📍नई दिल्ली | 20 Jul, 2026, 12:02 PM
Astra Missile Export: भारत की स्वदेशी अस्त्र बियॉन्ड विजुअल रेंज एयर-टू-एयर मिसाइल अब दुनिया के कई देशों का ध्यान अपनी ओर खींच रही है। ऑपरेशन सिंदूर में भारतीय वायुसेना द्वारा इसके सफल इस्तेमाल के बाद इस मिसाइल की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मांग तेजी से बढ़ी है। इंडोनेशिया के साथ हुए शुरुआती समझौते के बाद अब आर्मेनिया, सऊदी अरब सहित कम से कम छह देश इस मिसाइल को खरीदने या अपने लड़ाकू विमानों पर लगाने के इच्छुक दिख रहे हैं।
सूत्रों के मुताबिक, भारत और इंडोनेशिया के बीच अस्त्र मिसाइल को लेकर इन-प्रिंसिपल एग्रीमेंट हो चुका है। इस समझौते की घोषणा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इसी महीने जकार्ता यात्रा के दौरान की गई थी। अब दोनों देशों के बीच मिसाइलों की संख्या और सौदे की कुल कीमत पर आगे बातचीत होगी।
Astra Missile Export: ऑपरेशन सिंदूर के बाद बढ़ा दुनिया का भरोसा
अस्त्र मिसाइल की सबसे बड़ी ताकत यह है कि यह असली युद्ध में भी अपनी क्षमता साबित कर चुकी है। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारतीय वायुसेना के सुखोई-30 एमकेआई लड़ाकू विमानों से इस मिसाइल का सफल इस्तेमाल किया गया। इसके बाद इसे “कॉम्बैट प्रूवन” यानी वास्तविक युद्ध में सफल हथियार का दर्जा मिलने लगा।
रक्षा क्षेत्र में किसी भी हथियार के लिए यह पहचान बहुत महत्वपूर्ण मानी जाती है। जिन हथियारों का वास्तविक युद्ध में सफल इस्तेमाल हो चुका होता है, उन पर दूसरे देशों का भरोसा तेजी से बढ़ता है। यही कारण है कि अब कई देश भारत के इस स्वदेशी हथियार में दिलचस्पी दिखा रहे हैं। (Astra Missile Export)
आर्मेनिया सबसे आगे, सऊदी अरब भी बातचीत में
सूत्रों के मुताबिक, आर्मेनिया भारत के साथ अस्त्र मिसाइल खरीदने की बातचीत में सबसे आगे है। दोनों देशों के बीच इस मिसाइल को आर्मेनिया के सुखोई-30 एसएम लड़ाकू विमानों पर लगाने को लेकर एडवांस स्टेज पर चर्चा चल रही है।
आर्मेनिया पहले से ही भारत का बड़ा रक्षा ग्राहक बन चुका है। उसने भारत से आकाश एयर डिफेंस सिस्टम, पिनाका मल्टी बैरल रॉकेट लॉन्चर, स्वाति वेपन लोकेटिंग रडार, एडवांस्ड टोव्ड आर्टिलरी गन सिस्टम (एटीएजीएस) और जेन एंटी-ड्रोन सिस्टम जैसे कई हथियार खरीदे हैं। अब अस्त्र मिसाइल में उसकी रुचि भारत के रक्षा उद्योग पर बढ़ते भरोसे को भी दिखाती है।
दूसरी ओर सऊदी अरब भी इस मिसाइल को लेकर भारत के साथ बातचीत कर रहा है। जानकारी के अनुसार, सऊदी वायुसेना के एफ-15एस, एफ-15एसए और यूरोफाइटर टाइफून लड़ाकू विमानों पर अस्त्र मिसाइल को लगाने की संभावनाओं पर चर्चा चल रही है।
इंडोनेशिया बन सकता है पहला विदेशी ग्राहक
