📍नई दिल्ली | 28 Oct, 2026, 4:20 PM
Project-18A destroyer: हाल ही में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में 26 अक्टूबर को हुई रक्षा अधिग्रहण परिषद (डीएसी) की बैठक में करीब 2.12 लाख करोड़ रुपये के रक्षा खरीद प्रस्तावों को सैद्धांतिक मंजूरी दी गई। रक्षा मंत्रालय की ओर से जारी जानकारी में नौसेना के लिए एक्टिव ऑफबोर्ड डिकॉय सिस्टम (एओडीएस) के साथ कुछ अन्य बड़े स्वदेशी नौसैनिक प्लेटफॉर्म का भी जिक्र किया गया। हालांकि मंत्रालय ने इन प्लेटफॉर्म के नाम और उनकी पूरी तकनीकी जानकारी सार्वजनिक नहीं की।
सूत्रों के मुताबिक, ये नौसेना के लिए नेक्स्ट-जेनरेशन डिस्ट्रॉयर हैं। इन युद्धपोत का वजन 10,000 टन से अधिक हो सकता है।
Project-18A destroyer: क्या कहा है पीआईबी की रिलीज में
डीएसी की बैठक के बाद पीआईबी की तरफ से जारी प्रेस रिलीज में केवल इतना लिखा गया, “भारतीय नौसेना के लिए एक्टिव ऑफबोर्ड डिकॉय सिस्टम (AODS) और अन्य प्रमुख नौसैनिक प्लेटफॉर्म की खरीद को मंजूरी दी गई है। एक्टिव ऑफबोर्ड डिकॉय सिस्टम दुश्मन की आधुनिक एंटी-शिप मिसाइलों से नौसेना के युद्धपोतों की सुरक्षा मजबूत करेगा। यह सिस्टम मिसाइलों को भ्रमित करके जहाजों की सुरक्षा के लिए इस्तेमाल किया जाता है, जिससे मिसाइलों से बचाव की क्षमता बढ़ती है। इसके अलावा, स्वदेशी तकनीक से डिजाइन और निर्मित किए जाने वाले प्रमुख नौसैनिक प्लेटफॉर्म में आधुनिक युद्ध क्षमताएं होंगी। इनसे भारतीय नौसेना की युद्धक क्षमता और समुद्री अभियानों को अंजाम देने की ताकत बढ़ेगी।”
🇮🇳 Rs 2.12 Lakh Crore Defence Boost for India!
The Defence Acquisition Council (DAC), chaired by Defence Minister Rajnath Singh, has cleared capital acquisition proposals worth Rs 2.12 lakh crore for the Indian Army, Navy and Air Force.
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विशाखापत्तनम-क्लास डिस्ट्रॉयर से होंगे बड़े
सूत्रों के मुताबिक, रक्षा मंत्रालय की प्रेस इन्फॉर्मेशन ब्यूरो (पीआईबी) की रिलीज में जिन नौसैनिक प्लेटफॉर्म्स को मंजूरी मिलने का जिक्र किया गया है, उनमें भारतीय नौसेना के लिए प्रोजेक्ट-18ए के तहत डेवलप किए जाने वाले नेक्स्ट-जेनरेशन डिस्ट्रॉयर शामिल हैं।
प्रोजेक्ट-18ए भारतीय नौसेना के लिए अगली पीढ़ी के गाइडेड मिसाइल डिस्ट्रॉयर विकसित करने से जुड़ा कार्यक्रम है। इन युद्धपोतों को आधुनिक सेंसर, मिसाइलों, एयर डिफेंस सिस्टम और स्टेल्थ तकनीक से लैस करने की योजना है।
सूत्रों का कहना है कि इस प्रोजेक्ट के तहत 6-8 जहाज बनाए जााएंगे। इनकी लंबाई करीब 180 मीटर हो सकती है। ये भारत में बने अब तक के सबसे बड़े और सबसे भारी हथियारबंद सतह युद्धपोत होंगे और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर क्रूजर-क्लास के करीब पहुंचेंगे।
इनका डिजाइन नौसेना का वॉरशिप डिजाइन ब्यूरो तैयार कर रहा है। जुलाई 2025 में आयोजित ‘नेशन बिल्डिंग थ्रू शिपबिल्डिंग’ सेमिनार के दौरान प्रोजेक्ट-18 से जुड़ा कॉन्सेप्चुअल डिजाइन भी सामने आया था। इसका उद्देश्य ऐसे बड़े युद्धपोत तैयार करना है जो लंबी दूरी तक समुद्र में तैनात रहकर अलग-अलग तरह के नौसैनिक अभियान चला सकें।
मौजूदा विशाखापत्तनम-क्लास डिस्ट्रॉयर प्रोजेक्ट-15बी के तहत बनाए गए हैं। इनका डिस्प्लेसमेंट लगभग 7,400 से 8,000 टन के बीच है। इसके मुकाबले प्रोजेक्ट-18ए के प्रस्तावित युद्धपोत काफी बड़े होंगे। इनका डिस्प्लेसमेंट लगभग 13,000 से 15,000 टन तक होगा। (Project-18A destroyer)
मौजूदा डिस्ट्रॉयर से कितने अलग होंगे नए युद्धपोत?
