📍नई दिल्ली | 10 Sep, 2026, 7:35 PM
Sagar Defence war vessel licence: पुणे स्थित डीप-टेक स्टार्टअप सागर डिफेंस इंजीनियरिंग लिमिटेड को सतह और पानी के भीतर इस्तेमाल होने वाले ‘वेसल्स ऑफ वॉर’ के निर्माण के लिए इंडस्ट्रियल लाइसेंस मिला है। यह मंजूरी कंपनी के लिए साल 2026 में मिली दूसरी बड़ी रेगुलेटरी अप्रूवल है। इससे पहले अप्रैल 2026 में सागर डिफेंस को आर्म्स, एक्सप्लोसिव्स और एम्युनिशन के निर्माण से जुड़ा इंडस्ट्रियल लाइसेंस मिला था।
यह लाइसेंस मिलने के बाद अब कंपनी अब कानूनी तौर पर सरफेस और अंडरवाटर मिलिट्री वेसल्स (मानव रहित समेत) डिजाइन, बना, इंटीग्रेट और सप्लाई कर सकती है।
Sagar Defence war vessel licence: क्या है ‘वेसल्स ऑफ वॉर’ लाइसेंस
‘वेसल्स ऑफ वॉर’ लाइसेंस मिलने का मतलब है कि कंपनी अब कानूनी तौर पर मिलिट्री इस्तेमाल वाले सरफेस और अंडरवाटर वेसल्स पर काम कर सकती है। इसमें मानव रहित सिस्टम भी शामिल हैं। कंपनी अब ऐसे मिलिट्री वेसल्स को डिजाइन करने, बनाने, उनके अलग-अलग सिस्टम को इंटीग्रेट करने और उन्हें सप्लाई करने का काम कर सकती है। प्रेस नोट-1 (2019) के तहत इस कैटेगरी में वॉर वेसल्स, हथियारों से लैस सरफेस वेसल्स, खास नेवल इक्विपमेंट और मिलिट्री इस्तेमाल के लिए बनाए गए अनमैन्ड सरफेस तथा सब-सर्फेस व्हीकल्स आते हैं।
नए इंडस्ट्रियल लाइसेंस के तहत सागर डिफेंस को तय नेवल डिफेंस प्लेटफॉर्म और उनसे जुड़े सिस्टम के डिजाइन, मैन्युफैक्चरिंग, कंस्ट्रक्शन, इंटीग्रेशन, असेंबली, टेस्टिंग और सप्लाई से जुड़ी गतिविधियां करने की अनुमति मिली है। हालांकि यह काम सरकार के अप्रूवल और लाइसेंस की शर्तों के अनुसार ही किया जा सकेगा।
बता दें कि सागर डिफेंस पहले से ही ऑटोनॉमस और अनमैन्ड मैरीटाइम सिस्टम पर काम करती रही है।
कंपनी के लिए क्यों अहम है यह लाइसेंस
यह लाइसेंस मिलने के बाद कंपनी के लिए ज्यादा एडवांस नेवल प्लेटफॉर्म डेवलप करने का रास्ता खुल गया है। कंपनी की ऑटोनॉमी टेक्नोलॉजी और जीईएनआईएसवाईएस जैसी क्षमताओं को हथियार या एम्युनिशन से जुड़ी लाइसेंस प्राप्त क्षमताओं के साथ जोड़ा जा सकता है। इससे आर्म्ड ऑटोनॉमस वेसल्स जैसे सिस्टम डेवलप किए जा सकते हैं।
‘बायर नेवी’ से ‘बिल्डर नेवी’
इस पूरी नीति के पीछे सरकार का बड़ा लक्ष्य भारत को सिर्फ ‘बायर नेवी’ से ‘बिल्डर नेवी’ की तरफ ले जाना है। यानी भारत केवल विदेशों से युद्धपोत खरीदने वाला देश न रहे, बल्कि अपने युद्धपोतों और उनसे जुड़े सिस्टम को खुद डिजाइन और तैयार करे।
