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PM मोदी की जकार्ता यात्रा से पहले भारतीय नौसेना के IFC-IOR में पहुंचा पहला इंडोनेशियाई अधिकारी

सूत्रों के मुताबिक इंडोनेशियाई अधिकारी ने एक जुलाई से यहां अपनी जिम्मेदारी संभाल ली है। यह कदम ऐसे समय उठाया गया है जब दोनों देशों के बीच रक्षा, समुद्री सुरक्षा और सैन्य प्रशिक्षण को लेकर सहयोग लगातार बढ़ रहा है...

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📍नई दिल्ली | 6 Jul, 2026, 8:09 PM

IFC-IOR Indonesia Liaison Officer: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इंडोनेशिया यात्रा से ठीक पहले भारत और इंडोनेशिया के बीच समुद्री सुरक्षा सहयोग में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। सूत्रों के मुताबिक इंडोनेशिया ने पहली बार अपना एक लाइजन ऑफिसर भारतीय नौसेना के इन्फॉर्मेशन फ्यूजन सेंटर-इंडियन ओशन रीजन (IFC-IOR) में तैनात किया है। यह सेंटर हरियाणा के गुरुग्राम में स्थित है और हिंद महासागर क्षेत्र में समुद्री गतिविधियों पर नजर रखने के लिए भारतीय नौसेना का प्रमुख मल्टीनेशनल सेंटर माना जाता है।

सूत्रों के मुताबिक इंडोनेशियाई अधिकारी लेफ्टिनेंट कमांडर फेलिक्स डिमास सतीरावन ने एक जुलाई से यहां अपनी जिम्मेदारी संभाल ली है। यह कदम ऐसे समय उठाया गया है जब दोनों देशों के बीच रक्षा, समुद्री सुरक्षा और सैन्य प्रशिक्षण को लेकर सहयोग लगातार बढ़ रहा है।

IFC-IOR Indonesia Liaison Officer: क्या है आईएफसी-आईओआर और क्यों है इतना महत्वपूर्ण

आईएफसी-आईओआर की स्थापना भारतीय नौसेना ने 22 दिसंबर 2018 को की थी। यह भारत के सागर (सिक्योरिटी एंड ग्रोथ फॉर ऑल इन द रीजन) और महासागर विजन का अहम हिस्सा है। इसका मुख्य उद्देश्य हिंद महासागर क्षेत्र में चलने वाले व्यापारिक जहाजों की निगरानी करना और समुद्र से जुड़े संभावित खतरों की समय रहते पहचान करना है।

यह सेंटर दुनिया के सबसे व्यस्त समुद्री व्यापार मार्गों में से एक पर नजर रखता है। यहां विभिन्न देशों के समुद्री सुरक्षा संगठनों, तटीय रडार नेटवर्क, सैटेलाइट, ऑटोमैटिक आइडेंटिफिकेशन सिस्टम (एआईएस) और अन्य साझेदार एजेंसियों से मिलने वाले डेटा को एक जगह जोड़कर उसका विश्लेषण किया जाता है। इसके आधार पर समुद्र में चल रहे जहाजों की एक साझा तस्वीर तैयार की जाती है।

समुद्री सुरक्षा से जुड़े खतरों पर रखी जाती है नजर

आईएफसी-आईओआर केवल जहाजों की लोकेशन देखने तक सीमित नहीं है। यहां लगातार यह भी देखा जाता है कि कहीं कोई जहाज असामान्य गतिविधि तो नहीं कर रहा। यदि किसी जहाज की गति, मार्ग या व्यवहार सामान्य से अलग दिखाई देता है तो उस पर विशेष निगरानी रखी जाती है।

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सूत्रों के मुताबिक इस सेंटर के जरिए समुद्री डकैती, हथियारों और नशीले पदार्थों की तस्करी, मानव तस्करी, अवैध मछली पकड़ने, प्रतिबंधित सामान की आवाजाही और समुद्री आतंकवाद जैसी गतिविधियों पर भी नजर रखी जाती है। इससे साझेदार देशों को समय रहते अलर्ट भेजा जा सकता है।

लाइजन ऑफिसर की तैनाती क्यों है अहम

सूत्रों के मुताबिक किसी देश का केवल डेटा साझा करना और किसी अधिकारी को सीधे सेंटर में तैनात करना, दोनों अलग-अलग स्तर का सहयोग है।

लाइजन ऑफिसर भारतीय नौसेना के अधिकारियों के साथ एक ही ऑपरेशन रूम में काम करता है। वह अपने देश से मिलने वाली सूचनाओं को तुरंत साझा कर सकता है और जरूरत पड़ने पर दूसरे देशों से मिली जानकारी भी अपने देश तक पहुंचा सकता है। इससे किसी घटना पर प्रतिक्रिया देने में समय कम लगता है और कॉर्डिनेशन बेहतर होता है।

सूत्रों का कहना है कि इंडोनेशिया के अधिकारी की तैनाती से भारत और इंडोनेशिया के बीच मैरिटाइम डोमेन अवेयरनेस यानी समुद्री क्षेत्र की साझा निगरानी को नई मजबूती मिलेगी।

