📍नई दिल्ली | 23 Sep, 2026, 2:14 PM
Indian Navy LCU Mk-V: भारतीय नौसेना अपने एम्फीबियस ऑपरेशन और द्वीपीय इलाकों में सैन्य रसद पहुंचाने और आपदा राहत मिशनों की क्षमता को नई मजबूती देने की तैयारी कर रही है। रक्षा मंत्रालय के तहत नौसेना के शिप प्रोडक्शन निदेशालय ने छह नए लैंडिंग क्राफ्ट यूटिलिटी एमके-5 (एलसीयू एमके-5) के निर्माण के लिए रिक्वेस्ट फॉर इंफॉर्मेशन (आरएफआई) जारी की है।
ये नए जहाज मौजूदा एलसीयू एमके-4 के मुकाबले में काफी बड़े, ज्यादा दूरी तक ऑपरेशन करने वाले और बेहतर हथियारों तथा सेंसरों से लैस होंगे। इनका इस्तेमाल सैनिकों, टैंकों, आर्मर्ड व्हीकल्स, सैन्य उपकरणों और आपदा राहत सामग्री को तटीय क्षेत्रों तथा द्वीपों तक पहुंचाना होगा।
Indian Navy LCU Mk-V: मौजूदा एलसीयू एमके-4 से होगा कितना अलग
भारतीय नौसेना के पास वर्तमान में आठ एलसीयू एमके-4 जहाज हैं। इन्हें कोलकाता स्थित गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स (जीआरएसई) ने बनाया था। साल 2017 से 2021 के बीच एल-51 से एल-58 तक सभी जहाज नौसेना में शामिल किए गए।
ये जहाज लगभग 63 मीटर लंबे हैं और इनका वजन करीब 1,000 टन तक हैं। इनका मुख्य ऑपरेशन एरिया अंडमान एवं निकोबार कमांड है।
वहीं, नई पीढ़ी के एलसीयू एमके-5 लगभग 85 मीटर लंबे होंगे और वजन करीब 1,500 टन रखा गया है। यानी आकार और वहन क्षमता दोनों में यह पहले के जहाजों से काफी बड़ा होगा।
आरएफआई के मुताबिक जहाज की अधिकतम गति कम से कम 15 नॉट तक होगी। इसकी ऑपरेशनल रेंज करीब 4,500 समुद्री मील होगी, जो मौजूदा एलसीयू के मुकाबले लगभग तीन गुना अधिक है।
टैंक और सैनिकों को सीधे तट तक पहुंचाने की क्षमता
एलसीयू एमके-5 का मुख्य उद्देश्य समुद्र से सीधे तट तक सैनिकों और सैन्य उपकरणों को पहुंचाना है।
नौसेना ने जहाज के लिए विशेष बीचिंग क्षमता मांगी है। इसका मतलब है कि जहाज बिना बंदरगाह के सीधे समुद्री तट पर जाकर उतर सके और अपने रैंप के जरिए टैंक, वाहन तथा सैनिकों को उतार सके।
आरएफआई के अनुसार जहाज में आगे की तरफ बड़ा बो डोर और रैंप होगा। इसके जरिए भारी सैन्य वाहन सीधे समुद्र तट पर उतर सकेंगे।
जहाज के अंदर बड़े वाहन डेक और कार्गो होल्ड की व्यवस्था होगी। इसमें विभिन्न कॉन्फिगरेशन में सैन्य उपकरण ले जाए जा सकेंगे।
आरएफआई के मुताबिक जहाज एक साथ चार मुख्य युद्धक टैंक और चार बीएमपी इन्फैंट्री फाइटिंग व्हीकल ले जा सकेगा। वैकल्पिक रूप से दस हेवी मिलिट्री व्हीकल्स या अन्य मिक्सड मिलिट्री मिश्रित वजन भी ले जाया जा सकेगा।
