📍नई दिल्ली | 10 Sep, 2026, 12:10 PM
Yudh Abhyas 2026: भारत और अमेरिका की सेनाओं के बीच होने वाली सालाना जॉइंट मिलिट्री एक्सरसाइज युद्ध अभ्यास-2026 शुरू हो गई है। यह दोनों देशों के बीच होने वाले सबसे बड़े द्विपक्षीय सैन्य अभ्यास का 22वां संस्करण है। इस बार का अभ्यास कई मायनों में खास माना जा रहा है, क्योंकि पहली बार इसमें हाई-एल्टीट्यूड ऑपरेशन, डेजर्ट वॉरफेयर, अपाचे अटैक हेलीकॉप्टर, मल्टी-डोमेन लॉन्ग-रेंज फायर सिस्टम और अमेरिकी मोबाइल काउंटर-ड्रोन सिस्टम को एक ही अभ्यास में शामिल किया गया है।
यह संयुक्त अभ्यास 9 सितंबर से 28 सितंबर तक चलेगा। इसमें भारत और अमेरिका की सेनाओं के लगभग 700 सैनिक हिस्सा ले रहे हैं। दोनों देशों की तरफ से करीब 350-350 जवान तैनात किए गए हैं।
Yudh Abhyas 2026: दो अलग-अलग युद्धक्षेत्रों में होगा अभ्यास
सूत्रों के अनुसार पहली बार एक ही संस्करण में पहाड़ी और रेगिस्तानी दोनों तरह के युद्धक्षेत्रों को शामिल किया गया है। पहला औली, उत्तराखंड है, जो समुद्र तल से करीब 2,500 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। यह इलाका वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) से लगभग 95 किलोमीटर दूर माना जाता है। 2020 के भारत-चीन सैन्य तनाव के बाद यह क्षेत्र भारतीय सेना के हाई-एल्टीट्यूड ऑपरेशन के लिए महत्वपूर्ण बन गया है।
दूसरा इलाका राजस्थान में महाजन फील्ड फायरिंग रेंज है। यह भारत की सबसे बड़ी लाइव-फायर ट्रेनिंग रेंज में शामिल है और पाकिस्तान सीमा के नजदीक स्थित है। यहां मैकेनाइज्ड ऑपरेशन, आर्टिलरी फायरिंग, एयर-ग्राउंड कोऑर्डिनेशन और बड़े पैमाने पर युद्धाभ्यास किए जाते हैं।
इस साल के अभ्यास में दोनों सेनाएं हाई-एल्टीट्यूड ऑपरेशन, रेगिस्तानी युद्ध, काउंटर-ड्रोन तकनीक, डिजिटल फायर कंट्रोल और संयुक्त कमांड सिस्टम जैसे आधुनिक सैन्य क्षेत्रों में प्रशिक्षण ले रही हैं। (Yudh Abhyas 2026)
थर्ड मल्टी-डोमेन टास्क फोर्स ले रही हिस्सा
अमेरिकी सेना की ओर से इस अभ्यास में 11वीं एयरबोर्न डिवीजन के सैनिक शामिल हैं। यह यूनिट अलास्का के फोर्ट वेनराइट में तैनात है और आर्कटिक परिस्थितियों में वॉर ऑपरेशन के लिए प्रशिक्षित मानी जाती है।
आर्कटिक क्षेत्र में ट्रेनिंग प्राप्त सैनिकों का भारत के ऊंचाई वाले इलाकों में प्रशिक्षण दोनों सेनाओं को कठिन परिस्थितियों में संयुक्त अभियान चलाने का अनुभव देगा।
अमेरिकी सेना की थर्ड मल्टी-डोमेन टास्क फोर्स (3एमडीटीएफ) भी इस अभ्यास का हिस्सा है। यह यूनिट केवल पारंपरिक सैन्य अभियान नहीं बल्कि साइबर, स्पेस, इन्फॉर्मेशन और लॉन्ग-रेंज प्रिसिजन फायर जैसी आधुनिक युद्ध क्षमताओं पर काम करती है। (Yudh Abhyas 2026)
पहली बार भारत में तैनात हुआ अमेरिकी एमएलआईडीएस सिस्टम
युद्ध अभ्यास-2026 में सबसे अहम अमेरिकी एमएलआईडीएस (मोबाइल लो, स्लो, स्मॉल अनमैन्ड एयरक्राफ्ट इंटीग्रेटेड डिफीट सिस्टम) है, जिसकी भारत में पहली बार किसी एक्सरसाइज में ऑपरेशनल तैनाती की गई है।
यह एक मोबाइल काउंटर-ड्रोन सिस्टम है, जिसे छोटे, कम ऊंचाई और कम गति से उड़ने वाले ड्रोन को पहचानने और नष्ट करने के लिए विकसित किया गया है।
इस सिस्टम में रडार, इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल सेंसर, इन्फ्रारेड सेंसर, इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर उपकरण और वेपन सिस्टम शामिल होते हैं। आधुनिक युद्ध में ड्रोन खतरों को देखते हुए यह सिस्टम बेहद अहम है।
अमेरिकी सेना ने इस सिस्टम का इस्तेमाल पहले रोमानिया और मध्य पूर्व के कुछ क्षेत्रों में भी किया है।
अपाचे हेलीकॉप्टर और लॉन्ग-रेंज फायर सिस्टम पर फोकस
