📍बिश्केक/नई दिल्ली | 1 Sep, 2026, 12:45 PM
PM Modi SCO Summit 2026: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को किर्गिजस्तान में आयोजित 26वें शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) शिखर सम्मेलन को संबोधित करते हुए आतंकवाद, क्षेत्रीय सुरक्षा, कनेक्टिविटी और लोगों के बीच सहयोग जैसे मुद्दों पर भारत का स्पष्ट रुख रखा। उन्होंने कहा कि आतंकवाद आज भी पूरी मानवता के लिए सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक है और इससे लड़ने के लिए केवल कार्रवाई की प्रतिक्रिया वाली सोच से आगे बढ़ना होगा।
प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि एससीओ के 25 सालों के सफर ने यूरेशिया क्षेत्र में संवाद और सहयोग की मजबूत परंपरा बनाई है। अब समय आ गया है कि इस सहयोग को केवल विचारों और घोषणाओं तक सीमित न रखकर ठोस परिणामों में बदला जाए।
PM Modi SCO Summit 2026: साझा लक्ष्यों को व्यावहारिक उपलब्धियों में बदलें
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि एससीओ की स्थापना के बाद पिछले 25 सालों में सदस्य देशों ने मिलकर क्षेत्रीय सहयोग को मजबूत किया है। उन्होंने कहा कि यह मंच केवल देशों के बीच बातचीत का माध्यम नहीं रहा, बल्कि लोगों के विकास और क्षेत्रीय स्थिरता में भी इसकी महत्वपूर्ण भूमिका रही है।
उन्होंने सम्मेलन में मौजूद सदस्य देशों के नेताओं का स्वागत करते हुए कहा कि अब अगले चरण में संगठन को अपने साझा लक्ष्यों को व्यावहारिक उपलब्धियों में बदलना होगा।
सुरक्षा, कनेक्टिविटी और अवसर पर जोर
प्रधानमंत्री ने याद दिलाया कि भारत पहले भी एससीओ के लिए तीन प्रमुख स्तंभों की बात करता रहा है। इनमें “एस” यानी सिक्योरिटी, “सी” यानी कनेक्टिविटी और “ओ” यानी ऑपर्च्युनिटी शामिल हैं।
उन्होंने कहा कि अब इन तीनों स्तंभों को केवल विजन के रूप में नहीं बल्कि ठोस नतीजों में बदलने की जरूरत है। भारत का मानना है कि क्षेत्र में शांति और सुरक्षा के बिना आर्थिक विकास और स्थिरता संभव नहीं है।
आतंकवाद के खिलाफ सख्त संदेश
प्रधानमंत्री मोदी ने आतंकवाद को लेकर सबसे कड़ा संदेश दिया। उन्होंने कहा कि आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई केवल आतंकियों तक सीमित नहीं हो सकती। इसके पूरे नेटवर्क को खत्म करना जरूरी है।
उन्होंने कहा कि आतंकवाद की फंडिंग, भर्ती, कट्टरपंथ फैलाने वाली गतिविधियों और आतंकियों को सुरक्षित ठिकाने देने वाले पूरे तंत्र को समाप्त करना होगा। इस गंभीर विषय पर दोहरे मानदंडों के लिए कोई जगह नहीं हो सकती।
प्रधानमंत्री ने बिना किसी देश का नाम लिए कहा कि जो देश आतंकवाद को अपनी नीति का साधन बनाते हैं या आतंकियों को समर्थन और शरण देते हैं, उन्हें स्पष्ट संदेश दिया जाना चाहिए कि आतंकवाद किसी भी देश के लिए रणनीतिक संपत्ति नहीं हो सकता।
अफगानिस्तान का भी किया उल्लेख
प्रधानमंत्री ने अपने भाषण में अफगानिस्तान का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि शांत और सुरक्षित यूरेशिया की कल्पना अफगानिस्तान में शांति और स्थिरता से जुड़ी हुई है।
उन्होंने कहा कि भारत लगातार अफगानिस्तान के लोगों के विकास और मानवीय सहायता में योगदान देता रहा है। भारत का ध्यान अफगान जनता की सहायता और विकास सहयोग पर बना हुआ है।
PM Modi at SCO Summit in Bishkek: India called for united action against terrorism, stronger regional connectivity, and deeper people-to-people ties among SCO nations.
