📍नई दिल्ली/जकार्ता | 10 Sep, 2026, 12:54 PM
Super Garuda Shield 2026: इंडोनेशिया में इन दिनों बहुराष्ट्रीय सैन्य अभ्यास सुपर गरुड़ा शील्ड 2026 चल रही है। इस एक्सरसाइज में पहली बार भारत सक्रिय तौर पर शामिल हुआ है। भारत ने पहली बार इस अभ्यास में अपने स्पेशल फोर्सेज के जवानों को भेजा है। 31 अगस्त से 11 सितंबर तक आयोजित इस बड़े सैन्य अभ्यास में 21 देशों के कुल 4,743 सैनिक हिस्सा ले रहे हैं।
इंडोनेशिया की सरकारी समाचार एजेंसी अंतारा और सैन्य सूत्रों के अनुसार भारतीय सेना के 40 पैरा ट्रूपर्स ने एयरबोर्न जंप और फायरिंग अभ्यास में हिस्सा लिया।
यह अभ्यास इंडोनेशिया की सेना टीएनआई (टेंटारा नेशनल इंडोनेशिया) और अमेरिकी इंडो-पैसिफिक कमांड के सहयोग से आयोजित किया जा रहा है। इसका उद्देश्य विभिन्न देशों की सेनाओं के बीच तालमेल बढ़ाना, ऑपरेशनल रेडीनेस मजबूत करना और क्षेत्रीय सुरक्षा चुनौतियों से निपटने की क्षमता विकसित करना है।
Super Garuda Shield 2026: 21 देशों के सैनिक एक मंच पर
अंतारा के मुताबिक, इस साल के सुपर गरुड़ा शील्ड में इंडोनेशिया, अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, भारत, जापान, फ्रांस, जर्मनी, ब्रिटेन, कनाडा, दक्षिण कोरिया, सिंगापुर, थाईलैंड, वियतनाम और अन्य देशों के सैनिक शामिल हैं।
सुपर गरुड़ा शील्ड हर साल आयोजित किया जाता है। इस बार 21 देशों के 4,743 सैनिक 12 अलग-अलग प्रशिक्षण गतिविधियों में भाग ले रहे हैं। अभ्यास इंडोनेशिया के बांडुंग, जकार्ता, लाम्पुंग, दक्षिण सुमात्रा के बातुराजा और उत्तरी कालीमंतान के नुनुकान क्षेत्रों में आयोजित किया जा रहा है। इसका समापन 11 सितंबर को जकार्ता में होगा।
भारत की सक्रिय भागीदारी
सूत्रों के अनुसार भारत की ओर से इस अभ्यास में 50वीं इंडिपेंडेंट पैरा स्पेशल फोर्स (पैरा एसएफ) के जवान शामिल हुए हैं। यह भागीदारी इसलिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि पहले कई मौकों पर भारत की भूमिका या तो बेहद सीमित रही या फिर ऑब्जर्वर स्तर की रही थी।
लेकिन इस बार भारतीय सैनिकों ने सीधे ऑपरेशनल ट्रेनिंग में हिस्सा लिया। दक्षिण सुमात्रा के बातुराजा कॉम्बैट ट्रेनिंग सेंटर में आयोजित एयरबोर्न ड्रिल में भारतीय पैरा ट्रूपर्स ने अन्य देशों के सैनिकों के साथ पैराशूट जंप किए। (Super Garuda Shield 2026)

भारत के 40 पैराट्रूपर्स हुए शामिल
अंतारा के अनुसार एयरबोर्न ट्रेनिंग में इंडोनेशिया, अमेरिका, भारत, जापान और फ्रांस के सैनिक शामिल हुए। इस अभ्यास में इंडोनेशिया के 110, अमेरिका के 147, भारत के 40, जापान के 17 और फ्रांस के 6 पैराट्रूपर्स ने हिस्सा लिया।
जवानों ने सी-130 हरक्यूलिस विमान से 1,200 फीट की ऊंचाई से स्टैटिक लाइन जंप किए। इस दौरान इंडोनेशियाई वायुसेना के दो हरक्यूलिस विमान और अमेरिकी वायुसेना के तीन हरक्यूलिस विमान तैनात रहे।
टीएनआई के मुताबिक, “इस प्रशिक्षण का उद्देश्य विभिन्न देशों के पैराट्रूपर्स की सुरक्षित और सटीक एयरबोर्न ऑपरेशन क्षमता को मजबूत करना है।”
इस अभ्यास के दौरान विभिन्न सेनाओं की प्रक्रियाओं को एक-दूसरे के साथ कॉर्डिनेट करने और संयुक्त अभियान चलाने की क्षमता को भी परखा गया। (Super Garuda Shield 2026)
भारतीय पैरा एसएफ ने फायरिंग ड्रिल में भी लिया हिस्सा
