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Swavlamban 2026 में नेवी करेगी इनोवेशन और इंडिजिनाइजेशन पर चर्चा, अधूरे प्रोटोटाइप का भी होगा टेस्ट, फीडबैक से बेहतर होंगे हथियार

वाइस एडमिरल अजय कोचर के मुताबिक इनोवेशन फॉर डिफेंस एक्सीलेंस (आईडेक्स) के तहत नौसेना ने 229 चैलेंजेस शुरू किए हैं। इनके जवाब में स्टार्टअप्स और एमएसएमई से 4,000 से अधिक प्रस्ताव मिले हैं...

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📍नई दिल्ली | 24 Oct, 2026, 6:44 PM

Swavlamban 2026: भारतीय नौसेना स्वदेशी रक्षा तकनीक को बढ़ावा देने के लिए 26 और 27 अक्टूबर को स्वावलंबन 2026 का आयोजन करने जा रही है। इस कार्यक्रम में नौसेना की जरूरतों के मुताबिक हथियार, सेंसर, ड्रोन और दूसरी सैन्य तकनीक विकसित करने में भारतीय स्टार्टअप्स और कंपनियों की भूमिका पर चर्चा होगी। खास बात यह है कि नौसेना अब किसी सिस्टम के पूरी तरह तैयार होने का इंतजार करने के बजाय शुरुआती प्रोटोटाइप का परीक्षण करके उसमें सुधार करने पर जोर दे रही है। इस तरीके को ‘स्पाइरल डेवलपमेंट मॉडल’ कहा जाता है।

Swavlamban 2026: थीम ‘स्ट्रेंथ एंड पावर थ्रू इनोवेशन एंड इंडिजिनाइजेशन’

भारतीय नौसेना के प्रमुख इनोवेशन और इंडिजिनाइजेशन सेमिनार स्वावलंबन का पांचवां संस्करण 26 और 27 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली के मानेकशॉ सेंटर में आयोजित होगा। इस बार सेमिनार की थीम ‘स्ट्रेंथ एंड पावर थ्रू इनोवेशन एंड इंडिजिनाइजेशन’ रखी गई है। इसका मतलब है कि स्वदेशी तकनीक और नए आविष्कारों के जरिए देश की सैन्य ताकत बढ़ाना।

इस कार्यक्रम में भारतीय सेनाओं, डिफेंस कंपनियों, स्टार्टअप्स, एमएसएमई, शिक्षण संस्थानों और निवेशकों के प्रतिनिधि शामिल होंगे। कार्यक्रम में 100 से अधिक स्टॉल लगाए जाएंगे। इन स्टॉल पर भारतीय कंपनियां अपनी तकनीक और उपकरणों को शोकेस करेंगी।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह 26 अक्टूबर को आयोजित होने वाले मुख्य सत्र में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे। इस दौरान रक्षा क्षेत्र में स्वदेशी तकनीक विकसित करने में योगदान देने वाले औद्योगिक साझेदारों को सम्मानित भी किया जाएगा।

कार्यक्रम में ‘स्वावलंबन 5.0’ दस्तावेज और ‘कंपेंडियम ऑन टेक्नोलॉजी इम्परेटिव्स’ भी जारी किए जाएंगे। इन दस्तावेजों में भारतीय नौसेना की तकनीकी प्राथमिकताओं, ऑपरेशनल जरूरतों और स्वदेशी विकास से जुड़े क्षेत्रों का उल्लेख होगा।

स्पाइरल डेवलपमेंट मॉडल में पहले प्रोटोटाइप तैयार

रक्षा उपकरणों को विकसित करने में अक्सर कई साल लग जाते हैं। किसी नए सिस्टम को सेना में शामिल करने से पहले उसका डिजाइन, प्रोटोटाइप, तकनीकी परीक्षण और ऑपरेशनल ट्रायल किए जाते हैं। इस दौरान कई बार डिजाइन में बदलाव की जरूरत पड़ती है। अगर हर बदलाव के बाद पूरे सिस्टम को नए सिरे से विकसित किया जाए, तो प्रक्रिया लंबी हो सकती है।

