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Swavlamban 2026: राजनाथ सिंह ने दिया आत्मनिर्भरता 2.0 का मंत्र, अब भारत बनाएगा एडवांस डिफेंस टेक्नोलॉजी

राजनाथ सिंह ने कहा कि कम लागत वाले प्रयोगों के जरिए भी महत्वपूर्ण तकनीकी नतीजे हासिल किए जा सकते हैं। इसलिए भारत को ऐसी रिसर्च को प्रोत्साहित करना चाहिए, जिसमें वैज्ञानिक नई तकनीक विकसित करने के लिए अलग-अलग तरीके आजमा सकें...

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📍नई दिल्ली | 26 Oct, 2026, 9:35 PM

Swavlamban 2026: भारत को डिफेंस सेक्टर में आत्मनिर्भर बनाने के लिए रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने ‘आत्मनिर्भरता 2.0’ का आह्वान किया है। उन्होंने कहा कि अब भारत को सिर्फ देश में हथियार और सैन्य उपकरण बनाने तक सीमित नहीं रहना है, बल्कि एडवांस टेक्नोलॉजी विकसित करने, रिसर्च को मजबूत बनाने और जरूरी कच्चे माल व तकनीक के लिए दूसरे देशों पर निर्भरता कम करने पर भी ध्यान देना होगा। इसके लिए सरकार, निजी कंपनियों, स्टार्टअप, एमएसएमई और शिक्षण संस्थानों को मिलकर काम करना होगा।

रक्षा मंत्री ने मानेकशॉ सेंटर में आयोजित भारतीय नौसेना के पांचवें स्वावलंबन सम्मेलन में कही। दो दिन का यह सम्मेलन 26 और 27 अक्टूबर को आयोजित किया जा रहा है। इस साल इसकी थीम ‘इनोवेशन और इंडिजिनाइजेशन के जरिए ताकत’ रखी गई है।

Swavlamban 2026: डिफेंस सेक्टर में बढ़ी आत्मनिर्भरता

राजनाथ सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में पिछले एक दशक के दौरान डिफेंस सेक्टर में आत्मनिर्भरता की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति हुई है। अब जरूरत ऐसे सैन्य उपकरण और तकनीक विकसित करने की है, जो कम लागत में तैयार हों, ऑपरेशन के दौरान बेहतर प्रदर्शन करें और अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी प्रतिस्पर्धा कर सकें।

राजनाथ सिंह ने कहा कि भारत को ऐसे उत्पाद बनाने होंगे, जो तकनीकी रूप से एडवांस होने के साथ किफायती भी हों। उनके मुताबिक, आत्मनिर्भरता का मतलब केवल स्वदेशी उत्पादों की संख्या बढ़ाना नहीं है। इनकी गुणवत्ता, काम करने की क्षमता और लागत भी महत्वपूर्ण है।

सप्लाई चेन को मजबूत बनाना जरूरी?

रक्षा मंत्री ने डिफेंस सप्लाई चेन को राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा महत्वपूर्ण मुद्दा बताया। उन्होंने कहा कि किसी हथियार या सैन्य प्लेटफॉर्म के निर्माण के लिए जरूरी कच्चा माल, इलेक्ट्रॉनिक उपकरण और विशेष तकनीक समय पर उपलब्ध होना आवश्यक है।

अगर इन चीजों की सप्लाई दूसरे देशों से होती है, तो युद्ध, अंतरराष्ट्रीय तनाव, प्रतिबंध या समुद्री व्यापार मार्गों में रुकावट आने पर रक्षा उत्पादन प्रभावित हो सकता है।

राजनाथ सिंह ने विशेष रूप से रेयर अर्थ एलिमेंट्स जैसे कच्चे माल का जिक्र किया। इनका इस्तेमाल कई आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों, सेंसर और अन्य तकनीकी प्रणालियों में होता है। कुछ क्षेत्रों में घरेलू उपलब्धता सीमित होने और जरूरी तकनीक की कमी के चलते भारत को बाहरी सप्लायर पर निर्भर रहना पड़ता है।

उन्होंने कहा कि सरकार और उद्योग को एक ऐसा रोडमैप तैयार करना चाहिए, जिसमें स्पष्ट हो कि किस उत्पाद या तकनीक में कितने समय के भीतर आत्मनिर्भरता हासिल करनी है। इसमें जरूरी तकनीक, संबंधित उद्योगों और उपलब्ध संसाधनों की पहचान भी की जानी चाहिए।

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रक्षा मंत्री ने कहा, “सप्लाई चेन मैनेजमेंट केवल तकनीकी मुद्दा नहीं है, बल्कि यह एक रणनीतिक जरूरत है, जिसका सीधा संबंध राष्ट्रीय सुरक्षा से है।”

उन्होंने यह भी कहा कि किसी संकट के आने का इंतजार करने के बजाय पहले से यह आकलन किया जाना चाहिए कि किन जरूरी सामानों का बफर स्टॉक उपलब्ध है और देश के भीतर कितना उत्पादन किया जा सकता है। (Swavlamban 2026)