एयरबोर्न ऑपरेशन के अलावा भारतीय सैनिकों ने सॉफ फ्लैट रेंज एडवांस शूटिंग अभ्यास में भी हिस्सा लिया। यह अभ्यास दक्षिण सुमात्रा के मार्तापुरा स्थित फायरिंग रेंज में आयोजित किया गया।
सूत्रों के अनुसार इस ड्रिल में कुल 270 सैनिक शामिल हुए। इनमें इंडोनेशिया के 110 सैनिक, अमेरिका के 80 सैनिक, न्यूजीलैंड के 45 सैनिक और भारत के 40 पैरा एसएफ कमांडो शामिल थे।
अभ्यास का उद्देश्य विभिन्न देशों की सेनाओं की युद्धक क्षमता और इंटरऑपरेबिलिटी बढ़ाना था। अधिकारियों के अनुसार पूरा प्रशिक्षण सफलतापूर्वक पूरा किया गया। (Super Garuda Shield 2026)
साइबर, एयर असॉल्ट और लाइव फायर ट्रेनिंग पर जोर
सुपर गरुड़ा शील्ड 2026 केवल जमीनी युद्ध अभ्यास तक सीमित नहीं है। इसमें साइबर सुरक्षा, कमांड एंड कंट्रोल, एयर असॉल्ट, जंगल वारफेयर, अर्बन ऑपरेशन, मेडिकल इवैक्यूएशन और डिजास्टर रिलीफ जैसे कई मॉड्यूल शामिल हैं।
टीएनआई के मुताबिक, इंडोनेशिया की साइबर यूनिट केवल तीन साल पहले स्थापित हुई थी। ऐसे में दूसरे देशों के साथ संयुक्त साइबर अभ्यास अनुभव साझा करने और क्षमताएं विकसित करने का महत्वपूर्ण अवसर प्रदान कर रहा है। (Super Garuda Shield 2026)

मानवीय सहायता और आपदा राहत भी अभ्यास का हिस्सा
इस बार अभ्यास में एचएडीआर (ह्यूमैनिटेरियन असिस्टेंस एंड डिजास्टर रिलीफ) गतिविधियों को भी प्रमुखता दी गई है। उत्तरी कालीमंतान क्षेत्र में प्राकृतिक आपदा प्रतिक्रिया से जुड़े विशेष प्रशिक्षण आयोजित किए जा रहे हैं।
इंडोनेशियाई सेना का कहना है कि आधुनिक सुरक्षा चुनौतियां केवल सैन्य संघर्ष तक सीमित नहीं हैं। प्राकृतिक आपदाओं और मानवीय संकटों में भी सेनाओं की भूमिका लगातार बढ़ रही है। इसी कारण राहत और बचाव अभियानों को प्रशिक्षण कार्यक्रम का हिस्सा बनाया गया है। (Super Garuda Shield 2026)
2007 में शुरू हुई थी गरुड़ा शील्ड
सुपर गरुड़ा शील्ड की शुरुआत वर्ष 2007 में गरुड़ा शील्ड नामक द्विपक्षीय अभ्यास के रूप में हुई थी। उस समय इसमें केवल इंडोनेशिया और अमेरिका हिस्सा लेते थे।
बाद के सालों में इसका विस्तार किया गया और कई देशों को इसमें शामिल किया गया। इसके बाद इसे सुपर गरुड़ा शील्ड नाम दिया गया। अब यह इंडो-पैसिफिक क्षेत्र के सबसे बड़े बहुराष्ट्रीय सैन्य अभ्यासों में गिनी जाती है। (Super Garuda Shield 2026)
अंतारा के अनुसार इंडोनेशिया इस अभ्यास को क्षेत्रीय स्थिरता, सुरक्षा और रक्षा कूटनीति का मंच मानता है। यह अभ्यास इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में शांति, सुरक्षा और स्थिरता बनाए रखने के लिए इंडोनेशिया की रक्षा कूटनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा है। (Super Garuda Shield 2026)
Author
हरेंद्र चौधरी रक्षा पत्रकारिता (Defence Journalism) में सक्रिय हैं और RakshaSamachar.com से जुड़े हैं। वे लंबे समय से भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना से जुड़ी रणनीतिक खबरों, रक्षा नीतियों और राष्ट्रीय सुरक्षा से संबंधित मुद्दों को कवर कर रहे हैं। पत्रकारिता के अपने करियर में हरेंद्र ने संसद की गतिविधियों, सैन्य अभियानों, भारत-पाक और भारत-चीन सीमा विवाद, रक्षा खरीद और ‘मेक इन इंडिया’ रक्षा परियोजनाओं पर विस्तृत लेख लिखे हैं। वे रक्षा मामलों की गहरी समझ और विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण के लिए जाने जाते हैं।