इसके अलावा जहाज में लगभग 190 सैनिक और पांच अधिकारी ले जाने की क्षमता होगी। जहाज का अपना चालक दल करीब 81 लोगों का होगा। (Indian Navy LCU Mk-V)
हिंद महासागर क्षेत्र में लंबी दूरी के मिशन
एलसीयू एमके-5 को पूरे हिंद महासागर क्षेत्र में ऑपरेशन के लिए डिजाइन किया जाएगा। जहाज को विभिन्न समुद्री परिस्थितियों में ऑपरेशन योग्य बनाया जाएगा। इसे सी स्टेट-5 तक सभी दिशाओं में ऑपरेशन और स्टेट-6 तक सुरक्षित यात्रा करने की क्षमता दी जाएगी। इससे यह जहाज लंबी दूरी के सैन्य और मानवीय अभियानों में भी इस्तेमाल किया जा सकेगा।
लगभग 30 दिन तक लगातार अभियान चलाने की क्षमता भी मांगी गई है। जहाज की अनुमानित लाइफ साइकिल कम से कम 30 साल रखी गई है। (Indian Navy LCU Mk-V)
हथियारों से भी होगा लैस
एलसीयू एमके-5 को सेल्फ डिफेंस के लिए कई आधुनिक हथियार प्रणालियों से लैस किया जाएगा। आरएफआई के अनुसार जहाज पर दो एके-630 क्लोज-इन वेपन सिस्टम लगाए जाएंगे। ये 30 मिमी की तेज फायरिंग वाली तोपें हैं जो मिसाइल, ड्रोन और कम दूरी के हवाई खतरों से रक्षा कर सकती हैं।
इसके अलावा दो 12.7 मिमी रिमोट कंट्रोल्ड गन भी लगाई जाएंगी।
जहाज में इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल इंफ्रारेड सर्च एंड ट्रैक सिस्टम (ईओआईआरएसटी), विजुअल शॉर्ट रेंज एयर डिफेंस सिस्टम (वीएसएचओआरएडीएस) और आधुनिक फायर कंट्रोल सिस्टम भी शामिल होंगे।
सुरक्षा के लिए ध्वनिक चेतावनी प्रणाली यानी एलआरएडी भी लगाने की मांग की गई है। (Indian Navy LCU Mk-V)
सेंसर और कम्युनिकेशन सिस्टम होंगे अत्याधुनिक
नौसेना ने जहाज में एडवांस सेंसर और कम्युनिकेशन सिस्टम्स भी लगाए जाएंगे। जहाज पर इंटीग्रेटेड ब्रिज सिस्टम, कॉम्बैट मैनेजमेंट सिस्टम, ड्यूल चैनल इको साउंडर, ऑटोमैटिक आइडेंटिफिकेशन सिस्टम (एआईएस), आईएफएफ एमके-12 और भारतीय नाविक आधारित जीएनएसएस रिसीवर लगाए जाएंगे।
कम्युनिकेशन के लिए एडवांस्ड कॉम्पोजिट कम्युनिकेशन सिस्टम, रुक्मिणी सैटकॉम, यूएचएफ सैटकॉम, इनमारसैट और जीएमडीएसएस जैसे सिस्टम्स शामिल होंगे। इलेक्ट्रॉनिक सपोर्ट मेजर (ईएसएम), जीएनएसएस जैमर और हल्के कॉमइंट सिस्टम भी जहाज का हिस्सा होंगे।
नौसेना चाहती है कि सभी सेंसर, हथियार और कमांड सिस्टम एक साझा नेटवर्क पर काम करें ताकि जहाज को नेटवर्क-सेंट्रिक ऑपरेशन में इस्तेमाल किया जा सके। (Indian Navy LCU Mk-V)
हेलीकॉप्टर और यूएवी का भी सपोर्ट
एलसीयू एमके-5 पर दो सात मीटर लंबी रिजिड हल बोट तैनात की जाएंगी। इनके अलावा चार जेमिनी नावें भी होंगी। जहाज पर भारी सामान उतारने के लिए क्रेन, टोइंग व्यवस्था और स्टर्न फ्यूलिंग सिस्टम लगाया जाएगा।
