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अंधेरे में भी दुश्मन पर नजर रखेंगे सेना के नए नाइट विजन सिस्टम, BEL ने दिया जर्मेनियम लेंस के लिए 29.8 करोड़ रुपये का बड़ा ऑर्डर

जर्मेनियम लेंसेज सामान्य कैमरा लेंस की तरह नहीं होते। इनका इस्तेमाल खासतौर पर इन्फ्रारेड और थर्मल इमेजिंग सिस्टम्स में किया जाता है...

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📍नई दिल्ली | 21 May, 2026, 7:55 PM

BEL Germanium Lens Order: भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड ने गोवा की प्राइवेट डिफेंस कंपनी आरआरपी डिफेंस को करीब 29.8 करोड़ रुपये का बड़ा ऑर्डर दिया है। यह ऑर्डर हाई-प्रिसीजन जर्मेनियम लेंसेज की सप्लाई के लिए है, जिनका इस्तेमाल थर्मल इमेजिंग और इन्फ्रारेड डिफेंस सिस्टम्स में किया जाता है। ये लेंसेज नाइट विजन डिवाइसेज, थर्मल कैमरों, सर्विलांस सिस्टम्स और हथियारों की साइट्स का अहम हिस्सा होते हैं।

बीईएल देश की सबसे बड़ी डिफेंस इलेक्ट्रॉनिक्स कंपनियों में शामिल है। भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना के लिए बनने वाले कई एडवांस सिस्टम्स में ऐसे इन्फ्रारेड ऑप्टिकल पार्ट्स की जरूरत पड़ती है।

BEL Germanium Lens Order: क्या होते हैं जर्मेनियम लेंसेज

जर्मेनियम लेंसेज सामान्य कैमरा लेंस की तरह नहीं होते। इनका इस्तेमाल खासतौर पर इन्फ्रारेड और थर्मल इमेजिंग सिस्टम्स में किया जाता है। सामान्य ऑप्टिकल ग्लास इन्फ्रारेड रेडिएशन को ठीक से पास नहीं होने देता, जबकि जर्मेनियम इन्फ्रारेड तरंगों को आसानी से ट्रांसमिट कर सकता है।

इसी वजह से सेना के थर्मल कैमरे, नाइट विजन डिवाइसेज और हथियारों की थर्मल साइट्स में जर्मेनियम का इस्तेमाल किया जाता है। रात में, धुंध में, धुएं में या कम दृश्यता वाले इलाकों में सैनिक इन्हीं सिस्टम्स की मदद से दुश्मन की गतिविधियों को देख पाते हैं।

रक्षा विशेषज्ञों के मुताबिक आधुनिक युद्ध में थर्मल इमेजिंग बेहद जरूरी हो चुकी है। सीमा पर निगरानी से लेकर ड्रोन, टैंक और हथियार सिस्टम्स तक में इसका इस्तेमाल बढ़ रहा है।

बीईएल ने क्यों दिया यह ऑर्डर

बीईएल कई तरह के डिफेंस इलेक्ट्रॉनिक्स सिस्टम बनाती है। कंपनी के प्रोडक्ट्स में रडार, इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सिस्टम, कम्युनिकेशन सिस्टम, मिसाइल इलेक्ट्रॉनिक्स और नाइट विजन डिवाइसेज शामिल हैं।

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इनमें इस्तेमाल होने वाले थर्मल और इन्फ्रारेड सिस्टम्स के लिए हाई-क्वालिटी ऑप्टिकल लेंसेज की जरूरत होती है। आरआरपी डिफेंस अब बीईएल की तकनीकी जरूरतों के मुताबिक इन लेंसेज को डिजाइन, इंजीनियर और कस्टमाइज करेगी।

आरआरपी ग्रुप ऑफ कंपनीज के फाउंडर और चेयरमैन राजेंद्र चोडणकर ने कहा कि बीईएल से मिला यह ऑर्डर आरआरपी डिफेंस की एडवांस इलेक्ट्रो-ऑप्टिक्स और हाई-प्रिसीजन ऑप्टिकल इंजीनियरिंग क्षमताओं पर बड़ा भरोसा दिखाता है। उन्होंने कहा कि जर्मेनियम लेंसेज़ किसी भी थर्मल इमेजिंग सिस्टम का बेहद महत्वपूर्ण हिस्सा होते हैं और यही किसी सिस्टम की परफॉर्मेंस और विश्वसनीयता तय करते हैं।

उन्होंने कहा कि भारत तेजी से स्वदेशी रक्षा तकनीकों पर फोकस बढ़ा रहा है और आरआरपी डिफेंस का लक्ष्य भारत में डिजाइन और भारत में निर्माण वाले विश्वस्तरीय इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल सिस्टम विकसित करना है। राजेंद्र चोडणकर के मुताबिक कंपनी ऐसे सिस्टम तैयार कर रही है जिनका इस्तेमाल केवल भारतीय सुरक्षा जरूरतों के लिए ही नहीं, बल्कि वैश्विक स्तर पर भी किया जा सके।

राजेंद्र चोडणकर के मुताबिक बीईएल के साथ लगातार बढ़ता सहयोग इस बात का संकेत है कि दोनों कंपनियां इनोवेशन, सटीक तकनीक और टेक्नोलॉजिकल आत्मनिर्भरता के जरिए भारत की रक्षा तैयारियों को मजबूत करने की साझा सोच के साथ काम कर रही हैं।

