HomeIndian Air Forceक्या राफेल और स्कैल्प मिसाइल को दूर से किया जा सकता है...

क्या राफेल और स्कैल्प मिसाइल को दूर से किया जा सकता है कंट्रोल? रूसी एक्सपर्ट्स का बड़ा दावा- फाइटर जेट में हो सकता है ‘किल स्विच’!

स्टडी में रूसी विशेषज्ञों ने दावा किया गया कि एक्सपोर्ट के लिए बनाए गए राफेल विमानों में ऐसे सॉफ्टवेयर और हार्डवेयर "बग" मौजूद हो सकते हैं जिन्हें दूर से एक्टिवेट किया जा सकता है...

रक्षा समाचार WhatsApp Channel Follow US

📍नई दिल्ली | 15 Sep, 2026, 6:02 PM

Rafale Kill Switch: भारतीय वायुसेना के लिए खरीदे जाने वाले 114 नए राफेल मल्टी-रोल फाइटर जेट को लेकर एक चौंकाने वाला खुलासा सामने आया है। रूस के सेंटर फॉर एनालिसिस ऑफ वर्ल्ड आर्म्स ट्रेड (सीएडब्ल्यूएटी) से जुड़े कुछ विशेषज्ञों ने दावा किया है कि एक्सपोर्ट वर्जन राफेल लड़ाकू विमानों और स्कैल्प-ईजी (एससीएएलपी-ईजी) क्रूज मिसाइलों में ऐसे सॉफ्टवेयर और हार्डवेयर फीचर हो सकते हैं, जिन्हें बाहरी इलेक्ट्रॉनिक सिग्नल के जरिए एक्टिव किया जा सकता है।

हालांकि इन दावों को लेकर अभी तक कोई सार्वजनिक तकनीकी या फोरेंसिक सबूत सामने नहीं आया है। फ्रांस ने भी कभी ऐसी किसी क्षमता की पुष्टि नहीं की है। इसके बावजूद यह मामला भारत के लिए इसलिए अहम माना जा रहा है क्योंकि भारतीय वायुसेना के 114 फाइटर जेट कार्यक्रम में राफेल एफ-4 सबसे मजबूत दावेदारों में शामिल है।

Rafale Kill Switch: क्या कहा गया है रूसी रिपोर्ट में?

रूसी डिफेंस एनालिस्ट रिया नोवोस्ती ने दावा किया है कि रूस के सेंटर फॉर एनालिसिस ऑफ वर्ल्ड आर्म्स ट्रेड ने एक एक्सपर्ट स्टडी जारी की है। स्टडी में रूसी विशेषज्ञों ने दावा किया गया कि एक्सपोर्ट के लिए बनाए गए राफेल विमानों में ऐसे सॉफ्टवेयर और हार्डवेयर “बग” मौजूद हो सकते हैं जिन्हें दूर से एक्टिवेट किया जा सकता है।

रिपोर्ट में कहा गया, “फ्रांस के पास स्कैल्प-ईजी मिसाइलों के युद्ध में इस्तेमाल को रोकने की क्षमता हो सकती है और भारत को इस पहलू पर विचार करना चाहिए।”

यह दावा सीधे तौर पर भारत की उस रणनीतिक सोच को चुनौती देता है जिसके तहत वह अपने लड़ाकू विमानों में स्वदेशी हथियार, डेटा लिंक, सेंसर और इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम जोड़ने की आजादी चाहता है।

ऑपरेशन सिंदूर का भी किया गया जिक्र

रूसी रिपोर्ट ने मई 2025 में हुए ऑपरेशन सिंदूर का भी उल्लेख किया है। रिपोर्ट के अनुसार भारतीय वायुसेना ने मई 2025 में पहली बार 10 स्कैल्प-ईजी लंबी दूरी की क्रूज मिसाइल का इस्तेमाल किया था। इनमें से 9 मिसाइलें अपने टारगेट पर सफलतापूर्वक लगीं, जबकि 1 मिसाइल में इंजन खराबी का दावा किया गया है। इन हमलों में आतंकवादी ठिकाने, कमांड एवं कंट्रोल सेंटर, हैंगर और एयरबेस के इंफ्रास्ट्रक्चर को निशाना बनाया गया था। उस दौरान ब्रह्मोस, हैमर, रैंपेज, और क्रिस्टल मेज मिसाइलें भी इस्तेमाल की गई थीं। वहीं, ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारत 100 से 150 अतिरिक्त स्कैल्प-ईजी मिसाइलें खरीदने की योजना बना रहा है।

यह भी पढ़ें:  NEET के पेपर मुफ्त में नहीं पहुंचाएगी वायुसेना! जानें Mi-17 हेलीकॉप्टरों पर चुकानी होगी कितनी रकम?

