📍नई दिल्ली | 10 Jul, 2026, 10:45 AM
Germany IFC-IOR India: भारत और जर्मनी के बीच समुद्री सुरक्षा सहयोग को नई मजबूती मिली है। जर्मनी ने पहली बार अपने एक इंटरनेशनल लाइजन ऑफिसर (आईएलओ) को भारतीय नौसेना के इन्फॉर्मेशन फ्यूजन सेंटर-इंडियन ओशन रीजन (आईएफसी-आईओआर) में तैनात किया है। गुरुग्राम स्थित इस केंद्र में जर्मनी की ओर से कमांडर ओलिवर वानेक ने कार्यभार संभाल लिया है। वह इस केंद्र में तैनात होने वाले 17वें अंतरराष्ट्रीय लाइजन ऑफिसर हैं और जर्मनी के पहले प्रतिनिधि भी हैं।
भारतीय नौसेना के अनुसार इस नियुक्ति के साथ भारत और जर्मनी के बीच समुद्री सूचनाओं के आदान-प्रदान, समुद्री निगरानी और क्षेत्रीय समन्वय को और मजबूत करने में मदद मिलेगी।
Germany IFC-IOR India: क्या है आईएफसी-आईओआर?
आईएफसी-आईओआर भारतीय नौसेना द्वारा स्थापित एक ऐसा केंद्र है, जहां हिंद महासागर क्षेत्र में होने वाली समुद्री गतिविधियों की जानकारी एकत्र की जाती है और साझेदार देशों के साथ साझा की जाती है।
रक्षा सूत्रों के अनुसार इस केंद्र का मुख्य उद्देश्य समुद्र में जहाजों की आवाजाही पर नजर रखना, संदिग्ध गतिविधियों की पहचान करना और विभिन्न देशों के बीच वास्तविक समय में सूचना साझा करना है। इससे किसी भी समुद्री घटना पर तेजी से प्रतिक्रिया देने में आसानी होती है।
किन गतिविधियों पर रखी जाती है नजर?
सूत्रों के मुताबिक आईएफसी-आईओआर केवल व्यापारिक जहाजों की निगरानी तक सीमित नहीं है। यहां समुद्री डकैती, अवैध मछली पकड़ने, हथियारों और नशीले पदार्थों की तस्करी, मानव तस्करी, समुद्री दुर्घटनाओं और प्राकृतिक आपदाओं जैसी घटनाओं पर भी लगातार नजर रखी जाती है।
केंद्र विभिन्न देशों और अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों से मिलने वाली सूचनाओं का विश्लेषण करता है और जरूरत पड़ने पर संबंधित देशों को तुरंत जानकारी उपलब्ध कराता है।
जर्मनी की तैनाती क्यों मानी जा रही है महत्वपूर्ण?
सूत्रों का कहना है कि जर्मनी यूरोप की प्रमुख समुद्री और आर्थिक शक्तियों में शामिल है। बड़ी संख्या में जर्मन व्यापारिक जहाज हिंद महासागर के समुद्री मार्गों का इस्तेमाल करते हैं। ऐसे में आईएफसी-आईओआर में जर्मनी के प्रतिनिधि की मौजूदगी से दोनों देशों के बीच सूचना साझा करने की प्रक्रिया और तेज होगी।
भारतीय नौसेना के अधिकारियों के अनुसार इससे समुद्री सुरक्षा से जुड़े मामलों में बेहतर समन्वय स्थापित किया जा सकेगा और साझेदार देशों के बीच सहयोग भी बढ़ेगा।
बता दें कि 12 जनवरी को ही रक्षा समाचार ने खबर लिखी थी कि जर्मनी IFC-IOR में अपना लायजन अफसर भेजेगा।
क्या होती है समुद्री संपर्क अधिकारी भूमिका?
