📍नई दिल्ली | 14 Sep, 2026, 10:42 AM
PLA Deployment Along LAC: भारत और चीन के बीच वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर पिछले कुछ वर्षों से जारी सैन्य तनाव के बीच रक्षा मंत्रालय की वार्षिक रिपोर्ट 2025-26 में कहा गया है कि चीन ने उत्तरी सीमाओं के सामने पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) की तैनाती में उल्लेखनीय कटौती की है। हालांकि भारत ने साफ किया है कि उसकी सेना एलएसी के सभी सेक्टरों में पूरी तरह तैयार और मजबूत स्थिति में है।
PLA Deployment Along LAC: क्या कहा है रक्षा मंत्रालय ने?
रिपोर्ट में कहा गया है कि, “साल 2025 में उत्तरी सीमाओं के सामने पीएलए सेनाओं की तैनाती में महत्वपूर्ण कमी देखी गई है। एलएसी और पारंपरिक ट्रेनिंग इलाकों में 10-10 कम्बाइंड आर्म्स ब्रिगेड साइज की सेनाएं तैनात रहीं। भारतीय सेना की तैनाती एलएसी के सभी सेक्टरों में मजबूत, संतुलित और किसी भी उभरती परिस्थिति से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार है।”
सैन्य सूत्रों के अनुसार, इस आकलन का मतलब यह माना जा रहा है कि चीन ने एलएसी के पास मौजूद कुछ अग्रिम तैनात ब्रिगेडों को पीछे हटाया है। वहीं, पीएलए की एक कम्बाइंड आर्म्स ब्रिगेड में लगभग 5,000 सैनिक होते हैं। ऐसे में 10 ब्रिगेड के स्तर पर कमी का मतलब लगभग 50,000 सैनिकों की संख्या में कमी माना जा सकता है। (PLA Deployment Along LAC)
खत्म नहीं हुआ है खतरा?
हालांकि रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि सैनिकों की संख्या में कमी का अर्थ यह नहीं है कि चीन ने अपनी सैन्य क्षमता कम कर दी है या सीमा पर खतरा समाप्त हो गया है। अमेरिकी रक्षा विभाग की नवंबर 2024 की एक रिपोर्ट में कहा गया था कि चीन ने एलएसी के विभिन्न क्षेत्रों में करीब 1.20 लाख सैनिक तैनात किए हुए थे। रिपोर्ट के अनुसार पश्चिमी, मध्य और पूर्वी सेक्टरों में 20 से अधिक कम्बाइंड आर्म्स ब्रिगेड अग्रिम मोर्चों पर मौजूद थीं।
सूत्रों के मुताबिक चीन अब भी एलएसी के पास बड़ी संख्या में सैनिक, मिसाइल सिस्टम, एयर डिफेंस सिस्टम, आर्टिलरी और टैंक तैनात रखे हुए है। पिछले कुछ सालों में चीन ने तिब्बत और शिनजियांग क्षेत्रों में सड़क, रेल, एयरबेस और सैन्य ढांचे का भी तेजी से विस्तार किया है। (PLA Deployment Along LAC)
चीन की तरफ का भूभाग समतल
भारतीय सेना ने अपनी तैनाती में कोई कमी नहीं की है। रक्षा मंत्रालय ने रिपोर्ट में दोहराया है कि सेना हर परिस्थिति से निपटने के लिए तैयार है।
सूत्र बताते हैं कि चीन की तरफ का भूभाग अधिकतर समतल पठारी क्षेत्र है। वहां सैनिकों, टैंकों और सैन्य उपकरणों की तेज आवाजाही संभव है। इसके मुकाबले भारतीय इलाकों में ऊंचे पहाड़ और कठिन भूगोलिक परिस्थितियां हैं। इसी कारण भारत को अग्रिम क्षेत्रों में पर्याप्त संख्या में सैनिक बनाए रखने पड़ते हैं।
2020 में पूर्वी लद्दाख में शुरू हुए सैन्य गतिरोध के बाद भारतीय सेना ने एलएसी पर अपनी निगरानी, इन्फ्रास्ट्रक्चर और तैनाती क्षमता में काफी वृद्धि की है। (PLA Deployment Along LAC)
बातचीत से आई स्थिरता
रक्षा मंत्रालय ने अपनी रिपोर्ट में भारत और चीन के बीच राजनीतिक, कूटनीतिक और सैन्य स्तर पर हुई बातचीत को सीमा पर स्थिरता का महत्वपूर्ण कारण बताया है। रिपोर्ट के अनुसार, मार्च और जुलाई 2025 में वर्किंग मेकैनिज्म फॉर कंसल्टेशन एंड कोऑर्डिनेशन (डब्ल्यूएमसीसी) की 33वीं और 34वीं बैठक आयोजित हुईं। इसके अलावा भारत-चीन सीमा विवाद पर विशेष प्रतिनिधियों की वार्ता भी दोबारा शुरू हुई।
