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नई दिल्ली डिक्लेरेशन 2026 में ब्रिक्स देशों ने की पहलगाम आतंकी हमले की निंदा, संघर्ष रोकने और संवाद बढ़ाने पर दिया जोर

दस्तावेज को अंतिम रूप देने के लिए बातचीत शनिवार तड़के करीब 4 बजे तक चली। कई संवेदनशील मुद्दों पर सदस्य देशों के अलग-अलग विचार थे...

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📍नई दिल्ली | 12 Sep, 2026, 5:13 PM

BRICS New Delhi Declaration 2026: भारत की राजधानी नई दिल्ली में आयोजित 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान सदस्य देशों ने सर्वसम्मति से नई दिल्ली डिक्लेरेशन 2026 को पारित कर दिया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उस उपलब्धि की घोषणा करते हुए कहा, “किसी भी सदस्य देश ने कोई आपत्ति नहीं जताई है। नई दिल्ली डिक्लेरेशन 2026 सर्वसम्मति से अपनाया जाता है।” खास बात यह रही है कि चीन की मौजूदगी में ही नई दिल्ली घोषणापत्र में पहलगाम आतंकी हमले की निंदा की गई है।

यह घोषणा ऐसे समय में हुई है जब दुनिया के कई हिस्सों में संघर्ष, भू-राजनीतिक तनाव और व्यापारिक विवाद बढ़ रहे हैं। डिक्लेरेशन में देशों के बीच विवादों के शांतिपूर्ण समाधान, वैश्विक संस्थाओं में सुधार और ग्लोबल साउथ की भूमिका मजबूत करने पर विशेष जोर दिया गया है।

BRICS New Delhi Declaration 2026: देर रात तक चली बातचीत के बाद बनी सहमति

ब्रिक्स देशों के बीच संयुक्त बयान पर सहमति बनाना आसान नहीं था। सूत्रों के अनुसार दस्तावेज को अंतिम रूप देने के लिए बातचीत शनिवार तड़के करीब 4 बजे तक चली। कई संवेदनशील मुद्दों पर सदस्य देशों के अलग-अलग विचार थे।

भारत ने सभी देशों के साथ लगातार चर्चा कर साझा सहमति बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। यह प्रक्रिया इसलिए भी चुनौतीपूर्ण रही क्योंकि ब्रिक्स में अब ईरान, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात जैसे देश भी शामिल हैं, जिनके बीच कई क्षेत्रीय मुद्दों पर अलग-अलग दृष्टिकोण हैं।

BRICS New Delhi Declaration 2026
Marking two decades of BRICS, India releases two Commemorative Postage Stamps during the 18th BRICS Summit in New Delhi.

संघर्ष रोकने और कूटनीति पर जोर

नई दिल्ली डिक्लेरेशन में अंतरराष्ट्रीय विवादों को बातचीत, परामर्श और कूटनीति के जरिए हल करने की प्रतिबद्धता दोहराई गई है। दस्तावेज में संघर्षों को रोकने और उनके मूल कारणों को संबोधित करने की आवश्यकता पर बल दिया गया है।

पश्चिम एशिया की स्थिति को लेकर भी डिक्लेरेशन में चिंता जताई गई। इसमें एकतरफा सैन्य कार्रवाइयों और युद्धों पर चिंता व्यक्त की गई, हालांकि किसी विशेष देश का नाम नहीं लिया गया। यह भाषा सभी सदस्य देशों की सहमति से तैयार की गई। (BRICS New Delhi Declaration 2026)

पहलगाम हमले की सामुहिक निंदा

घोषणापत्र में आतंकवाद को लेकर कहा गया है, हम प्रकार के आतंकवाद की कड़ी निंदा करते हैं। आतंकवाद एक अपराध है और इसे किसी भी कारण से सही नहीं ठहराया जा सकता। यह कहीं भी, कभी भी और किसी के द्वारा किया जाए, गलत है।

