📍कोच्चि/नई दिल्ली | 17 Sep, 2026, 8:38 PM
Indian Navy NGMV: भारतीय नौसेना के लिए तैयार किए जा रहे नेक्स्ट जेनरेशन मिसाइल वेसल (एनजीएमवी) प्रोग्राम तेजी पकड़ रहा है। 17 सितंबर को कोचिन शिपयार्ड लिमिटेड (सीएसएल) में दूसरे एनजीएमवी की स्टील कटिंग सेरेमनी का आयोजन हुआ। यह कार्यक्रम भारतीय नौसेना के लिए बनाए जा रहे छह अत्याधुनिक स्टेल्थ मिसाइल युद्धपोतों की निर्माण प्रक्रिया में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।
Indian Navy NGMV: पहली डिलीवरी डिलीवरी 2027 के अंत तक
सूत्रों ने रक्षा समाचार को बताया, नौसेना को पहले जहाज की डिलीवरी 2027 के अंत तक किए जाने की योजना है। इसके बाद बाकी जहाजों की डिलीवरी लगभग हर छह महीने के अंतराल पर भारतीय नौसेना को की जाएगी।
सूत्रों ने बताया कि कि किसी भी नई क्लास के पहले जहाज के निर्माण में आमतौर पर ज्यादा वक्त लगता है। इसकी वजह यह है कि डिजाइन को वास्तविक रूप देना, जरूरी उपकरण और सामग्री जुटाना, तथा शिपयार्ड में उत्पादन व्यवस्था तैयार करना समय लेने वाली प्रक्रिया होती है। लेकिन पहला जहाज तैयार होने के बाद उसी से मिले अनुभव के आधार पर बाकी जहाजों का निर्माण तेजी से और अधिक व्यवस्थित तरीके से किया जा सकता है। उन्होंने उम्मीद जताई कि सारे जहाजों की डिलीवरी 2030 तक पूरी हो जाएगी।

वीर-क्लास मिसाइल बोट्स की जगह लेंगी एनजीएमवी
नेक्स्ट जेनरेशन मिसाइल वेसल भारतीय नौसेना का एक महत्वपूर्ण सरफेस कॉम्बैट प्लेटफॉर्म है। इन जहाजों को पुराने वीर-क्लास मिसाइल बोट्स की जगह लेने के लिए डिजाइन किया गया है।
सोवियत संघ के तारंतुल डिजाइन पर आधारित नौसेना के पुराने वीर-क्लास मिसाइल पोत अब पुराने हो चुके हैं और उनकी मारक दूरी भी सीमित है। नया नेक्स्ट जेनरेशन मिसाइल वेसल (NGMV) उसी भूमिका को आधुनिक तकनीक के साथ निभाएगा। इसमें एडवांस सेंसर, रडार पर कम दिखाई देने वाला स्टेल्थ डिजाइन और लंबी दूरी की सुपरसोनिक मिसाइलें होंगी, जिससे इसकी युद्ध क्षमता पहले के मुकाबले कहीं अधिक मजबूत होगी।
रक्षा मंत्रालय ने 30 मार्च 2023 को कोचिन शिपयार्ड लिमिटेड के साथ लगभग 9,805 करोड़ रुपये का कॉन्ट्रैक्ट किया था। इस कॉन्ट्रैक्ट के तहत कुल छह एनजीएमवी बनाए जा रहे हैं।
इन जहाजों का मुख्य काम दुश्मन के युद्धपोतों, समुद्री ठिकानों और महत्वपूर्ण मिलिट्री टारगेट्स पर तेज और सटीक हमला करना होगा। इन्हें विशेष रूप से हिंद महासागर क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा और समुद्री प्रभुत्व बनाए रखने के लिए तैयार किया जा रहा है।

दूसरे जहाज की स्टील कटिंग क्यों है महत्वपूर्ण?