रिपोर्ट में सवाल उठाया गया कि क्या उस दौरान राफेल विमानों को किसी प्रकार की सॉफ्टवेयर या सिस्टम संबंधी दिक्कत हुई थी? हालांकि इस संबंध में न भारत सरकार ने कोई आधिकारिक जानकारी दी है और न ही फ्रांस ने किसी तरह की तकनीकी दखल की बात स्वीकार की है। इसलिए यह दावा पूरी तरह अनुमान आधारित माना जा रहा है। (Rafale Kill Switch)

कोई तकनीकी सबूत सामने नहीं

रूसी रिपोर्ट खुद भी स्वीकार करती है कि अंतिम निष्कर्ष केवल भारतीय जांच एजेंसियां ही निकाल सकती हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि किसी विमान में वास्तव में दूर से एक्टिव होने वाला “किल स्विच” मौजूद हो, तो उसके लिए सुरक्षित कम्युनिकेशन सिस्टम, ऑथेंटिकेशन प्रोटोकॉल, कमांड चैनल और विशेष सॉफ्टवेयर आर्किटेक्चर की जरूरत होगी।

अब तक ऐसा कोई सार्वजनिक प्रमाण उपलब्ध नहीं है जो दिखाए कि राफेल में ऐसा कोई सिस्टम मौजूद है।

फ्रांस नहीं देता सॉफ्टवेयर कंट्रोल

राफेल विवाद का सबसे महत्वपूर्ण पहलू “किल स्विच” नहीं बल्कि सॉफ्टवेयर कंट्रोल है। राफेल के सबसे संवेदनशील सिस्टम जैसे थेल्स आरबीई-2 एईएसए रडार, स्पेक्ट्रा इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सूट, मिशन कंप्यूटर और सेंसर फ्यूजन सॉफ्टवेयर का सोर्स कोड फ्रांस अपने किसी भी ग्राहक देश को नहीं देता।

इसका मतलब यह है कि विमान खरीदने वाला देश राफेल का उपयोग तो कर सकता है, लेकिन उसके मूल सॉफ्टवेयर में अपनी तरफ से बदलाव नहीं कर सकता।

भारत, मिस्र, कतर, ग्रीस, इंडोनेशिया और संयुक्त अरब अमीरात जैसे सभी राफेल ऑपरेटर इसी सिस्टम के तहत विमान चला रहे हैं। (Rafale Kill Switch)

भारत चाहता है आईसीडी तक पहुंच

भारत की मांग है कि उसे कम से कम इंटरफेस कंट्रोल डॉक्यूमेंट्स (आईसीडी) तक पहुंच मिले। आईसीडी वह तकनीकी दस्तावेज होता है जिसकी मदद से कोई देश अपने हथियार और इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम विमान में जोड़ सकता है। भारत की भविष्य में राफेल पर अस्त्र एमके-1, अस्त्र एमके-2, रुद्रम एंटी-रेडिएशन मिसाइल, स्मार्ट एंटी एयरफील्ड वेपन और ब्रह्मोस-एनजी जैसे स्वदेशी हथियारों के साथ नेशनल डेटालिंक से जोड़ने की योजना है। इसके लिए उसे फ्रांसीसी कंपनियों की मंजूरी पर पूरी तरह निर्भर नहीं रहना है।

वहीं, इससे पहले राफेल-एम लड़ाकू विमान में भारत के स्वदेशी “उत्तम” एईएसए रडार को लगाने की योजना थी, लेकिन उसे टाल दिया गया, क्योंकि इसके लिए विमान के मिशन सिस्टम में बड़े बदलाव करने पड़ते। इससे लागत बहुत अधिक बढ़ जाती और प्रोजेक्ट में लगभग आठ साल की देरी हो सकती थी। (Rafale Kill Switch)

यह भी पढ़ें:  500 किमी दूर तक दुश्मन पर नजर! DRDO का AEW&C MK-2 प्रोग्राम क्यों है भारतीय वायुसेना का सबसे बड़ा फोर्स मल्टीप्लायर?

