📍मुंबई | 31 Aug, 2026, 11:22 AM
INS Nipun Commissioned: भारतीय नौसेना ने सोमवार अपना दूसरा स्वदेशी डाइविंग सपोर्ट वेसल (डीएसवी) आईएनएस निपुण को औपचारिक रूप से सेवा में शामिल कर लिया। मुंबई स्थित नेवल डॉकयार्ड में आयोजित समारोह में नौसेना प्रमुख एडमिरल कृष्णास्वामिनाथन ने जहाज को कमीशन किया। इसके साथ ही भारतीय नौसेना की गहरे समुद्र में गोताखोरी, पानी के भीतर बचाव अभियान और पनडुब्बी रेस्क्यू क्षमता को बड़ी ताकत मिली है। बता दें कि 30 जुलाई को ही हिंदुस्तान शिपयार्ड लिमिटेड ने निपुण को नौसेना को सौंपा था।
आईएनएस निपुण (ए-17) को हिंदुस्तान शिपयार्ड लिमिटेड (एचएसएल), विशाखापत्तनम ने डिजाइन और निर्मित किया है। यह निस्तार-क्लास का दूसरा डाइविंग सपोर्ट वेसल है। इससे पहले इसी कैटेगरी का पहला जहाज आईएनएस निस्तार (ए-16) पिछले साल 18 जुलाई को विशाखापत्तनम में भारतीय नौसेना में शामिल किया गया था। इसे भी हिंदुस्तान शिपयार्ड लिमिटेड ने बनाया था।
INS Nipun Commissioned: नौसेना को हर तरह की स्थिति के लिए तैयार रहना जरूरी
आईएनएस निपुण को भारतीय नौसेना में शामिल करते हुए नौसेना प्रमुख एडमिरल कृष्णास्वामिनाथन ने कहा कि यह भारत का दूसरा स्वदेशी डाइविंग सपोर्ट वेसल है और इसके शामिल होने से नौसेना की समुद्र के भीतर काम करने की क्षमता काफी मजबूत हुई है।
उन्होंने कहा कि भारतीय नौसेना की सबसे बड़ी जिम्मेदारी देश की समुद्री सुरक्षा और युद्धक तैयारियों को मजबूत रखना है। आज समुद्री क्षेत्र में चुनौतियां लगातार बढ़ रही हैं और सुरक्षा से जुड़े खतरे भी बदल रहे हैं। ऐसे समय में नौसेना को हर तरह की स्थिति के लिए तैयार रहना जरूरी है।
एडमिरल कृष्णास्वामिनाथन ने बताया कि आईएनएस निपुण पश्चिमी नौसेना कमान के तहत पश्चिमी तट पर तैनात रहेगा। यह जहाज गहरे समुद्र में ऑपरेशन, पानी के नीचे बचाव कार्य और पनडुब्बी रेस्क्यू जैसे विशेष मिशनों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। (INS Nipun Commissioned)
कई खास क्षमताओं से है लैस
नौसेना प्रमुख ने कहा कि करीब 9,000 टन वजनी यह जहाज कई ऐसी क्षमताओं से लैस है जो दुनिया की केवल कुछ ही नौसेनाओं के पास हैं। इसमें 300 मीटर तक सैचुरेशन डाइविंग की सुविधा, डायनामिक पोजिशनिंग सिस्टम, डाइविंग डिकम्प्रेशन चैंबर, हाइपरबेरिक लाइफबोट, रिमोटली ऑपरेटेड व्हीकल (आरओवी) और डीप सबमर्जेंस रेस्क्यू व्हीकल (डीएसआरवी) को संचालित करने की क्षमता मौजूद है।
नौसेना प्रमुख ने कहा कि आईएनएस निपुण केवल एक जहाज नहीं, बल्कि भारत की समुद्री सुरक्षा क्षमता को मजबूत करने वाला एक महत्वपूर्ण प्लेटफॉर्म है। यह पानी के नीचे बचाव कार्य, समुद्री साल्वेज ऑपरेशन और मानवीय सहायता एवं आपदा राहत अभियानों में भी काम करेगा।
नौसेना प्रमुख ने कहा कि आईएनएस निपुण का आदर्श वाक्य “निश्चय, निर्भय, निपुण” है और जहाज का दल इसी भावना के साथ भारतीय नौसेना और देश की सेवा करेगा। (INS Nipun Commissioned)
पश्चिमी तट पर तैनात होगा आईएनएस निपुण
जहां आईएनएस निस्तार पूर्वी नौसेना कमान के तहत विशाखापत्तनम में तैनात है, जबकि आईएनएस निपुण पश्चिमी नौसेना कमान के तहत मुंबई में तैनात रहेगा। दोनों जहाजों की अलग-अलग तैनाती से भारतीय नौसेना को अरब सागर और बंगाल की खाड़ी दोनों क्षेत्रों में पनडुब्बी बचाव और गहरे समुद्र के अभियानों के लिए त्वरित प्रतिक्रिया देने की क्षमता मिली है।
नौसेना के मुताबिक पहले पूरे भारतीय महासागर क्षेत्र में ऐसी विशेष क्षमताओं के लिए सीमित प्लेटफॉर्म उपलब्ध थे, लेकिन अब पूर्वी और पश्चिमी दोनों समुद्री मोर्चों पर अलग-अलग सहायता उपलब्ध रहेगी।
⚓🇮🇳 INS Nipun Commissioned into the Indian Navy
A significant boost to India’s maritime strength as INS Nipun is being commissioned into the Indian Navy today.
