📍नई दिल्ली | 13 Sep, 2026, 8:22 PM
Operation Sindoor Mod Report: रक्षा मंत्रालय की वार्षिक रिपोर्ट 2025-26 में ऑपरेशन सिंदूर को भारत के आतंकवाद विरोधी अभियान में एक महत्वपूर्ण सैन्य कार्रवाई बताया गया है। रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि जैकोबाबाद एयरबेस पर कई एफ-16 लड़ाकू विमानों को नुकसान पहुंचा था। वहीं रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि सेना की विशेष टीमों ने युद्ध के दौरान गिरे ड्रोन, मिसाइलों और फटे बिना रह गए सैकड़ों विस्फोटकों को सुरक्षित तरीके से निष्क्रिय कर संभावित खतरे को टाल दिया।
Operation Sindoor Mod Report: नियंत्रित थी भारतीय कार्रवाई
रक्षा मंत्रालय की वार्षिक रिपोर्ट 2025-26 में ऑपरेशन सिंदूर को भारत के आतंकवाद विरोधी अभियान में एक महत्वपूर्ण सैन्य कार्रवाई बताया गया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारत ने संयुक्त सैन्य शक्ति, आधुनिक हथियारों और इंटीग्रेटेड एयर डिफेंस नेटवर्क का इस्तेमाल करते हुए पाकिस्तान की कई सैन्य क्षमताओं को निशाना बनाया। साथ ही भारतीय पक्ष ने कार्रवाई को नियंत्रित और गैर-विस्तारवादी रखने का प्रयास किया।
रिपोर्ट में बताया गया है कि इस अभियान ने दिखाया कि भारतीय सेनाएं मल्टी-डोमेन ऑपरेशंस, एडवांस टेक्नोलॉजी, इंटेलिजेंस नेटवर्क और जॉइंट फोर्स को किस तरह एक साथ इस्तेमाल करने में सक्षम हैं। साथ ही, ऑपरेशन के बाद भारत ने अपनी सैन्य क्षमताओं की व्यापक समीक्षा शुरू की, जिसमें फोर्स रिस्ट्रक्चरिंग, तीनों सेनाओं के बीच बेहतर जॉइंटनेस और उभरती टेक्नोलॉजी को तेजी से शामिल करने पर विशेष ध्यान दिया गया।

भारतीय वायुसेना ने संभाली एयर सुपीरियोरिटी
रक्षा मंत्रालय की रिपोर्ट के अनुसार ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारतीय वायुसेना के एडवांस्ड एयर डिफेंस सिस्टम ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। भारतीय रक्षा बलों ने पाकिस्तान और पीओके में स्थित नौ आतंकी शिविरों तथा संबंधित इंफ्रास्ट्रक्चर पर सटीक हमले किए। रिपोर्ट में कहा गया है कि एस-400 और शौर्य जैसे एयर डिफेंस सिस्टम ने कई पाकिस्तानी हवाई खतरों को विफल किया, जिससे भारत को एयर सुपीरियोरिटी बनाए रखने में मदद मिली और पाकिस्तान वायुसेना की ऑपरेशनल क्षमता सीमित हो गई।
ऑपरेशन के दौरान भारतीय वायुसेना की एस-400 एयर डिफेंस यूनिट ने पाकिस्तान के एक विशेष मिशन विमान को 314 किलोमीटर की दूरी से सफलतापूर्वक निशाना बनाकर नष्ट कर दिया। यह दुनिया के सबसे लंबी दूरी वाले सतह से हवा में मार करने वाले अभियानों में से एक माना जाता है।
