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अब इंजन नहीं, बल्कि HAL के इस “फैसले” की वजह से डिलीवरी में हुई देरी, एक भी तेजस Mk-1A क्यों नहीं पहुंचा स्क्वाड्रन में?

27 विमान तैयार, 10 इंजन उपलब्ध, लेकिन रडार और मिसाइल इंटीग्रेशन की चुनौतियों के कारण भारतीय वायुसेना को अब तक नहीं मिला एक भी तेजस Mk-1A फाइटर जेट...

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📍नई दिल्ली | 18 Sep, 2026, 12:46 PM

Tejas Mk-1A Delivery Delay: भारतीय वायुसेना के लिए तैयार किए जा रहे तेजस मार्क-1 अल्फा फाइटर जेट्स की डिलीवरी में देरी को पिछले दो साल से अमेरिकी कंपनी जीई एयरोस्पेस के एफ-404 इंजन की सप्लाई से जोड़कर देखा जाता रहा है। लेकिन हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल) के नए चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर रवि के. के बयानों की मानें तो डिलीवरी में अब देरी इंजन की वजह से नहीं, बल्कि रडार और मिसाइल इंटीग्रेशन से जुड़ी चुनौतियां डिलीवरी में बड़ी बाधा बनी हुई हैं।

एचएएल के पास 27 तेजस एमके-1ए एयरफ्रेम तैयार हैं और 10 इंजन भी मिल चुके हैं। इसके बावजूद भारतीय वायुसेना को एक भी एमके-1ए विमान नहीं सौंपा गया है। सूत्रों का कहना है कि अगर 2025 में एचएएल स्वदेशी उत्तम एईएसए रडार की जगह पहले बैच के लिए इजरायली एल्टा EL/M-2052 एईएसए रडार नहीं लगाता तो अब तक डिलीवरी शुरू हो चुकी होती।

Tejas Mk-1A Delivery Delay: मार्च 2024 से शुरू होनी थी डिलीवरी

भारतीय वायुसेना ने फरवरी 2021 में लगभग 48,000 करोड़ रुपये की लागत से 83 तेजस मार्क वन अल्फा लड़ाकू विमानों का ऑर्डर दिया था। इस समझौते के तहत पहला विमान मार्च 2024 में डिलीवर होना था।

उस समय भारतीय वायुसेना की कमान एयर चीफ मार्शल वी.आर. चौधरी के पास थी। उनका कार्यकाल अक्टूबर 2021 से सितंबर 2024 तक रहा। एसीएम वी.आर. चौधरी ने अपने कार्यकाल के दौरान कई बार तेजस कार्यक्रम को भारतीय वायुसेना के लिए महत्वपूर्ण बताया था। तेजस एमके-1ए की पहली डिलीवरी उनके कार्यकाल में मार्च 2024 से शुरू होनी थी, लेकिन ऐसा नहीं हो सका।

अक्टूबर 2024 में एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने भारतीय वायुसेना प्रमुख का पद संभाला। तेजस कार्यक्रम से उनका जुड़ाव काफी पुराना रहा है। वह स्वयं एक टेस्ट पायलट रह चुके हैं और तेजस प्रोजेक्ट को करीब से जानते हैं। उनके कार्यकाल के दौरान सितंबर 2025 में 97 अतिरिक्त तेजस एमके-1ए विमानों का दूसरा ऑर्डर दिया गया। इस तरह कुल अब तक 180 फाइटर जेट्स का ऑर्डर एचएएल के पास है।

एयर चीफ मार्शल एपी सिंह इस साल अक्टूबर में रिटायर होने वाले हैं। ऐसे में स्थिति यह बन गई है कि लगातार दूसरे वायुसेना प्रमुख का कार्यकाल भी एक भी तेजस एमके-1ए की डिलीवरी लिए बिना समाप्त हो रहा है। जबकि पूरा ऑर्डर करीब 2028-29 तक खत्म होना था।

डिलीवरी पर एचएएल चेयरमैन ने क्या कहा?