डिस्ट्रॉयर आधुनिक नौसेना के प्रमुख सतही युद्धपोतों में शामिल होते हैं। इनका इस्तेमाल दुश्मन के युद्धपोतों और पनडुब्बियों से मुकाबला करने, हवाई हमलों से बेड़े की सुरक्षा करने तथा लंबी दूरी तक मिसाइल हमले करने के लिए किया जाता है।
प्रोजेक्ट-18ए के प्रस्तावित जहाज इन सभी भूमिकाओं को ध्यान में रखकर तैयार किए जाएंगे। बड़े साइज के चलते इनमें अधिक हथियार, ईंधन, सेंसर और अन्य उपकरण रखने के लिए जगह मिल सकती है। इनकी फायर पावर भी विशाखापत्तनम या नीलगिरी क्लास से कई गुना ज्यादा होगी।
ऐसे युद्धपोत एयरक्राफ्ट कैरियर के साथ कैरियर बैटल ग्रुप में भी काम कर सकते हैं। इस दौरान इनकी भूमिका कैरियर और उसके साथ चलने वाले दूसरे जहाजों को हवाई हमलों, दुश्मन की मिसाइलों और पनडुब्बियों से बचाने की होती है। जरूरत पड़ने पर ये स्वतंत्र रूप से भी समुद्री अभियानों में हिस्सा ले सकते हैं। (Project-18A destroyer)
मिसाइलों के लिए वर्टिकल लॉन्च सेल
प्रोजेक्ट-18ए में 144 वर्टिकल लॉन्च सिस्टम (वीएलएस) सेल भी होगा। वीएलएस युद्धपोत के भीतर लगाया जाने वाला ऐसा सिस्टम है, जिसमें मिसाइलों को खड़े स्थान पर रखा जाता है और जरूरत पड़ने पर सीधे ऊपर की ओर लॉन्च किया जाता है। इससे जहाज एक ही लॉन्च सिस्टम से अलग-अलग तरह की मिसाइलों का इस्तेमाल कर सकता है।
प्रस्तावित युद्धपोतों में ब्रह्मोस एंटी-शिप मिसाइलों, भविष्य में विकसित होने वाली हाइपरसोनिक ब्रह्मोस-2, लंबी दूरी की लैंड-अटैक क्रूज मिसाइल (एलआर-एलएसीएम), एयर डिफेंस के लिए प्रोजेक्ट कुशा या ईआरएडीएस जैसी लंबी दूरी की सतह-से-हवा में मार करने वाली मिसाइलें भी शामिल होंगी। इसके अलावा पनडुब्बियों के खिलाफ इस्तेमाल होने वाले हथियार भी शामिल होंगे। (Project-18A destroyer)
स्टेल्थ डिजाइन और आधुनिक रडार सिस्टम
आधुनिक युद्धपोतों में स्टेल्थ तकनीक का इस्तेमाल उनकी रडार पर पहचान को कठिन बनाने के लिए किया जाता है। इसके तहत जहाज की बाहरी बनावट, सतहों के कोण और उपकरणों की स्थिति को इस तरह डिजाइन किया जाता है कि रडार से लौटने वाले सिग्नल को कम किया जा सके।
प्रोजेक्ट-18ए के प्रस्तावित जहाजों में भी बेहतर स्टेल्थ डिजाइन पर जोर दिया जाएगा। ये आधुनिक रडार, इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सिस्टम और सेंसर फ्यूजन जैसी क्षमताओं से लैस होंगे।
सेंसर फ्यूजन का मतलब अलग-अलग सेंसर से मिलने वाली जानकारी को एक साथ जोड़कर ऑपरेटरों को किसी खतरे की अधिक स्पष्ट तस्वीर उपलब्ध कराना है। इससे जहाज को एक ही समय में कई हवाई, सतही और समुद्री खतरों पर नजर रखने में मदद मिल सकती है।
वहीं, स्वदेशी एस-बैंड एईएसए रडार और नेटवर्क-सेंट्रिक कॉम्बैट मैनेजमेंट सिस्टम जैसी तकनीकें भी होंगी। एईएसए रडार इलेक्ट्रॉनिक तरीके से अपनी रडार बीम को कंट्रोल कर सकता है। जबकि कॉम्बैट मैनेजमेंट सिस्टम युद्धपोत को दूसरे नौसैनिक जहाजों, विमानों और निगरानी प्रणालियों से मिलने वाली जानकारी के आधार पर तेजी से फैसला लेने में मदद करेगा। (Project 18A destroyer)