Addressing SCO leaders, PM @narendramodi said there can be “no place for double standards on terrorism” and… pic.twitter.com/rvctcl1Q3c— Raksha Samachar | रक्षा समाचार 🇮🇳 (@RakshaSamachar) September 1, 2026
पश्चिम एशिया संकट और वैश्विक असर की चर्चा
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि आज की दुनिया पहले से कहीं अधिक आपस में जुड़ी हुई है। किसी एक क्षेत्र में पैदा हुआ संकट अब केवल उसी क्षेत्र तक सीमित नहीं रहता।
उन्होंने पश्चिम एशिया की स्थिति का उल्लेख करते हुए कहा कि क्षेत्रीय संघर्षों का असर पूरी दुनिया की ऊर्जा सुरक्षा, समुद्री व्यापार और सप्लाई चेन पर पड़ता है। इसका सबसे ज्यादा प्रभाव विकासशील देशों और वैश्विक दक्षिण के देशों पर देखने को मिलता है।
इसी वजह से भारत का मानना है कि सभी तनावों और संघर्षों का समाधान युद्ध के मैदान में नहीं बल्कि संवाद और कूटनीति के माध्यम से होना चाहिए।
ड्रग तस्करी को बताया बड़ा खतरा
प्रधानमंत्री ने मादक पदार्थों की तस्करी को केवल अपराध नहीं बल्कि युवाओं और क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बताया।
उन्होंने कहा कि एससीओ के भीतर सुरक्षा खतरों, संगठित अपराध, सूचना सुरक्षा और नारकोटिक्स से जुड़ी चुनौतियों से निपटने के लिए विभिन्न केंद्र स्थापित किए जा रहे हैं। भारत चाहता है कि इन संस्थानों को केवल औपचारिक ढांचे तक सीमित न रखकर व्यावहारिक समन्वय और समयबद्ध कार्रवाई का प्रभावी माध्यम बनाया जाए।
कनेक्टिविटी परियोजनाओं पर रखा भारत का रुख
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि मजबूत और भरोसेमंद कनेक्टिविटी साझा विकास का महत्वपूर्ण आधार है। भारत उन सभी प्रयासों का समर्थन करता है जो बाजारों को जोड़ते हैं, व्यापार को आसान बनाते हैं और विकास के नए अवसर पैदा करते हैं।
उन्होंने कहा कि कनेक्टिविटी परियोजनाओं में सभी देशों की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान होना चाहिए। यह एससीओ चार्टर की मूल भावना भी है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि आने वाले समय में कनेक्टिविटी केवल सड़कों, रेलवे लाइनों और हवाई गलियारों तक सीमित नहीं रहेगी। कस्टम प्रक्रियाओं को सरल बनाना, डिजिटल दस्तावेजों को बढ़ावा देना और लॉजिस्टिक्स नेटवर्क को अधिक प्रभावी बनाना भी उतना ही महत्वपूर्ण होगा।
लोगों के बीच संबंधों को बताया सबसे बड़ी ताकत
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि एससीओ की सबसे बड़ी पूंजी उसके सदस्य देशों के लोगों के बीच मौजूद रिश्ते हैं। उन्होंने कहा कि भारत के लिए एससीओ केवल राजनीतिक या आर्थिक मंच नहीं बल्कि विभिन्न सभ्यताओं, संस्कृतियों और विचारों का संगम भी है।
उन्होंने कहा कि संगठन के अगले चरण में पीपल-टू-पीपल संबंधों को सहयोग का केंद्र बनाया जाना चाहिए। किसी भी पहल की सफलता इस बात से मापी जानी चाहिए कि उससे युवाओं को कितने अवसर मिले, उद्यमियों के लिए कितने नए बाजार खुले और नागरिकों के जीवन में कितना सुधार आया।
युवाओं और स्टार्टअप सहयोग पर भारत का फोकस
प्रधानमंत्री ने कहा कि एससीओ का सहयोग केवल सरकारों तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि इसे लोगों द्वारा संचालित साझेदारी में बदलना होगा।
उन्होंने बताया कि भारत एससीओ के तहत स्टार्टअप फोरम, यंग ऑथर्स कॉन्क्लेव और यंग साइंटिस्ट्स फोरम जैसी पहलों का समर्थन करता रहा है। इन मंचों का उद्देश्य युवाओं, शोधकर्ताओं और उद्यमियों को एक-दूसरे से जोड़ना है।
भारत में होगा एससीओ सिविलाइजेशनल डायलॉग फोरम
प्रधानमंत्री मोदी ने जानकारी दी कि पिछले वर्ष भारत ने एससीओ सिविलाइजेशनल डायलॉग फोरम का प्रस्ताव रखा था। उन्होंने कहा कि इस मंच का पहला सत्र इसी वर्ष भारत में आयोजित किया जाएगा।
उन्होंने विश्वास जताया कि यह फोरम सदस्य देशों के बीच सांस्कृतिक संवाद और आपसी समझ को मजबूत करने का महत्वपूर्ण मंच बनेगा।
साझा अवसरों पर आगे बढ़ने की अपील
अपने संबोधन के अंत में प्रधानमंत्री मोदी ने किर्गिज लेखक चिंगिज ऐतमातोव का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि दुनिया को उन बातों पर अधिक ध्यान देना चाहिए जो लोगों को जोड़ती हैं, न कि उन बातों पर जो उन्हें अलग करती हैं।
प्रधानमंत्री ने कहा कि एससीओ की विविधता उसकी पहचान है और साझा शांति उसका उद्देश्य है। इसी भावना के साथ संगठन को साझा भूगोल से साझा अवसरों की ओर, विजन से परिणामों की ओर और सरकार आधारित सहयोग से लोगों द्वारा संचालित साझेदारी की ओर आगे बढ़ना चाहिए। उन्होंने कहा कि भारत इसी सोच और प्रतिबद्धता के साथ एससीओ परिवार की साझा यात्रा में अपना योगदान देता रहेगा। (PM Modi SCO Summit 2026)
Author
रक्षा समाचार न्यूज डेस्क भारत की अग्रणी हिंदी रक्षा समाचार टीम है, जो Indian Army, Navy, Air Force, DRDO, रक्षा उपकरण, युद्ध रणनीति और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी विश्वसनीय और विश्लेषणात्मक खबरें पेश करती है। हम लाते हैं सटीक, सरल और अपडेटेड Defence News in Hindi। हमारा उद्देश्य है – "हर खबर, देश की रक्षा से जुड़ी।"