दिसंबर 2024 और अगस्त 2025 में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल और चीन के विदेश मंत्री वांग यी के बीच बातचीत हुई। अगस्त 2025 में बीजिंग में हुई बैठक के दौरान दोनों पक्षों ने सीमा विवाद के राजनीतिक समाधान की दिशा में प्रयास जारी रखने पर सहमति जताई थी। (PLA Deployment Along LAC)
मोदी-शी जिनपिंग मुलाकातों का भी असर
रिपोर्ट में कहा गया है कि अक्टूबर 2024 के बाद दोनों देशों के शीर्ष नेतृत्व के बीच संपर्क बढ़ा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच कई महत्वपूर्ण मुलाकातें हुईं।
अगस्त 2025 में प्रधानमंत्री मोदी ने चीन के तियानजिन शहर में आयोजित शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) शिखर सम्मेलन में हिस्सा लिया था। रक्षा मंत्रालय का मानना है कि इस दौरान हुई उच्चस्तरीय बातचीत ने दोनों देशों के रिश्तों में सकारात्मक माहौल बनाने में मदद की। (PLA Deployment Along LAC)
पूर्वी लद्दाख में सैन्य वार्ता जारी
भारत और चीन के बीच सैन्य स्तर पर भी बातचीत जारी रही। रिपोर्ट के अनुसार 25-26 अक्टूबर 2025 को पूर्वी लद्दाख में 23वीं कोर कमांडर स्तर की बैठक आयोजित की गई।
रक्षा मंत्रालय ने कहा कि जमीनी स्तर पर दोनों देशों के सैनिकों के बीच नियमित बॉर्डर पर्सनल मीटिंग्स भी जारी हैं। इन बैठकों का उद्देश्य स्थानीय स्तर पर उत्पन्न होने वाले मुद्दों का समाधान करना और तनाव को बढ़ने से रोकना है।
रिपोर्ट में कहा गया है, “सभी सेक्टरों में पीएलए के साथ बॉर्डर पर्सनल मीटिंग्स सौहार्दपूर्ण और मित्रवत वातावरण में जारी हैं, ताकि चिंता के मुद्दों का समाधान किया जा सके।” (PLA Deployment Along LAC)
सीमा क्षेत्रों में तेजी से बढ़ रहा इन्फ्रास्ट्रक्चर
रक्षा मंत्रालय की रिपोर्ट में सीमा क्षेत्रों में इन्फ्रास्ट्रक्चर विकास का भी उल्लेख किया गया है। बॉर्डर रोड्स ऑर्गेनाइजेशन (बीआरओ) लगातार ऊंचाई वाले और रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण क्षेत्रों में ऑल-वेदर कनेक्टिविटी मजबूत कर रहा है।
रिपोर्ट में पूर्वी लद्दाख के मुध-न्योमा एयरफील्ड का भी जिक्र किया गया है। लगभग 13,700 फीट की ऊंचाई पर स्थित यह भारतीय वायुसेना का सबसे ऊंचा एयरफील्ड माना जाता है। इसके चालू होने से लद्दाख सेक्टर में सैन्य और लॉजिस्टिक क्षमताओं को मजबूती मिली है।
इसके अलावा अरुणाचल प्रदेश के अनिनी में बीआरओ ने हेलिपैड का बड़ा अपग्रेड पूरा किया है। पहले यहां छोटा लैंडिंग ग्राउंड था, जिसका साइज बढ़ाकर पेवमेंट क्वालिटी कंक्रीट हेलिपैड बनाया गया है।
इस नए और बड़े हेलिपैड की वजह से अब भारी हेलीकॉप्टर भी यहां आसानी से उतर सकेंगे। इससे सीमावर्ती इलाके में सामान, जरूरी सामग्री और सैनिकों की आवाजाही तेज और आसान होगी। प्राकृतिक आपदा, राहत कार्य और आपातकालीन परिस्थितियों में भी यह हेलिपैड काफी मददगार साबित होगा। (PLA Deployment Along LAC)
Author
हरेंद्र चौधरी रक्षा पत्रकारिता (Defence Journalism) में सक्रिय हैं और RakshaSamachar.com से जुड़े हैं। वे लंबे समय से भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना से जुड़ी रणनीतिक खबरों, रक्षा नीतियों और राष्ट्रीय सुरक्षा से संबंधित मुद्दों को कवर कर रहे हैं। पत्रकारिता के अपने करियर में हरेंद्र ने संसद की गतिविधियों, सैन्य अभियानों, भारत-पाक और भारत-चीन सीमा विवाद, रक्षा खरीद और ‘मेक इन इंडिया’ रक्षा परियोजनाओं पर विस्तृत लेख लिखे हैं। वे रक्षा मामलों की गहरी समझ और विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण के लिए जाने जाते हैं।





