📍नई दिल्ली | 6 Jul, 2026, 10:30 AM
Agniveer Permanent Recruitment: अग्निपथ योजना के तहत भर्ती किए गए पहले बैच के अग्निवीर इस साल अपना चार साल का कार्यकाल पूरा करने जा रहे हैं। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या अब 25 प्रतिशत से ज्यादा अग्निवीरों को नियमित सैनिक के रूप में रखा जाएगा? रक्षा सूत्रों और मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक तीनों सेनाएं प्रशिक्षित और अनुभवी अग्निवीरों की संख्या बढ़ाने के विकल्प पर विचार कर रही हैं। हालांकि अभी सरकार की ओर से मौजूदा नीति में किसी बदलाव की आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है।
सूत्रों के अनुसार भारतीय नौसेना अपने यहां लगभग 75 प्रतिशत अग्निवीरों को रखने का प्रस्ताव रख सकती है, जबकि भारतीय सेना और भारतीय वायुसेना करीब 50 प्रतिशत तक रिटेंशन बढ़ाने के पक्ष में हैं। इस विषय पर अंतिम फैसला रक्षा मंत्रालय के डिपार्टमेंट ऑफ मिलिट्री अफेयर्स (डीएमए) के साथ चर्चा के बाद ही होगा।
Agniveer Permanent Recruitment: क्या है अग्निपथ योजना और कैसे होती है भर्ती
अग्निपथ योजना के तहत युवाओं की भर्ती चार साल के लिए की जाती है। भर्ती के बाद उन्हें सैनिक, नाविक और एयरमैन के रूप में पूरी सैन्य ट्रेनिंग दी जाती है। ट्रेनिंग पूरी होने के बाद वे अपनी-अपनी यूनिट में तैनात होकर ऑपरेशनल और तकनीकी जिम्मेदारियां निभाते हैं।
मौजूदा व्यवस्था के अनुसार चार साल पूरे होने पर सभी अग्निवीर पहले सेवा से मुक्त किए जाते हैं। इसके बाद स्वेच्छा से आवेदन करने वाले अग्निवीरों में से अधिकतम 25 प्रतिशत का चयन मेरिट, मेडिकल फिटनेस, प्रदर्शन और संगठन की जरूरत के आधार पर नियमित सेवा के लिए किया जाएगा। बाकी अग्निवीर सेवा निधि पैकेज और अन्य सुविधाओं के साथ सेना से बाहर आते हैं। (Agniveer Permanent Recruitment)
अब रिटेंशन बढ़ाने की चर्चा क्यों हो रही है
सूत्रों के मुताबिक पिछले चार वर्षों में अग्निवीरों ने केवल ट्रेनिंग ही नहीं ली, बल्कि कई महत्वपूर्ण ऑपरेशनल गतिविधियों, सीमावर्ती तैनाती, बड़े सैन्य अभ्यास और आधुनिक हथियारों को चलाने की भी ट्रेनिंग ली है।
सेना का मानना है कि किसी सैनिक को पूरी तरह दक्ष बनने में केवल शुरुआती ट्रेनिंग ही नहीं, बल्कि फील्ड एक्सपीरियंस भी अहम भूमिका निभाता है। चार सालों में तैयार हुए प्रशिक्षित जवानों को पूरी तरह सेवा से अलग करने के बजाय बड़ी संख्या में बनाए रखने से अनुभवी स्किल्ड अग्निवीर सेना को मिलेंगे। इसी के चलते तीनों सेनाओं ने रिटेंशन प्रतिशत बढ़ाने के विकल्प पर आंतरिक स्तर पर विचार शुरू किया है। (Agniveer Permanent Recruitment)
नौसेना क्यों चाहती है सबसे ज्यादा रिटेंशन
सूत्रों के अनुसार भारतीय नौसेना में कई ऐसे प्लेटफॉर्म हैं, जिनके संचालन के लिए लंबी तकनीकी ट्रेनिंग की जरूरत होती है।
युद्धपोतों पर लगे आधुनिक रडार, मिसाइल सिस्टम, सोनार, कम्युनिकेशन नेटवर्क, गैस टर्बाइन इंजन, इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर सिस्टम और नेटवर्क बेस्ड वेपन सिस्टम को चलाने में काफी समय लगता है। ऐसे में यदि प्रशिक्षित नौसैनिक चार साल बाद बड़ी संख्या में सेवा छोड़ देंगे तो नए कर्मियों को फिर से उसी स्तर तक ट्रेनिंग देने में अतिरिक्त समय और संसाधन लगेंगे।
