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आर्मी चीफ का अधिकारियों को पहला बड़ा संदेश, ‘अफसर खुद निकालें समाधान’, हर यूनिट युद्ध के लिए रहे तैयार

जनरल सेठ ने लिखा कि हमारी तैयारी हमेशा ऐसी होनी चाहिए कि यदि ऑपरेशन सिंदूर 2.0 या ऑपरेशन स्नो लेपर्ड 2.0 जैसी कोई भी चुनौती सामने आए, तो सेना तुरंत कार्रवाई करने के लिए पूरी तरह तैयार हो...

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📍नई दिल्ली | 10 Jul, 2026, 1:27 PM

Indian Army Chief Letter: भारतीय सेना के नए प्रमुख जनरल धीरज सेठ ने पद संभालने के बाद सभी अधिकारियों को अपना पहला संदेश भेजा है। अपने संदेश में उन्होंने साफ कहा है कि भारतीय सेना को हर समय किसी भी चुनौती का सामना करने के लिए पूरी तरह तैयार रहना होगा। उन्होंने खास तौर पर “ऑपरेशन सिंदूर 2.0” और “ऑपरेशन स्नो लेपर्ड 2.0” का जिक्र करते हुए कहा कि सेना की सबसे बड़ी प्राथमिकता हमेशा युद्ध की तैयारी और ऑपरेशनल क्षमता बनी रहनी चाहिए।

अपने पत्र में उन्होंने यह भी लिखा कि हमारा लक्ष्य भारतीय सेना को और अधिक मजबूत बनाना, युद्ध के लिए हर समय तैयार रखना, नई क्षमताएं विकसित करना, मौजूदा सुरक्षा चुनौतियों का प्रभावी ढंग से सामना करना और देश निर्माण में अपनी भूमिका को और मजबूत करना होना चाहिए।

Indian Army Chief Letter: बदलते युद्ध के अनुसार खुद को बदलना होगा

जनरल धीरज सेठ ने 06 जुलाई को भेजे अपने संदेश में कहा कि आज भारतीय सेना तेजी से बदलाव के दौर से गुजर रही है। आपने हाल ही में मेरे द्वारा बताए गए “विजय” के सिद्धांतों के बारे में सुना होगा। अब युद्ध पहले जैसा नहीं रहा।

आज सैनिकों के साथ ड्रोन और दूसरे बिना चालक वाले सिस्टम भी युद्ध का हिस्सा बन चुके हैं। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, मशीन लर्निंग और नई तकनीकें अब भविष्य की नहीं बल्कि आज की जरूरत हैं। इसलिए हर अधिकारी को इस बदलाव की जिम्मेदारी अपने स्तर पर उठानी होगी।

अगर हर अधिकारी अपनी यूनिट में इस बदलाव को अपनाएगा, तभी पूरी सेना वास्तव में आधुनिक बन पाएगी।

इसके साथ ही हमें अधिकारियों और सैनिकों के बीच भरोसा, सम्मान, अच्छा व्यवहार, पेशेवर दक्षता और नैतिक मूल्यों पर आधारित मजबूत संबंध भी बनाए रखने होंगे।

हर समय युद्ध के लिए तैयार रहे सेना

उन्होंने लिखा कि युद्ध की तैयारी केवल बड़े सैन्य अभ्यासों तक सीमित नहीं होनी चाहिए। हर यूनिट को समय-समय पर अपनी तैयारियों की समीक्षा करनी चाहिए।

जनरल सेठ ने लिखा कि हमारी तैयारी हमेशा ऐसी होनी चाहिए कि यदि ऑपरेशन सिंदूर 2.0 या ऑपरेशन स्नो लेपर्ड 2.0 जैसी कोई भी चुनौती सामने आए, तो सेना तुरंत कार्रवाई करने के लिए पूरी तरह तैयार हो।

उन्होंने अधिकारियों से कहा कि वे लगातार यह सुनिश्चित करें कि उनकी यूनिट के पास पर्याप्त हथियार, गोला-बारूद, रसद, संचार उपकरण, वाहन, तकनीकी संसाधन और प्रशिक्षित सैनिक उपलब्ध हों। यदि किसी स्तर पर कमी दिखाई देती है तो उसका समाधान तुरंत निकाला जाए।