किसी भी युद्धपोत के निर्माण में स्टील कटिंग को औपचारिक शुरुआत माना जाता है। पहले जहाज की स्टील कटिंग 16 दिसंबर 2024 को हुई थी। वहीं दूसरे जहाज की स्टील कटिंग 17 सितंबर को कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड (सीएसएल) में हुई है। इसी चरण में जहाज के लिए इस्तेमाल होने वाले विशेष ग्रेड स्टील को काटकर विभिन्न सेक्शनों और मॉड्यूल्स के निर्माण की प्रक्रिया शुरू होती है।
इस मौके पर भारतीय नौसेना के रियर एडमिरल कपिल मेहता, एनएम, एसीडब्ल्यूपी एंड ए ने स्टील कटिंग कर निर्माण कार्य की औपचारिक शुरुआत की। इस प्रोजेक्ट के तहत यार्ड नंबर 531 से 536 तक कुल छह जहाजों (हल) का निर्माण किया जाना है। सीएसएल में आयोजित समारोह के दौरान भारतीय नौसेना और शिपयार्ड के अधिकारियों ने इस परियोजना की प्रगति की समीक्षा भी की। (Indian Navy NGMV)
कितना बड़ा होगा यह युद्धपोत?
एनजीएमवी आकार में फ्रिगेट या डिस्ट्रॉयर जितना बड़ा नहीं होगा, लेकिन इसकी मारक क्षमता काफी अधिक होगी।
जहाज का डिस्प्लेसमेंट लगभग 1,400 टन होगा। इसकी लंबाई करीब 89 मीटर होगी और इसमें लगभग 80 नौसैनिक तैनात किए जा सकेंगे।
यह जहाज 35 नॉट से अधिक की रफ्तार पर चलेगा। तेज गति और कम रडार सिग्नेचर के कारण यह दुश्मन के लिए चुनौतीपूर्ण लक्ष्य साबित हो सकता है।
इस पोत का मुख्य काम दुश्मन के युद्धपोतों, व्यापारिक जहाजों और महत्वपूर्ण तटीय ठिकानों पर तेज हमला करना है। हमला करने के बाद यह तेजी से इलाका छोड़ सकता है, जिससे इसे पकड़ना मुश्किल हो जाता है।
भारतीय नौसेना इसे एंटी-सरफेस वॉरफेयर और मैरीटाइम स्ट्राइक मिशनों के लिए इस्तेमाल करेगी। इसके अलावा यह तटीय क्षेत्रों की सुरक्षा और समुद्र में मौजूद महत्वपूर्ण एनर्जी और इकॉनमिक एसेट्स की सुरक्षा भी करेगा।
इसकी सबसे बड़ी भूमिका सी डिनायल है। यानी ऐसे समुद्री मार्गों और जलक्षेत्रों में दुश्मन के जहाजों की आवाजाही रोकना, जहां से होकर महत्वपूर्ण समुद्री यातायात गुजरता है। (Indian Navy NGMV)
ब्रह्मोस मिसाइल से होगा लैस
एनजीएमवी की सबसे बड़ी ताकत इसकी मिसाइल क्षमता होगी। सूत्रों के मुताबिक प्रत्येक जहाज में आठ एंटी शिप ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइलें तैनात की जा सकेंगी। ब्रह्मोस मिसाइल भारतीय नौसेना की सबसे घातक एंटी-शिप और लैंड अटैक मिसाइलों में शामिल है।
यह मिसाइल ध्वनि की गति से लगभग तीन गुना तेज गति से उड़ान भर सकती है और समुद्र तथा जमीन दोनों पर लक्ष्य भेद सकती है। छोटे साइज के युद्धपोत पर आठ ब्रह्मोस मिसाइलों की तैनाती उसे काफी मारक क्षमता देती है। ऐसे कई जहाज एक साथ ऑपरेट करें तो वे बड़े नौसैनिक बेड़े के लिए भी गंभीर चुनौती पैदा कर सकते हैं।
यह मिसाइल ध्वनि की गति से लगभग तीन गुना तेज गति से उड़ान भर सकती है और समुद्र तथा जमीन दोनों पर लक्ष्य भेद सकती है।
