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AI in Operation Sindoor: कैसे भारत की ‘छतरी’ बना आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस? ऑपरेशन सिंदूर में पाकिस्तानी हवाई हमलों को ऐसे किया नाकाम

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📍नई दिल्ली | 19 May, 2025, 8:09 PM

AI in Operation Sindoor: पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत ने ऑपरेशन सिंदूर के तहत प्रतिक्रियात्मक कार्रवाई करते हुए न केवल पाकिस्तान के 9 आतंकी ठिकानों को नष्ट किया बल्कि उसके कई सैन्य ठिकानों और एयर स्ट्रिप्स को भी नुकसान पहुंचाया। जिसमें पाकिस्तान ने ड्रोन और मिसाइलों के जरिए भारत पर हवाई हमला करने की कोशिश की थी, जिसके जवाब में भारत ने उसके सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया। खास बात यह रही कि भारत और पाकिस्तान के बीच 6 से 10 मई के बीच हुए चार दिन के सैन्य संघर्ष में भारतीय वायुसेना और सेना ने जिस कुशलता से जवाब दिया, उसके पीछे एक अदृश्य लेकिन बेहद ताकतवर सहयोगी था एडवांस “आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस” यानी AI। जी हां, भारत के पास पहले से ही तैयार की गई AI आधारित टेक्नोलॉजी ही थीं जिन्होंने दुश्मन के ड्रोन और मिसाइल हमलों को हवा में ही निशाना बना दिया।

डिफेंस सूत्रों के अनुसार, भारत ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान के कई हवाई ठिकानों और सैन्य इन्फ्रास्ट्रक्चर को सफलतापूर्वक निशाना बनाया और पाकिस्तान की ओर से आने वाले दर्जनों हवाई हमलों को नाकाम किया। इस पूरे ऑपरेशन में भारत की ‘स्पेस टेक्नोलॉजी’, ‘इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर’ और ‘कंप्यूटर साइंस’ का जबरदस्त कॉम्बिनेशन देखने को मिला।

AI in Operation Sindoor: क्या हुआ था उस 6 और 7 मई की रात?

15 मई की रात, जब पूरा देश नींद में था, तब पाकिस्तानी सेना (AI in Operation Sindoor) ने भारत की सीमा के पास अपने ड्रोन और मिसाइलों को तैनात किया। इन हथियारों का मकसद भारत के सैन्य ठिकानों को नुकसान पहुंचाना और सीमावर्ती इलाकों में दहशत फैलाना था। डिफेंस सूत्रों के अनुसार, पाकिस्तान ने इस हमले के लिए अत्याधुनिक ड्रोनों का इस्तेमाल किया, जो रात के अंधेरे में चुपके से सीमा पार कर सकते थे। इसके अलावा, कुछ मिसाइलें भी दागी गईं, जो भारत के रडार सिस्टम को चकमा देने के लिए डिजाइन की गई थीं।

लेकिन पाकिस्तान की यह चाल कामयाब नहीं हो सकी। भारत की सेना ने अपनी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI in Operation Sindoor) से लैस एयर डिफेंस सिस्टम का इस्तेमाल कर इन हमलों को न केवल रोका, बल्कि दुश्मन के ड्रोन और मिसाइलों को हवा में ही नष्ट कर दिया। रक्षा मंत्रालय के एक अधिकारी ने बताया कि इस ऑपरेशन में भारत की “क्लाउड-बेस्ड इंटीग्रेटेड एय़र कमांड एंड कंट्रोल सिस्टम” ने अहम भूमिका निभाई। इस सिस्टम ने न सिर्फ दुश्मन के ड्रोन और मिसाइलों का पता लगाया, बल्कि उनकी लोकेशन ट्रैक करके उन्हें नष्ट करने के लिए सही समय पर सटीक कार्रवाई भी की।

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मिशन सिंदूर में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस ने कैसे की मदद?

सूत्रों ने बताया कि भारत ने पिछले कुछ सालों में अपने डिफेंस सिस्टम को मजबूत करने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस टेक्नोलॉजी (AI in Operation Sindoor) पर काफी काम किया है। 2018 में, रक्षा मंत्रालय ने एक खास टास्क फोर्स बनाई थी, जिसका मकसद नेशनल सिक्योरिटी के लिए एआई टेक्नोलॉजी को बढ़ावा देना था। इसके बाद डिफेंस AI काउंसिल (DAIC) और डिफेंस AI प्रोजेक्ट एजेंसी (DAIPA) का गठन हुआ, ताकि सेनाओं में AI को प्रभावी रूप से लागू किया जा सके। इस टास्क फोर्स ने कई सरकारी और निजी कंपनियों के साथ मिलकर एआई-बेस्ड डिफेंस सिस्टम्स को डेवलप करने की दिशा में काम शुरू किया। 2022 तक, भारत ने 129 एआई-बेस्ड प्रोजेक्ट्स को मंजूरी दी, जिनमें से 77 पूरी हो चुकी हैं। इन प्रोजेक्ट्स पर करीब 100 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं।