लाइजन ऑफिसर किसी सैन्य या सुरक्षा संगठन का स्थायी प्रतिनिधि होता है। उसका मुख्य काम अपने देश और मेजबान संगठन के बीच सूचनाओं का आदान-प्रदान, समन्वय और आपसी सहयोग को आसान बनाना होता है।
रक्षा सूत्रों के मुताबिक आईएफसी-आईओआर में तैनात अधिकारी अपने-अपने देशों की समुद्री एजेंसियों और भारतीय नौसेना के बीच संपर्क बनाए रखते हैं। किसी संदिग्ध जहाज, सुरक्षा चुनौती या समुद्री घटना की स्थिति में वे तेजी से जानकारी साझा करने में मदद करते हैं।
बढ़ता जा रहा है अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क
जर्मनी के अधिकारी के शामिल होने के बाद आईएफसी-आईओआर में तैनात अंतरराष्ट्रीय लाइजन ऑफिसरों की संख्या बढ़कर 17 हो गई है। भारतीय नौसेना पिछले कुछ वर्षों से मित्र देशों के अधिकारियों को इस केंद्र में शामिल कर रही है ताकि हिंद महासागर क्षेत्र में साझा समुद्री सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत किया जा सके।
रक्षा समाचार ने बताया था कि कुछ दिन पहले ही इंडोनेशिया ने भी अपना लाइजन ऑफिसर इस केंद्र में तैनात किया था। अब जर्मनी के जुड़ने से इस बहुराष्ट्रीय नेटवर्क का दायरा और विस्तृत हो गया है।
वैश्विक व्यापार के लिए अहम है हिंद महासागर
हिंद महासागर दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री क्षेत्रों में गिना जाता है। वैश्विक व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति का बड़ा हिस्सा इसी क्षेत्र से होकर गुजरता है। तेल और गैस लेकर चलने वाले टैंकरों के अलावा हजारों व्यापारिक जहाज हर वर्ष इस समुद्री मार्ग का उपयोग करते हैं।
सूत्रों के मुताबिक इस क्षेत्र में किसी भी प्रकार की सुरक्षा चुनौती का असर अंतरराष्ट्रीय व्यापार और आपूर्ति श्रृंखला पर पड़ सकता है। इसी कारण समुद्री निगरानी और देशों के बीच सूचना साझा करने की व्यवस्था को लगातार मजबूत किया जा रहा है।
भारत-जर्मनी रक्षा सहयोग को मिली नई मजबूती
हाल के वर्षों में भारत और जर्मनी के बीच रक्षा और समुद्री सहयोग लगातार बढ़ा है। दोनों देशों के बीच उच्च स्तरीय रक्षा वार्ताएं, नौसैनिक संपर्क और समुद्री सुरक्षा से जुड़े कई क्षेत्रों में सहयोग बढ़ा है।
आईएफसी-आईओआर में जर्मनी के पहले लाइजन ऑफिसर की तैनाती को इसी बढ़ते रणनीतिक सहयोग का हिस्सा माना जा रहा है। भारतीय नौसेना का कहना है कि इस कदम से समुद्री सूचना साझा करने, समुद्री क्षेत्र की बेहतर निगरानी और हिंद महासागर क्षेत्र में कॉर्डिनेशन को और मजबूती मिलेगी।
Author
हरेंद्र चौधरी रक्षा पत्रकारिता (Defence Journalism) में सक्रिय हैं और RakshaSamachar.com से जुड़े हैं। वे लंबे समय से भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना से जुड़ी रणनीतिक खबरों, रक्षा नीतियों और राष्ट्रीय सुरक्षा से संबंधित मुद्दों को कवर कर रहे हैं। पत्रकारिता के अपने करियर में हरेंद्र ने संसद की गतिविधियों, सैन्य अभियानों, भारत-पाक और भारत-चीन सीमा विवाद, रक्षा खरीद और ‘मेक इन इंडिया’ रक्षा परियोजनाओं पर विस्तृत लेख लिखे हैं। वे रक्षा मामलों की गहरी समझ और विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण के लिए जाने जाते हैं।



