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सर क्रीक में पाकिस्तान को लगेगा झटका! ऑपरेशन के लिए भारतीय सेना को मिलेंगी पानी और जमीन दोनों पर चलने वालीं ये खास बोटें

रक्षा मंत्रालय की तरफ से जारी आरएफपी के मुताबिक, इन 11 बोटों में से 7 भारतीय सेना और 4 भारतीय नौसेना को मिलेंगी...

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📍नई दिल्ली | 15 Jul, 2026, 11:08 AM

Indian Army Amphibious Boats: पाकिस्तान से लगे सर क्रीक इलाके से लेकर अंडमान-निकोबार तक भारतीय सेना की ऑपरेशनल क्षमता बढ़ाने के लिए रक्षा मंत्रालय ने 11 रिजिड हल बोट (एम्फीबियस) की खरीद के लिए रिक्वेस्ट फॉर प्रपोजल (आरएफपी) जारी किया है। यह खरीद बाय (इंडियन) श्रेणी के तहत होगी, जिसमें कम से कम 60 प्रतिशत स्वदेशी सामग्री का इस्तेमाल जरूरी है।

रक्षा मंत्रालय की तरफ से जारी आरएफपी के मुताबिक, इन 11 बोटों में से 7 भारतीय सेना और 4 भारतीय नौसेना को मिलेंगी। सेना की बोटें गुजरात के लखपत स्थित 235 इनलैंड वाटर ट्रांसपोर्ट यूनिट को दी जाएंगी, जबकि नौसेना की दो बोटें मुंबई और दो पोर्ट ब्लेयर में तैनात की जाएंगी। इन बोटों का इस्तेमाल ऐसे इलाकों में तेज और निर्बाध आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए किया जाएगा, जहां सामान्य नावें या पहिए वाले वाहन काम नहीं कर पाते।

Indian Army Amphibious Boats: क्या होती हैं एम्फीबियस रिजिड हल बोट

एम्फीबियस रिजिड हल बोट ऐसी विशेष मिलिट्री बोट होती हैं, जो केवल पानी में ही नहीं बल्कि जमीन पर भी चल सकती है। इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि समुद्र, ज्वारीय दलदली क्षेत्र, उथली खाड़ियां और कीचड़ वाले इलाकों में भी यह बिना दिक्कत के आगे बढ़ सकती है।

सामान्य नावें कम ज्वार के समय अक्सर कीचड़ में फंस जाती हैं, जबकि आम मिलिट्री व्हीकल्स दलदल में धंस जाते हैं। एम्फीबियस बोटों में इस तरह की समस्याएं नहीं आती हैं। जरूरत पड़ने पर यह पानी से सीधे जमीन पर आ सकती है और फिर दोबारा पानी में उतर सकती हैं।

रक्षा मंत्रालय ने आरएफपी में स्पष्ट किया है कि नई बोटों को सेना की जरूरतों को देखते हुए मजबूत बनाया जाएगा। इनमें तेज रफ्तार, बेहतर समुद्री स्थिरता और ऐसा हल डिजाइन होगा जिससे तेज रफ्तार पर भी क्रू मेंबर्स को कम झटके महसूस हों। (Indian Army Amphibious Boats)

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सर क्रीक में क्यों है ऐसी बोटों की जरूरत

इन बोटों की सबसे बड़ी भूमिका गुजरात के सर क्रीक इलाके में होगी। लगभग 96 किलोमीटर लंबा सर क्रीक भारत और पाकिस्तान के बीच एक ज्वारीय मुहाना है, जो अरब सागर में जाकर मिलता है।

यह इलाका पूरी तरह सामान्य समुद्री क्षेत्र भी नहीं है और पूरी तरह जमीन भी नहीं। यहां ज्वार-भाटा के साथ पानी का स्तर लगातार बदलता रहता है। चारों ओर दलदल, उथले चैनल और कीचड़ भरे इलाके होने के कारण पेट्रोलिंग करना हमेशा चुनौतीपूर्ण रहता है।

भारत का मानना है कि सीमा इस क्रीक के बीच से गुजरती है, जबकि पाकिस्तान पूरे क्रीक पर दावा करता है। इसी विवाद के कारण समुद्री सीमा का निर्धारण भी प्रभावित होता है।

घुसपैठ और तस्करी रोकने में मिलेगी मदद

सर क्रीक और उससे जुड़े हरामी नाला इलाके का इस्तेमाल कई बार तस्करी, मादक पदार्थों की तस्करी और अवैध घुसपैठ के लिए किया जाता रहा है। सुरक्षा एजेंसियों के लिए इन इलाकों में लगातार निगरानी बनाए रखना आसान नहीं होता।

सूत्रों के अनुसार, इन नई एम्फीबियस बोटों के आने से सेना दलदली इलाकों में बिना रुके पेट्रोलिंग कर सकेगी। जरूरत पड़ने पर छोटी टुकड़ियों को तेजी से एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचाया जा सकेगा। इससे निगरानी और जवाबी कार्रवाई दोनों अधिक प्रभावी होंगी। (Indian Army Amphibious Boats)

ऑपरेशन सिंदूर के बाद बदली स्थिति

सूत्रों के मुताबिक, सुरक्षा एजेंसियों ने पिछले साल सर क्रीक क्षेत्र के सामने पाकिस्तान की ओर नए बंकर, फॉरवर्ड पोस्ट्स और अन्य स्ट्रक्चर्स के निर्माण पर भी ध्यान दिया था। इसी वजह से इस क्षेत्र में भारतीय सेना की पेट्रोलिंग बढ़ाने की जरूरत महसूस की गई।