इस साल के युद्ध अभ्यास में एएच-64 अपाचे अटैक हेलीकॉप्टर भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। इनका इस्तेमाल क्लोज एयर सपोर्ट और प्रिसिजन स्ट्राइक मिशनों में किया जाएगा।
साथ ही भारतीय और अमेरिकी सेना के रॉकेट तथा आर्टिलरी सिस्टम को डिजिटल नेटवर्क के जरिए जोड़ने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
अमेरिकी 3एमडीटीएफ लॉन्ग-रेंज प्रिसिजन फायर क्षमताओं के लिए जानी जाती है। अभ्यास के दौरान टारगेट संबंधी सूचनाओं को साझा करने और संयुक्त फायर मिशन चलाने की प्रक्रिया पर काम किया जाएगा।
सूत्रों के मुताबिक यह आधुनिक युद्ध की उस अवधारणा का हिस्सा है जिसमें कई तरह के हथियार एक साझा डिजिटल नेटवर्क पर काम करते हैं। (Yudh Abhyas 2026)
कमांड पोस्ट और लाइव फायरिंग होगी मुख्य आकर्षण
युद्ध अभ्यास-2026 में कमांड पोस्ट एक्सरसाइज और फील्ड ट्रेनिंग एक्सरसाइज दोनों शामिल हैं। कमांड पोस्ट फेज में दोनों सेनाओं के अधिकारी संयुक्त योजना, निर्णय प्रक्रिया और युद्ध संचालन के विभिन्न पहलुओं पर काम करेंगे।
इसके बाद फील्ड ट्रेनिंग चरण में सैनिक वास्तविक परिस्थितियों में संयुक्त अभियान चलाने का अभ्यास करेंगे।
अभ्यास का समापन कंबाइंड लाइव-फायर डेमोंस्ट्रेशन के साथ होगा। इसमें भारतीय और अमेरिकी रॉकेट, आर्टिलरी और दूसरे वेपन सिस्टम्स मिल कर टारगेट पर अटैक करेंगे। (Yudh Abhyas 2026)
अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने कही ये बात
भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने कहा, “युद्ध अभ्यास दिखाता है कि भारत और अमेरिका की रक्षा साझेदारी कितनी मजबूत हो चुकी है। हमारे सैनिक एक-दूसरे से सीख रहे हैं, साथ प्रशिक्षण ले रहे हैं और ऐसा भरोसा विकसित कर रहे हैं जो दोनों देशों को अधिक सुरक्षित बनाता है।”
वहीं, अमेरिकी सेना प्रशांत क्षेत्र के डिप्टी कमांडिंग जनरल लेफ्टिनेंट जनरल जोएल ‘जेबी’ वोवेल ने कहा, “युद्ध अभ्यास भरोसा बनाने, विशेषज्ञता साझा करने और मुक्त एवं खुले इंडो-पैसिफिक के प्रति हमारी प्रतिबद्धता को दर्शाने का मंच है। हर वर्ष भारतीय सेना के साथ हमारी साझेदारी और मजबूत होती जा रही है।” (Yudh Abhyas 2026)
2004 से जारी है युद्ध अभ्यास
युद्ध अभ्यास की शुरुआत साल 2004 में हुई थी। शुरुआती वर्षों में इसका मुख्य उद्देश्य काउंटर-इंसर्जेंसी और शांति स्थापना अभियानों में सहयोग बढ़ाना था।
समय के साथ यह अभ्यास लगातार विकसित होता गया। अब इसमें मल्टी-डोमेन ऑपरेशन, ड्रोन विरोधी क्षमताएं, लॉन्ग-रेंज फायर सिस्टम, डिजिटल कमांड नेटवर्क और आधुनिक युद्ध तकनीकों को शामिल किया जाता है।
2024 में राजस्थान के महाजन में हुए संस्करण में हिमार्स, पिनाका, एम-777 हॉवित्जर, अपाचे और अन्य हथियार प्रणालियों का प्रदर्शन हुआ था। वहीं 2025 का अभ्यास अलास्का में आयोजित किया गया था, जिसमें भारतीय सेना के जवानों ने सब-आर्कटिक परिस्थितियों में प्रशिक्षण लिया था। (Yudh Abhyas 2026)
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हरेंद्र चौधरी रक्षा पत्रकारिता (Defence Journalism) में सक्रिय हैं और RakshaSamachar.com से जुड़े हैं। वे लंबे समय से भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना से जुड़ी रणनीतिक खबरों, रक्षा नीतियों और राष्ट्रीय सुरक्षा से संबंधित मुद्दों को कवर कर रहे हैं। पत्रकारिता के अपने करियर में हरेंद्र ने संसद की गतिविधियों, सैन्य अभियानों, भारत-पाक और भारत-चीन सीमा विवाद, रक्षा खरीद और ‘मेक इन इंडिया’ रक्षा परियोजनाओं पर विस्तृत लेख लिखे हैं। वे रक्षा मामलों की गहरी समझ और विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण के लिए जाने जाते हैं।





