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क्या अगले साल सितंबर से IAF को मिलेंगे तेजस Mk-1A? रक्षा मंत्रालय ने दी नई डिलीवरी टाइमलाइन!

जीई एयरोस्पेस से 10 इंजन मिलने के बाद उत्पादन में तेजी, लेकिन भारतीय वायुसेना को पहला तेजस Mk-1A मिलने का इंतजार अभी भी जारी...

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📍नई दिल्ली | 14 Sep, 2026, 12:16 PM

Tejas Mk-1A Delivery Delay: भारतीय वायुसेना के सबसे महत्वपूर्ण स्वदेशी लड़ाकू विमान तेजस एमके-1ए की डिलीवरी में लगातार देरी हो रही है। फरवरी 2024 में भारतीय वायुसेना को पहला तेजस एमके-1ए मिलना था, लेकिन सितंबर 2026 तक एक भी विमान औपचारिक रूप से वायुसेना को नहीं सौंपा गया है। अब रक्षा मंत्रालय की सालाना रिपोर्ट 2025-26 में खुलासा हुआ है कि मार्क-1 अल्फा की डिलीवरी में और देरी हो सकती है।

बता दें कि अमेरिकी कंपनी जीई एयरोस्पेस से अगस्त 2026 तक एचएएल को कुल 10 एफ-404आईएन20 इंजन मिल चुके हैं।

Tejas Mk-1A Delivery Delay: रक्षा मंत्रालय की रिपोर्ट में क्या कहा गया है?

रक्षा मंत्रालय की सालाना रिपोर्ट 2025-26 के अनुसार, “25 सितंबर 2025 को हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल) और रक्षा मंत्रालय के बीच 97 अतिरिक्त तेजस एमके-1ए विमानों का अनुबंध हुआ था। इस ऑर्डर में 68 सिंगल-सीटर फाइटर जेट और 29 ट्विन-सीटर ट्रेनर विमान शामिल हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि इन 97 विमानों की डिलीवरी सितंबर 2027 से शुरू होगी और सितंबर 2033 तक पूरी हो जाएगी।”

यह ऑर्डर पहले से मौजूद 83 तेजस एमके-1ए विमानों के कॉन्ट्रैक्ट से अलग है। दोनों ऑर्डर मिलाकर भारतीय वायुसेना को कुल 180 तेजस एमके-1ए विमान मिलने हैं। अभी तक पहले ऑर्डर के 83 तेजस एमके-1ए विमानों में से एक भी फाइटर जेट डिलीवर नहीं हुआ है। हालांकि रिपोर्ट में पहले बैच के ऑर्डर के डिलीवरी की कोई टाइमलाइन नहीं दी गई है। (Tejas Mk-1A Delivery Delay)

2021 में मिला था पहला बड़ा ऑर्डर

तेजस एमके-1ए कार्यक्रम की शुरुआत फरवरी 2021 में हुई थी। उस समय भारतीय वायुसेना ने 83 विमानों का ऑर्डर दिया था। इनमें 73 सिंगल-सीटर फाइटर और 10 ट्विन-सीटर ट्रेनर विमान शामिल थे। मूल योजना के अनुसार पहला विमान 3 फरवरी 2024 तक वायुसेना को सौंपा जाना था। इसके बाद हर साल लगभग 16 विमान देने का लक्ष्य रखा गया था। पूरा ऑर्डर 2028-29 तक पूरा होना था।

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लेकिन सितंबर 2026 तक हालात यह है कि पहली डिलीवरी लगभग 2 साल 7 महीने पीछे चल रही है। (Tejas Mk-1A Delivery Delay)

एचएएल के पास तैयार हैं कई विमान

लोकसभा की रक्षा संबंधी स्थायी समिति के सामने एचएएल ने इस साल मार्च बताया कि उसके पास पांच तेजस एमके-1ए विमान डिलीवरी के लिए लगभग तैयार हैं।

एचएएल अधिकारियों ने संसदीय समिति को बताया था, “एलसीए मार्क-1 अल्फा के लिए हमारे पास पांच विमान तैयार हैं। रडार और डीडब्ल्यूयू का इंटीग्रेशन पूरा हो चुका है। एएसआरएएएम एयर-टू-एयर मिसाइल और अस्त्र बियॉन्ड विजुअल रेंज मिसाइल के परीक्षण भी सफलतापूर्वक पूरे किए जा चुके हैं।”

वहीं, सूत्रों के मुताबिक एचएएल ने लगभग 30 एयरफ्रेम तैयार कर लिए हैं। इनमें से कई विमान प्रोडक्शन और ट्रायल्स के एडवांस फेज में पहुंच चुके हैं। एचएएल का लक्ष्य मार्च 2027 तक पहला पूर्ण स्क्वाड्रन तैयार करना है। एक फाइटर स्क्वाड्रन में सामान्य तौर पर 18 से 20 विमान शामिल होते हैं। (Tejas Mk-1A Delivery Delay)

इंजन सप्लाई ने बढ़ाईं मुश्किलें

कार्यक्रम में देरी की सबसे बड़ी वजह इंजन की कमी रही है। तेजस एमके-1ए में अमेरिकी कंपनी जीई एयरोस्पेस का एफ-404आईएन20 टर्बोफैन इंजन लगाया जाता है। कोविड महामारी के बाद वैश्विक सप्लाई चेन समस्याओं और उत्पादन संबंधी चुनौतियों के कारण इंजन की डिलीवरी समय पर नहीं हो सकी।