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स्पाइरल डेवलपमेंट मॉडल में शुरुआती काम करने वाला प्रोटोटाइप तैयार किया जाता है। इसके बाद उसका वास्तविक परिस्थितियों में परीक्षण होता है। परीक्षण के दौरान सामने आने वाली कमियों को दूर किया जाता है और नई तकनीक के अनुसार सिस्टम में सुधार किए जाते हैं।

नौसेना के उप प्रमुख वाइस एडमिरल अजय कोचर ने बताया कि पहली कोशिश में ही 100 फीसदी तैयार उपकरण की उम्मीद करना जरूरी नहीं है। उन्होंने प्रोटोटाइप आधारित विकास की जरूरत पर जोर दिया।

इस तरीके में नौसेना शुरुआती मॉडल का परीक्षण कर सकती है और फिर मिलने वाले फीडबैक के आधार पर उसके अगले संस्करण को बेहतर बना सकती है। इससे भारतीय स्टार्टअप्स को अपनी तकनीक को वास्तविक सैन्य जरूरतों के अनुरूप विकसित करने का अवसर मिलता है। (Swavlamban 2026)

स्टार्टअप्स से मिले 4,000 से ज्यादा प्रपोजल

वाइस एडमिरल अजय कोचर के मुताबिक इनोवेशन फॉर डिफेंस एक्सीलेंस (आईडेक्स) के तहत नौसेना ने 229 चैलेंजेस शुरू किए हैं। इनके जवाब में स्टार्टअप्स और सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) से 4,000 से अधिक प्रस्ताव मिले हैं। इन प्रस्तावों के जरिए अलग-अलग तकनीकी समस्याओं के समाधान तलाशे जा रहे हैं।

नौसेना के अनुसार, स्टार्टअप्स के साथ 1,950 करोड़ रुपये के कॉन्ट्रैक्ट किए जा चुके हैं। स्टार्टअप से जुड़े प्रोजेक्ट्स के लिए जरूरत की मंजूरी यानी एक्सेप्टेंस ऑफ नेसेसिटी (एओएन) का कुल मूल्य 3,500 करोड़ रुपये से अधिक हो चुका है।

नौसेना ने स्वदेशी तकनीक को बढ़ावा देने के लिए आईडेक्स के तहत उद्योग और नए उद्यमों के साथ काम किया है। इस सिस्टम का उद्देश्य ऐसी तकनीकों को विकसित करना है, जिनकी जरूरत सेना को है, लेकिन जिनके लिए अभी उपयुक्त स्वदेशी समाधान उपलब्ध नहीं हैं या जिनमें सुधार की गुंजाइश है।

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इस पहल में एमएसएमई की भूमिका भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि छोटी कंपनियां विशेष तकनीक, इलेक्ट्रॉनिक उपकरण, सॉफ्टवेयर और अन्य रक्षा उत्पाद विकसित करने में योगदान दे सकती हैं। (Swavlamban 2026)

एआई से लेकर हाइपरसोनिक तकनीक तक पर रहेगा जोर

स्वावलंबन 2026 में भविष्य के युद्ध और नौसैनिक अभियानों से जुड़ी तकनीकों पर विशेष चर्चा होगी। इनमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), क्वांटम टेक्नोलॉजी, ऑटोनॉमस सिस्टम और हाइपरसोनिक तकनीक शामिल हैं।

एआई का इस्तेमाल डेटा का विश्लेषण करने, निगरानी से मिली जानकारी को समझने और सैन्य निर्णय लेने में सहायता के लिए किया जा सकता है। क्वांटम टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में सुरक्षित संचार और संवेदनशील तकनीकी प्रणालियों पर काम किया जा रहा है। वहीं, ऑटोनॉमस सिस्टम ऐसे उपकरण होते हैं जो कुछ कार्यों को सीमित मानवीय नियंत्रण या पहले से तय निर्देशों के आधार पर कर सकते हैं।

