री कॉम्बैट व्हीकल का इस्तेमाल किया गया, वह भारतीय सेना की मैकेनाइज्ड इन्फैंट्री की रीढ़ माना जाता है। इस वाहन में 30 मिमी ऑटोमैटिक कैनन, कोंकर्स एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइल सिस्टम, को-एक्सियल मशीन गन और स्मोक ग्रेनेड लॉन्चर लगे होते हैं। यह एक बार में लगभग 10 सैनिकों को युद्ध क्षेत्र तक पहुंचा सकता है।
मैदानी क्षेत्रों में इसकी अधिकतम गति लगभग 65 किलोमीटर प्रति घंटा तक होती है। हालांकि लद्दाख जैसे ऊंचे क्षेत्रों में कम ऑक्सीजन और अत्यधिक ठंड इंजन के प्रदर्शन को प्रभावित करती है। कई बार तापमान माइनस 30 से माइनस 40 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच जाता है, जिसके कारण वाहनों को विशेष रखरखाव की आवश्यकता होती है। (Army ITBP Joint Training Ladakh)

इंटीग्रेटेड मिसाइल सिमुलेटर का हुआ इस्तेमाल
इस संयुक्त अभ्यास की एक खास बात इंटीग्रेटेड मिसाइल सिमुलेटर का इस्तेमाल रहा। यह एक आधुनिक ट्रेनिंग सिस्टम है, जो असली वेपन सिस्टम का एक्सपीरियंस देती है। वहीं इसमें इसमें वास्तविक गोला-बारूद खर्च नहीं होता। सिमुलेटर के जरिए जवान एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइल फायरिंग, लक्ष्य पहचान, हथियार संचालन और युद्ध क्षेत्र की विभिन्न परिस्थितियों का अभ्यास कर सकते हैं।
उच्च हिमालयी क्षेत्रों में लाइव फायरिंग कई बार मौसम, सुरक्षा और लॉजिस्टिक कारणों से सीमित होती है। ऐसे में सिमुलेटर बेस्ड ट्रेनिंग सैनिकों को वास्तविक परिस्थितियों जैसी तैयारी उपलब्ध कराता है। इससे गोला-बारूद की बचत होती है और प्रशिक्षण की गुणवत्ता भी बेहतर रहती है। (Army ITBP Joint Training Ladakh)
फायर एंड फ्यूरी कॉर्प्स के अंडर में है यह इलाका
भारतीय सेना की 14वीं कॉर्प्स या फायर एंड फ्यूरी कॉर्प्स का मुख्यालय लेह में स्थित है। कारगिल युद्ध के बाद बनी इस कॉर्प्स की जिम्मेदारी सियाचिन ग्लेशियर, पाकिस्तान के साथ नियंत्रण रेखा और चीन के साथ लगी कुल 3,488 किलोमीटर की लगभग 832 किमी लंबी वास्तविक नियंत्रण रेखा की सुरक्षा करती है। जिसमें दौलत बेग ओल्डी (डीबीओ) से लेकर देमचोक तक का इलाका शामिल है।
गलवान संघर्ष के बाद इस कॉर्प्स की जिम्मेदारियां और बढ़ गईं। इसके तहत टी-72, टी-90 भीष्म टैंक और बीएमपी-2 सारथ जैसे प्लेटफॉर्म बड़ी संख्या में पूर्वी लद्दाख में तैनात किए गए। इतनी अधिक ऊंचाई पर मैकेनाइज्ड फोर्स का ऑपरेशन करना दुनिया की चुनिंदा सैन्य क्षमताओं में गिना जाता है। (Army ITBP Joint Training Ladakh)

गलवान के बाद आईटीबीपी पर रहा फोकस
आईटीबीपी की स्थापना 1962 के भारत-चीन युद्ध के बाद की गई थी। यह बल चीन सीमा की निगरानी और सीमा प्रबंधन की जिम्मेदारी निभाता है। एलएसी पर आईटीबीपी को अक्सर भारत की पहली सुरक्षा पंक्ति माना जाता है।