अंडमान-निकोबार में भी बढ़ेगी क्षमता

नई बोटें केवल पश्चिमी सीमा तक सीमित नहीं रहेंगी। चार बोटें भारतीय नौसेना को मिलेंगी, जिनमें दो मुंबई और दो पोर्ट ब्लेयर में तैनात की जाएंगी।

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अंडमान-निकोबार द्वीप समूह में बड़ी संख्या में छोटे द्वीप, संकरे समुद्री मार्ग और उथले तटीय क्षेत्र हैं। ऐसे इलाकों में एम्फीबियस बोट तेज गश्त, तटीय सुरक्षा, विशेष अभियान और राहत कार्यों में उपयोगी होती हैं। (Indian Army Amphibious Boats)

जमीन और पानी दोनों पर चलेंगी

आरएफपी के अनुसार, बोट न केवल पानी में ही तेज रफ्तार से चलेगी, बल्कि इसमें हाइड्रोलिक तरीके से ऑपरेट होने वाले वापस मुड़ने वाले पहिए लगाए जाएंगे।

इन्हीं पहियों की मदद से यह जमीन पर भी चल सकेगी। जमीन पर इसकी गति लगभग 10 से 15 किलोमीटर प्रति घंटा होगी और यह लगभग 15 डिग्री ढलान भी चढ़ सकेगी।

इससे सैनिकों को पानी से उतरने के बाद अलग वाहन की जरूरत नहीं पड़ेगी। (Indian Army Amphibious Boats)

40 नॉट से ज्यादा होगी रफ्तार

इन बोटों की अधिकतम गति 40 नॉट से अधिक होनी चाहिए। एक नॉट लगभग 1.85 किलोमीटर प्रति घंटा के बराबर होता है। इसका अर्थ है कि बोट लगभग 74 किलोमीटर प्रति घंटा या उससे अधिक की गति से पानी में चल सकेगी। इतनी गति सीमावर्ती क्षेत्रों में तेजी से प्रतिक्रिया देने और गश्त के दौरान काफी महत्वपूर्ण मानी जाती है।

साथ ही, हर बोट में लगभग 12 पूरी तरह हथियारों से लैस सैनिक सवार हो सकेंगे। इसके अलावा यह 1,500 किलोग्राम से अधिक पेलोड लेकर चल सकेगी। इससे सैनिकों के साथ हथियार, कम्युनिकेशन इक्विपमेंट्स और अन्य जरूरी सैन्य सामग्री भी आसानी से पहुंचाई जा सकेगी। (Indian Army Amphibious Boats)

बोट में मिलेगा बैलिस्टिक प्रोटेक्शन

आरएफपी के अनुसार, बोट के आगे और पीछे हथियार लगाने की व्यवस्था होगी। साथ ही चालक दल की सुरक्षा के लिए बैलिस्टिक प्रोटेक्शन भी दिया जाएगा ताकि ऑपरेशन के दौरान गोलीबारी की स्थिति में सुरक्षा बढ़ाई जा सके।

हर बोट में कई जरूरी सैन्य उपकरण पहले से लगाए जाएंगे। इनमें कम्युनिकेशन सिस्टम, लाइफ सेविंग जैकेट्स, आग बुझाने के उपकरण, प्राथमिक उपचार किट, स्ट्रेचर, मूरिंग लाइन और अन्य सुरक्षा उपकरण शामिल होंगे।
इसके अलावा तकनीकी दस्तावेज, गुणवत्ता जांच योजना और रखरखाव संबंधी दस्तावेज भी सप्लाई का हिस्सा होंगे।

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रक्षा मंत्रालय ने कहा है कि हर बोट की वारंटी 24 महीने होगी। इसके बाद 8 वर्ष का कॉम्प्रिहेंसिव मेंटेनेंस कॉन्ट्रैक्ट रहेगा। इसके अलावा पूरी प्रणाली के लिए कम से कम 10 वर्ष का प्रोडक्ट सपोर्ट उपलब्ध कराना होगा। बोट की सर्विस लाइफ कम से कम 10 वर्ष या 10,000 ऑपरेटिंग घंटे रखी गई है।

वहीं, कॉन्ट्रैक्ट पर दस्तखत होने के बाद सभी 11 बोटों की सप्लाई 24 महीने के भीतर पूरी करनी होगी। पहले चरण में एक बोट, दूसरे चरण में चार और अंतिम चरण में छह बोटें सौंपी जाएंगी। (Indian Army Amphibious Boats)

हवाई मार्ग से भी पहुंचाई जा सकेगी

रक्षा मंत्रालय ने यह भी तय किया है कि जरूरत पड़ने पर इन बोटों को सड़क मार्ग से भारी टैंक ट्रांसपोर्टर पर ले जाया जा सके। इसके अलावा इन्हें भारतीय वायुसेना के आईएल-76 और सी-17 ग्लोबमास्टर परिवहन विमान में भी ले जाने योग्य बनाया जाएगा। इससे किसी भी सैन्य क्षेत्र में कम समय में इनकी तैनाती संभव होगी। (Indian Army Amphibious Boats)

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    हरेंद्र चौधरी रक्षा पत्रकारिता (Defence Journalism) में सक्रिय हैं और RakshaSamachar.com से जुड़े हैं। वे लंबे समय से भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना से जुड़ी रणनीतिक खबरों, रक्षा नीतियों और राष्ट्रीय सुरक्षा से संबंधित मुद्दों को कवर कर रहे हैं। पत्रकारिता के अपने करियर में हरेंद्र ने संसद की गतिविधियों, सैन्य अभियानों, भारत-पाक और भारत-चीन सीमा विवाद, रक्षा खरीद और ‘मेक इन इंडिया’ रक्षा परियोजनाओं पर विस्तृत लेख लिखे हैं। वे रक्षा मामलों की गहरी समझ और विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण के लिए जाने जाते हैं।

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