एचएएल के चेयरमैन रवि के. ने हाल ही में कई मीडिया संस्थानों को दिए इंटरव्यू में साफ कहा कि अब मुख्य चुनौती रडार और मिसाइल इंटीग्रेशन से जुड़ी है।

उन्होंने कहा कि अधिकांश परीक्षण पूरे हो चुके हैं, लेकिन कुछ रडार संबंधी मुद्दों और हथियार इंटीग्रेशन परीक्षणों को अंतिम रूप दिया जाना बाकी है। उनके अनुसार विमान लगभग 90 से 95 प्रतिशत तैयार है, लेकिन अंतिम 5 प्रतिशत तकनीकी जरूरतों को पूरा करना अभी बाकी है।

रवि के. ने बताया कि 27 एयरफ्रेम पहले से तैयार हैं और एचएएल को जीई एयरोस्पेस से 10 एफ404-आईएन20 इंजन मिल चुके हैं और इन इंजनों के आधार पर कंपनी 10 विमान डिलीवर करने की स्थिति में है। उन्होंने यह भी बताया कि जीई ने दिसंबर 2026 तक 12 अतिरिक्त इंजन देने का भरोसा दिया है।

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उन्होंने बताया कि कंपनी की योजना इस साल के आखिर तक विमानों की डिलीवरी शुरू करने की है। हालांकि उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि डिलीवरी की सटीक तारीख क्या होगी और शुरुआती चरण में कितने विमान वायुसेना को सौंपे जाएंगे। रवि के. ने कहा कि वह अभी किसी निश्चित टाइमलाइन का वादा नहीं कर सकते। (Tejas Mk-1A Delivery Delay)

2025 का एचएएल का फैसला पड़ रहा भारी

तेजस एमके-1ए कार्यक्रम में सबसे अधिक चर्चा जून 2025 में लिए गए उस फैसले की हुई, जब एचएएल ने पहले बैच के विमानों के लिए इजरायली कंपनी एल्टा सिस्टम्स के EL/M-2052 एईएसए राडार और स्कॉर्पियस इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सिस्टम को चुनने का फैसला किया।

उस समय एचएएल ने इजरायल की एल्टा सिस्टम्स को लेटर ऑफ इंटेंट जारी किया। इसके तहत पहले बैच के विमानों के लिए EL/M-2052 एईएसए रडार और स्कॉर्पियस इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सिस्टम को चुना गया।

पहले योजना यह थी कि 41वें विमान से डीआरडीओ का बनाया स्वदेशी उत्तम एईएसए रडार लगाया जाएगा। लेकिन एचएएल ने तर्क दिया कि उत्तम रडार और स्वयं रक्षा कवच इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सिस्टम अभी फुल प्रोडक्शन सर्टिफिकेशन नहीं मिला है।

एचएएल का कहना था कि अगर स्वदेशी सिस्टम का इंतजार किया गया, तो कार्यक्रम में 12 से 18 महीने की अतिरिक्त देरी हो सकती है। (Tejas Mk-1A Delivery Delay)

डीआरडीओ ने किया था विरोध

सूत्रों ने बताया कि डीआरडीओ ने एचएएल की इस दलील का विरोध किया था। डीआरडीओ का कहना था कि उत्तम एईएसए रडार 2023 से ही उत्पादन के लिए तैयार था। डीआरडीओ के मुताबिक अप्रैल 2025 तक चार महत्वपूर्ण फ्लाइट ट्रायल चरण पूरे हो चुके थे और सेंटर फॉर मिलिट्री एयरवर्थीनेस एंड सर्टिफिकेशन (CEMILAC) ने भी कई जरूरी ट्रायल्स को मंजूरी दे दी थी और डीआरडीओ को सब-सिस्टम का प्रोडक्शन शुरू करने की सलाह दी थी।

डीआरडीओ का कहना था कि यदि जरूरत पड़े तो शुरुआती चरण में स्वदेशी राडार के साथ विदेशी इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सिस्टम का हाइब्रिड मॉडल अपनाया जा सकता था। लेकिन एचएएल ने टाइमलाइन को प्राथमिकता देते हुए विदेशी रडार का रास्ता चुना।

बता दें कि एईएसए यानी एक्टिव इलेक्ट्रॉनिकली स्कैन्ड एरे राडार आधुनिक लड़ाकू विमानों की सबसे महत्वपूर्ण तकनीकों में से एक माना जाता है। पारंपरिक रडार में एंटीना को मैकेनिकली घुमाना पड़ता है, जबकि एईएसए राडार में हजारों छोटे ट्रांसमिट-रिसीव मॉड्यूल इलेक्ट्रॉनिक तरीके से बीम को कंट्रोल करते हैं।

इससे रडार एक साथ कई टारगेट्स को ट्रैक कर सकता है, जामिंग का मुकाबला कर सकता है और हवा से हवा तथा हवा से जमीन दोनों प्रकार के मिशन में बेहतर प्रदर्शन करता है।

वहीं, उत्तम एईएसए रडार को डीआरडीओ की इलेक्ट्रॉनिक्स एंड रडार डेवलपमेंट एस्टैब्लिशमेंट (LRDE) ने डेवलप किया है। यह भारत का पहला स्वदेशी एक्टिव इलेक्ट्रॉनिकली स्कैन्ड एरे रडार है। इसमें गैलियम आर्सेनाइड आधारित ट्रांसमिट-रिसीव मॉड्यूल का इस्तेमाल किया गया है।