इंटीग्रेटेड इलेक्ट्रिक प्रोपल्शन से लैस
आधुनिक रडार, इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सिस्टम और भविष्य के हाई-पावर उपकरणों के लिए पर्याप्त इलेक्ट्रिसिटी की जरूरत होती है। प्रोजेक्ट-18ए में इंटीग्रेटेड इलेक्ट्रिक प्रोपल्शन (आईईपी) भी होगा। इस सिस्टम में बिजली उत्पादन और उसके डिस्ट्रीब्यूशन को जहाज के प्रोपल्शन सिस्टम तथा दूसरे उपकरणों के साथ इंटीग्रेट किया जाता है। इलेक्ट्रिक प्रोपल्शन में बिजली से चलने वाली मोटरें जहाज के प्रोपेलर को घुमाती हैं। (Project-18A destroyer)
कम क्रू, ज्यादा ऑटोमेशन
प्रोजेक् 18-ए में ऑटोमेशन बढ़ाकर उसे ऑपरेट करने के लिए जरूरी क्रू की संख्या कम रखने की योजना है। ऑटोमेशन से कई काम कंप्यूटर और ऑटोमेटेड सिस्टम्स की मदद से किए जा सकते हैं, जिससे चालक दल पर काम का दबाव कम होता है।
इसमें दो हेलीकॉप्टरों को रखने और ऑपरेट करने की सुविधा भी होगी। हेलीकॉप्टर समुद्र में निगरानी, पनडुब्बियों का पता लगाने, खोज और बचाव अभियान तथा अन्य नौसैनिक मिशनों में मदद करते हैं। (Project-18A destroyer)
भारतीय नौसेना ने 2023 में ही दिए थे संकेत
भारतीय नौसेना ने नई पीढ़ी के अधिक आधुनिक और सक्षम डिस्ट्रॉयर युद्धपोतों के निर्माण की तैयारी दिसंबर 2023 में ही शुरू कर दी थी। 4 दिसंबर 2023 को नौसेना दिवस से पहले आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में तत्कालीन वाइस चीफ ऑफ नेवल स्टाफ वाइस एडमिरल संजय जसजीत सिंह ने इसकी जानकारी दी थी। इस दौरान तत्कालीन नौसेना प्रमुख एडमिरल आर. हरि कुमार भी मौजूद थे।
वाइस एडमिरल सिंह ने कहा था, “भारतीय नौसेना ने अगली पीढ़ी के अधिक एडवांस और सक्षम डिस्ट्रॉयर बनाने पर काम शुरू कर दिया है और इन युद्धपोतों की योजनाएं पहले से ही ड्रॉइंग बोर्ड पर हैं।”
उन्होंने परियोजना की संभावित समयसीमा के बारे में भी बताया था। उनके अनुसार, लगभग पांच साल में कॉन्ट्रैक्ट देने की स्थिति में पहुंचने का लक्ष्य था, जबकि अगले पांच से दस सालों के भीतर सभी युद्धपोतों की डिलीवरी पूरी करने की योजना थी। (Project-18A destroyer)
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हरेंद्र चौधरी रक्षा पत्रकारिता (Defence Journalism) में सक्रिय हैं और RakshaSamachar.com से जुड़े हैं। वे लंबे समय से भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना से जुड़ी रणनीतिक खबरों, रक्षा नीतियों और राष्ट्रीय सुरक्षा से संबंधित मुद्दों को कवर कर रहे हैं। पत्रकारिता के अपने करियर में हरेंद्र ने संसद की गतिविधियों, सैन्य अभियानों, भारत-पाक और भारत-चीन सीमा विवाद, रक्षा खरीद और ‘मेक इन इंडिया’ रक्षा परियोजनाओं पर विस्तृत लेख लिखे हैं। वे रक्षा मामलों की गहरी समझ और विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण के लिए जाने जाते हैं।