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जकार्ता यात्रा के दौरान भारत और इंडोनेशिया के बीच अस्त्र मिसाइल को लेकर सिद्धांत रूप में सहमति बनी थी। इसके बाद दोनों देशों के रक्षा अधिकारियों के बीच टेक्निकल और कमर्शियल नेगोशिएशंस चल रही हैं।
सौदे के तहत कितनी मिसाइलें खरीदी जाएंगी और कुल कीमत कितनी होगी, इसका फैसला कॉन्ट्रैक्ट नेगोशिएशंस के दौरान किया जाएगा। इंडोनेशिया के पास भी सुखोई लड़ाकू विमान हैं, इसलिए अस्त्र मिसाइल का इंटीग्रेशन अपेक्षाकृत आसान माना जा रहा है। (Astra Missile Export)
क्या है अस्त्र मिसाइल
अस्त्र भारत की पहली पूरी तरह स्वदेशी बियॉन्ड विजुअल रेंज एयर-टू-एयर मिसाइल है। इसका मतलब है कि यह ऐसी मिसाइल है जो पायलट की आंखों से दिखाई देने वाली दूरी से काफी आगे मौजूद दुश्मन के लड़ाकू विमान को निशाना बना सकती है। इसे भारतीय वायुसेना के यह सु-30एमकेआई और तेजस एमके-1ए सहित अन्य लड़ाकू विमानों के साथ भी जोड़ा जा रहा है।
इस मिसाइल को डीआरडीओ की हैदराबाद स्थित डिफेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट लेबोरेटरी (डीआरडीएल) ने तैयार किया है। इसका उत्पादन भारत डायनेमिक्स लिमिटेड (बीडीएल) करती है।
अस्त्र का विकास भारत के लिए इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि पहले इस श्रेणी की मिसाइलों के लिए देश को विदेशी कंपनियों पर निर्भर रहना पड़ता था। (Astra Missile Export)
अस्त्र एमके-1 की खूबियां
अस्त्र एमके-1 लगभग 154 किलोग्राम वजनी मिसाइल है। इसकी लंबाई करीब 3.84 मीटर और व्यास 178 मिलीमीटर है। इसमें लगभग 15 किलोग्राम का प्री-फ्रैगमेंटेड हाई एक्सप्लोसिव वारहेड लगाया गया है।
यह मिसाइल मैक 4.5 यानी ध्वनि की गति से लगभग साढ़े चार गुना अधिक रफ्तार से उड़ सकती है। इसकी मारक क्षमता सामान्य परिस्थितियों में 80 से 110 किलोमीटर तक है। कुछ एडवांस वर्जन में इसकी इफेक्टिव रेंज और बढ़ाई गई है।
मिसाइल में सिंगल-पल्स स्मोकलेस सॉलिड रॉकेट मोटर लगी है। यह लॉन्च के समय बहुत कम धुआं छोड़ती है, जिससे लड़ाकू विमान की स्थिति का पता लगाना दुश्मन के लिए कठिन हो जाता है।
कैसे करती है टारगेट पर हमला
अस्त्र मिसाइल में कई आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल किया गया है। शुरुआत में यह फाइबर ऑप्टिक जायरोस्कोप आधारित इनर्शियल नेविगेशन सिस्टम की मदद से उड़ान भरती है। बीच रास्ते में लड़ाकू विमान से डेटा लिंक के जरिए इसे लगातार नई जानकारी मिलती रहती है।
लक्ष्य के पास पहुंचने के बाद इसका एक्टिव रडार सीकर खुद टारगेट को खोजकर उस पर सटीक हमला करता है। इस तकनीक की वजह से मिसाइल अंतिम चरण में भी तेजी से दिशा बदल सकती है और तेज गति से उड़ रहे लड़ाकू विमान को निशाना बना सकती है। (Astra Missile Export)
अस्त्र एमके-2 में बढ़ी दूरी और ताकत
डीआरडीओ ने अस्त्र के दूसरे वर्जन एमके-2 का भी सफल परीक्षण किया है। इस मिसाइल की मारक क्षमता 160 से 240 किलोमीटर तक मानी जा रही है।