ऊपर से नहीं आएगा हर समस्या का समाधान

अपने पत्र में उन्होंने आगे लिखा कि आज तकनीक इतनी तेजी से बदल रही है कि कई बार हथियार खरीदने या नई क्षमता विकसित करने की सरकारी प्रक्रिया उसके बराबर गति से आगे नहीं बढ़ पाती। यह बिल्कुल सामान्य बात है।

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इसलिए हर अधिकारी को अपने स्तर पर व्यावहारिक, सरल और लागू किए जा सकने वाले समाधान खोजने होंगे।
छोटे-छोटे सुधार भी पूरी यूनिट की क्षमता को काफी बढ़ा सकते हैं।

उन्होंने लिखा कि हर समस्या के समाधान के लिए केवल मुख्यालय की ओर देखने की आदत बदलनी होगी।

साथ ही उन्होंने यह भी लिखा कि हमें केवल आदर्श समाधान का इंतजार नहीं करना चाहिए। कई बार साधारण, व्यावहारिक और तुरंत लागू होने वाला समाधान ज्यादा उपयोगी होता है। जो तरीके वर्षों से युद्ध में सफल साबित हुए हैं, उन्हें केवल इसलिए नहीं छोड़ देना चाहिए क्योंकि नई तकनीक आ गई है। जरूरत पड़ने पर हमें अपनी बुनियादी सैन्य क्षमताओं पर भी पूरा भरोसा रखना होगा।

साथ ही परिस्थितियों के अनुसार खुद को बदलने, सुधारने और नई परिस्थितियों में काम करने की क्षमता भी बनाए रखनी होगी। लेकिन यह सब करते समय गुणवत्ता, जवाबदेही और नियमों से कोई समझौता नहीं होना चाहिए।

बदल रहा है युद्ध का स्वरूप

जनरल धीरज सेठ ने अधिकारियों को बताया कि आधुनिक युद्ध पहले जैसा नहीं रह गया है। अब लड़ाई केवल सैनिकों, टैंकों और तोपों के भरोसे नहीं लड़ी जाती।

उन्होंने कहा कि आज ड्रोन, बिना चालक वाले सिस्टम, स्मार्ट हथियार, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, मशीन लर्निंग और स्वचालित तकनीकें युद्ध का सामान्य हिस्सा बन चुकी हैं। ऐसे में हर अधिकारी को इन तकनीकों की जानकारी होनी चाहिए और उन्हें अपनी यूनिट में प्रभावी तरीके से अपनाना चाहिए।

नई तकनीक के साथ पुरानी सैन्य क्षमता भी जरूरी

सेना प्रमुख ने अपने संदेश में यह भी स्पष्ट किया कि नई तकनीक अपनाने का मतलब यह नहीं है कि पहले से सफल सैन्य सिद्धांतों और पारंपरिक क्षमताओं को भुला दिया जाए।

उन्होंने अधिकारियों से कहा कि आधुनिक तकनीक और पारंपरिक सैन्य कौशल दोनों का संतुलन बनाए रखना जरूरी है। कई परिस्थितियों में बुनियादी सैन्य प्रशिक्षण, नेतृत्व क्षमता और सैनिकों का अनुशासन ही सबसे बड़ी ताकत साबित होते हैं।

सैनिकों के साथ भरोसे का रिश्ता बनाने पर जोर

अपने पहले संदेश में सेना प्रमुख ने नेतृत्व शैली पर भी विशेष जोर दिया। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि वे अपने सैनिकों के साथ विश्वास, सम्मान और पारदर्शिता का रिश्ता बनाएं। एक अच्छा कमांडर वही होता है जो कठिन परिस्थितियों में सबसे आगे खड़ा दिखाई दे।

उन्होंने लिखा कि एक अधिकारी का सबसे बड़ा गुण उसका नेतृत्व होता है। नेतृत्व केवल आदेश देने से नहीं आता।