टाटा समूह बना सकता है 94 राफेल

फरवरी 2026 में भारत ने 114 नए फाइटर जेट खरीदने की आवश्यकता को मंजूरी दी थी। इनमें 88 सिंगल सीटर और 26 ट्विन सीटर शामिल हैं। अगस्त 2026 में फ्रांसीसी कंपनी दसॉ एविएशन ने अपना औपचारिक प्रस्ताव भी जमा कर दिया। प्रस्ताव के अनुसार लगभग 20 विमान सीधे फ्रांस से आएंगे जबकि करीब 94 विमान भारत में टाटा समूह की भागीदारी से बनाए जा सकते हैं।

हालांकि इस सौदे की अंतिम कीमत अभी तय नहीं हुई है, लेकिन विमान, हथियार, बेसिक इंफ्रास्ट्रक्चर, ट्रेनिंग, मेंटेनेंस, टेक्नोलॉजी ट्रांसफर और पूरे सर्विस लाइफ सपोर्ट को जोड़ने पर इसकी कुल लागत लगभग 30 अरब डॉलर तक पहुंच सकती है। यही कारण है कि डिजिटल संप्रभुता और सॉफ्टवेयर नियंत्रण का मुद्दा बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। (Rafale Kill Switch)

स्कैल्प मिसाइल कैसे काम करती है?

एससीएएलपी-ईजी एक लंबी दूरी की क्रूज मिसाइल है जिसका वजन लगभग 1,300 किलोग्राम है। इसकी लंबाई करीब 5.1 मीटर है और इसमें लगभग 450 किलोग्राम का ब्रॉच वारहेड लगा होता है। यह मिसाइल लॉन्च होने के बाद इनर्शियल नेविगेशन, सैटेलाइट पोजिशनिंग, टेरेन रेफरेंस सिस्टम और इमेजिंग इंफ्रारेड सीकर की मदद से अपने टारगेट तक पहुंचती है।

मिसाइल के अलग-अलग वर्जन और उसके उड़ान प्रोफाइल के आधार पर इसकी मारक क्षमता लगभग 250 से 560 किलोमीटर तक मानी जाती है। इससे राफेल लड़ाकू विमान दुश्मन के मजबूत एयर डिफेंस क्षेत्र से काफी दूर रहकर ही मिसाइल दाग सकते हैं।

सैन्य विशेषज्ञों का कहना है कि मिसाइल लॉन्च होने के बाद उसे दूर से रोकना तकनीकी रूप से काफी जटिल काम होगा क्योंकि वह पहले से प्रोग्राम किए गए मार्ग पर उड़ती है। स्कैल्प और उसका ब्रिटिश संस्करण स्टॉर्म शैडो इराक, लीबिया, सीरिया, यमन, यूक्रेन और भारत-पाकिस्तान संघर्ष जैसे कई युद्ध क्षेत्रों में इस्तेमाल हो चुके हैं। लेकिन अब तक ऐसा कोई सार्वजनिक और प्रमाणित मामला सामने नहीं आया है, जिसमें फ्रांस या ब्रिटेन ने किसी ग्राहक देश को पहले से दी गई और लॉन्च की गई मिसाइल को दूर से डिसेबल कर दिया हो। (Rafale Kill Switch)

