📍नई दिल्ली/कारवार | 5 Sep, 2026, 1:21 PM
Karwar Naval Base Expansion: भारतीय नौसेना अपने सबसे बड़े और रणनीतिक प्रोजेक्ट सीबर्ड फेज-IIA को आगे बढ़ाने की तैयारी कर रही है। नौसेना ने कर्नाटक के कारवार स्थित आईएनएस कदंबा में नई ऑर्डिनेंस स्टोरेज फैसिलिटी और रणनीतिक इंफ्रास्ट्रक्चर के विस्तार के लिए डिजाइन कंसल्टेंट नियुक्त करने हेतु एक्सप्रेशन ऑफ इंटरेस्ट (ईओआई) जारी की है।
कारवार नौसेना बेस को भारतीय नौसेना की भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखकर विकसित किया जा रहा है। यह बेस पश्चिमी समुद्री क्षेत्र में भारत की सैन्य मौजूदगी को मजबूत करने वाला सबसे महत्वपूर्ण केंद्र माना जाता है।
Karwar Naval Base Expansion: प्रोजेक्ट सीबर्ड फेज-IIA में क्या होगा?
ईओआई के अनुसार, प्रोजेक्ट के तहत मौजूदा नेवल आर्मामेंट डिपो (एनएडी), मिसाइल टेक्निकल पोजिशन (एमटीपी), कॉमन फैसिलिटी एरिया (सीएफए) और नेवल आर्मामेंट इंस्पेक्टोरेट (एनएआई) का विस्तार किया जाएगा।
इस प्रोजेक्ट के डिजाइन का लगभग 85 प्रतिशत काम पहले ही पूरा हो चुका है। आईआईटी मद्रास पहले ही तकनीकी जांच कर चुकी है और उन्हें मंजूरी भी मिल चुकी है। वहीं सेंटर फॉर फायर, एक्सप्लोसिव एंड एनवायरनमेंट सेफ्टी (सीएफईईएस) ने भी प्रारंभिक मंजूरी प्रदान की है।
ऑर्डिनेंस स्टोरेज के लिए बनेंगे हाई-सिक्योरिटी बंकर
कारवार में बनने वाली नई सुविधाओं का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा आधुनिक ऑर्डिनेंस स्टोरेज परिसर है। यहां अलग-अलग कैटेगरी के विस्फोटकों और मिसाइलों के लिए खास स्ट्रक्चर तैयार किए जाएंगे।
योजना के अनुसार 400 टन क्षमता वाले बॉक्स टाइप इग्लू, 600 टन क्षमता वाले डबल बंकर मैगजीन और 120 टन क्षमता वाले एबव-ग्राउंड मैगजीन बनाए जाएंगे।
इसके अलावा टॉरपीडो, मिसाइल, माइन और अन्य नौसैनिक हथियारों के रखरखाव और परीक्षण के लिए विशेष वर्कशॉप भी बनाई जाएंगी। इन सुविधाओं का उद्देश्य युद्धपोतों और पनडुब्बियों को तेजी से हथियार उपलब्ध कराना है। (Karwar Naval Base Expansion)
कारवार को क्यों चुना गया था?
कारवार नौसेना बेस का आइडिया 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध के बाद सामने आया था। उस समय मुंबई बंदरगाह पर व्यापारिक जहाजों, मछली पकड़ने वाली नौकाओं और नौसेना के युद्धपोतों का भारी दबाव था।
इसके बाद भारतीय नौसेना ने पश्चिमी तट पर एक ऐसे खास सैन्य बंदरगाह की जरूरत महसूस की, जहां केवल नौसैनिक गतिविधियां संचालित की जा सकें। इसी उद्देश्य से कर्नाटक के कारवार को चुना गया।
गोवा से लगभग 120 किलोमीटर दक्षिण में स्थित यह क्षेत्र पश्चिमी घाट की पहाड़ियों और अरब सागर के बीच मौजूद है। यहां समुद्र तट के पास ही पर्याप्त गहराई उपलब्ध है, जिससे बड़े विमानवाहक पोत और पनडुब्बियां आसानी से ऑपरेट कर सकती हैं। (Karwar Naval Base Expansion)
आईएनएस कदंबा का इतिहास
कारवार नौसेना बेस की आधारशिला वर्ष 1986 में तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने रखी थी। बाद में इस प्रोजेक्ट को प्रोजेक्ट सीबर्ड नाम दिया गया।