अब 17 देशों के अधिकारी हैं इस सेंटर का हिस्सा

आईएफसी-आईओआर का नेटवर्क 28 देशों से जुड़ा हुआ है, लेकिन सभी देशों के अधिकारी यहां मौजूद नहीं हैं।

इंडोनेशिया के अधिकारी के आने के बाद अब इस सेंटर में 17 देशों के लाइजन ऑफिसर तैनात हैं। इनमें ऑस्ट्रेलिया, फ्रांस, जर्मनी, इटली, जापान, केन्या, मालदीव, मॉरीशस, सिंगापुर, श्रीलंका, थाईलैंड, ब्रिटेन, अमेरिका और अन्य साझेदार देश शामिल हैं।

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सूत्रों के मुताबिक किसी देश का यहां अधिकारी भेजना इस बात का संकेत माना जाता है कि दोनों देशों के बीच केवल सूचना साझा करने से आगे बढ़कर वास्तविक ऑपरेशनल सहयोग भी विकसित हो रहा है।

मलक्का जलडमरूमध्य के चलते बढ़ जाता है इंडोनेशिया का महत्व

इंडोनेशिया दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री क्षेत्रों में से एक में स्थित है। उसके पास मलक्का जलडमरूमध्य के आसपास का बड़ा समुद्री इलाका है। यह वही समुद्री मार्ग है जहां से एशिया, यूरोप और मध्य पूर्व के बीच बड़ी मात्रा में व्यापारिक जहाज गुजरते हैं।

भारत के लिए भी यह समुद्री मार्ग रणनीतिक रूप से बेहद अहम है क्योंकि देश के ऊर्जा आयात और अंतरराष्ट्रीय व्यापार का बड़ा हिस्सा इसी क्षेत्र से होकर गुजरता है।

रक्षा मामलों के जानकारों का कहना है कि यदि भारत और इंडोनेशिया समुद्री जानकारी को तेजी से साझा करते हैं तो पूरे हिंद महासागर और मलक्का क्षेत्र में जहाजों की निगरानी और बेहतर हो सकती है।

पीएम मोदी की यात्रा के दौरान रक्षा सहयोग पर रहेगा जोर

सूत्रों के मुताबिक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इंडोनेशिया यात्रा के दौरान समुद्री सुरक्षा, मिलिट्री ट्रेनिंग और रक्षा सहयोग प्रमुख मुद्दों में शामिल रह सकते हैं।

बताया जा रहा है कि भारत इंडोनेशिया के सैन्य कैडेट्स के लिए पुणे स्थित नेशनल डिफेंस एकेडमी (एनडीए) में ट्रेनिंग सीटें उपलब्ध कराने का प्रस्ताव रख सकता है। इसके अलावा तमिलनाडु के वेलिंगटन स्थित डिफेंस सर्विसेज स्टाफ कॉलेज में मिड-कैरियर कोर्स के अवसर बढ़ाने पर भी चर्चा हो सकती है।

इस तरह दोनों देशों के सैन्य अधिकारियों के बीच प्रोफेशनल ट्रेनिंग और अनुभव साझा करने का दायरा बढ़ेगा।

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रियल टाइम डेटा से तैयार होती है साझा समुद्री तस्वीर

आईएफसी-आईओआर की सबसे बड़ी ताकत इसका डेटा फ्यूजन मॉडल है। सेंटर में अलग-अलग स्रोतों से आने वाली सूचनाओं को एक साथ जोड़कर विश्लेषण किया जाता है।

इसमें तटीय रडार नेटवर्क, सैटेलाइट फीड, एआईएस डेटा, शिपिंग डेटाबेस और साझेदार देशों की एजेंसियों से मिलने वाली जानकारी शामिल होती है। इसके बाद पूरे हिंद महासागर क्षेत्र का एक रियल टाइम समुद्री नक्शा तैयार किया जाता है।

यदि किसी जहाज का रास्ता अचानक बदलता है, वह अपने पहचान संकेत बंद कर देता है या किसी संवेदनशील क्षेत्र में असामान्य गतिविधि करता है तो सिस्टम तुरंत उसकी पहचान कर सकता है।

पिछले कुछ सालों में भारत ने हिंद महासागर क्षेत्र में समुद्री निगरानी को काफी मजबूत किया है। इसके लिए केवल नौसैनिक जहाजों पर निर्भर रहने के बजाय डेटा नेटवर्क, सैटेलाइट, तटीय रडार और अंतरराष्ट्रीय साझेदारी को भी बराबर महत्व दिया गया है। (IFC-IOR Indonesia Liaison Officer)

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  • News Desk

    रक्षा समाचार न्यूज डेस्क भारत की अग्रणी हिंदी रक्षा समाचार टीम है, जो Indian Army, Navy, Air Force, DRDO, रक्षा उपकरण, युद्ध रणनीति और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी विश्वसनीय और विश्लेषणात्मक खबरें पेश करती है। हम लाते हैं सटीक, सरल और अपडेटेड Defence News in Hindi। हमारा उद्देश्य है – "हर खबर, देश की रक्षा से जुड़ी।"

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