जनवरी 2023 में रक्षा अधिग्रहण परिषद ने नेक्स्ट जेनरेशन मिसाइल वेसल के लिए ब्रह्मोस मिसाइल लॉन्चर और फायर कंट्रोल सिस्टम को मंजूरी दी थी। इसके बाद भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड को कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड से सेंसर, वेपन सिस्टम्स, फायर कंट्रोल सिस्टम और कम्युनिकेशन सिस्टम्स की सप्लाई के लिए लगभग 2,118 करोड़ रुपये का ऑर्डर मिला था। (Indian Navy NGMV)
एयर डिफेंस के लिए भी होंगे आधुनिक सिस्टम
सूत्रों के मुताबिक जहाज में 24 वर्टिकल लॉन्च सिस्टम सेल लगाए जाएंगे, जिनमें वर्टिकल लॉन्च शॉर्ट रेंज सरफेस टू एयर मिसाइलें (VL-SRSAM) तैनात की जा सकेंगी।
इसके अलावा नजदीकी खतरे से बचाव के लिए 30 मिमी एके-630 गन सिस्टम भी लगाया जाएगा। एडवांस्ड वेपंस एंड इक्विपमेंट इंडिया लिमिटेड (AWEIL) ने सीएसएल को 12 स्वदेशी एके-630 नेवल गन सप्लाई की है।
सूत्रों ने बताया कि छह नए वॉरशिप्स पर 12 एके-630 गनें लगाई जाएंगी।
यह सिस्टम आने वाली एंटी-शिप मिसाइलों, ड्रोन और कम ऊंचाई पर उड़ने वाले टारगेट्स को निशाना बना सकता है। जहाज में आधुनिक रडार, फायर कंट्रोल सिस्टम, इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर उपकरण और कम्युनिकेशन सिस्टम भी लगाए जाएंगे। (Indian Navy NGMV)
जीई एलएम2500 गैस टर्बाइन इंजन से लैस
एनजीएमवी को रेज रफ्तार देने के लिए गैस टर्बाइन आधारित प्रोपल्शन सिस्टम लगाया जा रहा है। मार्च 2024 में सीएसएल ने हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड के साथ छह जीई एलएम2500 गैस टर्बाइन इंजन की सप्लाई का समझौता किया था। इस कॉन्ट्रैक्ट का कीमत लगभग 1,173 करोड़ रुपये थी।
इसके अलावा अप्रैल 2026 नॉर्वे की कंपनी कोंग्सबर्ग से 18 कामेवा वाटरजेट सिस्टम खरीदे गए हैं। प्रत्येक जहाज में तीन वाटरजेट लगाए जाएंगे। वाटरजेट तकनीक से जहाज को तेज गति, बेहतर संचालन क्षमता और उथले समुद्री इलाकों में ऑपरेशन करने में फायदा मिलता है।
स्टेल्थ डिजाइन पर विशेष ध्यान
एनजीएमवी को स्टेल्थ तकनीक के साथ डिजाइन किया गया है। जहाज का रडार क्रॉस सेक्शन कम रखा जाएगा ताकि दुश्मन के रडार पर इसकी पहचान मुश्किल हो। इसके अलावा इंफ्रारेड और ध्वनिक सिग्नेचर कम करने के उपाय भी किए जा रहे हैं। इससे जहाज को समुद्री अभियानों के दौरान अतिरिक्त सुरक्षा मिलती है। (Indian Navy NGMV)
बना चुका है विक्रांत और माहे-क्लास ASW
कोचिन शिपयार्ड भारतीय नौसेना के लिए पहले भी कई महत्वपूर्ण परियोजनाएं पूरी कर चुका है। सीएसएल ने भारत का पहला स्वदेशी विमानवाहक पोत आईएनएस विक्रांत बनाया था, जिसे 2 सितंबर 2022 को भारतीय नौसेना में शामिल किया गया था। लगभग 45,000 टन वजनी आईएनएस विक्रांत भारत का सबसे बड़ा स्वदेशी युद्धपोत है।