हाइपरसोनिक तकनीक भी चर्चा का अहम हिस्सा होगी। इसमें मैक-5 या उससे अधिक गति से उड़ने वाले हथियारों और वाहनों से जुड़ी तकनीक शामिल होती है। नौसेना के लिए इन क्षेत्रों का महत्व समुद्री निगरानी, संचार, सुरक्षा और आधुनिक युद्ध प्रणालियों से जुड़ा है।

सेमिनार में समुद्री निगरानी, काउंटर-यूएएस यानी ड्रोन रोधी सिस्टम, एआई, क्वांटम टेक्नोलॉजी, एनबीसीडी सुरक्षा और कार्यक्षमता बढ़ाने वाले उपकरणों पर आधारित प्रदर्शनी भी लगाई जाएगी। एनबीसीडी का संबंध परमाणु, जैविक, रासायनिक और रेडियोलॉजिकल खतरों से बचाव से है। (Swavlamban 2026)

स्वदेशी सप्लाई चेन और निवेश पर भी चर्चा

स्वावलंबन 2026 में केवल नई तकनीक दिखाने पर ही जोर नहीं होगा, बल्कि उन्हें विकसित करने और उत्पादन तक पहुंचाने की प्रक्रिया पर भी चर्चा होगी। इसके लिए घरेलू सप्लाई चेन को मजबूत करने, रक्षा क्षेत्र में शैक्षणिक संस्थानों की भागीदारी बढ़ाने और स्टार्टअप्स को अपना कारोबार बढ़ाने में मदद देने जैसे विषय शामिल हैं।

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कार्यक्रम में निवेशकों और वेंचर कैपिटलिस्ट्स के साथ बातचीत भी होगी। इसका उद्देश्य ऐसी कंपनियों के लिए फंडिंग, उत्पादन बढ़ाने और अपने उत्पादों को बाजार तक पहुंचाने के विकल्पों पर चर्चा करना है, जिनकी तकनीक रक्षा क्षेत्र की जरूरतों के अनुरूप है।

भारतीय नौसेना इस कार्यक्रम का आयोजन डिफेंस इनोवेशन ऑर्गनाइजेशन (डीआईओ) और सोसाइटी ऑफ इंडियन डिफेंस मैन्युफैक्चरर्स (एसआईडीएम) के सहयोग से कर रही है। (Swavlamban 2026)

2022 में शुरू हुआ था स्वावलंबन

स्वावलंबन की शुरुआत वर्ष 2022 में हुई थी। तब से यह भारतीय नौसेना, रक्षा उद्योग और शिक्षण संस्थानों के बीच सहयोग का एक प्रमुख मंच बन गया है। इसका उद्देश्य नौसेना की वास्तविक जरूरतों को भारतीय कंपनियों और शोधकर्ताओं की तकनीकी क्षमता से जोड़ना है।

नौसेना के लिए स्वदेशी तकनीक विकसित करने में सिर्फ नया उपकरण बनाना ही पर्याप्त नहीं है। उसे समुद्र में कठिन परिस्थितियों, लगातार इस्तेमाल, साइबर सुरक्षा और रखरखाव से जुड़ी जरूरतों पर भी खरा उतरना होता है। स्वावलंबन के जरिए इन चुनौतियों पर चर्चा और परीक्षण के आधार पर तकनीक में सुधार करने पर जोर दिया जा रहा है। (Swavlamban 2026)

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    रक्षा समाचार न्यूज डेस्क भारत की अग्रणी हिंदी रक्षा समाचार टीम है, जो Indian Army, Navy, Air Force, DRDO, रक्षा उपकरण, युद्ध रणनीति और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी विश्वसनीय और विश्लेषणात्मक खबरें पेश करती है। हम लाते हैं सटीक, सरल और अपडेटेड Defence News in Hindi। हमारा उद्देश्य है – "हर खबर, देश की रक्षा से जुड़ी।"

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