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INS Mahendragiri ने बनाए तीन बड़े रिकॉर्ड, 75% स्वदेशीकरण के साथ Project-17A ने रखी “बिल्डर नेवी” की नींव!

नौसेना प्रमुख एडमिरल कृष्णा स्वामीनाथन ने बताया कि महेंद्रगिरि के निर्माण के दौरान भारतीय शिपबिल्डिंग क्षेत्र ने कई नए रिकॉर्ड बनाए। इसमें पहली उपलब्धि यह रही कि लॉन्चिंग से डिलीवरी तक का समय लगभग आधा कर दिया गया...

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📍नई दिल्ली/विशाखापत्तनम | 11 Jul, 2026, 2:23 PM

Project 17A INS Mahendragiri: भारतीय नौसेना कुछ दशक पहले तक ज्यादातर विदेशी डिजाइन और आयातित जहाजों पर निर्भर थी। ब्रिटिश लीएंडर क्लास या रूसी/ब्रिटिश तकनीक पर आधारित जहाजों का निर्माण होता था। लेकिन 21वीं सदी में स्थिति पूरी तरह बदल गई। भारतीय नौसेना के वॉरशिप डिजाइन ब्यूरो (WDB) ने स्वदेशी डिजाइन तैयार करना शुरू किया। वहीं, प्रोजेक्ट 17ए (नीलगिरी क्लास) इसका सबसे बड़ा उदाहरण है।

प्रोजेक्ट 17ए के तहत बनाए गए छठे स्वदेशी स्टेल्थ फ्रिगेट आईएनएस महेंद्रगिरि को रिकॉर्ड टाइम में तैयार किया है। इस जहाज को शनिवार को विशाखापत्तनम में आयोजित समारोह में आईएनएस महेंद्रगिरि को आधिकारिक रूप से पूर्वी नौसैनिक बेड़े में शामिल किया गया। इसका डिजाइन भारतीय नौसेना के वारशिप डिजाइन ब्यूरो ने तैयार किया है, जबकि निर्माण मुंबई स्थित मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड (एमडीएल) ने किया है।

Project 17A INS Mahendragiri: निर्माण अवधि घटकर 95 से 75 महीने हुई

कमीशनिंग समारोह में नौसेना प्रमुख एडमिरल कृष्णा स्वामीनाथन ने बताया कि महेंद्रगिरि नाम ओडिशा के पूर्वी घाट में स्थित ऐतिहासिक महेंद्रगिरि पर्वत से लिया गया है। महेंद्रगिरि प्रोजेक्ट-17ए के तहत भारतीय नौसेना की पुराने गिरी क्लास फ्रिगेट्स से प्रेरित हैं, जिन्होंने वर्ष 1972 से 2013 तक देश की सेवा की थी।

नौसेना प्रमुख ने बताया कि महेंद्रगिरि के निर्माण के दौरान भारतीय शिपबिल्डिंग क्षेत्र ने कई नए रिकॉर्ड बनाए।
इसमें पहली उपलब्धि यह रही कि लॉन्चिंग से डिलीवरी तक का समय लगभग आधा कर दिया गया। पहले इस प्रक्रिया में लगभग 63 महीने लगते थे, जबकि महेंद्रगिरि के मामले में यह अवधि घटकर करीब 31 महीने रह गई।

दूसरी उपलब्धि पूरे निर्माण समय से जुड़ी रही है। पहले एक युद्धपोत तैयार होने में करीब 95 महीने लगते थे, लेकिन इस परियोजना में निर्माण अवधि घटकर लगभग 75 महीने रह गई। यानी निर्माण समय में लगभग 20 प्रतिशत की कमी लाई गई।

वहीं, तीसरी और सबसे महत्वपूर्ण उपलब्धि की चर्चा करते हुए चीफ ऑफ नेवल स्टाफ ने कहा कि पहले समुद्री परीक्षणों में बहुत समय लगता था। पहले किसी नए युद्धपोत को पूरी तरह तैयार घोषित करने से पहले पांच से सात समुद्री परीक्षण करने पड़ते थे, लेकिन महेंद्रगिरि ने पहले ही सी ट्रायल में सभी प्रमुख तकनीकी मानकों को सफलतापूर्वक पूरा कर लिया।

नौसेना प्रमुख ने कहा कि यह उपलब्धि भारतीय नौसेना, एमडीएल, वारशिप ओवरसीइंग टीम, परीक्षण एजेंसियों, रक्षा उद्योग और पूरे जहाज के दल के संयुक्त प्रयासों का परिणाम है।