इसके अलावा सीएसएल ने आईएनएस अन्वेष नामक मिसाइल रेंज इंस्ट्रूमेंटेशन शिप भी बनाया है, जिसका इस्तेमाल बैलिस्टिक मिसाइल परीक्षणों के दौरान किया जाता है।
शिपयार्ड माहे-क्लास एंटी-सबमरीन वॉरफेयर शैलो वॉटर क्राफ्ट प्रोजेक्ट पर भी काम कर रहा है। इस कार्यक्रम के तहत आठ जहाज बनाए जा रहे हैं, जिनमें आईएनएस माहे और आईएनएस मालवन पहले ही नौसेना को सौंपे जा चुके हैं। वहीं, आईएनएस मांगरोल अगस्त 2026 में भारतीय नौसेना को सौंप दिया गया है।
जबकि इस प्रोजेक्ट के तहत बनने वाले बाकी पांच जहाज आईएनएस मंगला, आईएनएस मलपे, आईएनएस मन्नापाद और अन्य जहाज अभी निर्माण या लॉन्चिंग के विभिन्न चरणों में हैं। इनमें से कुछ जहाजों का स्ट्रक्टर तैयार हो चुका है, जबकि कुछ निर्माण के आखिरी चरण में हैं। (Indian Navy NGMV)
दो स्तर की समुद्री सुरक्षा जरूरी
रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण हिंद महासागर क्षेत्र में चीन की बढ़ती समुद्री गतिविधियों और पाकिस्तान की हरकतों को देखते हुए भारत को दो स्तर की समुद्री सुरक्षा व्यवस्था की जरूरत है। एक तरफ गहरे समुद्र में ऑपरेशन करने वाले बड़े युद्धपोत होने चाहिए, जबकि दूसरी तरफ तटीय क्षेत्रों में तेजी से प्रतिक्रिया देने वाले युद्धपोत भी जरूरी हैं।
भारत के प्रोजेक्ट-15बी डेस्ट्रॉयर और प्रोजेक्ट-17ए फ्रिगेट लंबी दूरी तक निगरानी और हमला करने में सक्षम हैं। हालांकि, इतने बड़े युद्धपोतों को हर महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग या चोकपॉइंट पर लगातार तैनात करना संभव नहीं है।
ऐसी स्थिति में छह नेक्स्ट जेनरेशन मिसाइल वेसल (NGMV) महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। इन्हें पश्चिमी तट, लक्षद्वीप के आसपास के समुद्री मार्गों और अन्य संवेदनशील क्षेत्रों में तैनात किया जा सकता है। तटीय क्षेत्रों में तैनात ब्रह्मोस मिसाइल बैटरियों के साथ मिलकर ये युद्धपोत समुद्र और तट दोनों पर एक मजबूत रक्षा नेटवर्क तैयार करते हैं, जिससे भारत की समुद्री सुरक्षा और निगरानी क्षमता और मजबूत होती है। (Indian Navy NGMV)
Author
हरेंद्र चौधरी रक्षा पत्रकारिता (Defence Journalism) में सक्रिय हैं और RakshaSamachar.com से जुड़े हैं। वे लंबे समय से भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना से जुड़ी रणनीतिक खबरों, रक्षा नीतियों और राष्ट्रीय सुरक्षा से संबंधित मुद्दों को कवर कर रहे हैं। पत्रकारिता के अपने करियर में हरेंद्र ने संसद की गतिविधियों, सैन्य अभियानों, भारत-पाक और भारत-चीन सीमा विवाद, रक्षा खरीद और ‘मेक इन इंडिया’ रक्षा परियोजनाओं पर विस्तृत लेख लिखे हैं। वे रक्षा मामलों की गहरी समझ और विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण के लिए जाने जाते हैं।