इंजन नहीं मिलने की वजह से एचएएल तैयार एयरफ्रेम को अंतिम रूप नहीं दे पाया। कई विमान असेंबली पूरी होने के बावजूद उड़ान और डिलीवरी चरण तक नहीं पहुंच सके। अगस्त 2026 तक एचएएल को कुल 10 इंजन मिल चुके हैं। इनमें अगस्त के दौरान पहुंचे तीन नए इंजन भी शामिल हैं।

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जीई एयरोस्पेस की 2026-27 के दौरान 24 इंजन और उसके बाद हर साल लगभग 30 इंजन देने की योजना है। इसी के आधार पर उत्पादन प्रक्रिया में तेजी आने की उम्मीद जताई जा रही है। (Tejas Mk-1A Delivery Delay)

नासिक में खुली तीसरी प्रोडक्शन लाइन

रिपोर्ट के मुताबिक, तेजस कार्यक्रम की सबसे बड़ी चुनौती केवल इंजन नहीं बल्कि उत्पादन क्षमता भी थी। इसी को देखते हुए एचएएल ने महाराष्ट्र के नासिक स्थित एयरक्राफ्ट डिवीजन में तीसरी प्रोडक्शन लाइन शुरू की है। इस लाइन की सालाना 8 विमान है। बेंगलुरु की दो मौजूदा लाइनों के साथ मिलाकर अब एचएएल की कुल उत्पादन क्षमता 24 विमान प्रति वर्ष हो गई है।

17 अक्टूबर 2025 को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने नासिक स्थित इस नई सुविधा का उद्घाटन किया था। इसी दौरान नासिक में निर्मित पहले तेजस एमके-1ए विमान को औपचारिक रूप से फ्लैग ऑफ भी किया गया था।

एचएएल ने संसद की समिति को बताया कि तीसरी लाइन शुरू होने के बाद उत्पादन क्षमता 16 विमान प्रति वर्ष से बढ़कर 24 विमान प्रति वर्ष हो गई है। (Tejas Mk-1A Delivery Delay)

तेजस एमके-1ए में क्या है खास?

तेजस एमके-1ए भारतीय वायुसेना की जरूरतों को ध्यान में रखकर विकसित किया गया आधुनिक मल्टीरोल फाइटर जेट है। इसमें एडवांस एईएसए रडार लगाया गया है, जो एक साथ कई लक्ष्यों को ट्रैक और एंगेज करने में सक्षम है। विमान में नया इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सूट, आधुनिक एवियोनिक्स, एयर-टू-एयर रिफ्यूलिंग क्षमता और बेहतर मिशन कंप्यूटर भी शामिल हैं। (Tejas Mk-1A Delivery Delay)

डीआरडीओ ने बनाया स्वदेशी रेडोम

रिपोर्ट के मुताबिक, तेजस एमके-1ए कार्यक्रम में डीआरडीओ की भी महत्वपूर्ण भूमिका रही है। डीआरडीओ ने विमान के लिए स्वदेशी रेडोम विकसित किया है। रेडोम विमान के नाक वाले हिस्से पर लगा विशेष कवर होता है, जिसके अंदर रडार सिस्टम स्थित रहता है। इसका काम रडार सिग्नल को न्यूनतम हानि के साथ बाहर जाने देना और संवेदनशील उपकरणों की सुरक्षा करना होता है। रक्षा मंत्रालय के अनुसार मई 2025 में स्वदेशी रेडोम का इंटीग्रेशन ट्रायल सफलतापूर्वक पूरा किया गया था। (Tejas Mk-1A Delivery Delay)

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भारतीय वायुसेना के लिए क्यों जरूरी है तेजस?

भारतीय वायुसेना की अधिकृत जरूरत 42 फाइटर स्क्वाड्रन की है। वर्तमान में यह संख्या लगभग 29 से 31 स्क्वाड्रन के बीच है। मिग-21 विमान सेवा से बाहर हो चुके हैं। आने वाले सालों में जगुआर, मिग-29 और मिराज-2000 जैसे पुराने लड़ाकू विमानों की संख्या भी धीरे-धीरे कम होगी। (Tejas Mk-1A Delivery Delay)

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  • herry passport

    हरेंद्र चौधरी रक्षा पत्रकारिता (Defence Journalism) में सक्रिय हैं और RakshaSamachar.com से जुड़े हैं। वे लंबे समय से भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना से जुड़ी रणनीतिक खबरों, रक्षा नीतियों और राष्ट्रीय सुरक्षा से संबंधित मुद्दों को कवर कर रहे हैं। पत्रकारिता के अपने करियर में हरेंद्र ने संसद की गतिविधियों, सैन्य अभियानों, भारत-पाक और भारत-चीन सीमा विवाद, रक्षा खरीद और ‘मेक इन इंडिया’ रक्षा परियोजनाओं पर विस्तृत लेख लिखे हैं। वे रक्षा मामलों की गहरी समझ और विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण के लिए जाने जाते हैं।

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