📍नई दिल्ली | 21 May, 2026, 8:25 PM
SOF Week 2026 USA: भारतीय सेना ने अमेरिका में आयोजित दुनिया के सबसे बड़े स्पेशल ऑपरेशंस इवेंट्स में से एक “एसओएफ वीक 2026” में हिस्सा लिया। यह कार्यक्रम 18 से 21 मई तक अमेरिका के फ्लोरिडा राज्य के टैम्पा शहर में आयोजित किया गया। भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व वेस्टर्न कमांड के जीओसी-इन-सी लेफ्टिनेंट जनरल पुष्पेंद्र पाल सिंह ने किया, जिन्हें भारतीय सशस्त्र बलों के सबसे वरिष्ठ कार्यरत स्पेशल फोर्सेस अधिकारियों में गिना जाता है। एसओएफ वीक में दुनिया भर के स्पेशल ऑपरेशंस फोर्सेज, रक्षा उद्योगों और सैन्य रणनीतिक विशेषज्ञों ने हिस्सा लिया।
SOF Week 2026 USA: 70 से ज्यादा देशों के प्रतिनिधि पहुंचे
एसओएफ वीक 2026 का आयोजन यूनाइटेड स्टेट्स स्पेशल ऑपरेशंस कमांड (यूएसएसओकॉम) और ग्लोबल एसओएफ फाउंडेशन ने मिलकर किया। इस कार्यक्रम में 70 से ज्यादा देशों के प्रतिनिधि शामिल हुए। आयोजन में लगभग 28 हजार प्रतिभागियों और 850 से ज्यादा डिफेंस एग्जिबिटर्स ने हिस्सा लिया।
इस दौरान सैन्य रणनीति, स्पेशल ऑपरेशंस, आधुनिक युद्ध तकनीक, इंडस्ट्री सहयोग और भविष्य की सुरक्षा चुनौतियों पर कई चर्चाएं हुईं। भारतीय प्रतिनिधिमंडल ने भी कई देशों के स्पेशल फोर्सेस कमांडरों के साथ बैठकें कीं और अलग-अलग सैन्य तकनीकों का अवलोकन किया।
भारतीय सेना ने पहली बार किया बड़ा प्रदर्शन
इस बार भारतीय सेना ने पहली बार “कैपेबिलिटी डेमोंस्ट्रेशन” यानी कैपेक्स में हिस्सा लिया। यह एसओएफ वीक का सबसे महत्वपूर्ण लाइव प्रदर्शन माना जाता है।
20 मई को टैम्पा वॉटरफ्रंट पर “बैटल इन द बे” नाम से लाइव ऑपरेशनल डेमो आयोजित किया गया। इसमें अमेरिकी स्पेशल फोर्सेस के साथ 10 पार्टनर देशों की टुकड़ियां शामिल हुईं। भारतीय स्पेशल फोर्सेस ने भी इसमें अपनी क्षमताओं का प्रदर्शन किया।
भारतीय टीम ने काउंटर टेररिज्म, जंगल युद्ध, हाई-ऑल्टीट्यूड कॉम्बैट और अनकन्वेंशनल वॉरफेयर से जुड़ी क्षमताएं दिखाई। रक्षा अधिकारियों के मुताबिक यह भारतीय स्पेशल फोर्सेस के लिए अंतरराष्ट्रीय मंच पर बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है।
बता दें कि लेफ्टिनेंट जनरल पुष्पेंद्र पाल सिंह भारतीय सेना की पैराशूट रेजिमेंट की 4 पैरा स्पेशल फोर्सेस यूनिट से जुड़े रहे हैं। उन्हें करीब चार दशक का सैन्य अनुभव है। उन्होंने सियाचिन, जम्मू-कश्मीर, एलओसी और उत्तर-पूर्व के कई ऑपरेशंस में हिस्सा लिया है।
उन्होंने ऑपरेशन पवन, ऑपरेशन मेघदूत और कई काउंटर इंसर्जेंसी मिशनों में भी काम किया है। अप्रैल 2026 में उन्होंने वेस्टर्न कमांड की कमान संभाली थी। सेना में उन्हें स्पेशल फोर्सेस ऑपरेशंस का विशेषज्ञ माना जाता है।
Indian Armed Forces participate in SOF Week 2026 in the US 🇮🇳🇺🇸
A high-level Indian Armed Forces delegation led by Lt Gen Pushpendra Pal Singh participated in SOF Week 2026 held at Tampa from 18–21 May 2026.