The commissioning ceremony is being presided over by Chief of the Naval Staff Admiral Krishna Swaminathan, marking… pic.twitter.com/NRktnQa0um— Raksha Samachar | रक्षा समाचार 🇮🇳 (@RakshaSamachar) August 31, 2026
75 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी सामग्री
आईएनएस निपुण में 75 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी सामग्री का इस्तेमाल किया गया है। पश्चिमी नौसेना कमान के फ्लैग ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ वाइस एडमिरल संजय वात्सायन ने कहा कि यह जहाज रक्षा निर्माण क्षेत्र में भारत की बढ़ती आत्मनिर्भरता का प्रतीक है।
उन्होंने बताया कि आईएनएस निपुण अत्याधुनिक डाइविंग सपोर्ट वेसल है, जिसे सैचुरेशन डाइविंग, सबमरीन रेस्क्यू, मेरीटाइम साल्वेज ऑपरेशन और गहरे समुद्र में विशेष अभियानों के लिए तैयार किया गया है। उनके अनुसार भारत उन चुनिंदा देशों में शामिल है जिनके पास समर्पित सबमरीन रेस्क्यू सिस्टम मौजूद है।
उन्होंने कहा कि संस्कृत और हिंदी में “निपुण” का अर्थ किसी विशेष क्षेत्र में दक्ष, सक्षम और कुशल व्यक्ति होता है। इसी भावना को यह जहाज भी दर्शाता है। (INS Nipun Commissioned)
क्या है आईएनएस निपुण की खासियत
करीब 9,000 टन से अधिक क्षमता वाला यह जहाज भारतीय नौसेना के सबसे एडवांस मिशन प्लेटफॉर्म में शामिल है। इसकी लंबाई लगभग 118 मीटर और चौड़ाई करीब 23 मीटर है। जहाज पर 200 से अधिक कर्मियों के रहने की सुविधा है और यह लंबे समय तक समुद्र में बिना बाहरी सहायता के अभियान चला सकता है।
आईएनएस निपुण की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता इसकी 300 मीटर तक सैचुरेशन डाइविंग क्षमता है। इस तकनीक की मदद से गोताखोर लंबे समय तक उच्च दबाव वाले वातावरण में रहकर समुद्र की गहराई में काम कर सकते हैं। इसमें 1,000 मीटर की गहराई तक काम करने वाले रिमोटली ऑपरेटेड व्हीकल (ROVs) और 15 टन की सबसी क्रेन मौजूद है।
जहाज में 8 बेड का अस्पताल, आधुनिक डाइविंग डिकम्प्रेशन चैंबर, हाइपरबेरिक सुविधाएं, ऑपरेशन थिएटर, आईसीयू और विशेष चिकित्सा प्रणाली भी लगाई गई हैं। (INS Nipun Commissioned)
पनडुब्बी बचाव में निभाएगा अहम भूमिका
आईएनएस निपुण को भारतीय नौसेना के डीप सबमर्जेंस रेस्क्यू व्हीकल (डीएसआरवी) के लिए मदर शिप के रूप में डिजाइन किया गया है। यदि किसी पनडुब्बी को समुद्र के भीतर आपात स्थिति का सामना करना पड़ता है, तो डीएसआरवी के माध्यम से उसमें फंसे कर्मियों को बाहर निकाला जा सकता है।
नौसेना प्रमुख एडमिरल कृष्णास्वामिनाथन ने कहा कि पनडुब्बी बचाव ऐसा क्षेत्र है जहां देरी की बहुत कम गुंजाइश होती है। आईएनएस निपुण की डीएसआरवी संचालित करने की क्षमता भारतीय नौसेना की आपातकालीन प्रतिक्रिया क्षमता को काफी बढ़ाती है। उन्होंने कहा कि यह जहाज केवल भारतीय नौसेना ही नहीं बल्कि मित्र देशों की नौसेनाओं की सहायता करने में भी सक्षम होगा। (INS Nipun Commissioned)