रिपोर्ट के मुताबिक 8 से 10 मई 2025 के बीच पाकिस्तान की ओर से सैन्य ठिकानों के साथ-साथ नागरिक ढांचे, धार्मिक स्थलों, स्कूलों और चिकित्सा केंद्रों को निशाना बनाने की कोशिश की गई। इसके जवाब में भारतीय वायुसेना ने कई महत्वपूर्ण सैन्य लक्ष्यों पर कार्रवाई की।
छह रडार और दो एयर डिफेंस ठिकाने बने निशाना
रिपोर्ट के मुताबिक भारतीय वायुसेना ने एयर लॉन्च हथियारों और लोइटरिंग म्यूनिशन के इस्तेमाल से पाकिस्तान के छह रडार और दो एयर डिफेंस ठिकानों को सफलतापूर्वक निशाना बनाया। यह कार्रवाई पाकिस्तान की वायु निगरानी और एयर डिफेंस क्षमता को प्रभावित करने के उद्देश्य से की गई थी।
भारतीय कार्रवाई में चकलाला, रहीम यार खान, सुक्कुर, मुरीद, सरगोधा, जैकोबाबाद और भोलारी जैसे स्थानों का उल्लेख किया गया है। रिपोर्ट के अनुसार इन ठिकानों पर हमले भारत की “डिमॉन्स्ट्रेटिव कम्पेलेंस” रणनीति का हिस्सा थे, जिसका उद्देश्य सीमित लेकिन प्रभावी सैन्य दबाव बनाना था। (Operation Sindoor Mod Report)
जैकोबाबाद में एफ-16 और ड्रोन सिस्टम को नुकसान
पाकिस्तान के जैकोबाबाद एयरबेस के बाारे में कहा गया है कि 10 मई 2025 को भारतीय वायुसेना ने चार ऐसे हैंगरों को निशाना बनाया, जिनमें लड़ाकू विमान, एयरबोर्न अर्ली वार्निंग एंड कंट्रोल विमान और मानव रहित विमान रखे गए थे।
रिपोर्ट में कहा गया है, “जैकोबाबाद में मौजूद कई एफ-16 विमान, एक एईडब्ल्यू एंड सी विमान और अकिनची तथा टीबी-2 श्रेणी के कई यूसीएवी नष्ट या क्षतिग्रस्त हुए।” साथ ही कई पाकिस्तानी सैन्य कर्मी भी हताहत हुए थे।

सरगोधा और रहीम यार खान की रनवे स्ट्राइक
ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारतीय वायुसेना ने पाकिस्तान के दो महत्वपूर्ण एयरबेस के रनवे भी निशाना बनाए। रिपोर्ट के अनुसार सरगोधा और रहीम यार खान के रनवे पर सटीक हमला किया गया, जिससे उन्हें नुकसान पहुंचा।
रिपोर्ट में इन हमलों की तुलना 1971 के युद्ध के दौरान पूर्वी पाकिस्तान के एयरफील्ड को निष्क्रिय करने वाली भारतीय वायुसेना की कार्रवाई से की गई है।
वहीं ऑपरेशन के दौरान चकलाला और मुरीद स्थित कमांड एंड कंट्रोल सेंटरों को भी सफलतापूर्वक निशाना बनाया गया। रिपोर्ट के अनुसार चकलाला पाकिस्तान वायुसेना के एयर डिफेंस कमांड का मुख्यालय है।
कमांड एंड कंट्रोल सेंटर किसी भी सैन्य नेटवर्क का दिमाग माने जाते हैं। यहां से रडार, मिसाइल सिस्टम, एयर डिफेंस नेटवर्क और लड़ाकू विमानों के ऑपरेशन को कॉर्डिनेट किया जाता है।
रिपोर्ट के अनुसार भारतीय वायुसेना ने जैकोबाबाद स्थित कूलिंग प्लांट और रहीम यार खान के टर्मिनल क्षेत्र को भी निशाना बनाया। इन टारगेट् को एयरफील्ड इंफ्रास्ट्रक्चर का हिस्सा बताया गया है। ऐसे स्ट्रक्चर किसी एयरबेस की नियमित संचालन क्षमता बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। (Operation Sindoor Mod Report)
आईएसीसीएस नेटवर्क ने निभाई अहम भूमिका