इन प्रोजेक्ट्स में से एक अहम सिस्टम है “इंटीग्रेटेड एयर कमांड एंड कंट्रोल सिस्टम” (AICCS), जिसने इस हमले को रोकने में बड़ी भूमिका निभाई। यह सिस्टम एआई (AI in Operation Sindoor) की मदद से दुश्मन के हथियारों का पता लगाने, उनकी लोकेशन ट्रैक करने और उन्हें नष्ट करने में सक्षम है। रक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि यह सिस्टम इतना एडवांस है कि यह रात के अंधेरे में भी दुश्मन के ड्रोन और मिसाइलों को कैच कर सकता है। इसके अलावा, यह सिस्टम हवा में मौजूद सभी वस्तुओं को स्कैन करता है और यह तय करता है कि कौन सी वस्तु खतरा है और कौन सी नहीं।

सूत्रों ने बताया कि यह सिस्टम जमीन, समुद्र और आकाश से दुश्मन की किसी भी गतिविधि को रियल टाइम में पहचान सकता है और उस पर तुरंत जवाबी कार्रवाई कर सकता है। AICCS ने मिसाइल और ड्रोन को ट्रैक करके उन्हें टारगेट पर पहुंचने से पहले ही हवा में नष्ट कर दिया।

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भारत में बने सिस्टम ने दिखाई ताकत

पिछले कुछ सालों में भारत ने अपनी डिफेंस टेक्नोलॉजी (AI in Operation Sindoor) को मजबूत करने के लिए कई कदम उठाए हैं। रक्षा मंत्रालय ने निजी कंपनियों को भी इस क्षेत्र में काम करने के लिए प्रोत्साहित किया है। 2022 में, सरकार ने 70 डिफेंस कंपनियों को एआई प्रोजेक्ट दिए, जिनमें से 40 पूरे हो चुके हैं। इनमें से भारत की सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (BEL) ने एक AI आधारित सिस्टम विकसित किया है, जो दुश्मन के विमानों की गतिविधियों को पहचान कर अलर्ट जारी करता है। यह सिस्टम भारत के इंटीग्रेटेड एयर कमांड एंड कंट्रोल सिस्टम (IACCS) में इंटीग्रेट किया गया, इस सिस्टम ने पाकिस्तानी ड्रोन और मिसाइलों को पकड़ने में अहम भूमिका निभाई।

रक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि एआई टेक्नोलॉजी (AI in Operation Sindoor) ने भारत के डिफेंस सिस्टम को पूरी तरह से बदल दिया है। पहले, भारत को दुश्मन के हमलों का पता लगाने के लिए पारंपरिक रडार सिस्टम पर निर्भर रहना पड़ता था, जो कई बार चूक जाते थे। लेकिन अब, एआई की मदद से भारत न केवल दुश्मन के हमलों को रोक सकता है, बल्कि सटीक कार्रवाई कर जवाब भी दे सकता है।

वहीं, रक्षा मंत्रालय ने अब अपनी तैयारियों को और मजबूत करने का फैसला किया है। मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि वह एआई टेक्नोलॉजी को और डेवलप करने के लिए काम करेगा, ताकि भविष्य में ऐसे हमलों को और बेहतर तरीके से रोका जा सके।

रक्षा मंत्रालय ने यह भी कहा कि वह सेना के सभी अंगों में एआई टेक्नोलॉजी (AI in Operation Sindoor) को लागू करने की योजना बना रहा है। इसके लिए मंत्रालय ने कई निजी कंपनियों के साथ करार किए हैं, जो एआई-आधारित सिस्टम डेपलप करने में मदद करेंगी। मंत्रालय का लक्ष्य है कि 2030 तक भारत की पूरा डिफेंस सिस्टम एआई टेक्नोलॉजी पर आधारित हो।

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हालांकि, कुछ विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि एआई टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल सावधानी से करना चाहिए। अगर यह टेक्नोलॉजी गलत हाथों में पड़ जाए, तो यह देश की सुरक्षा के लिए खतरा भी बन सकती है। इसलिए, सरकार को यह सुनिश्चित करना होगा कि इस टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल केवल सही मकसद के लिए हो।

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    हरेंद्र चौधरी रक्षा पत्रकारिता (Defence Journalism) में सक्रिय हैं और RakshaSamachar.com से जुड़े हैं। वे लंबे समय से भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना से जुड़ी रणनीतिक खबरों, रक्षा नीतियों और राष्ट्रीय सुरक्षा से संबंधित मुद्दों को कवर कर रहे हैं। पत्रकारिता के अपने करियर में हरेंद्र ने संसद की गतिविधियों, सैन्य अभियानों, भारत-पाक और भारत-चीन सीमा विवाद, रक्षा खरीद और ‘मेक इन इंडिया’ रक्षा परियोजनाओं पर विस्तृत लेख लिखे हैं। वे रक्षा मामलों की गहरी समझ और विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण के लिए जाने जाते हैं।

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