📍नई दिल्ली | 12 Sep, 2026, 9:44 PM
K-9 Vajra Sigma 30N-600: भारतीय सेना अपने सबसे अहम सेल्फ प्रोपेल्ड आर्टिलरी प्लेटफॉर्म के-9 वज्र को और अधिक सटीक और आधुनिक बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठा रही है। सेना के सबसे आधुनिक और घातक सेल्फ प्रोपेल्ड आर्टिलरी सिस्टम को अब अत्याधुनिक नेविगेशन तकनीक से लैस करने की तैयारी शुरू हो गई है। रक्षा मंत्रालय के-9 वज्र हॉवित्जर के लिए फ्रांस की कंपनी साफरान से इनर्शियल नेविगेशन यूनिट खरीदने की तैयारी कर रहा है।
इस सिस्टम से के-9 वज्र को बैटलफील्ड में बिना बाहरी सिग्नल के भी अधिक सटीक लोकेशन, तुरंत तैनाती और टारगेट को सटीक निशाना बनाने में मदद मिलेगी।
K-9 Vajra Sigma 30N-600: K-9 वज्र के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह सिस्टम?
इंटीग्रेटेड हेडक्वॉर्टर (आर्मी) ने साफरान इलेक्ट्रॉनिक्स एंड डिफेंस के एडवांस इनर्शियल नेविगेशन यूनिट (आईएनयू) सिग्मा 30एन-600 18 यूनिट की सप्लाई के लिए सिंगल टेंडर इन्क्वायरी (टू बिड सिस्टम) के तहत आरएफपी जारी की है। यह प्रोक्योरमेंट दिसंबर 2024 में एलएंडटी के साथ हुए के-9 वज्र के रीपीट ऑर्डर से जुड़ा हुआ है।
इनर्शियल नेविगेशन यूनिट किसी भी बाहरी सिग्नल पर निर्भर हुए बिना प्लेटफॉर्म की स्थिति और दिशा का पता लगाता है। यदि दुश्मन जीपीएस को जाम भी कर दे या सैटेलाइट सिग्नल ब्लॉक कर दे, तब भी यह सिस्टम काम करता रहता है।
सेना का मानना है कि सिग्मा 30एन-600 लगाने के बाद के-9 वज्र की “शूट एंड स्कूट” क्षमता और बेहतर होगी। तोप तेजी से फायर करके तुरंत अपनी जगह बदल सकेगी, जिससे दुश्मन के जवाबी हमले से बचना आसान होगा।
क्या है सिग्मा 30N-600?
सिग्मा 30एन-600, फ्रांस की कंपनी साफरान का बनाया रिंग लेजर जाइरो (RLG) आधारित स्ट्रैपडाउन इनर्शियल नेविगेशन सिस्टम है। इसे विशेष रूप से आर्टिलरी, मल्टीपल रॉकेट लॉन्चर, मोर्टार और सेल्फ प्रोपेल्ड तोपों के लिए डिजाइन किया गया है।
यह सिस्टम अत्यधिक चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में भी काम कर सकता है। यदि जीएनएसएस, जीपीएस या अन्य सैटेलाइट बेस्ड नेविगेशन सेवाएं उपलब्ध न हों, तब भी यह तोप को सटीक दिशा और स्थान की जानकारी देता रहता है। सिग्मा 30एन-600 का हेडिंग प्रिसिजन लगभग 0.9 मिल आरएमएस है, जबकि रोल और पिच प्रीसिजन लगभग 0.35 मिल आरएमएस है। इसका हॉरिजॉन्टल पोजिशन एरर लगभग 0.05 फीसदी दूरी (CEP) के आसपास है।
सिस्टम कुछ ही मिनटों में पूरी क्षमता से काम करने लगता है और इसकी बिजली खपत भी काफी कम है। इसे 18 से 32 वोल्ट पावर सप्लाई पर चलाया जा सकता है तथा इसकी खपत 30 वाट से कम रहती है। (K-9 Vajra Sigma 30N-600)
जीपीएस बंद होने पर भी जारी रहेगा ऑपरेशन
हाल के सालों में दुनिया भर के युद्धक्षेत्रों में इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर का महत्व तेजी से बढ़ा है। कई देशों ने ऐसे सिस्टम विकसित कर लिए हैं जो जीपीएस सिग्नलों को जैम या स्पूफ कर सकते हैं। ऐसे हालात में पारंपरिक नेविगेशन सिस्टम प्रभावित हो सकते हैं, लेकिन सिग्मा 30एन-600 पूरी तरह इनर्शियल प्रिंसिपल पर आधारित होने के चलते स्वतंत्र रूप से काम करता है।