डायनामिक पोजिशनिंग सिस्टम से लैस
आईएनएस निपुण में अत्याधुनिक डायनामिक पोजिशनिंग सिस्टम लगाया गया है। यह प्रणाली समुद्र में तेज धाराओं और ऊंची लहरों के बीच भी जहाज को एक निश्चित स्थान पर स्थिर बनाए रखती है। गहरे समुद्र में डाइविंग और रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान यह क्षमता बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है।
एचएसएल के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक रियर एडमिरल (सेवानिवृत्त) चंद्रशेखरन रघुराम ने बताया कि जहाज की डायनामिक पोजिशनिंग और फेल्योर मोड एंड इफेक्ट एनालिसिस सर्टिफिकेशन प्रोसेस 11 दिन तक लगातार समुद्र में चलाए गए परीक्षणों के दौरान पूरा किया गया था।
उन्होंने यह भी बताया कि 300 मीटर तक सैचुरेशन डाइविंग क्षमता वाली प्रणालियों का लगातार आठ दिन तक परीक्षण किया गया, जिसके बाद जहाज को नौसेना को सौंपा गया। (INS Nipun Commissioned)
एचएसएल और नौसेना के संयुक्त प्रयास का परिणाम
रियर एडमिरल रघुराम ने कहा कि आईएनएस निपुण केवल एक जहाज नहीं बल्कि भारत की समुद्री क्षमता का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसके निर्माण में डिजाइनरों, इंजीनियरों, गोताखोरों, उत्पादन टीम, गुणवत्ता विशेषज्ञों और नौसेना के निरीक्षण दलों ने मिलकर काम किया।
उन्होंने बताया कि आईएनएस निस्तार के निर्माण के दौरान मिले अनुभवों का इस्तेमाल आईएनएस निपुण में किया गया, जिससे इसकी तैयारी और ऑपरेशनल क्षमता को और बेहतर बनाया जा सका। (INS Nipun Commissioned)
कमांडिंग ऑफिसर ने बताई जहाज की भूमिका
आईएनएस निपुण के कमांडिंग ऑफिसर कैप्टन एल. एस. सुब्रमणियन ने कहा कि यह भारतीय नौसेना का अनूठा प्लेटफॉर्म है। उन्होंने बताया कि जहाज पर लगे सभी प्रमुख सिस्टम गहरे समुद्र में गोताखोरी और पनडुब्बी बचाव अभियानों के लिए तैयार किए गए हैं।
उनके अनुसार इस जहाज का सबसे बड़ा हथियार इसके प्रशिक्षित गोताखोर और रेस्क्यू सिस्टम हैं। यह प्लेटफॉर्म मुख्य रूप से गहरे समुद्र में विशेष अभियानों के लिए काम करेगा। (INS Nipun Commissioned)
Author
हरेंद्र चौधरी रक्षा पत्रकारिता (Defence Journalism) में सक्रिय हैं और RakshaSamachar.com से जुड़े हैं। वे लंबे समय से भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना से जुड़ी रणनीतिक खबरों, रक्षा नीतियों और राष्ट्रीय सुरक्षा से संबंधित मुद्दों को कवर कर रहे हैं। पत्रकारिता के अपने करियर में हरेंद्र ने संसद की गतिविधियों, सैन्य अभियानों, भारत-पाक और भारत-चीन सीमा विवाद, रक्षा खरीद और ‘मेक इन इंडिया’ रक्षा परियोजनाओं पर विस्तृत लेख लिखे हैं। वे रक्षा मामलों की गहरी समझ और विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण के लिए जाने जाते हैं।