आरआरपी डिफेंस गोवा बेस्ड निजी रक्षा कंपनी है, जो इलेक्ट्रो-ऑप्टिक्स और थर्मल इमेजिंग सिस्टम्स पर काम करती है। कंपनी आरआरपी ग्रुप का हिस्सा है।

आरआरपी ग्रुप पिछले कुछ समय से डिफेंस और सेमीकंडक्टर सेक्टर में तेजी से निवेश कर रहा है। समूह की प्रमुख कंपनी आरआरपी इलेक्ट्रॉनिक्स महाराष्ट्र की पहली ओसैट यानी “आउटसोर्स्ड सेमीकंडक्टर असेंबली एंड टेस्ट” सुविधा चला रही है।

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नवी मुंबई के महापे इलाके में स्थित यह सुविधा ऑटोमोटिव, टेलीकॉम, इंडस्ट्रियल और डिफेंस सेक्टर के लिए सेमीकंडक्टर पैकेजिंग और टेस्टिंग सेवाएं देती है।

ग्रुप ने महाराष्ट्र के खालापुर इलाके में बड़ा सेमीकंडक्टर कैंपस बनाने की भी योजना बनाई है। इसके लिए 100 एकड़ से ज्यादा जमीन ली गई है।

थर्मल इमेजिंग सिस्टम्स में क्यों जरूरी हैं ये लेंसेज

थर्मल इमेजिंग सिस्टम्स शरीर, वाहन या किसी वस्तु से निकलने वाली गर्मी को पहचानते हैं। इसके जरिए सैनिक अंधेरे में भी दुश्मन को देख सकते हैं।

जर्मेनियम लेंसेज इस सिस्टम का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा माने जाते हैं, क्योंकि वे इन्फ्रारेड सिग्नल्स को सेंसर तक पहुंचाते हैं।

इनका इस्तेमाल कई सैन्य उपकरणों में जैसे नाइट विजन साइट्स, थर्मल वेपन साइट्स, बॉर्डर सर्विलांस कैमरे, ड्रोन पेलोड्स, टारगेट ट्रैकिंग सिस्टम्स और व्हीकल बेस्ड सर्विलांस सिस्टम्स में होता है। वहीं आधुनिक सीमा सुरक्षा और आतंकवाद विरोधी अभियानों में ऐसे सिस्टम्स की मांग तेजी से बढ़ी है।

चीन पर निर्भरता कम करने की कोशिश

जर्मेनियम का वैश्विक उत्पादन सीमित देशों में होता है। रिपोर्ट्स के मुताबिक चीन इस क्षेत्र में बड़ी हिस्सेदारी रखता है। इसी वजह से कई देश अब घरेलू उत्पादन बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं।

भारत भी लंबे समय से ऐसे संवेदनशील डिफेंस कंपोनेंट्स के लिए आयात पर निर्भर रहा है। अब सरकार और निजी कंपनियां मिलकर लोकल सप्लाई चेन विकसित करने पर काम कर रही हैं।

यह ऑर्डर बीईएल और आरआरपी ग्रुप के बीच हुए एक बड़े समझौते के बाद आया है। दोनों कंपनियों ने डिफेंस इलेक्ट्रॉनिक्स, सेमीकंडक्टर्स, इलेक्ट्रो-ऑप्टिक्स, ड्रोन और एडवांस टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने के लिए एमओयू साइन किया था।

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हालांकि उस समझौते की पूरी वित्तीय जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई थी, लेकिन अब यह ऑर्डर उस साझेदारी का पहला बड़ा परिणाम माना जा रहा है।

हालांकि आरआरपी डिफेंस केवल ऑप्टिकल लेंसेज तक सीमित नहीं है। कंपनी थर्मल साइट्स, थर्मल कैमरों और सर्विलांस सिस्टम्स पर भी काम कर रही है। कंपनी ने पहले रक्षा मंत्रालय से डिजिटल स्पॉटर स्कोप्स का ऑर्डर भी हासिल किया था। इसके अलावा लॉन्ग-रेंज थर्मल इमेजिंग कैमरे और स्मार्ट थर्मल साइट्स के क्षेत्र में भी काम चल रहा है।

ग्रुप ड्रोन टेक्नोलॉजी में भी निवेश कर रहा है। “ड्रोन-इन-अ-बॉक्स” जैसे ऑटोनॉमस सिस्टम्स पर काम किया जा रहा है, जिन्हें कठिन परिस्थितियों में इस्तेमाल किया जा सकता है।

विदेशी कंपनियों के साथ तकनीकी साझेदारी

आरआरपी ग्रुप ने कई विदेशी कंपनियों के साथ भी तकनीकी सहयोग समझौते किए हैं। इसमें इजरायल की मेप्रोलाइट और बुल्गारिया की ऑप्टिक्स जैसी कंपनियां शामिल हैं।

इन साझेदारियों के जरिए कंपनी एडवांस इलेक्ट्रो-ऑप्टिक्स और थर्मल टेक्नोलॉजी भारत में विकसित करने की कोशिश कर रही है। वहीं, कंपनी का फोकस केवल भारतीय सेना ही नहीं, बल्कि वैश्विक रक्षा बाजार के लिए भी सिस्टम तैयार करने पर है।

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