यही वजह है कि भारतीय सेना के-9 वज्र के नए बैच में इस सिस्टम को शामिल कर रही है ताकि किसी भी परिस्थिति में तोप की मारक क्षमता प्रभावित न हो। (K-9 Vajra Sigma 30N-600)
नैविक-ग्लोनास रिसीवर भी मिलेगा
सेना की तरफ से जारी जरूरत के मुताबिक प्रत्येक इनर्शियल नेविगेशन यूनिट के साथ कई एसेसरीज भी दी जाएंगी। इनमें जीपीएस एंटीना, इंटरफेस केबल, माउंटिंग ब्रैकेट, आईसीसी (इंटरफेस कंट्रोल कंपोनेंट) तथा आईआरएनएसएस-ग्लोनास रिसीवर शामिल हैं।
आईआरएनएसएस यानी नैविक (NavIC) भारत की स्वदेशी सैटेलाइट नेविगेशन प्रणाली है। इसका इस्तेमाल भारतीय मिलिट्री प्लेटफॉर्मों में लगातार बढ़ाया जा रहा है। नैविक और रूसी ग्लोनास रिसीवर से यह फायदा होगा कि जरूरत पड़ने पर भारतीय सैटेलाइट नेटवर्क का भी इस्तेमाल किया जा सकेगा। (K-9 Vajra Sigma 30N-600)
जबलपुर में होगी डिलीवरी
सभी 18 यूनिट की डिलीवरी कॉन्ट्रैक्ट लागू होने के 18 महीने के भीतर पूरी करनी होगी। इन सिस्टमों की सप्लाई जबलपुर स्थित सेंट्रल ऑर्डनेंस डिपो को की जाएगी। साथ ही मूल निर्माता को सेना के ईएमई (इलेक्ट्रॉनिक्स एंड मैकेनिकल इंजीनियर्स) कर्मियों को इंस्टॉलेशन, फिटमेंट और रखरखाव का प्रशिक्षण भी देना होगा। कंपनी को दो सालों तक इंस्टॉलेशन और कमीशनिंग मदद निःशुल्क उपलब्ध करानी होगी। (K-9 Vajra Sigma 30N-600)
भारत में होगा निर्माण
दिसंबर 2025 में इंडिया ऑप्टेल लिमिटेड (IOL) और साफरान के बीच सिग्मा 30एन सिस्टम के प्रोडक्शन ट्रांसफर को लेकर समझौता हुआ था। इस समझौते के तहत भारत में सिस्टम की असेंबली, परीक्षण, रखरखाव और लाइफ-साइकिल सपोर्ट की व्यवस्था विकसित की जा रही है। ताकि भविष्य में इनर्शियल नेविगेशन सिस्टम के अधिक हिस्सों का निर्माण भारत में ही किया जा सके। (K-9 Vajra Sigma 30N-600)
के-9 वज्र भारतीय सेना की प्रमुख सेल्फ प्रोपेल्ड गन
के-9 वज्र भारतीय सेना की सबसे आधुनिक 155 मिमी/52 कैलिबर ट्रैक्ड सेल्फ-प्रोपेल्ड हॉवित्जर है। इसे एलएंडटी ने दक्षिण कोरिया की हनव्हा एयरोस्पेस के सहयोग से विकसित किया है। पहली 100 के-9 वज्र तोपों की सप्लाई 2021 तक पूरी हो चुकी थी। इसके बाद दिसंबर 2024 में दूसरी खेप के लिए 100 अतिरिक्त तोपों का कॉन्ट्रैक्ट किया गया था। वहीं, सेना की योजना करीब 300 और तोपों का ऑर्डर देने की है, लेकिन अभी यह प्रोपेजल लेवल पर ही है। (K-9 Vajra Sigma 30N-600)
Author
हरेंद्र चौधरी रक्षा पत्रकारिता (Defence Journalism) में सक्रिय हैं और RakshaSamachar.com से जुड़े हैं। वे लंबे समय से भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना से जुड़ी रणनीतिक खबरों, रक्षा नीतियों और राष्ट्रीय सुरक्षा से संबंधित मुद्दों को कवर कर रहे हैं। पत्रकारिता के अपने करियर में हरेंद्र ने संसद की गतिविधियों, सैन्य अभियानों, भारत-पाक और भारत-चीन सीमा विवाद, रक्षा खरीद और ‘मेक इन इंडिया’ रक्षा परियोजनाओं पर विस्तृत लेख लिखे हैं। वे रक्षा मामलों की गहरी समझ और विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण के लिए जाने जाते हैं।





