📍नई दिल्ली | 15 Sep, 2026, 12:35 PM
DRDO Industry Partnership: भारत को रक्षा क्षेत्र में वैश्विक शक्ति बनाने और भविष्य की सैन्य तकनीकों में अग्रणी स्थान दिलाने के लक्ष्य के साथ रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने उद्योग जगत, स्टार्टअप्स, एमएसएमई और शिक्षण संस्थानों से रक्षा अनुसंधान एवं विकास में सक्रिय भागीदारी की अपील की। नई दिल्ली में आयोजित डीआरडीओ–इंडस्ट्री सिनर्जी मीट ‘विमर्श 2026’ को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि आने वाले समय में युद्ध का स्वरूप तकनीक आधारित होगा और जो देश नई तकनीकों का नेतृत्व करेगा, वही रणनीतिक बढ़त हासिल करेगा।
DRDO Industry Partnership: संवाद और सहयोग से बनेगा मजबूत रक्षा इकोसिस्टम
रक्षा मंत्री ने कहा कि भारत में विचार-विमर्श और संवाद की परंपरा सदियों पुरानी है। उन्होंने कहा, “वादे वादे जायते तत्त्वबोधः अर्थात बातचीत से ही सत्य का बोध होता है। डीआरडीओ और इंडस्ट्री के बीच यही संवाद नए और सशक्त भारत के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।”
उन्होंने कहा कि ‘विमर्श 2026’ की थीम ‘वार्ता से विकास’ केवल एक नारा नहीं, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा और औद्योगिक क्षमता के क्षेत्र में आ रहे बदलाव का प्रतीक है। उनके अनुसार रक्षा अनुसंधान और उत्पादन अब केवल सरकारी संस्थानों तक सीमित नहीं रह सकता, बल्कि इसमें निजी उद्योग, स्टार्टअप्स और शिक्षण संस्थानों की भी बराबर भागीदारी जरूरी है।
70 सालों में डीआरडीओ ने बनाई मजबूत पहचान
राजनाथ सिंह ने कहा कि डीआरडीओ की स्थापना को लगभग 70 साल हो चुके हैं और इस दौरान संगठन ने मिसाइल, राडार, कॉम्बैट एयरक्राफ्ट, सबमैरिन, इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर सिस्टम और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसे क्षेत्रों में अपनी क्षमता साबित की है।
उन्होंने कहा, “डिफेंस सेक्टर में रिसर्च एंड डेवलपमेंट के लिए डीआरडीओ आज देश का प्रमुख संगठन है। लेकिन केवल सरकार या डीआरडीओ के प्रयास पर्याप्त नहीं हैं। यह एक साझा प्रयास है और यही सहयोग इस कार्यक्रम का मूल संदेश है।” (DRDO Industry Partnership)
रक्षा निर्माण का वैश्विक केंद्र बन सकता है भारत
रक्षा मंत्री ने कहा कि डीआरडीओ और उद्योग जगत की साझेदारी भारत को रक्षा निर्माण का वैश्विक केंद्र बना सकती है। उन्होंने पिछले कुछ वर्षों में रक्षा क्षेत्र में किए गए सुधारों का उल्लेख करते हुए कहा कि ‘मेक इन इंडिया’, ‘पॉजिटिव इंडिजेनाइजेशन लिस्ट’, ‘आईडेक्स’ और निजी क्षेत्र के लिए अनुसंधान बजट का 25 प्रतिशत आरक्षित करने जैसे कदमों ने बड़ा बदलाव लाया है।
उन्होंने कहा कि इन पहलों का उद्देश्य रक्षा आयात पर निर्भरता कम करना और देश को आत्मनिर्भर बनाना है। उनके अनुसार आत्मनिर्भरता केवल हथियार या प्लेटफॉर्म बनाने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सोच और कार्यशैली का हिस्सा बननी चाहिए। (DRDO Industry Partnership)
स्टार्टअप्स और एमएसएमई पर विशेष जोर
राजनाथ सिंह ने कहा कि स्टार्टअप्स और एमएसएमई भारत में इनोवेशन के नए केंद्र बनकर उभरे हैं। उन्होंने बताया कि डीआरडीओ ने ऐसा स्ट्रक्चर तैयार किया है, जिसके माध्यम से छोटे उद्यम सीधे उसकी प्रयोगशालाओं के साथ काम कर सकते हैं।