आरएफआई के मुताबिक जहाज में यूएवी या दूर से ऑपरेशन होने वाले मरीन सिस्टम्स के लिए लॉन्च और रिकवरी सिस्टम होना चाहिए। वहीं, कोस्टल सर्वे के लिए विशेष उपकरण और ऑटोनॉमस प्लेटफॉर्म ऑपरेशन की क्षमता भी होनी चाहिए। (Indian Navy LCU Mk-V)
दो डीजल इंजन से होगा लैस
नए एलसीयू एमके-5 में दो मुख्य डीजल इंजन लगाए जाएंगे। इनके साथ दो गियरबॉक्स और दो शाफ्टिंग सिस्टम होंगे। जहाज का निर्माण डीएमआर-249ए स्टील से किया जाएगा। इसके साथ डिजिटल ट्विन तकनीक, प्रोडक्ट डेट मैनेजमेंट और लाइफ साइकल मैनेजमेंट जैसी आधुनिक डिजिटल सिस्टम्सको शामिल कियाा जाएगा।
जहाज में इंटीग्रेटेड प्लेटफॉर्म मैनेजमेंट सिस्टम (आईपीएमएस) और बैटल डैमेज कंट्रोल सिस्टम भी होगा, जिससे इंजन, बिजली, मशीनरी और क्षति नियंत्रण की निगरानी एक ही कंट्रोल सेंटर से की जा सकेगी।
एनबीसी सुरक्षा और आपदा राहत पर विशेष जोर
नौसेना ने जहाज में न्यूक्लियर, बायोलॉजिकल और केमिकल (एनबीसी) सिक्योरिटी सिस्टम्स को भी शामिल किया है। जहाज में रेडिएशन डिटेक्शन सिस्टम, जैविक और रासायनिक एजेंट डिटेक्टर तथा ब्रिदिंग अप्रेटस चार्जिंग सिस्टम लगाए जाएंगे। आग लगने और बाढ़ जैसी आपात स्थितियों से निपटने के लिए एडवांस फायर फाइटिंग सिस्टम और डैमेज कंट्रोल सिस्टम भी होंगे।
इसके अलावा जहाज में रिवर्स ऑस्मोसिस आधारित वायर प्यूरीफिकेशन प्लांट और एयर कंडीशनिंग सिस्टम भी लगाए जाएंगे। (Indian Navy LCU Mk-V)
स्वदेशी श्रेणी में होगी खरीद
आरएफआई डॉक्युमेंट के मुताबिक भारतीय नौसेना ने इस प्रोजेक्ट को बाय (इंडियन-आईडीडीएम) कैटगेरी में रखा है। इसके तहत जहाज का डिजाइन भारत में डेवलप होना चाहिए और उसमें कम से कम 50 फीसदी स्वदेशी सामग्री का इस्तेमाल होना चाहिए। (Indian Navy LCU Mk-V)
Author
हरेंद्र चौधरी रक्षा पत्रकारिता (Defence Journalism) में सक्रिय हैं और RakshaSamachar.com से जुड़े हैं। वे लंबे समय से भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना से जुड़ी रणनीतिक खबरों, रक्षा नीतियों और राष्ट्रीय सुरक्षा से संबंधित मुद्दों को कवर कर रहे हैं। पत्रकारिता के अपने करियर में हरेंद्र ने संसद की गतिविधियों, सैन्य अभियानों, भारत-पाक और भारत-चीन सीमा विवाद, रक्षा खरीद और ‘मेक इन इंडिया’ रक्षा परियोजनाओं पर विस्तृत लेख लिखे हैं। वे रक्षा मामलों की गहरी समझ और विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण के लिए जाने जाते हैं।