अप्रैल 2026 तक तेजस LSP-2 और LSP-3 प्रोटोटाइप पर इसके व्यापक परीक्षण पूरे किए जा चुके थे। परीक्षणों के दौरान इसने फाइटर साइज के टारगेट को लगभग 140 किलोमीटर दूरी तक ट्रैक करने की क्षमता दिखाई। साथ ही इसकी 150 से अधिक टेस्ट सॉर्टी पूरी की जा चुकी थीं।

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उत्तम रडार एक साथ कई टारगेट्स को ट्रैक कर सकता है और अस्त्र जैसी भारतीय मिसाइलों के साथ काम करने के लिए डिजाइन किया गया है। (Tejas Mk-1A Delivery Delay)

इजरायली रडार क्यों बना चुनौती?

हालांकि इजरायल का एल्टा EL/M-2052 रडार दुनिया के एडवांस एईएसए रडारों में गिना जाता है। यह 60 से अधिक टारगेट्स को ट्रैक कर सकता है और एयर-टू-एयर, एयर-टू-ग्राउंड तथा मैरीटाइम मिशन में इस्तेमाल किया जा सकता है।

लेकिन समस्या हार्डवेयर नहीं, बल्कि इंटीग्रेशन में सामने आई। तेजस एमके-1ए में केवल रडार लगाना काफी नहीं है। रडार को मिशन कंप्यूटर, इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सिस्टम, डेटा लिंक और अस्त्र जैसी भारतीय मिसाइलों के साथ भी जोड़ना पड़ता है।

मार्च 2025 में तेजस एमके-1ए से अस्त्र एमके-1 मिसाइल का परीक्षण पूरी तरह सफल नहीं रहा। बाद में एचएएल के तत्कालीन चेयरमैन डी.के. सुनील ने स्वीकार किया कि सॉफ्टवेयर ग्लिच भी चुनौतियों में शामिल था। उन्होंने बताया कि सॉफ्टवेयर से जुड़ी दिक्कतों ने रडार और मिसाइल के बीच डेटा एक्सचेंज को प्रभावित किया। इसके बाद अतिरिक्त फ्लाइट टेस्ट और सॉफ्टवेयर सुधार शुरू किए गए।

अब फिर उत्तम रडार की ओर वापसी

दिलचस्प रूप से जुलाई 2026 में एचएएल ने अस्त्रा माइक्रोवेव को लगभग 2205 करोड़ रुपये का ऑर्डर दिया। यह ऑर्डर दूसरे बैच के 97 तेजस एमके-1ए विमानों के लिए उत्तम एईएसए रडार एंटीना यूनिट्स का है। हालांकि एचएएल एचएएल ने पहले भी कहा था कि 41वें विमान के बाद उत्तम रडार लगाया जाएगा। अब दूसरे बैच के अधिकांश विमानों में यही रडार इस्तेमाल होने की योजना है। (Tejas Mk-1A Delivery Delay)

वायुसेना ने एचएएल को दी थी छूट

फरवरी 2026 में वायुसेना और रक्षा मंत्रालय ने एचएएल को तेजस एमके-1ए की डिलीवरी तेज करने के लिए कुछ सीमित छूट दी थी। यह छूट नॉन-क्रिटिकल प्रोसेस को लेकर थी, जो विमान की तत्काल युद्धक क्षमता को प्रभावित नहीं करती हैं।

हालांकि आईएएफ ने स्पष्ट कर दिया था कि तीन अनिवार्य क्षमताओं पर कोई समझौता नहीं होगा। इनमें मिसाइल फायरिंग परीक्षण का पूरा होना, एईएसए राडार का इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर (ईडब्ल्यू) सिस्टम के साथ इंटीग्रेशन और पूर्ण हथियार पैकेज का एकीकरण शामिल है। आईएएफ का कहना था कि इन जरूरी क्षमताओं के बिना विमान स्वीकार नहीं किया जाएगा। बाकी कुछ तकनीकी काम डिलीवरी के बाद भी पूरे किए जा सकते हैं। (Tejas Mk-1A Delivery Delay)

एचएएच पर जुर्माने को लेकर है चुप्पी

जून 2026 में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में हुई एक समीक्षा बैठक में एचएएल पर लिक्विडेटेड डैमेज (LD) यानी वित्तीय जुर्माना लगाने की संभावना पर चर्चा हुई थी। उस समय यह माना गया था कि विमानों के लिए जरूरी इंजन उपलब्ध होने लगे हैं और कई एयरफ्रेम भी तैयार हैं, फिर भी तय समय पर डिलीवरी नहीं हो पाई है।