रिसर्च में असफलता से डरने की जरूरत नहीं

राजनाथ सिंह ने डिफेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट यानी रिसर्च और डेवलपमेंट को आत्मनिर्भरता का महत्वपूर्ण आधार बताया। उन्होंने कहा कि आधुनिक सैन्य तकनीक विकसित करने के लिए लंबे समय तक निवेश, वैज्ञानिक क्षमता और लगातार प्रयोग करने की जरूरत होती है।

रिसर्च के दौरान हर प्रयोग सफल नहीं होता। कई बार तकनीकी समस्याएं सामने आती हैं और तैयार किया गया प्रोटोटाइप तय मानकों पर खरा नहीं उतरता। रक्षा मंत्री के मुताबिक, इसे केवल असफलता के तौर पर नहीं देखना चाहिए, क्योंकि इससे तकनीक को बेहतर बनाने का मौका मिलता है।

उन्होंने सवाल उठाया कि क्या भारत ऐसी फंडिंग व्यवस्था विकसित कर सकता है, जो अधिक जोखिम वाले लेकिन बड़े परिणाम देने वाले रिसर्च प्रोजेक्ट को समर्थन दे सके। उन्होंने निजी कंपनियों की भागीदारी बढ़ाने पर भी जोर दिया।

राजनाथ सिंह ने कहा कि कम लागत वाले प्रयोगों के जरिए भी महत्वपूर्ण तकनीकी नतीजे हासिल किए जा सकते हैं। इसलिए भारत को ऐसी रिसर्च को प्रोत्साहित करना चाहिए, जिसमें वैज्ञानिक नई तकनीक विकसित करने के लिए अलग-अलग तरीके आजमा सकें।

उन्होंने इजरायल, दक्षिण कोरिया और अमेरिका जैसे देशों का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां रिसर्च और इनोवेशन को काम करने की संस्कृति का हिस्सा बनाया गया है। भारत में भी उद्योगों, विश्वविद्यालयों और रिसर्च संस्थानों के बीच सहयोग बढ़ाने की जरूरत है।

उन्होंने शिक्षण संस्थानों में छात्रों को रिसर्च के लिए प्रोत्साहित करने और युवाओं को वैज्ञानिक तथा तकनीकी क्षेत्रों में करियर बनाने के अधिक अवसर देने की बात कही। (Swavlamban 2026)

नौसेना के जहाजों की लागत कम करने पर जोर

राजनाथ सिंह ने कहा कि हिंद महासागर क्षेत्र में बदलते सुरक्षा हालात के बीच भारतीय नौसेना के युद्धपोतों की जरूरत महत्वपूर्ण बनी हुई है। हालांकि, युद्धपोतों का निर्माण एक महंगी और तकनीकी रूप से जटिल प्रक्रिया है।

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इसलिए नौसेना के लिए जरूरी उपकरणों और तकनीक को देश में विकसित करने के साथ उनकी लागत कम करने पर भी ध्यान देना होगा। इससे स्वदेशी उत्पादन को बढ़ावा मिलेगा और विदेशी सप्लाई पर निर्भरता घटाने में मदद मिलेगी।

रक्षा मंत्री ने नौसेना के लिए जरूरी उन उपकरणों की पहचान करने पर भी जोर दिया, जिन्हें अभी विदेशी कंपनियों से खरीदा जाता है। इनमें बायर नॉमिनेटेड इक्विपमेंट जैसे क्षेत्र भी शामिल हैं, जहां उपकरणों के लिए विशेष सप्लायर निर्धारित किए जा सकते हैं।

उन्होंने कहा कि आत्मनिर्भरता के अगले चरण में ऐसे क्षेत्रों पर ध्यान देना जरूरी है, जहां आयात पर निर्भरता अभी बनी हुई है। (Swavlamban 2026)

सिविल और मिलिट्री इस्तेमाल वाली तकनीक पर बनेगा रोडमैप

रक्षा मंत्री ने ‘ड्यूल टेक्नोलॉजी रोडमैप’ तैयार करने का सुझाव दिया। इसका उद्देश्य ऐसी तकनीकों की पहचान करना है, जिनका इस्तेमाल नागरिक और सैन्य, दोनों क्षेत्रों में किया जा सकता है।

उदाहरण के लिए, आधुनिक नेविगेशन सिस्टम, कम्युनिकेशन तकनीक, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, ऑटोनॉमस प्लेटफॉर्म और सेंसर का इस्तेमाल सैन्य ऑपरेशन के साथ नागरिक जहाजरानी और अन्य क्षेत्रों में भी हो सकता है।

उन्होंने कहा कि स्वदेशीकरण का दायरा केवल मौजूदा पॉजिटिव इंडिजिनाइजेशन लिस्ट तक सीमित नहीं रहना चाहिए। नागरिक और सैन्य जहाजरानी के लिए जरूरी उत्पादों और तकनीकों की भी पहचान की जानी चाहिए।

