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India Strengthens Defence Ties: भारत ऐसे साध रहा है अमेरिका और रूस को, अमेरिकी ‘प्रेडेटर’ ड्रोन के बाद रूस से खरीद रहे पैंट्सिर एयर डिफेंस सिस्टम और स्टेल्थ फ्रिगेट्स

India Strengthens Defence Ties with US and Russia: After US Predator Drones, India Acquires Pantsir Air Defence System and Stealth Frigates from Russia
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📍नई दिल्ली | 13 Nov, 2024, 2:16 PM

India Strengthens Defence Ties: भारत ने हाल ही में 34,500 करोड़ रुपये के सौदे के तहत अमेरिका से 31 ‘प्रेडेटर’ ड्रोन खरीदने की घोषणा की थी, अब देश लंबे समय से चले आ रहे रूस के साथ रक्षा संबंधों को फिर से संतुलित करने की दिशा में कदम बढ़ा रहा है।

India Strengthens Defence Ties with US and Russia: After US Predator Drones, India Acquires Pantsir Air Defence System and Stealth Frigates from Russia

इंडिया टुडे के डिफेंस एडिटर प्रदीप सागर इंडिया टुडे मैगजीन में लिखते हैं कि रक्षा क्षेत्र में इस संतुलन की प्रक्रिया को और मजबूत करने के लिए, भारत में रूस के उप प्रधानमंत्री डेनिस मंटूरोव दो दिवसीय दौरे पर पहुंचे हैं। इस दौरान, दोनों देशों के बीच चल रही रणनीतिक सहयोग की समीक्षा की जाएगी। इसके बाद, भारतीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह अगले कुछ दिनों में मास्को का दौरा करेंगे, जहां वह इंडो-रूसी अंतर सरकारी सैन्य तकनीकी सहयोग आयोग (IRIGC-M&MTC) की बैठक में भाग लेंगे। यह आयोग भारत और रूस के बीच सैन्य और तकनीकी सहयोग की निगरानी करता है।

यह घटनाक्रम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अक्टूबर में कज़ान में आयोजित BRICS शिखर सम्मेलन में भाग लेने के बाद सामने आया है, जब रूस ने इस सम्मेलन की अध्यक्षता की थी। इसके अलावा, 8 नवंबर को भारतीय राज्य-निर्मित रक्षा कंपनी भारत डायनामिक्स लिमिटेड (BDL) और रूस की प्रमुख हथियार निर्यातक संस्था रोसोबोरोनएक्सपोर्ट के बीच पैंटसिर एयर डिफेंस सिस्टम के विभिन्न संस्करणों के संयुक्त विकास के लिए एक समझौता हुआ।

इस बीच, मंटूरोव की भारत यात्रा के दौरान, उन्होंने 12 नवंबर को विदेश मंत्री एस. जयशंकर के साथ मिलकर रूस-भारत व्यापार, आर्थिक, वैज्ञानिक, तकनीकी और सांस्कृतिक सहयोग पर 25वीं द्विपक्षीय बैठक की सहअध्यक्षता की।

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वैश्विक गठबंधनों में बदलाव और पश्चिमी प्रभाव के बावजूद, रूस से रक्षा खरीदारी भारत की सैन्य आधुनिकीकरण योजना का अहम हिस्सा बनी हुई है। रूस के साथ भारत का सामरिक संबंध दशकों पुराना है, और इन खरीदारी से भारत को अपनी रक्षा क्षमता को बढ़ाने और क्षेत्रीय खतरों से निपटने में मदद मिलती है।

रूस ने पिछले दो दशकों में भारत को 60 बिलियन डॉलर (करीब 5.06 लाख करोड़ रुपये) से ज्यादा की रक्षा आपूर्ति की है, जिसमें लगभग 65 प्रतिशत भारतीय रक्षा खरीदारी शामिल है। हालांकि, यूक्रेन युद्ध और रूस पर पश्चिमी प्रतिबंधों के खतरे को देखते हुए, भारत अब अपनी रक्षा आपूर्तिकर्ताओं की विविधता पर भी जोर दे रहा है।

अब, अमेरिका से ड्रोन सौदे के बाद, भारत रूस से दो स्टेल्थ फ्रिगेट्स प्राप्त करने के लिए तैयार है। ये फ्रिगेट्स 2018 में 2.5 बिलियन डॉलर (21,100 करोड़ रुपये) के सौदे के तहत रूस के यंतर शिपयार्ड में बनाए गए हैं। पहले फ्रिगेट को INS तुषिल के रूप में भारतीय नौसेना में शामिल किया जाएगा।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह अपने रूस दौरे के दौरान केवल अपने समकक्ष के साथ बातचीत नहीं करेंगे, बल्कि INS तुषिल का कमीशन भी करेंगे। दूसरा फ्रिगेट, INS तमल, अगले साल की शुरुआत में भारत को सौंपे जाने की उम्मीद है।

नौसैनिक सूत्रों के अनुसार, ये फ्रिगेट्स ब्रह्मोस क्रूज मिसाइल और उन्नत रडार प्रणालियों से लैस होंगे, जो भारतीय नौसेना की सतही मुकाबला क्षमताओं को मजबूती देंगे। यह अधिग्रहण 2016 में भारत और रूस के बीच चार अतिरिक्त स्टेल्थ फ्रिगेट्स के लिए किए गए इंटर-गवर्नमेंटल समझौते का हिस्सा है।

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इन फ्रिगेट्स के अलावा, भारत 2025 तक रूस से एक और परमाणु पनडुब्बी लीज पर लेने की योजना बना रहा है, हालांकि इसकी डिलीवरी 2028 तक हो सकती है। रूस एस-400 मिसाइल रक्षा प्रणाली की बाकी दो स्क्वाड्रन भी तेजी से भारत को सौंपने की तैयारी कर रहा है।

सर्द युद्ध युग से ही भारत ने रूस (पूर्व सोवियत संघ) को अपनी प्रमुख रक्षा आपूर्तिकर्ता के रूप में अपनाया है। रूस के लड़ाकू विमानों, टैंक और पनडुब्बियों से लेकर भारत की सैन्य क्षमता का आधार बन चुके हैं। इन उपकरणों की लागत-कुशलता, परिचितता और विश्वसनीयता के कारण भारत का रक्षा संबंध रूस से काफी मजबूत रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि भारत का अमेरिका और रूस दोनों के साथ संतुलित संबंध बनाना, उसे जरूरी सैन्य क्षमताओं को सुरक्षित रखते हुए वैश्विक राजनीति में अपनी रणनीतिक स्वायत्तता बनाए रखने में मदद करेगा।

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  • herry passport

    हरेंद्र चौधरी रक्षा पत्रकारिता (Defence Journalism) में सक्रिय हैं और RakshaSamachar.com से जुड़े हैं। वे लंबे समय से भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना से जुड़ी रणनीतिक खबरों, रक्षा नीतियों और राष्ट्रीय सुरक्षा से संबंधित मुद्दों को कवर कर रहे हैं। पत्रकारिता के अपने करियर में हरेंद्र ने संसद की गतिविधियों, सैन्य अभियानों, भारत-पाक और भारत-चीन सीमा विवाद, रक्षा खरीद और ‘मेक इन इंडिया’ रक्षा परियोजनाओं पर विस्तृत लेख लिखे हैं। वे रक्षा मामलों की गहरी समझ और विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण के लिए जाने जाते हैं।

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