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अधिकारी को अपने सैनिकों के साथ रहना चाहिए, उनके साथ कठिन परिस्थितियों में काम करना चाहिए और हर चुनौती में सबसे आगे दिखाई देना चाहिए। उन्होंने लिखा कि सैनिक उसी अधिकारी को सबसे ज्यादा मानते हैं जो खुद करके दिखाता है।

उन्होंने अधिकारियों को शारीरिक रूप से फिट रहने की भी सलाह दी और कहा कि नेतृत्व केवल आदेश देने से नहीं, बल्कि उदाहरण प्रस्तुत करने से स्थापित होता है।

सीखने और नए विचारों को बढ़ावा देने की सलाह

जनरल धीरज सेठ ने अधिकारियों से कहा कि वे अपनी यूनिट में ऐसा माहौल तैयार करें जहां सैनिक और जूनियर अधिकारी नई बातें सीख सकें और अपने सुझाव खुलकर रख सकें।

उन्होंने लिखा कि यदि प्रशिक्षण के दौरान सीमित दायरे में कोई गलती होती है और उससे सीख मिलती है तो उसे सकारात्मक तरीके से देखा जाना चाहिए।

उन्होंने हर अधिकारी को लगातार सीखते रहने की आदत पर भी जोर दिया। उन्होंने लिखा कि नई तकनीक, दुनिया में हो रहे बदलाव, आधुनिक युद्ध के तरीके और वैश्विक सुरक्षा परिस्थितियों की जानकारी रखना आज की जरूरत है। इसके लिए नियमित पढ़ाई की आदत विकसित करनी होगी।

जितना अधिक आप सीखेंगे, उतनी ही आसानी से अपनी यूनिट की समस्याओं का समाधान खुद निकाल पाएंगे। यदि आप लगातार खुद को अपडेट रखेंगे तो हर छोटी समस्या के लिए ऊपरी मुख्यालय की ओर देखने की जरूरत नहीं पड़ेगी।

ऐसा माहौल बनाइए जहां लोग सीख सकें

सेना प्रमुख ने अधिकारियों से कहा कि केवल सैन्य प्रशिक्षण पर्याप्त नहीं है। हर यूनिट का वातावरण ऐसा होना चाहिए जहां सैनिक और जूनियर अधिकारी खुलकर अपने विचार रख सकें। नई सोच को प्रोत्साहन मिलना चाहिए।

नई तकनीक सीखने के अवसर मिलने चाहिए। यदि प्रशिक्षण के दौरान कोई सीमित और सुरक्षित गलती होती है, जिससे सीख मिलती है, तो उसे सकारात्मक नजरिए से देखना चाहिए।

हमारा उद्देश्य ऐसा वातावरण बनाना होना चाहिए जहां पेशेवर विकास, साहसिक सोच और नए विचारों को बढ़ावा मिले।

सोशल मीडिया को भी बताया नया युद्धक्षेत्र

जनरल धीरज सेठ ने अपने संदेश में सोशल मीडिया का भी जिक्र किया। उन्होंने लिखा कि आज का युद्ध केवल जमीन, समुद्र और आसमान तक सीमित नहीं है। सोशल मीडिया भी अब एक महत्वपूर्ण युद्धक्षेत्र बन चुका है।

हमारे विरोधी देश इसका इस्तेमाल दुष्प्रचार फैलाने, भ्रम पैदा करने और लोगों की सोच को प्रभावित करने के लिए करते हैं। इसलिए हर अधिकारी को सोशल मीडिया का इस्तेमाल बहुत जिम्मेदारी से करना चाहिए।

बिना सोचे-समझे कोई जानकारी साझा करना या अनुचित टिप्पणी करना केवल व्यक्तिगत गलती नहीं होती, बल्कि इससे सेना की सुरक्षा और प्रतिष्ठा दोनों प्रभावित हो सकती हैं। अनुशासन, संयम और गरिमापूर्ण व्यवहार हर समय बनाए रखना जरूरी है।

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सेना की परंपराओं और मूल्यों को बनाए रखें