रिपोर्ट में भारतीय वायुसेना के इंटीग्रेटेड एयर कमांड एंड कंट्रोल सिस्टम यानी आईएसीसीएस का विशेष उल्लेख किया गया है। मंत्रालय के अनुसार यही नेटवर्क पूरे ऑपरेशन के दौरान एयर डिफेंस ऑपरेशन की रीढ़ बना रहा।
आईएसीसीएस में सैन्य और नागरिक दोनों प्रकार के निगरानी सेंसर जुड़े रहते हैं। इससे सभी संबंधित एजेंसियों को एक साझा एयर पिक्चर उपलब्ध होती है। रिपोर्ट के अनुसार चार दिन तक चले संघर्ष के दौरान यह नेटवर्क अपेक्षा के अनुरूप काम करता रहा। (Operation Sindoor Mod Report)

ऑपरेशन सिंदूर में शामिल थी भारतीय नौसेना की स्पेशल फोर्सेज
पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारतीय नौसेना ने अपने प्रमुख युद्धपोतों, एयरक्राफ्ट कैरियर बैटल ग्रुप और पनडुब्बियों को उत्तर अरब सागर में अग्रिम मोर्चे पर तैनात कर दिया। नौसेना पूरी तरह युद्धक तैयारी की स्थिति में थी और आदेश मिलने पर समुद्र तथा जमीन पर चुने गए टारगेट्स पर हमला करने की क्षमता रखती थी।
भारतीय नौसेना ने अपने युद्धपोतों, विमानों, स्पेस बेस्ड सिस्टम्स और तटीय संसाधनों की मदद से समुद्री क्षेत्र की लगातार निगरानी बनाए रखी। नौसेना की अग्रिम तैनाती से पाकिस्तान के लिए समुद्र में ऑपरेशन करना मुश्किल हो गया और समुद्र पर भारत का प्रभावी नियंत्रण स्थापित किया।
इसके अलावा, भारतीय नौसेना के स्पेशल फोर्सेज भी 6-7 मई 2025 को आतंकवादी इंफ्रास्ट्रक्चर पर किए गए सटीक हमलों का हिस्सा थे। इन अभियानों में उच्च सटीकता वाले हथियारों का इस्तेमाल किया गया था।
वहीं, इंडियन कोस्ट गार्ड ने भारतीय नौसेना के साथ मिलकर भारत के पश्चिमी समुद्री तट पर अपने संसाधनों को तैनात किया और निगरानी को और मजबूत किया। जिससे संवेदनशील क्षेत्रों में किसी भी शत्रुतापूर्ण समुद्री गतिविधि या खतरे को रोकने में मदद मिली।
वहीं, क्रीक क्षेत्र में भी आईसीजी ने संबंधित एजेंसियों के साथ समन्वय बनाकर लगातार निगरानी रखी और जरूरत पड़ने पर जमीनी बलों की तुरंत तैनाती के लिए पूरी तैयारी बनाए रखी। (Operation Sindoor Mod Report)
ऑपरेशन सिंदूर के दौरान 220 यूएक्सओ को किया निष्क्रिय
ऑपरेशन सिंदूर के दौरान काउंटर एक्सप्लोसिव डिवाइस यूनिट (सीईडीयू) की टीमों ने बड़ी संख्या में बिना फटे हथियारों और ड्रोन से जुड़े खतरों को सुरक्षित तरीके से निष्क्रिय किया। उत्तरी कमान (नॉर्दर्न कमांड) के जिम्मेदारी क्षेत्र में सीईडीयू टीमों ने 220 अनएक्सप्लोडेड ऑर्डनेंस (यूएक्सओ) यानी ऐसे बम, मिसाइल या गोला-बारूद जो फटे नहीं थे, उन्हें सुरक्षित रूप से नष्ट किया। वहीं पश्चिमी कमान (वेस्टर्न कमांड) क्षेत्र में 13 यूएक्सओ को सफलतापूर्वक निष्क्रिय किया गया।
