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BRICS में पीएम मोदी का बड़ा संदेश; अब सिर्फ चर्चा नहीं, दुनिया को दिखाने होंगे नतीजे, सीफेयरर्स की सुरक्षा पर दिया जोर

प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत की अध्यक्षता का आधार "पीपल-सेंट्रिक" और "ह्यूमैनिटी-फर्स्ट" दृष्टिकोण रहा है। उन्होंने बताया कि रेजिलिएंस, इनोवेशन, कोऑपरेशन और सस्टेनेबिलिटी को प्राथमिकता दी गई...

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📍नई दिल्ली | 12 Sep, 2026, 4:13 PM

BRICS Summit 2026: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को नई दिल्ली में आयोजित ब्रिक्स शिखर सम्मेलन 2026 का औपचारिक उद्घाटन किया। भारत की अध्यक्षता में हो रहे इस सम्मेलन में पीएम मोदी ने ब्रिक्स देशों से अगले 20 साल के लिए नई और महत्वाकांक्षी कार्ययोजना तैयार करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि ब्रिक्स अब एक ऐसे दौर में पहुंच चुका है, जहां केवल विचार-विमर्श नहीं बल्कि वैश्विक स्तर पर ठोस परिणाम दिखाने की जरूरत है।

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, “ब्रिक्स के 20 साल पूरे हो रहे हैं। मानव जीवन में 20 साल की आयु परिपक्वता और जिम्मेदारी के नए चरण की शुरुआत मानी जाती है। आज ब्रिक्स भी ऐसे ही ‘कमिंग ऑफ एज’ के दौर में पहुंच गया है।”

BRICS Summit 2026: भारत की अध्यक्षता में लोगों को जोड़ने पर रहा जोर

प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत की अध्यक्षता का आधार “पीपल-सेंट्रिक” और “ह्यूमैनिटी-फर्स्ट” दृष्टिकोण रहा है। उन्होंने बताया कि रेजिलिएंस, इनोवेशन, कोऑपरेशन और सस्टेनेबिलिटी को प्राथमिकता दी गई।

पीएम मोदी ने कहा, “ब्रिक्स को आम लोगों से जोड़ने पर विशेष जोर दिया गया। इसी सोच के साथ 350 से अधिक बैठकों का आयोजन किया गया। लगभग 30 भारतीय शहरों में सदस्य देशों के प्रतिनिधिमंडलों का स्वागत करने का अवसर मिला।”

उन्होंने सभी सदस्य देशों का धन्यवाद करते हुए कहा कि भारत की अध्यक्षता को सफल बनाने में सभी साझेदार देशों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। (BRICS Summit 2026)

सहमति के आधार पर आगे बढ़ता है ब्रिक्स

अपने संबोधन में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि पिछले दो दशकों में ब्रिक्स ने वैश्विक मंच पर अपनी अलग पहचान बनाई है। उन्होंने कहा कि यह समूह एक-दूसरे के विचारों का सम्मान करता है और सहमति के आधार पर आगे बढ़ता है।

पीएम मोदी ने कहा, “हमारा दृष्टिकोण किसी के विरोध का नहीं है, बल्कि सभी को साथ लेकर चलने का है। अब समय आ गया है कि ब्रिक्स के भीतर बनी एकता और सहमति को वैश्विक मंच पर ठोस परिणामों में बदला जाए।”

अगले 20 साल के लिए नई कार्ययोजना का प्रस्ताव

प्रधानमंत्री ने ब्रिक्स देशों के सामने अगले 20 साल के लिए एक नई और महत्वाकांक्षी एजेंडा तैयार करने का प्रस्ताव रखा। उन्होंने कहा कि संगठन की आंतरिक कार्यप्रणाली को और मजबूत बनाने की जरूरत है।

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उन्होंने सुझाव दिया कि ब्रिक्स में एक “कॉन्टिन्युटी एंड इम्प्लीमेंटेशन मैकेनिज्म” बनाया जाए, ताकि अध्यक्षता बदलने के बावजूद परियोजनाओं और निर्णयों की गति प्रभावित न हो।

पीएम मोदी ने कहा, “ब्रिक्स की अध्यक्षता हर साल बदलती है, लेकिन इससे संस्थागत गति प्रभावित नहीं होनी चाहिए। ट्रोइका व्यवस्था के माध्यम से सभी पहलों और निर्णयों की निगरानी की जा सकती है।”