Jointly hosted by United States Special Operations Command and the… pic.twitter.com/1WIvoayRG7— Raksha Samachar | रक्षा समाचार 🇮🇳 (@RakshaSamachar) May 21, 2026
भारतीय पैरा एसएफ की खासियत क्या है
भारतीय पैरा स्पेशल फोर्सेस दुनिया की अनुभवी स्पेशल यूनिट्स में गिनी जाती हैं। इन्हें ऊंचाई वाले इलाकों, जंगलों और आतंकवाद विरोधी अभियानों में विशेषज्ञता हासिल है।
सियाचिन और लद्दाख जैसे इलाकों में हाई-ऑल्टीट्यूड ऑपरेशंस से लेकर जम्मू-कश्मीर में काउंटर टेररिज्म मिशनों तक इन यूनिट्स ने कई बार अपनी क्षमता साबित की है।
उत्तर-पूर्व के घने जंगलों में भी भारतीय स्पेशल फोर्सेस लंबे समय से ऑपरेशन करती रही हैं। अपने इसी अनुभव को एसओएफ वीक जैसे मंच पर सेना ने लाइव प्रदर्शन किया।
आधुनिक युद्ध तकनीकों पर चर्चा
एसओएफ वीक के दौरान भारतीय प्रतिनिधिमंडल ने एडवांस डिफेंस टेक्नोलॉजी और इंडस्ट्री एग्जिबिशन का भी दौरा किया। यहां ड्रोन, इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सिस्टम, नाइट विजन, एआई आधारित सिस्टम और आधुनिक कम्युनिकेशन तकनीकों का प्रदर्शन किया गया।
रक्षा अधिकारियों के मुताबिक ऐसे आयोजनों से अलग-अलग देशों की सेनाओं को नई तकनीकों और ऑपरेशनल अनुभवों को समझने का मौका मिलता है। भारतीय टीम ने भी कई देशों के साथ ऑपरेशनल अनुभव साझा किए।
भारत और अमेरिका के बीच बढ़ता सहयोग
भारत और अमेरिका के बीच पिछले कुछ वर्षों में रक्षा सहयोग तेजी से बढ़ा है। दोनों देशों के बीच कॉमकासा, लेमोआ और आईसीईटी जैसे कई महत्वपूर्ण समझौते हुए हैं।
भारतीय और अमेरिकी स्पेशल फोर्सेस पहले भी “वज्र प्रहार” और “तर्कश” जैसे संयुक्त अभ्यास कर चुकी हैं। एसओएफ वीक में भारत की भागीदारी को इसी बढ़ते सहयोग का हिस्सा माना जा रहा है।
भारतीय सेना के अधिकारियों का कहना है कि इस तरह के मंचों से इंटरऑपरेबिलिटी यानी अलग-अलग देशों की सेनाओं के बीच तालमेल बढ़ाने में मदद मिलती है। संयुक्त ऑपरेशंस के दौरान यह क्षमता काफी अहम मानी जाती है।
हाई-ऑल्टीट्यूड और जंगल युद्ध पर खास फोकस
भारतीय स्पेशल फोर्सेस की सबसे बड़ी ताकत हाई-ऑल्टीट्यूड और जंगल वॉरफेयर मानी जाती है। दुनिया की बहुत कम सेनाओं के पास सियाचिन जैसे बर्फीले इलाके में लंबे समय तक ऑपरेशन चलाने का अनुभव है।
इसी तरह उत्तर-पूर्व के घने जंगलों में काउंटर इंसर्जेंसी ऑपरेशंस का अनुभव भी भारतीय सेना को अलग पहचान देता है। एसओएफ वीक के दौरान भारतीय टीम ने इन्हीं क्षमताओं से जुड़े पहलुओं को प्रदर्शित किया।
डिफेंस इंडस्ट्री ने भी लिया हिस्सा
कार्यक्रम में कई बड़ी वैश्विक डिफेंस कंपनियों ने हिस्सा लिया। यहां आधुनिक हथियार, कम्युनिकेशन सिस्टम, स्पेशल ऑपरेशंस गियर और अनमैन्ड सिस्टम्स का प्रदर्शन किया गया।
सूत्रों के मुताबिक भारतीय प्रतिनिधिमंडल ने कई नई तकनीकों का अध्ययन किया। इसमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित सैन्य सिस्टम, छोटे ड्रोन, इलेक्ट्रॉनिक सर्विलांस और एडवांस नाइट ऑपरेशन उपकरण शामिल रहे।