इसके अलावा, उत्तरी कमान क्षेत्र में गिरे तीन ड्रोन के मलबे को भी सीईडीयू टीमों ने सुरक्षित बनाया और आगे की तकनीकी जांच के लिए संबंधित एजेंसियों को सौंप दिया। इन ड्रोन में लगे वारहेड (विस्फोटक हिस्से) को मौके पर ही नष्ट कर दिया गया।
जांच के दौरान एक ड्रोन की पहचान तुर्की निर्मित बायकर वाईआईएचए-III (Baykar YIHA III) के तौर पर की गई।
पश्चिमी कमान में सीईडीयू टीमों ने मिनी अकिली मुहिमाद (एमएएम) म्यूनिशन को भी निष्क्रिय किया। माना जाता है कि ये हथियार तुर्की के बायराक्तर टीबी-2 ड्रोन द्वारा दागे गए थे। इसके साथ ही टीमों ने दो पीएल-15 मिसाइलों को भी सुरक्षित तरीके से निष्क्रिय कर क्षेत्र को खतरे से मुक्त किया।
वहीं, भारतीय सेना ने साल 2025 में चिल्लम फील्ड फायरिंग रेंज की पूरी तरह से सफाई और सुरक्षा सुनिश्चित करने का अभियान भी पूरा किया। इस अभियान के तहत करीब 1.27 लाख वर्ग मीटर क्षेत्र की जांच की गई।
इस दौरान कुल 29 अनफटे बम (यूएक्सओ) और बड़ी मात्रा में धातु के टुकड़े (स्प्लिंटर्स) बरामद किए गए। बाद में इन सभी खतरनाक विस्फोटकों को कंट्रोल्ड एक्सप्लोजन तकनीक यानी नियंत्रित विस्फोट के जरिए सुरक्षित रूप से नष्ट कर दिया गया। (Operation Sindoor Mod Report)
9 मई को हुई थी डीएसी की विशेष बैठक
9 मई 2025 को रक्षा अधिग्रहण परिषद (डीएसी) की एक विशेष बैठक आयोजित की गई थी। इस बैठक में इमरजेंसी प्रोक्योरमेंट (ईपी)-2025 के तहत सेना की तत्काल जरूरतों से जुड़े कई पूंजीगत खरीद मामलों को मंजूरी दी गई। यह फैसला ऑपरेशन सिंदूर के पहले चरण से मिले अनुभवों और सबक के आधार पर लिया गया। भारतीय सेना ने माना कि बदलते युद्धक्षेत्र में कुछ महत्वपूर्ण क्षमताओं को तेजी से मजबूत करने की जरूरत है। इसी कारण सेना की ताकत बढ़ाने के लिए विशेष और आधुनिक उपकरणों को शामिल करने की प्रक्रिया शुरू की गई।
इसमें अनमैन्ड एरियल सिस्टम (यूएएस) यानी ड्रोन, काउंटर-यूएएस (सी-यूएएस) यानी दुश्मन के ड्रोन को रोकने वाली प्रणालियां, लोइटर म्यूनिशन, एयर डिफेंस सिस्टम और इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सिस्टम शामिल थे। (Operation Sindoor Mod Report)
Author
हरेंद्र चौधरी रक्षा पत्रकारिता (Defence Journalism) में सक्रिय हैं और RakshaSamachar.com से जुड़े हैं। वे लंबे समय से भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना से जुड़ी रणनीतिक खबरों, रक्षा नीतियों और राष्ट्रीय सुरक्षा से संबंधित मुद्दों को कवर कर रहे हैं। पत्रकारिता के अपने करियर में हरेंद्र ने संसद की गतिविधियों, सैन्य अभियानों, भारत-पाक और भारत-चीन सीमा विवाद, रक्षा खरीद और ‘मेक इन इंडिया’ रक्षा परियोजनाओं पर विस्तृत लेख लिखे हैं। वे रक्षा मामलों की गहरी समझ और विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण के लिए जाने जाते हैं।