उन्होंने एक सुरक्षित डिजिटल रिपॉजिटरी बनाने का भी सुझाव दिया, जहां प्रत्येक निर्णय, उसकी समयसीमा और क्रियान्वयन की स्थिति दर्ज की जा सके। (BRICS Summit 2026)

वैश्विक शासन व्यवस्था में सुधार की मांग

प्रधानमंत्री मोदी ने वैश्विक शासन प्रणाली में सुधार की आवश्यकता पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि वर्तमान वैश्विक ढांचा एक पिरामिड की तरह है, जहां निर्णय लेने की शक्ति शीर्ष पर केंद्रित है, जबकि अधिकांश देश उन फैसलों से प्रभावित होते हैं लेकिन निर्णय प्रक्रिया में उनकी भूमिका सीमित रहती है।

उन्होंने कहा, “ब्रिक्स को मजबूत बनाने के साथ-साथ हमें वैश्विक सुधार का रास्ता भी तय करना होगा। दुनिया की मौजूदा शासन व्यवस्था में व्यापक बदलाव की जरूरत है।” (BRICS Summit 2026)

पीएम मोदी ने सीफेयरर्स की सुरक्षा पर दिया जोर

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने भाषण के दौरान समुद्री नाविकों यानी सीफेयरर्स की सुरक्षा को वैश्विक व्यापार के लिए बेहद महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि दुनिया का व्यापार तभी सुचारू रूप से चल सकता है, जब समुद्री मार्ग सुरक्षित रहें, सप्लाई चेन बाधित न हो और समुद्र में काम करने वाले नाविक सुरक्षित रहें।

प्रधानमंत्री मोदी की यह पहल ऐसे समय आई है जब पश्चिम एशिया में जारी तनाव और कुछ समुद्री क्षेत्रों में जहाजों पर हमलों ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय की चिंता बढ़ा दी है।

बता दें कि हाल के सालों में पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव, लाल सागर और अन्य महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों पर हमलों की घटनाओं ने वैश्विक व्यापार को प्रभावित किया है। ऐसे माहौल में भारत ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नाविकों की सुरक्षा को लेकर नई पहल का प्रस्ताव रखा है।

उन्होंने कहा, “वैश्विक व्यापार तभी आगे बढ़ सकता है जब समुद्री मार्ग सुरक्षित हों, सप्लाई रूट खुले रहें और सीफेयरर्स सुरक्षित हों। इसी कारण भारत नेविगेशन की स्वतंत्रता और सीफेयरर्स की सुरक्षा का मजबूत समर्थक है।”

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प्रधानमंत्री ने स्पष्ट किया कि समुद्री सुरक्षा केवल किसी एक देश का मुद्दा नहीं है, बल्कि यह पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था से जुड़ा विषय है। दुनिया के अधिकांश व्यापारिक सामान समुद्री रास्तों से एक देश से दूसरे देश तक पहुंचते हैं। ऐसे में समुद्री मार्गों में किसी भी प्रकार की बाधा का असर वैश्विक बाजारों पर पड़ता है।

उन्होंने कहा कि समुद्री नाविक वैश्विक व्यापार में बहुत बड़ा योगदान देते हैं, लेकिन संकट की स्थिति में उन्हें अक्सर पर्याप्त सहायता नहीं मिल पाती।

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, “सीफेयरर्स वैश्विक व्यापार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, लेकिन कठिन परिस्थितियों में उन्हें अक्सर सहयोग की कमी का सामना करना पड़ता है। मैं ‘सीफेयरर्स इमरजेंसी सपोर्ट नेटवर्क’ स्थापित करने का प्रस्ताव रखता हूं।”

क्या होगा सीफेयरर्स इमरजेंसी सपोर्ट नेटवर्क?