एमके-2 में सबसे बड़ा बदलाव इसकी ड्यूल-पल्स रॉकेट मोटर है। यह तकनीक मिसाइल को उड़ान के अंतिम चरण में दोबारा अतिरिक्त ऊर्जा देती है। इससे टारगेट के पास पहुंचने तक इसकी गति और मारक क्षमता बनी रहती है।
इस वर्जन में बेहतर एईएसए बेस्ड सीकर, एडवांस लेजर फ्यूज और बड़ा नो-एस्केप जोन भी शामिल किया गया है। इसका मतलब है कि टारगेट के बच निकलने की संभावना काफी कम हो जाती है।
एमके-3 में होगी रैमजेट तकनीक
डीआरडीओ अस्त्र के तीसरे वर्जन एमके-3 पर भी काम कर रहा है। इसे गांडीव भी कहा जा रहा है। इसमें सॉलिड फ्यूल डक्टेड रैमजेट इंजन लगाया जा रहा है। यह तकनीक मिसाइल को लंबे समय तक हाई स्पीड बनाए रखने में मदद करती है। इसकी संभावित मारक क्षमता 300 किलोमीटर से अधिक रखने का लक्ष्य है।
रैमजेट तकनीक के कारण मिसाइल पूरे उड़ान मार्ग में पर्याप्त ऊर्जा बनाए रखती है और दूर स्थित तेज गति वाले लक्ष्यों पर भी प्रभावी हमला कर सकती है। (Astra Missile Export)
कीमत भी बड़ी ताकत
रक्षा सूत्रों का कहना है कि अस्त्र मिसाइल की सबसे बड़ी खूबियों में इसकी कीमत भी शामिल है। यह चीन, यूरोप, अमेरिका और रूस की मिसाइलों की तुलना में करीब 70 प्रतिशत तक सस्ती है। कम लागत के बावजूद इसकी मारक क्षमता और तकनीकी प्रदर्शन दुनिया की कई आधुनिक एयर-टू-एयर मिसाइलों के बराबर माना जा रहा है।
इसी वजह से जिन देशों के पास सीमित रक्षा बजट है, उनके लिए यह एक आकर्षक विकल्प बनकर उभरी है।
इसका मुकाबला पीएल-15 (चीन), मेटियोर (यूरोप/एमबीडीए), एआईएम-120डी (अमेरिका), आर-77, पीएल-17 (चीन), आर-37एम (रूस), एआईएम-260 (अमेरिका) से है।
बढ़ती मांग के बीच निजी कंपनियां भी करेंगी निर्माण
अब तक अस्त्र मिसाइल का निर्माण मुख्य रूप से भारत डायनेमिक्स लिमिटेड करती रही है। लेकिन लगातार बढ़ती घरेलू और अंतरराष्ट्रीय मांग को देखते हुए केंद्र सरकार ने इसके उत्पादन में निजी क्षेत्र को भी शामिल करने का फैसला किया है।
इस कदम का उद्देश्य उत्पादन क्षमता बढ़ाना और समय पर सप्लाई सुनिश्चित करना है। इससे भारतीय रक्षा उद्योग में निजी कंपनियों की भागीदारी भी बढ़ेगी। (Astra Missile Export)
Author
हरेंद्र चौधरी रक्षा पत्रकारिता (Defence Journalism) में सक्रिय हैं और RakshaSamachar.com से जुड़े हैं। वे लंबे समय से भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना से जुड़ी रणनीतिक खबरों, रक्षा नीतियों और राष्ट्रीय सुरक्षा से संबंधित मुद्दों को कवर कर रहे हैं। पत्रकारिता के अपने करियर में हरेंद्र ने संसद की गतिविधियों, सैन्य अभियानों, भारत-पाक और भारत-चीन सीमा विवाद, रक्षा खरीद और ‘मेक इन इंडिया’ रक्षा परियोजनाओं पर विस्तृत लेख लिखे हैं। वे रक्षा मामलों की गहरी समझ और विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण के लिए जाने जाते हैं।