हालांकि, सितंबर 2026 तक न तो रक्षा मंत्रालय ने किसी जुर्माने की आधिकारिक घोषणा की है और न ही एचएएल द्वारा कोई जुर्माना चुकाने की जानकारी सामने आई है। रक्षा मंत्रालय ने भी यह पुष्टि नहीं की है कि देरी को लेकर एचएएल से कोई पेनल्टी वसूली गई है।

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हालांकि दूसरी तरफ, एचएएल ने अमेरिकी कंपनी जीई एयरोस्पेस पर इंजन सप्लाई में देरी के चलते पेनल्टी क्लॉज लागू किया है। अप्रैल 2026 में एचएएल ने कॉन्ट्रैक्ट की शर्तों के तहत जीई के खिलाफ यह कार्रवाई की थी। (Tejas Mk-1A Delivery Delay)

भारतीय वायुसेना के लिए यह देरी क्यों है सिरदर्द?

वायुसेना के पास इस समय लगभग 29 स्क्वाड्रन हैं, जबकि उसकी स्वीकृत जरूरत 42 स्क्वाड्रन की है। पुराने मिग-21 विमान सेवा से बाहर हो चुके हैं और नए लड़ाकू विमान तय समय पर नहीं मिल रहे हैं। इससे वायुसेना की क्षमता पर दबाव बढ़ रहा है। आने वाले सालों में जगुआर, मिग-29 और मिराज-2000 जैसे पुराने विमानों की संख्या भी कम होगी।

जून 2026 में रिटायर हुए पूर्व वाइस चीफ ऑफ एयर स्टाफ एयर मार्शल नागेश कपूर ने अगस्त 2026 में एक इंटरव्यू में कहा था कि तेजस 2030 के दशक के मध्य तक पूरी तरह फ्रंटलाइन जरूरतों को पूरा नहीं कर पाएगा। उनके अनुसार तब तक चीन के पास पांचवीं और संभवतः छठी पीढ़ी के लड़ाकू विमान होंगे, जबकि पाकिस्तान भी नई पीढ़ी के फाइटर जेट हासिल करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

एचएएल की देरी पर उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा था कि जिन क्षमताओं वाले विमान कई साल पहले मिलने चाहिए थे, वे अब तक नहीं मिले हैं। उन्होंने यह भी कहा था कि किसी दूसरे संगठन की देरी का असर वायुसेना की युद्धक क्षमता पर नहीं पड़ना चाहिए। कपूर का मानना था कि एचएएल के लिए यह प्रोजेक्ट जितना महत्वपूर्ण है, उससे कहीं ज्यादा जरूरी यह वायुसेना के लिए है, क्योंकि उसे अपनी ऑपरेशनल जरूरतें पूरी करनी हैं। (Tejas Mk-1A Delivery Delay)

उत्पादन बढ़ाने की तैयारी

एचएएल के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर रवि के. ने बताया कि कंपनी तेजस एमके-1ए लड़ाकू विमान का उत्पादन तेजी से बढ़ा रही है। फिलहाल लक्ष्य हर साल 24 विमान बनाने का है, जिसके लिए बेंगलुरु की दो प्रोडक्शन लाइनों के साथ नासिक में तीसरी लाइन भी शुरू की गई है। कंपनी 2027-28 तक उत्पादन बढ़ाकर 30 विमान प्रति वर्ष करने की तैयारी कर रही है।

रवि के. के अनुसार, उत्पादन बढ़ाने के लिए कई गैर-जरूरी निर्माण कार्य निजी कंपनियों को दिए जा रहे हैं। निजी वेंडर्स एयरफ्रेम, विंग और अन्य महत्वपूर्ण पार्ट्स तैयार कर रहे हैं। सप्लाई चेन को भी मजबूत किया जा रहा है ताकि किसी पुर्जे की कमी न हो। (Tejas Mk-1A Delivery Delay)

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  • herry passport

    हरेंद्र चौधरी रक्षा पत्रकारिता (Defence Journalism) में सक्रिय हैं और RakshaSamachar.com से जुड़े हैं। वे लंबे समय से भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना से जुड़ी रणनीतिक खबरों, रक्षा नीतियों और राष्ट्रीय सुरक्षा से संबंधित मुद्दों को कवर कर रहे हैं। पत्रकारिता के अपने करियर में हरेंद्र ने संसद की गतिविधियों, सैन्य अभियानों, भारत-पाक और भारत-चीन सीमा विवाद, रक्षा खरीद और ‘मेक इन इंडिया’ रक्षा परियोजनाओं पर विस्तृत लेख लिखे हैं। वे रक्षा मामलों की गहरी समझ और विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण के लिए जाने जाते हैं।

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