इसके साथ ही ऐसी तकनीक विकसित करने पर जोर दिया गया, जिनका इस्तेमाल भारतीय सेना, नौसेना, वायुसेना और भारतीय तटरक्षक बल, चारों कर सकें। इससे एक ही तकनीक को अलग-अलग जरूरतों के अनुसार विकसित करने और इस्तेमाल करने का रास्ता खुल सकता है। (Swavlamban 2026)

Swavlamban 2026
Chief of the Naval Staff (CNS) Admiral Krishna Swaminathan highlighted the SWAVLAMBAN’s growth since 2022. (Photo: PIB)

आईडेक्स चैलेंज की संख्या 229

स्वावलंबन सम्मेलन में भारतीय नौसेना की इनोवेशन पहल आईडेक्स यानी इनोवेशन फॉर डिफेंस एक्सीलेंस की प्रगति भी सामने रखी गई।

नौसेना प्रमुख एडमिरल कृष्णा स्वामीनाथन ने बताया कि 2022 में स्वावलंबन की शुरुआत के समय नौसेना से जुड़े आईडेक्स चैलेंज की संख्या 20 थी। अब यह संख्या बढ़कर 229 हो गई है। ये चैलेंज पूरे डिफेंस सेक्टर में जारी कुल आईडेक्स चैलेंज का लगभग 35 प्रतिशत हैं।

नौसेना की ओर से जारी तकनीकी जरूरतों और समस्याओं के समाधान के लिए स्टार्टअप और एमएसएमई अपनी तकनीक पेश करते हैं। इसका उद्देश्य ऐसी स्वदेशी तकनीक विकसित करना है, जिसे नौसेना अपने ऑपरेशन में इस्तेमाल कर सके।

एडमिरल कृष्णा स्वामीनाथन के अनुसार, अब तक 3,500 करोड़ रुपये से अधिक के 41 एक्विजिशन ऑफ नेसेसिटी यानी एओएन मामलों को मंजूरी दी गई है। इसके अलावा 1,900 करोड़ रुपये से अधिक मूल्य के 25 कॉन्ट्रैक्ट पर हस्ताक्षर किए जा चुके हैं। (Swavlamban 2026)

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क्वांटम टेक्नोलॉजी और एआई पर भी ध्यान

स्वावलंबन 2026 में क्वांटम टेक्नोलॉजी, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, ऑटोनॉमस सिस्टम और हाइपरसोनिक टेक्नोलॉजी पर चर्चा की जा रही है। इन क्षेत्रों को भविष्य के सैन्य ऑपरेशन और नौसैनिक क्षमताओं के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

नौसेना प्रमुख ने कहा कि केवल नए विचार सामने लाना पर्याप्त नहीं है। उन्हें वास्तविक सैन्य क्षमता में बदलने के लिए पांच क्षेत्रों पर काम करना होगा। इनमें नए विचार विकसित करना, प्रोटोटाइप बनाना, वास्तविक परिस्थितियों में परीक्षण करना, कॉन्ट्रैक्ट और इंडक्शन की प्रक्रिया पूरी करना तथा उपकरणों को लंबे समय तक इस्तेमाल करने के लिए लाइफ-साइकिल सपोर्ट देना शामिल है।

उन्होंने विशेष रूप से प्रोटोटाइप के सफल परीक्षण और बड़े स्तर पर उत्पादन के बीच की प्रक्रिया को तेज करने पर जोर दिया। कई बार कोई तकनीक परीक्षण में सफल हो जाती है, लेकिन उत्पादन क्षमता, खरीद प्रक्रिया या जरूरी मंजूरी में देरी के कारण उसे सेना में शामिल करने में समय लगता है। (Swavlamban 2026)

100 से ज्यादा स्टॉल पर दिखाई गई स्वदेशी तकनीक

स्वावलंबन 2026 में स्टार्टअप और एमएसएमई के 100 से अधिक स्टॉल लगाए गए हैं। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने प्रदर्शनी का दौरा किया और नौसेना की जरूरतों पर काम कर रहे इनोवेटर्स से बातचीत की।

प्रदर्शनी में ऑटोनॉमस मैरीटाइम प्लेटफॉर्म, क्वांटम टेक्नोलॉजी, युद्ध में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के इस्तेमाल, लगातार निगरानी करने वाले सिस्टम, सुरक्षित नेविगेशन, एडवांस कम्युनिकेशन और काउंटर-ड्रोन तकनीक से जुड़े समाधान प्रदर्शित किए गए।

कार्यक्रम के दौरान रक्षा मंत्री ने ‘कम्पेंडियम ऑफ टेक्नोलॉजी इम्परेटिव्स, प्रॉब्लम स्टेटमेंट्स एंड फ्यूचर कॉन्सेप्ट्स’ और ‘स्वावलंबन 5.0’ दस्तावेज भी जारी किए। इनका उद्देश्य उद्योगों, स्टार्टअप और एमएसएमई को भारतीय नौसेना की तकनीकी जरूरतों तथा विकास से जुड़े अवसरों की जानकारी देना है। (Swavlamban 2026)

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