इसी दिशा में इंडियन नेवल इंडिजिनाइजेशन प्लान 2015-2030 और आत्मनिर्भर भारत के तहत देश में युद्धपोत निर्माण पर जोर दिया जा रहा है। नए जहाजों में स्वदेशी सामग्री की हिस्सेदारी भी लगातार बढ़ाने की कोशिश की जा रही है।
इसके साथ प्राइवेट सेक्टर की भूमिका बढ़ाने पर भी जोर है। एलएंडटी, स्वान डिफेंस जैसी कंपनियों के साथ अब सागर डिफेंस जैसे टेक्नोलॉजी आधारित स्टार्टअप भी इस इकोसिस्टम का हिस्सा बन रहे हैं।
2015 में हुई थी शुरुआत
सागर डिफेंस इंजीनियरिंग की शुरुआत 2015 में हुई थी। कंपनी की स्थापना कैप्टन निकुंज पराशर और उनकी टीम ने की थी। निकुंज पराशर मर्चेंट नेवी में काम कर चुके हैं और उनके पास समुद्री क्षेत्र का लंबा अनुभव है।
कंपनी की शुरुआत मुंबई के एक छोटे से ऑफिस स्पेस से हुई थी। बाद में इसका विस्तार पुणे तक हुआ और अब कंपनी के पास करीब 10 एकड़ का कैंपस है।
सागर डिफेंस ने पिछले कुछ सालों में कई तरह के मैरीटाइम और अनमैन्ड सिस्टम पर काम किया है। इनमें यूएसवी यानी अनमैन्ड सरफेस व्हीकल, एयूवी यानी ऑटोनॉमस अंडरवॉटर व्हीकल और समुद्री निगरानी से जुड़े ड्रोन शामिल हैं।
कंपनी ने जीनीसिस नाम का एक ऑटोनॉमी और कमांड-एंड-कंट्रोल सिस्टम भी विकसित किया है। इसे अलग-अलग तरह के प्लेटफॉर्म पर लगाया जा सकता है। इसका इस्तेमाल किसी मौजूदा नाव या वेसल को रिमोट, सेमी-ऑटोनॉमस या पूरी तरह ऑटोनॉमस सिस्टम में बदलने के लिए किया जा सकता है।
इसे ‘बोट इन ए बॉक्स’ भी कहा जाता है, जिसमें प्लेटफॉर्म की ऑटोनॉमी को सॉफ्टवेयर और इलेक्ट्रॉनिक्स के जरिए कंट्रोल किया जाता है।
हथियार और एम्युनिशन का भी मिला था लाइसेंस
सागर डिफेंस को इस साल अप्रैल में आर्म्स, एक्सप्लोसिव्स और एम्युनिशन के निर्माण के लिए भी इंडस्ट्रियल लाइसेंस दिया गया था। यह लाइसेंस इंडस्ट्रीज (डेवलपमेंट एंड रेगुलेशन) एक्ट 1951 के तहत मिला है, जिसके बाद कंपनी अब अगले दो साल में बड़े स्तर पर विस्फोटक और एम्युनिशन बनाने की तैयारी कर रही है।
आंध्र प्रदेश में ऑटोनॉमस मैरीटाइम शिपयार्ड
कंपनी ने समुद्री निर्माण क्षमता बढ़ाने के लिए आंध्र प्रदेश में भी विस्तार शुरू किया है। नेल्लोर के जुव्वलादिन्ने फिशिंग हार्बर में ऑटोनॉमस मैरीटाइम शिपयार्ड विकसित करने की योजना पर काम चल रहा है।
इस साल मार्च में इस प्रोजेक्ट की आधारशिला रखी गई थी। इसके अलावा कंपनी ने मई में आंध्र प्रदेश सरकार के साथ करीब 400 एकड़ के वेपन्स मैन्युफैक्चरिंग कॉम्प्लेक्स को लेकर समझौता भी किया है। (Sagar Defence war vessel licence)
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