Project 17A INS Mahendragiri
Image Source: Indian Navy

कोविड-19 महामारी में शुरू हुआ था निर्माण

समारोह में मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड (एमडीएल) के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक कैप्टन (सेवानिवृत्त) जगमोहन ने कहा कि महेंद्रगिरि का निर्माण उस समय शुरू हुआ, जब पूरी दुनिया कोविड-19 महामारी से जूझ रही थी। सप्लाई चेन प्रभावित थी, कर्मचारियों की आवाजाही सीमित थी और उद्योगों के सामने कई तरह की चुनौतियां थीं। इसके बावजूद परियोजना पर काम लगातार जारी रखा गया।

उन्होंने कहा कि भारतीय नौसेना, एमडीएल और रक्षा उद्योग के बीच बेहतर तालमेल की वजह से जहाज के प्रमुख हथियार और युद्ध प्रणाली डिलीवरी से पहले ही पूरी तरह तैयार कर दी गईं। यही वजह है कि महेंद्रगिरि पहले ही समुद्री परीक्षण में सभी आवश्यक तकनीकी मानकों पर खरा उतरा। (Project 17A INS Mahendragiri)

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प्रोजेक्ट-17ए क्यों है खास

प्रोजेक्ट-17ए भारतीय नौसेना के सबसे महत्वपूर्ण स्वदेशी युद्धपोत निर्माण कार्यक्रमों में से एक है। यह पहले के शिवालिक क्लास के फ्रिगेट का एडवांस वर्जन है। इस प्रोजेक्ट के तहत कुल सात स्टेल्थ गाइडेड मिसाइल फ्रिगेट बनाए जा रहे हैं।

इनमें चार युद्धपोत मुंबई स्थित एमडीएल और तीन युद्धपोत कोलकाता की गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स (जीआरएसई) ने बनाए हैं।

भारतीय नौसेना के लिए नई पीढ़ी के स्टेल्थ फ्रिगेट बनाने की योजना को डिफेंस एक्विजिशन काउंसिल (डीएसी) ने वर्ष 2009 में मंजूरी दी थी। इसके बाद फरवरी 2015 में कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी (सीसीएस) ने इस परियोजना के लिए करीब 45,381 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी।

Project 17A INS Mahendragiri
Image Source: Indian Navy

प्रोजेक्ट-17ए में पहली बार इंटीग्रेटेड मॉड्यूलर कंस्ट्रक्शन तकनीक

खास बात यह है कि प्रोजेक्ट-17ए के युद्धपोतों के निर्माण में मॉड्यूलर कंस्ट्रक्शन तकनीक का इस्तेमाल किया गया। इस तरीके में पूरे जहाज को एक साथ नहीं बनाया जाता, बल्कि उसे 200 से 300 टन तक के कई बड़े हिस्सों (ब्लॉक्स) में बांट दिया जाता है।

इस प्रक्रिया में सबसे पहले पूरे जहाज का कंप्यूटर की मदद से डिजिटल डिजाइन तैयार किया जाता है। इसके बाद डिजाइन के अनुसार जहाज को कई बड़े हिस्सों में बांट दिया जाता है। फिर स्टील प्लेटों को काटकर जहाज का आगे का हिस्सा, बीच का हिस्सा और पीछे का हिस्सा जैसे अलग-अलग ब्लॉक्स बनाए जाते हैं।

जब ब्लॉक तैयार हो जाते हैं, तब उनके अंदर पहले से ही बिजली की केबल, पाइपलाइन, वेंटिलेशन सिस्टम और कई अन्य मशीनें फिट कर दी जाती हैं। इससे बाद में अलग से फिटिंग करने में कम समय लगता है। इसके बाद गोलायथ क्रेन जैसी भारी क्रेन से इन ब्लॉक्स को उठाकर एक जगह लाया जाता है और उन्हें बहुत सटीक तरीके से जोड़ दिया जाता है। सभी हिस्सों को वेल्डिंग करके एक पूरा जहाज तैयार किया जाता है। इसके बाद अंतिम उपकरण लगाए जाते हैं, सभी सिस्टम की जांच होती है और फिर जहाज को समुद्र में उतारकर सी ट्रायल किए जाते हैं।

इस आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल करने के लिए मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड (एमडीएल) और गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स (जीआरएसई) ने अपने शिपयार्ड में विशेष सुविधाएं तैयार कीं। इनमें बड़ी गोलायथ क्रेन, आधुनिक मॉड्यूल वर्कशॉप और वेट बेसिन जैसी सुविधाएं शामिल हैं।