आईटीबीपी काराकोरम पास और दौलत बेग ओल्डी (डीबीओ) से लेकर दक्षिण में देमचोक और चुमार तक करीब 832 किलोमीटर लंबे सीमावर्ती क्षेत्र में निगरानी और गश्त का काम करती है।
पूर्वी लद्दाख में पैंगोंग त्सो, चुशुल, चांगचेनमो, न्योमा, हानले, कोरजोक, पुंगुक, देमचोक और चुमार जैसे संवेदनशील इलाकों में आईटीबीपी की चौकियां मौजूद हैं। इन चौकियों की ऊंचाई लगभग 9,000 फीट से लेकर 18,900 फीट तक है, जहां जवान बेहद कठिन मौसम और ऑक्सीजन की कमी के बीच ड्यूटी करते हैं।
जून 2020 के गलवान घाटी संघर्ष के बाद लद्दाख में आईटीबीपी की तैनाती को काफी मजबूत किया गया। पहले जहां इस सेक्टर में लगभग तीन बटालियन तैनात थीं, वहीं बाद में इनकी संख्या बढ़ाकर सात बटालियन तक कर दी गई। इसके साथ ही एलएसी पर बॉर्डर आउटपोस्ट (बीओपी) की संख्या 180 से बढ़ाकर 215 की गई। केवल लद्दाख क्षेत्र में 2022 से 2024 के बीच 29 नई चौकियां स्थापित की गईं।
साथ ही, 2020 के बाद आईटीबीपी ने अपने विशेष शौर्य कमांडो प्लाटून भी तैयार किए हैं। इन जवानों को पर्वतीय युद्ध, ड्रोन ऑपरेशन और त्वरित प्रतिक्रिया अभियानों के लिए प्रशिक्षित किया जाता है। साथ ही, आईटीबीपी ने अपनी गश्त गतिविधियों में भी बड़ा विस्तार किया है। एलएसी के पास गश्त की संख्या लगभग तीन गुना बढ़ाई गई है और कई चौकियों को सीमा के और नजदीक स्थानांतरित किया गया है। (Army ITBP Joint Training Ladakh)
सीआईएसएफ के साथ जॉइंट ट्रेनिंग
इससे पहले इसी साल 27 जून को केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (सीआईएसएफ) कर्मी लद्दाख स्थित परशु ड्रोन ट्रेनिंग स्कूल में आयोजित विशेष यूएएस और काउंटर-यूएएस अवेयरनेस एवं ऑपरेशंस कैडर ट्रेनिंग में शामिल हुए थे। ऊंचाई वाले चुनौतीपूर्ण क्षेत्र में आयोजित इस ट्रेनिंग में ड्रोन ऑपरेशन, ड्रोन खतरों की पहचान और काउंटर-यूएएस के बारे में बताया गया था। यह ट्रेनिंग भारतीय सेना द्वारा अंतर-एजेंसी सहयोग को बढ़ावा देने, विशेषज्ञता साझा करने और जॉइंट ट्रेनिंग के माध्यम से राष्ट्रीय सुरक्षा क्षमताओं को मजबूत करने के लिए आयोजित की गई थी। (Army ITBP Joint Training Ladakh)
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हरेंद्र चौधरी रक्षा पत्रकारिता (Defence Journalism) में सक्रिय हैं और RakshaSamachar.com से जुड़े हैं। वे लंबे समय से भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना से जुड़ी रणनीतिक खबरों, रक्षा नीतियों और राष्ट्रीय सुरक्षा से संबंधित मुद्दों को कवर कर रहे हैं। पत्रकारिता के अपने करियर में हरेंद्र ने संसद की गतिविधियों, सैन्य अभियानों, भारत-पाक और भारत-चीन सीमा विवाद, रक्षा खरीद और ‘मेक इन इंडिया’ रक्षा परियोजनाओं पर विस्तृत लेख लिखे हैं। वे रक्षा मामलों की गहरी समझ और विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण के लिए जाने जाते हैं।