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हम 22 अप्रैल 2025 को जम्मू-कश्मीर में हुए आतंकवादी हमले की कड़े शब्दों में निंदा करते हैं। इस हमले में 26 लोगों की मौत हुई थी और कई अन्य घायल हुए थे।

हम आतंकवाद के हर रूप और उसके सभी तरीकों के खिलाफ लड़ाई जारी रखने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराते हैं। इसमें सीमा पार आतंकियों की आवाजाही, आतंकवाद के लिए धन जुटाना और आतंकियों को सुरक्षित ठिकाने उपलब्ध कराना भी शामिल है।

हम यह दोहराते हैं कि आतंकवाद को किसी धर्म, राष्ट्रीयता, सभ्यता या जातीय समूह से नहीं जोड़ा जाना चाहिए। आतंकवादी गतिविधियों में शामिल सभी लोगों और उनका समर्थन करने वालों को जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए और संबंधित राष्ट्रीय तथा अंतरराष्ट्रीय कानूनों के अनुसार न्याय के कटघरे में लाया जाना चाहिए।

हम सभी देशों से आतंकवाद के प्रति शून्य सहनशीलता (ज़ीरो टॉलरेंस) की नीति अपनाने और आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई में दोहरे मापदंडों को खत्म करने की अपील करते हैं।

हम इस बात पर जोर देते हैं कि आतंकवाद से लड़ने की प्राथमिक जिम्मेदारी देशों की है। साथ ही आतंकवाद को रोकने और उससे निपटने के लिए किए जाने वाले सभी वैश्विक प्रयास संयुक्त राष्ट्र चार्टर, अंतरराष्ट्रीय कानून, मानवाधिकार कानून, शरणार्थी कानून और मानवीय कानून के अनुरूप होने चाहिए।

हम ब्रिक्स काउंटर-टेररिज्म वर्किंग ग्रुप (सीटीडब्ल्यूजी), उसकी पांच उप-समितियों, ब्रिक्स आतंकवाद-रोधी रणनीति, ब्रिक्स आतंकवाद-रोधी कार्ययोजना और सीटीडब्ल्यूजी पोजीशन पेपर के कार्यों का स्वागत करते हैं।

हम आतंकवाद के खिलाफ सहयोग को और मजबूत बनाने की उम्मीद करते हैं। हम संयुक्त राष्ट्र के ढांचे के तहत अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद पर व्यापक सम्मेलन (कॉम्प्रिहेंसिव कन्वेंशन ऑन इंटरनेशनल टेररिज्म) को जल्द अंतिम रूप देने और अपनाने की अपील करते हैं।

साथ ही, हम संयुक्त राष्ट्र द्वारा घोषित आतंकवादियों और आतंकवादी संगठनों के खिलाफ समन्वित और प्रभावी कार्रवाई करने का आह्वान करते हैं।

व्यापार पर बढ़ती बाधाओं को लेकर चिंता

संयुक्त घोषणा में वैश्विक व्यापार पर असर डालने वाले एकतरफा टैरिफ और गैर-टैरिफ उपायों पर गंभीर चिंता व्यक्त की गई। सदस्य देशों ने कहा कि ऐसे कदम विश्व व्यापार संगठन यानी डब्ल्यूटीओ के नियमों के अनुरूप नहीं हैं और वैश्विक व्यापार व्यवस्था को प्रभावित करते हैं।

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ब्रिक्स देशों ने निष्पक्ष और संतुलित व्यापारिक माहौल बनाए रखने की आवश्यकता पर भी जोर दिया। (BRICS New Delhi Declaration 2026)

पीएम मोदी ने रखा ग्लोबल गवर्नेंस सुधार का प्रस्ताव

शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वैश्विक शासन व्यवस्था में सुधार के लिए 10 प्रस्ताव तैयार करने का सुझाव दिया। उन्होंने कहा कि इन प्रस्तावों को अगले ब्रिक्स सम्मेलन तक एक ब्रिक्स रिफॉर्म रोडमैप के रूप में विकसित किया जा सकता है।