प्रधानमंत्री मोदी के प्रस्तावित नेटवर्क का उद्देश्य समुद्र में संकट की स्थिति में नाविकों को तेजी से मदद उपलब्ध कराना है। इस नेटवर्क के माध्यम से विभिन्न देशों की समुद्री प्राधिकरण एजेंसियों और उनके राजनयिक मिशनों को आपस में जोड़ा जाएगा। इससे आपातकालीन परिस्थितियों में बेहतर समन्वय स्थापित किया जा सकेगा।

प्रस्तावित नेटवर्क के तहत कई महत्वपूर्ण सुविधाएं उपलब्ध कराई जा सकती हैं।

यदि किसी जहाज से संकट का संकेत यानी डिस्ट्रेस अलर्ट प्राप्त होता है, तो संबंधित देशों की एजेंसियां तुरंत कार्रवाई कर सकेंगी। किसी नाविक के घायल होने या गंभीर रूप से बीमार पड़ने की स्थिति में मेडिकल सहायता पहुंचाने में सहयोग मिलेगा।

अगर किसी समुद्री दुर्घटना या सुरक्षा संकट की घटना होती है, तो नाविकों के परिवारों को समय पर सूचना दी जा सकेगी। जरूरत पड़ने पर प्रभावित नाविकों और जहाज के कर्मचारियों की सुरक्षित निकासी यानी इवैक्यूएशन में भी यह नेटवर्क मदद करेगा।

वैश्विक व्यापार में सीफेयरर्स की भूमिका

दुनिया भर में लाखों समुद्री नाविक अंतरराष्ट्रीय व्यापार को चलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। तेल, गैस, खाद्यान्न, मशीनरी, कंटेनर कार्गो और अन्य आवश्यक वस्तुओं का बड़ा हिस्सा समुद्री मार्गों से ही एक देश से दूसरे देश तक पहुंचता है।

जहाजों पर काम करने वाले ये नाविक कई बार महीनों तक अपने परिवारों से दूर रहते हैं और कठिन परिस्थितियों में काम करते हैं। समुद्री डकैती, युद्ध, क्षेत्रीय संघर्ष, खराब मौसम और तकनीकी दुर्घटनाएं उनके लिए बड़े जोखिम पैदा कर सकती हैं।

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भारत लंबे समय से करता रहा है समुद्री सुरक्षा का समर्थन

भारत लगातार मुक्त और सुरक्षित समुद्री मार्गों की वकालत करता रहा है। भारतीय नीति का प्रमुख आधार यह रहा है कि अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानूनों का सम्मान किया जाए और सभी देशों को सुरक्षित नेविगेशन की सुविधा मिले।

प्रधानमंत्री मोदी के हालिया वक्तव्यों ने एक बार फिर यह स्पष्ट किया है कि भारत समुद्री व्यापार, सप्लाई चेन सुरक्षा और सीफेयरर्स की सुरक्षा को वैश्विक स्थिरता के लिए महत्वपूर्ण मानता है।

संयुक्त बयान पर बनी सहमति

शिखर सम्मेलन के दौरान एक बड़ी कूटनीतिक उपलब्धि भी सामने आई। ब्रिक्स देशों ने लंबी बातचीत के बाद संयुक्त बयान पर सहमति बना ली।

जानकारी के अनुसार सदस्य देशों के बीच विभिन्न संवेदनशील और क्षेत्रीय मुद्दों पर मतभेद मौजूद थे। इसके बावजूद बातचीत शनिवार तड़के लगभग 4 बजे तक जारी रही और आखिरकार सभी देशों ने संयुक्त बयान पर सहमति दे दी।

यह सहमति इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि ब्रिक्स मंच पर ईरान, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात जैसे देश शामिल हैं, जिनके बीच कई क्षेत्रीय और भू-राजनीतिक मुद्दों पर अलग-अलग दृष्टिकोण रहे हैं। (BRICS Summit 2026)

भारत की कूटनीतिक भूमिका रही अहम

पश्चिम एशिया में जारी तनाव और संघर्षों के बीच सभी सदस्य देशों को एक साझा बयान पर सहमत करना आसान नहीं माना जा रहा था। सूत्रों के अनुसार भारत ने लगातार परामर्श और संवाद के जरिए विभिन्न देशों के बीच मौजूद मतभेदों को कम करने का प्रयास किया।

इस प्रक्रिया के बाद सभी सदस्य देशों ने साझा दस्तावेज पर सहमति बनाई, जिससे ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान संयुक्त बयान जारी करने का रास्ता साफ हुआ।

नई दिल्ली में आयोजित ब्रिक्स शिखर सम्मेलन 2026 में प्रधानमंत्री मोदी का संदेश स्पष्ट रहा कि संगठन को अगले चरण में अधिक प्रभावी, परिणाम-आधारित और वैश्विक सुधारों के लिए सक्रिय भूमिका निभानी होगी। (BRICS Summit 2026)

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