राफेल में सॉफ्टवेयर की तीन लेयर

राफेल की पहली लेयर उसका मुख्य लड़ाकू सॉफ्टवेयर है जिसमें रडार, सेंसर, इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर और हथियार प्रबंधन शामिल है। दूसरी लेयर इंटरफेस कंट्रोल डॉक्यूमेंट्स की है, जो बाहरी हथियारों और सिस्टम को विमान से जोड़ने में मदद करती है। तीसरी लेयर एप्लीकेशन प्रोग्रामिंग इंटरफेस की है, जिसके जरिए ग्राहक देश कुछ अतिरिक्त सिस्टम जोड़ सकते हैं, लेकिन मुख्य फ्रांसीसी सॉफ्टवेयर तक पहुंच नहीं मिलती। यही वजह है कि भारत और फ्रांस के बीच बातचीत का बड़ा हिस्सा सॉफ्टवेयर राइट्स और वेपन इंटीग्रेशन पर फोकस है। (Rafale Kill Switch)

यह भी पढ़ें:  यूक्रेन का नया वॉर फॉर्मूला, ड्रोन-रोबोट असॉल्ट मॉडल कैसे बदलेगा भविष्य के युद्धों की तस्वीर

36 राफेल के भी नहीं मिले थे कोड

2016 में भारत ने 36 राफेल विमानों का सौदा किया था। उस समय भी भारत को सोर्स कोड या पूर्ण आईसीडी एक्सेस नहीं मिला था। इसके कारण भारतीय हथियारों और सिस्टम को राफेल में जोड़ने के लिए फ्रांसीसी कंपनियों की तकनीकी मदद लेनी पड़ी थी। अस्त्र मिसाइल इंटीग्रेशन में दसॉ-थेल्स की मदद ली गई थी। जिसके लिए ट्रायल्स और सर्टिफिकेशन अभी भी जारी है, जिसके 2028 तक पूरा होने की उम्मीद है।

किसी फाइटर जेट में मिसाइल को जोड़ना केवल उसे विमान के नीचे लगाना भर नहीं होता। इसके लिए इंजीनियरों को यह सुनिश्चित करना पड़ता है कि मिसाइल को सही पावर मिले, उसका कूलिंग सिस्टम ठीक से काम करे, विमान और मिसाइल के इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम एक-दूसरे में कोई बाधा न डालें, दोनों के बीच डेटा का आदान-प्रदान सही हो, टारगेट की जानकारी सही तरीके से पहुंचे, मिसाइल किन परिस्थितियों में सुरक्षित रूप से दागी जा सकती है, लॉन्च के समय वह विमान से सुरक्षित तरीके से अलग हो, इमरजेंसी में उसे तुरंत गिराया जा सके और विमान का स्टोर्स मैनेजमेंट सिस्टम उसे सही तरीके से कंट्रोल कर सके। (Rafale Kill Switch)

Author

  • herry passport

    हरेंद्र चौधरी रक्षा पत्रकारिता (Defence Journalism) में सक्रिय हैं और RakshaSamachar.com से जुड़े हैं। वे लंबे समय से भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना से जुड़ी रणनीतिक खबरों, रक्षा नीतियों और राष्ट्रीय सुरक्षा से संबंधित मुद्दों को कवर कर रहे हैं। पत्रकारिता के अपने करियर में हरेंद्र ने संसद की गतिविधियों, सैन्य अभियानों, भारत-पाक और भारत-चीन सीमा विवाद, रक्षा खरीद और ‘मेक इन इंडिया’ रक्षा परियोजनाओं पर विस्तृत लेख लिखे हैं। वे रक्षा मामलों की गहरी समझ और विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण के लिए जाने जाते हैं।

रक्षा समाचार WhatsApp Channel Follow US
हरेंद्र चौधरी
हरेंद्र चौधरी
हरेंद्र चौधरी रक्षा पत्रकारिता (Defence Journalism) में सक्रिय हैं और RakshaSamachar.com से जुड़े हैं। वे लंबे समय से भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना से जुड़ी रणनीतिक खबरों, रक्षा नीतियों और राष्ट्रीय सुरक्षा से संबंधित मुद्दों को कवर कर रहे हैं। पत्रकारिता के अपने करियर में हरेंद्र ने संसद की गतिविधियों, सैन्य अभियानों, भारत-पाक और भारत-चीन सीमा विवाद, रक्षा खरीद और ‘मेक इन इंडिया’ रक्षा परियोजनाओं पर विस्तृत लेख लिखे हैं। वे रक्षा मामलों की गहरी समझ और विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण के लिए जाने जाते हैं।

Most Popular

Recent Comments