एमडीएल ने इस तकनीक को और बेहतर तरीके से अपनाने के लिए इटली की प्रसिद्ध जहाज निर्माण कंपनी फिनकांतिएरी से भी तकनीकी सहयोग लिया। इसी वजह से प्रोजेक्ट-17ए के युद्धपोत पहले की तुलना में कम समय में तैयार किए जा सके और उनकी निर्माण गुणवत्ता भी बेहतर हुई। (Project 17A INS Mahendragiri)

टाइमलाइन- एमडीएल में बने प्रोजेक्ट-17ए के ये जहाज

प्रोजेक्ट-17ए का पहला युद्धपोत आईएनएस नीलगिरि था। इसकी कील 28 दिसंबर 2017 को रखी गई और इसे 28 सितंबर 2019 को लॉन्च किया गया। कोविड-19 महामारी और अन्य वजहों से इसके समुद्री परीक्षण अगस्त 2024 में शुरू हो सके। जहाज 20 दिसंबर 2024 को नौसेना को सौंपा गया और 15 जनवरी 2025 को आईएनएस सूरत और आईएनएस वाघशीर के साथ भारतीय नौसेना में शामिल किया गया। यह इस परियोजना का पहला जहाज था, इसलिए इसके निर्माण में सबसे अधिक समय लगा। कई नई तकनीकों और प्रक्रियाओं को पहली बार लागू करने के कारण इसे तैयार होने में लगभग सात वर्ष लगे।

दूसरा युद्धपोत आईएनएस उदयगिरि था। इसकी कील 7 मई 2019 को रखी गई और 17 मई 2022 को इसे लॉन्च किया गया। केवल 37 महीनों में इसे तैयार कर 1 जुलाई 2025 को नौसेना को सौंप दिया गया। लॉन्च से डिलीवरी तक का यह समय पूरे प्रोजेक्ट-17ए क्लास में सबसे कम रहा। बाद में 26 अगस्त 2025 को इसे आईएनएस हिमगिरि के साथ एक ही समारोह में कमीशन किया गया।

तीसरे एमडीएल युद्धपोत आईएनएस तारागिरि की कील 10 सितंबर 2020 को रखी गई। इसे 11 सितंबर 2022 को लॉन्च किया गया। 28 नवंबर 2025 को इसकी डिलीवरी हुई और 3 अप्रैल 2026 को इसे भारतीय नौसेना में शामिल कर लिया गया।

इसके बाद आईएनएस महेंद्रगिरि की कील 28 जून 2022 को रखी गई। इसे 1 सितंबर 2023 को लॉन्च किया गया और 30 अप्रैल 2026 को नौसेना को सौंप दिया गया। वहीं आज 11 जुलाई 2026 को विशाखापत्तनम में इसकी कमीशनिंग हुई। (Project 17A INS Mahendragiri)

Project 17A INS Mahendragiri
Image Source: Indian Navy

जीआरएसई ने भी तैयार किए तीन आधुनिक युद्धपोत

कोलकाता स्थित जीआरएसई ने इस परियोजना के तहत तीन युद्धपोत बनाए।

पहला जहाज आईएनएस हिमगिरि था। इसकी कील 10 नवंबर 2018 को रखी गई, 14 दिसंबर 2020 को लॉन्च किया गया और 31 जुलाई 2025 को नौसेना को सौंपा गया। 26 अगस्त 2025 को इसे आईएनएस उदयगिरि के साथ कमीशन किया गया।

दूसरा जहाज आईएनएस दूनागिरि था। इसकी कील 24 जनवरी 2020 को रखी गई और 15 जुलाई 2022 को लॉन्च किया गया। 30 मार्च 2026 को इसकी डिलीवरी हुई और 21 जून 2026 को इसे आईएनएस संसोधक और आईएनएस अग्रय के साथ भारतीय नौसेना में शामिल किया गया।

वहीं, तीसरा और अंतिम जहाज आईएनएस विंध्यगिरि है। इसकी कील 5 मार्च 2021 को रखी गई और 17 अगस्त 2023 को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने इसे लॉन्च किया। यह इस परियोजना का अंतिम युद्धपोत है और इसका निर्माण अंतिम चरण में है। जो जल्द ही नौसेना में शामिल होगा। (Project 17A INS Mahendragiri)