इसी वजह से नौसेना लगभग 75 प्रतिशत तक प्रशिक्षित अग्निवीरों को बनाए रखने का प्रस्ताव रख सकती है।
सेना और वायुसेना भी क्यों चाहती हैं ज्यादा रिटेंशन
भारतीय सेना और भारतीय वायुसेना भी लगभग 50 प्रतिशत तक रिटेंशन बढ़ाने के पक्ष में बताई जा रही हैं।
सूत्रों के अनुसार पिछले कुछ वर्षों में सेना और वायुसेना में बड़ी संख्या में आधुनिक हथियार और नई तकनीक वाले प्लेटफॉर्म शामिल हुए हैं। इन पर काम करने वाले सैनिकों को विशेष तकनीकी प्रशिक्षण दिया जाता है।
ऑपरेशन सिंदूर के बाद नई तकनीकों, आधुनिक हथियारों और डिजिटल युद्ध क्षमता पर ज्यादा जोर दिया गया है। ऐसे में प्रशिक्षित सैनिकों को लंबे समय तक सेवा में बनाए रखना अधिक उपयोगी माना जा रहा है। (Agniveer Permanent Recruitment)

आधुनिक हथियारों के लिए लंबी ट्रेनिंग जरूरी
आज का सैनिक केवल राइफल चलाने तक सीमित नहीं है। उसे नेटवर्क बेस्ड कम्युनिकेशन, ड्रोन, एंटी-ड्रोन सिस्टम, आधुनिक मिसाइलें, इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर उपकरण, निगरानी प्रणाली और डिजिटल कमांड नेटवर्क जैसे कई तकनीकी सिस्टम पर काम करना पड़ता है।
इन सभी सिस्टम पर दक्षता हासिल करने में समय लगता है। सूत्रों का कहना है कि यदि प्रशिक्षित सैनिक अधिक समय तक सेवा में रहते हैं तो सेना को बार-बार नए लोगों को उसी स्तर की ट्रेनिंग देने की आवश्यकता कम होगी।
युद्ध का अनुभव भी बना बड़ा कारण
सूत्रों के अनुसार चार सालों के दौरान कई अग्निवीरों ने वास्तविक ऑपरेशनल परिस्थितियों में काम किया है। सीमावर्ती इलाकों में तैनाती, कठिन मौसम, लंबी फील्ड पोस्टिंग और बड़े सैन्य अभ्यासों का अनुभव किसी भी सैनिक की कार्यक्षमता बढ़ाता है।
ऐसे सैनिक किसी आपात स्थिति में तेजी से निर्णय लेने और बेहतर तालमेल के साथ काम करने में सक्षम होते हैं। यही अनुभव अब रिटेंशन बढ़ाने की चर्चा का एक प्रमुख कारण माना जा रहा है। (Agniveer Permanent Recruitment)
केवल तकनीक ही नहीं, टीमवर्क भी अहम
सूत्रों का मानना है कि किसी यूनिट की सबसे बड़ी ताकत केवल उसके हथियार नहीं होते, बल्कि उसके सैनिकों के बीच बना भरोसा और तालमेल भी होता है।
जब सैनिक लंबे समय तक एक साथ काम करते हैं, कठिन परिस्थितियों का सामना करते हैं और लगातार अभ्यास करते हैं, तब उनकी टीमवर्क क्षमता मजबूत होती है। ऐसे प्रशिक्षित सैनिक किसी भी ऑपरेशन में बेहतर प्रदर्शन कर सकते हैं।
अगर नीति नहीं बदली तो क्या होगा
सूत्रों के अनुसार यदि कुल रिटेंशन प्रतिशत में बदलाव नहीं होता, तब भी कुछ विशेष यूनिटों में अधिक अनुभवी अग्निवीरों को रखा जा सकता है।
इस मॉडल में पूरी सेना का औसत रिटेंशन 25 प्रतिशत ही रहेगा, लेकिन अत्यधिक तकनीकी या विशेष जिम्मेदारी वाली यूनिटों में नियमित किए गए अग्निवीरों की संख्या अधिक हो सकती है।
वहीं सामान्य यूनिटों में चार वर्ष की सेवा पूरी कर रहे अग्निवीरों की संख्या अपेक्षाकृत ज्यादा रह सकती है।