प्रधानमंत्री ने कहा, “ग्लोबल साउथ आज वैश्विक संकटों का सबसे ज्यादा सामना कर रहा है, लेकिन फैसला लेने की प्रक्रिया में उसकी भागीदारी सीमित है।”

उन्होंने कहा कि वर्तमान व्यवस्था में सभी देशों की आवाज और भागीदारी सुनिश्चित की जानी चाहिए।

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद सुधार पर जोर

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार को और अधिक समय तक टाला नहीं जा सकता। उन्होंने स्पष्ट समयसीमा और ठोस परिणामों के साथ टेक्स्ट आधारित वार्ता शुरू करने की आवश्यकता बताई।

उन्होंने यह भी कहा कि वैश्विक वित्तीय संस्थानों जैसे अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष और विश्व बैंक में नेतृत्व और मतदान शक्ति वर्तमान आर्थिक वास्तविकताओं के अनुसार होनी चाहिए। (BRICS New Delhi Declaration 2026)

सीफेयरर्स के लिए नया प्रस्ताव

प्रधानमंत्री मोदी ने वैश्विक समुद्री व्यापार में नाविकों की भूमिका को महत्वपूर्ण बताते हुए सीफेयरर्स इमरजेंसी सपोर्ट नेटवर्क बनाने का सुझाव दिया।

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इस नेटवर्क के माध्यम से विभिन्न देशों की समुद्री एजेंसियों और मिशनों को जोड़ा जा सकता है। संकट की स्थिति में मेडिकल सहायता, परिवारों तक सूचना पहुंचाने और निकासी कार्यों में सहयोग मिल सकेगा। (BRICS New Delhi Declaration 2026)

स्थानीय मुद्रा और डिजिटल सहयोग पर फोकस

डिक्लेरेशन में आर्थिक सहयोग को मजबूत बनाने पर भी जोर दिया गया। इसमें स्थानीय मुद्राओं में व्यापार और भुगतान प्रणाली को बढ़ावा देने, सप्लाई चेन सहयोग बढ़ाने और ब्रिक्स इकोनॉमिक पार्टनरशिप स्ट्रेटेजी 2030 को लागू करने का समर्थन किया गया।

सदस्य देशों ने ऊर्जा सुरक्षा, कृषि, हेल्थकेयर, डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, फिनटेक, स्टार्टअप और एमएसएमई सेक्टर में सहयोग बढ़ाने की आवश्यकता भी रेखांकित की। (BRICS New Delhi Declaration 2026)

बहुपक्षवाद और समुद्री सुरक्षा पर जोर

नई दिल्ली डिक्लेरेशन में बहुपक्षवाद, राष्ट्रीय संप्रभुता, संवाद और कूटनीति के सिद्धांतों को दोहराया गया है। आतंकवाद के खिलाफ सहयोग बढ़ाने और वैश्विक समुद्री मार्गों की सुरक्षा सुनिश्चित करने पर भी विशेष ध्यान दिया गया।

दस्तावेज में अंतरराष्ट्रीय शिपिंग रूट्स और समुद्री कर्मचारियों की सुरक्षा को वैश्विक आर्थिक स्थिरता के लिए महत्वपूर्ण बताया गया है। (BRICS New Delhi Declaration 2026)

11 देशों का समूह बन चुका है ब्रिक्स

ब्रिक्स अब दुनिया की प्रमुख उभरती अर्थव्यवस्थाओं का बड़ा मंच बन चुका है। वर्तमान में समूह में ब्राजील, चीन, मिस्र, इथियोपिया, भारत, इंडोनेशिया, ईरान, रूस, सऊदी अरब, दक्षिण अफ्रीका और संयुक्त अरब अमीरात शामिल हैं।

भारत की अध्यक्षता में आयोजित 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की थीम “बिल्डिंग फॉर रेजिलिएंस, इनोवेशन, कोऑपरेशन एंड सस्टेनेबिलिटी” रखी गई है। सम्मेलन में विकास, नवाचार, टिकाऊ विकास और वैश्विक सहयोग प्रमुख विषय रहे। (BRICS New Delhi Declaration 2026)

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