इस पूरे प्रोजेक्ट-17ए की एक और बड़ी उपलब्धि यह रही कि दिसंबर 2024 में आईएनएस नीलगिरि की डिलीवरी के बाद अगले 17 महीनों से भी कम समय में छह प्रोजेक्ट-17ए युद्धपोत नौसेना को सौंप दिए गए। आईएनएस उदयगिरि ने लॉन्च से डिलीवरी तक केवल 37 महीने का समय लेकर पूरी क्लास में नया रिकॉर्ड बनाया।

आईएनएस दूनागिरि का निर्माण भी पहले जहाज की तुलना में काफी कम समय में पूरा हुआ। एक और बड़ी उपलब्धि यह रही कि दिसंबर 2024 में आईएनएस नीलगिरि की डिलीवरी के बाद अगले 17 महीनों से भी कम समय में छह प्रोजेक्ट-17ए युद्धपोत नौसेना को सौंप दिए गए।

इसी तरह आईएनएस तारागिरि पिछले 11 महीनों के दौरान डिलीवर होने वाला चौथा युद्धपोत बना। जबकि पूरी नीलगिरी क्लास 2026 के अंत तक ऑपरेशनल हो जाएगी।

आधुनिक युद्ध के लिए तैयार प्लेटफॉर्म

प्रोजेक्ट-17ए के सभी फ्रिगेट हवा, समुद्र और पानी के भीतर मौजूद खतरों से एक साथ मुकाबला करने में सक्षम हैं। इनमें सुपरसोनिक ब्रह्मोस क्रूज मिसाइल, बराक-8 मध्यम दूरी की वायु रक्षा मिसाइल, आधुनिक मल्टी-फंक्शन एईएसए रडार, टॉरपीडो लॉन्चर, पनडुब्बी रोधी रॉकेट प्रणाली, क्लोज-इन वेपन सिस्टम और इलेक्ट्रॉनिक युद्ध प्रणाली लगी हैं।

करीब 149 मीटर लंबे और 6,670 टन वजनी इन युद्धपोतों में कंबाइंड डीजल ऑर गैस (सीओडीओजी) प्रोपल्शन सिस्टम लगाया गया है। यह इन्हें लंबी दूरी तक संचालन और लगभग 28 नॉट की अधिकतम गति प्रदान करता है। प्रत्येक जहाज पर लगभग 225 अधिकारी और नाविक तैनात किए जा सकते हैं।

इन युद्धपोतों में ऑटोमेशन का स्तर भी पहले की तुलना में काफी अधिक है। स्टेल्थ डिजाइन के कारण इनकी रडार पहचान कम होती है और आधुनिक सेंसर इन्हें समुद्री अभियानों के दौरान बेहतर स्थिति की जानकारी उपलब्ध कराते हैं। (Project 17A INS Mahendragiri)

Project 17A INS Mahendragiri
Image Source: Indian Navy

2026 में 18 शिप होंगे कमिशन!

मॉड्यूलर कंस्ट्रक्शन, स्वदेशी डिजाइन और शिपयार्ड्स की बढ़ती दक्षता के चलते जहाज अब रिकॉर्ड समय में तैयार हो रहे हैं। महेंद्रगिरि इस साल का छठा वॉरशिप है, जो नेवी में कमिशन किया गया है। वहीं इसी महीने नेवी में एक और स्वदेशी पनडुब्बी रोधी युद्धक पोत आईएनएस मालवान कमिशन होना है। जबकि अगले दो महीने में नेवी को 4 और शिप मिलेंगे। वहीं, इस साल 2026 में नेवी में 18 शिप कमिशन होंगे। बता दें कि नेवी के लिए इस वक्त 40 से ज्यादा शिप बन रहे हैं, जो आने वाले सालों में कमिशन किए जाएंगे। (Project 17A INS Mahendragiri)

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    हरेंद्र चौधरी रक्षा पत्रकारिता (Defence Journalism) में सक्रिय हैं और RakshaSamachar.com से जुड़े हैं। वे लंबे समय से भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना से जुड़ी रणनीतिक खबरों, रक्षा नीतियों और राष्ट्रीय सुरक्षा से संबंधित मुद्दों को कवर कर रहे हैं। पत्रकारिता के अपने करियर में हरेंद्र ने संसद की गतिविधियों, सैन्य अभियानों, भारत-पाक और भारत-चीन सीमा विवाद, रक्षा खरीद और ‘मेक इन इंडिया’ रक्षा परियोजनाओं पर विस्तृत लेख लिखे हैं। वे रक्षा मामलों की गहरी समझ और विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण के लिए जाने जाते हैं।

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