भैरव बटालियन का भी दिया जा रहा उदाहरण
सूत्रों के मुताबिक सेना की नई भैरव बटालियन जैसी विशेष यूनिटों में अधिक अनुभवी सैनिकों की जरूरत हो सकती है।
ऐसी स्थिति में नियमित किए गए अग्निवीरों का अनुपात इन यूनिटों में सामान्य इन्फैंट्री बटालियन की तुलना में अधिक रखा जा सकता है। हालांकि इस संबंध में कोई आधिकारिक नीति जारी नहीं की गई है।
पहले भी भेजा गया था प्रस्ताव
सूत्रों के अनुसार रिटेंशन बढ़ाने का प्रस्ताव पहले भी डिपार्टमेंट ऑफ मिलिट्री अफेयर्स को भेजा गया था।
बताया जाता है कि उस समय इस प्रस्ताव को दोबारा समीक्षा के लिए वापस भेज दिया गया था ताकि सभी पहलुओं का विस्तार से अध्ययन किया जा सके।
अब पहले बैच का चार साल का कार्यकाल पूरा होने के साथ इस विषय पर फिर चर्चा तेज हो गई है। (Agniveer Permanent Recruitment)
सेना में तेजी से चल रही है अग्निवीरों की ट्रेनिंग
सूत्रों के मुताबिक पिछले प्रशिक्षण चक्र में केवल भारतीय सेना के विभिन्न रेजिमेंटल सेंटरों में लगभग 70 हजार अग्निवीर ट्रेनिंग ले रहे थे।
अगले ट्रेनिंग साइकिल में सेना लगभग 90 हजार नई रिक्तियां जारी करने की तैयारी कर रही है। इसका उद्देश्य सैनिकों की संख्या में आई कमी को धीरे-धीरे पूरा करना भी है।
सूत्रों के अनुसार सेना आने वाले वर्षों में चरणबद्ध तरीके से भर्ती बढ़ाकर मानव संसाधन की आवश्यकता पूरी करने पर काम कर रही है।
आधुनिक सेना के लिए युवा और अनुभवी सैनिकों का संतुलन
सूत्रों का कहना है कि अग्निपथ योजना का मूल उद्देश्य सेना की औसत आयु कम रखना है ताकि जवान अधिक युवा और ऊर्जावान रहें।
दूसरी ओर, आधुनिक युद्ध में अनुभव भी उतना ही महत्वपूर्ण हो गया है। इसी वजह से अब युवा प्रोफाइल बनाए रखते हुए पर्याप्त संख्या में अनुभवी सैनिकों को भी सेवा में रखने पर विचार किया जा रहा है।
यही संतुलन रिटेंशन बढ़ाने की चर्चा का मुख्य आधार माना जा रहा है। (Agniveer Permanent Recruitment)
अग्निवीरों को मिल रही हैं नियमित सैनिकों जैसी कई सुविधाएं
चार वर्षों के दौरान अग्निवीरों को प्रशिक्षण, वेतन, भत्ते और छुट्टियों जैसी कई सुविधाएं नियमित सैनिकों के समान मिलती हैं।
रक्षा मंत्रालय ने विभिन्न बैंकों के साथ समझौते भी किए हैं ताकि अग्निवीरों को वित्तीय योजनाओं का लाभ मिल सके। सेवा समाप्त होने पर उन्हें सेवा निधि पैकेज भी दिया जाता है।
कौन करेगा अंतिम फैसला
सूत्रों के अनुसार रिटेंशन प्रतिशत में किसी भी बदलाव का अंतिम निर्णय रक्षा मंत्रालय और डिपार्टमेंट ऑफ मिलिट्री अफेयर्स के स्तर पर ही लिया जाएगा।
तीनों सेनाएं अपनी परिचालन जरूरत, तकनीकी आवश्यकताओं, मानव संसाधन और प्रशिक्षण से जुड़े अनुभव साझा कर रही हैं। इन्हीं आधारों पर आगे की प्रक्रिया तय की जाएगी। फिलहाल आधिकारिक नीति के अनुसार चार साल की सेवा पूरी करने के बाद अधिकतम 25 प्रतिशत अग्निवीरों को ही मेरिट और सेवा की आवश्यकता के आधार पर नियमित सैनिक के रूप में शामिल करने का प्रावधान लागू है। (Agniveer Permanent Recruitment)
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