उन्होंने कहा कि डीप-टेक और विशेष तकनीकों पर काम करने वाले स्टार्टअप्स को तकनीकी मार्गदर्शन और विश्वस्तरीय परीक्षण सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। उनके अनुसार रक्षा उत्पादन से जुड़े कंपोनेंट्स, सब-सिस्टम्स और उन्नत तकनीकों के विकास में एमएसएमई की भूमिका लगातार बढ़ रही है। (DRDO Industry Partnership)
भविष्य की तकनीकों में निवेश बढ़ाने की जरूरत
कार्यक्रम में जारी नई नीतियों और दिशानिर्देशों का उल्लेख करते हुए रक्षा मंत्री ने कहा कि इनका उद्देश्य उद्योग-आधारित अनुसंधान, स्टार्टअप्स को फंडिंग, शिक्षण संस्थानों और उद्योग के बीच सहयोग तथा भविष्य की तकनीकों में निवेश बढ़ाना है।
उन्होंने विशेष रूप से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, क्वांटम कंप्यूटिंग, हाइपरसोनिक तकनीक और डायरेक्टेड एनर्जी सिस्टम जैसे क्षेत्रों का जिक्र किया। उनके अनुसार यही तकनीकें भविष्य के रक्षा परिदृश्य को आकार देंगी।
राजनाथ सिंह ने कहा, “जो कंपनियां आज नई और उभरती तकनीकों में निवेश करेंगी, वही भविष्य की लीडर बनेंगी। हमें केवल भविष्य की कल्पना नहीं करनी है, बल्कि भविष्य की तकनीकों को आज विकसित करना है।” (DRDO Industry Partnership)
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर भी दिया संदेश
अपने संबोधन के दौरान रक्षा मंत्री ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के बढ़ते उपयोग का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि आज लोग एआई की मदद से 40-50 साल पुरानी तस्वीरों को नए रूप में दिखा रहे हैं, लेकिन असली उपलब्धि तब होगी जब यही तकनीक आने वाले 40-50 वर्षों के भारत की तस्वीर तैयार करने में मदद करे।
उन्होंने कहा, “आज की हमारी इमेजिनेशन ही कल की मिलिट्री कैपेबिलिटी बनेगी। भविष्य के युद्धों में वही देश रणनीतिक बढ़त हासिल करेगा जो तकनीक का नेतृत्व करेगा।” (DRDO Industry Partnership)
विकसित भारत 2047 के लक्ष्य में रक्षा क्षेत्र की अहम भूमिका
रक्षा मंत्री ने कहा कि विकसित भारत 2047 का लक्ष्य केवल आर्थिक रूप से मजबूत देश बनाना नहीं है। इसमें तकनीकी आत्मनिर्भरता, सामाजिक समावेशन, पर्यावरणीय संतुलन और रणनीतिक सुरक्षा भी शामिल है।
उन्होंने कहा कि 2047 तक भारत को महत्वपूर्ण तकनीकों में आत्मनिर्भरता, स्वदेशी सामग्री के उपयोग में वृद्धि, रक्षा निर्यात में कई गुना विस्तार और वैश्विक सप्लाई चेन में मजबूत उपस्थिति सुनिश्चित करनी होगी।
राजनाथ सिंह ने कहा कि आज डीआरडीओ के पास ज्ञान और तकनीक है, उद्योग जगत के पास उत्पादन क्षमता है, स्टार्टअप्स के पास इनोवेशन है और युवाओं के पास नए भारत का सपना है। उन्होंने कहा कि जब ये सभी ताकतें एक दिशा में मिलकर काम करेंगी, तब भारत की रक्षा क्षमता और मजबूत होगी।
उन्होंने सुझाव दिया कि डीआरडीओ, उद्योग और शिक्षण संस्थानों के बीच इस तरह का संवाद केवल साल में एक बार नहीं, बल्कि नियमित रूप से होना चाहिए ताकि नए विचार तेजी से प्रयोगशालाओं से उत्पादन तक पहुंच सकें। (DRDO Industry Partnership)
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