31 मई 2005 को इस बेस को आधिकारिक रूप से आईएनएस कदंबा के रूप में कमीशन किया गया। प्रोजेक्ट का पहला चरण 2011 में पूरा हुआ, जिसमें ब्रेकवाटर, पियर, शिप रिपेयर सुविधाएं, शिपलिफ्ट सिस्टम और आवासीय परिसर शामिल थे।
आज यह भारतीय नौसेना के पश्चिमी कमान के सबसे महत्वपूर्ण ठिकानों में गिना जाता है। (Karwar Naval Base Expansion)
50 युद्धपोतों तक की क्षमता वाला बेस
प्रोजेक्ट सीबर्ड का दूसरा फेज कारवार की क्षमता को कई गुना बढ़ा देगा। फेज-IIA पूरा होने के बाद यहां 32 बड़े युद्धपोत और पनडुब्बियां तथा 23 यार्ड क्राफ्ट एक साथ तैनात किए जा सकेंगे।
इसके बाद फेज-IIB के पूरा होने पर यह संख्या और बढ़ जाएगी। तब कारवार में लगभग 50 युद्धपोत और पनडुब्बियां तथा 40 सहायक जहाजों को ठहराने की क्षमता होगी।
वर्तमान में भारतीय नौसेना के दोनों विमानवाहक पोत आईएनएस विक्रमादित्य और आईएनएस विक्रांत इसी बेस से जुड़े हुए हैं। (Karwar Naval Base Expansion)
बन रहा है विशाल कवरड ड्राई बर्थ
फेज-IIA के तहत सबसे बड़े स्ट्रक्चर में से एक 75 मीटर ऊंचा कवरड ड्राई बर्थ है। इसकी ऊंचाई कुतुब मीनार से भी अधिक है।
लगभग 33,000 वर्ग मीटर क्षेत्र में फैली इस फैसिलिटी में एक साथ चार बड़े युद्धपोतों की मरम्मत और रखरखाव किया जा सकेगा। इसके अलावा चार कवरड ड्राई बर्थ, पूर्ण विकसित नेवल डॉकयार्ड और आधुनिक लॉजिस्टिक सुविधाएं भी विकसित की जा रही हैं। (Karwar Naval Base Expansion)
नया नेवल एयर स्टेशन भी तैयार हो रहा
प्रोजेक्ट के तहत कारवार में 2,700 मीटर रनवे वाला ग्रीनफील्ड ड्यूल-यूज नेवल एयर स्टेशन भी डेवलप किया जा रहा है। यह एयर स्टेशन समुद्री निगरानी विमान, हेलीकॉप्टर, ड्रोन और अन्य सैन्य विमानों के ऑपरेशन में मदद करेगा। साथ ही इसमें सिविल एनक्लेव भी होगा, जिससे नागरिक उड़ानों का संचालन संभव होगा।
यह सुविधा उत्तर कर्नाटक और दक्षिण गोवा क्षेत्र की कनेक्टिविटी को भी मजबूत करेगी। (Karwar Naval Base Expansion)
हजारों लोगों के लिए बन रहे आवास
कारवार प्रोजेक्ट में अधिकारियों, नाविकों और रक्षा नागरिक कर्मचारियों के लिए चार बड़े टाउनशिप भी डेवलप किए जा रहे हैं। इन टाउनशिप में लगभग 10,000 आवासीय इकाइयां बनाई जा रही हैं। पूरा परिसर करीब 10,000 सैन्य और नागरिक कर्मियों तथा उनके परिवारों को समायोजित करने की क्षमता रखेगा।
हाल के वर्षों में कई आवासीय टावर, पियर और बिजली सबस्टेशन तैयार किए जा चुके हैं। अप्रैल 2025 में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने करीब 2,000 करोड़ रुपये की विभिन्न सुविधाओं का उद्घाटन भी किया था। (Karwar Naval Base Expansion)
Author
हरेंद्र चौधरी रक्षा पत्रकारिता (Defence Journalism) में सक्रिय हैं और RakshaSamachar.com से जुड़े हैं। वे लंबे समय से भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना से जुड़ी रणनीतिक खबरों, रक्षा नीतियों और राष्ट्रीय सुरक्षा से संबंधित मुद्दों को कवर कर रहे हैं। पत्रकारिता के अपने करियर में हरेंद्र ने संसद की गतिविधियों, सैन्य अभियानों, भारत-पाक और भारत-चीन सीमा विवाद, रक्षा खरीद और ‘मेक इन इंडिया’ रक्षा परियोजनाओं पर विस्तृत लेख लिखे हैं। वे रक्षा मामलों की गहरी समझ और विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण के लिए जाने जाते हैं।