सेन प्रमुख ने अपने पत्र में लिखा कि हर अधिकारी को हमेशा “एक अधिकारी और सज्जन व्यक्ति” की पहचान बनाए रखनी चाहिए। ईमानदारी, नैतिकता, अनुशासन और चरित्र हमारी सबसे बड़ी पहचान हैं।

अपने साथ काम करने वाले सैनिकों के साथ-साथ पूर्व सैनिकों के प्रति भी सम्मान और संवेदनशीलता दिखाना हमारी जिम्मेदारी है। जिन लोगों ने वर्षों तक देश की सेवा की है, उनकी समस्याओं को समझना और उनके समाधान के लिए प्रयास करना भी हमारी जिम्मेदारी का हिस्सा है

उन्होंने लिखा कि सैनिक का जीवन केवल नौकरी नहीं बल्कि जीवन जीने का तरीका होता है। पूरी मेहनत से काम करना जरूरी है, लेकिन उतना ही जरूरी है अपने परिवार के लिए समय निकालना, अपने स्वास्थ्य का ध्यान रखना और खुद को हर क्षेत्र में बेहतर बनाना।

मुझे आपकी क्षमता, नेतृत्व, निर्णय लेने की योग्यता, मानसिक मजबूती और शारीरिक फिटनेस पर पूरा भरोसा है।

आर्मी मुख्यालय हमेशा आपकी सहायता और मार्गदर्शन के लिए उपलब्ध रहेगा। आप सभी भारतीय सेना की गौरवशाली परंपरा को आगे बढ़ाते रहें। मुझे आप पर पूरा विश्वास है और आपसे मेरी अपेक्षाएं भी बहुत ऊंची हैं।

विकसित भारत के लक्ष्य का भी किया उल्लेख

अपने संदेश में जनरल धीरज सेठ ने कहा कि भारतीय सेना केवल सीमाओं की सुरक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि विकसित भारत के राष्ट्रीय लक्ष्य में भी उसकी महत्वपूर्ण भूमिका है।

देश को वर्ष 2047 तक विकसित भारत बनाने के राष्ट्रीय लक्ष्य में भी सेना की महत्वपूर्ण भूमिका है। हमारे पास लोगों को प्रेरित करने, संसाधनों को संगठित करने और कठिन परिस्थितियों में शानदार परिणाम देने की क्षमता है।

इसलिए हर अधिकारी को केवल सैन्य कार्यों तक सीमित नहीं रहना चाहिए बल्कि व्यापक सोच विकसित करनी चाहिए। देश की बड़ी जिम्मेदारियों को समझना और उनके अनुसार खुद को तैयार करना भी जरूरी है।

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    हरेंद्र चौधरी रक्षा पत्रकारिता (Defence Journalism) में सक्रिय हैं और RakshaSamachar.com से जुड़े हैं। वे लंबे समय से भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना से जुड़ी रणनीतिक खबरों, रक्षा नीतियों और राष्ट्रीय सुरक्षा से संबंधित मुद्दों को कवर कर रहे हैं। पत्रकारिता के अपने करियर में हरेंद्र ने संसद की गतिविधियों, सैन्य अभियानों, भारत-पाक और भारत-चीन सीमा विवाद, रक्षा खरीद और ‘मेक इन इंडिया’ रक्षा परियोजनाओं पर विस्तृत लेख लिखे हैं। वे रक्षा मामलों की गहरी समझ और विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण के लिए जाने जाते हैं।

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हरेंद्र चौधरी रक्षा पत्रकारिता (Defence Journalism) में सक्रिय हैं और RakshaSamachar.com से जुड़े हैं। वे लंबे समय से भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना से जुड़ी रणनीतिक खबरों, रक्षा नीतियों और राष्ट्रीय सुरक्षा से संबंधित मुद्दों को कवर कर रहे हैं। पत्रकारिता के अपने करियर में हरेंद्र ने संसद की गतिविधियों, सैन्य अभियानों, भारत-पाक और भारत-चीन सीमा विवाद, रक्षा खरीद और ‘मेक इन इंडिया’ रक्षा परियोजनाओं पर विस्तृत लेख लिखे हैं। वे रक्षा मामलों की गहरी समझ और विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण के लिए जाने जाते हैं।

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