📍नई दिल्ली | 10 Jul, 2026, 9:16 PM
Army Air Defence Centre Gopalpur: भारतीय सेना अपनी ट्रेनिंग व्यवस्था को भी लगातार आधुनिक बना रही है। ओडिशा के गोपालपुर स्थित आर्मी एयर डिफेंस सेंटर में अब नई पीढ़ी के कई अत्याधुनिक सिमुलेटरों पर ट्रेनिंग दी जा रही है। आर्मी एयर डिफेंस सेंटर ने ड्राइविंग सिमुलेटर, VSHORADS सिमुलेटर और वर्चुअल शूटिंग सिमुलेटर को अपनी ट्रेनिंग में शामिल किया है। सेना के मुताबिक इन नए सिस्टमों का उद्देश्य जवानों को असली युद्ध जैसी परिस्थितियों में बेहतर ट्रेनिंग देना है, ताकि वे आधुनिक हवाई खतरों का तेजी से सामना कर सकें।
Army Air Defence Centre Gopalpur: बदल रहा है युद्ध का स्वरूप
कुछ साल पहले तक हवाई खतरों का मतलब मुख्य रूप से लड़ाकू विमान और हेलीकॉप्टर हुआ करता था। अब स्थिति पूरी तरह बदल चुकी है। आज ड्रोन, ड्रोन स्वॉर्म, लोइटरिंग म्यूनिशन, कम ऊंचाई पर उड़ने वाली क्रूज मिसाइलें और इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर जैसे खतरे तेजी से बढ़ रहे हैं।
ऐसे माहौल में केवल पारंपरिक ट्रेनिंग पर्याप्त नहीं मानी जाती। सैनिकों को ऐसे वातावरण में अभ्यास कराना जरूरी हो गया है, जहां वे अलग-अलग परिस्थितियों में तुरंत फैसला लेना सीख सकें। इसी जरूरत को ध्यान में रखते हुए गोपालपुर में तकनीक आधारित ट्रेनिंग सिस्टम को मजबूत किया गया है।
गोपालपुर क्यों है खास
ओडिशा के गोपालपुर मिलिट्री स्टेशन में स्थित आर्मी एयर डिफेंस सेंटर भारतीय सेना का प्रमुख एयर डिफेंस प्रशिक्षण संस्थान है। यहां एयर डिफेंस कोर के अधिकारी और जवान आधुनिक वेपन सिस्टम्स को ऑपरेट करना और हवाई खतरों से निपटने की ट्रेनिंग लेते हैं।
यहां पहले से एल-70 एयर डिफेंस गन, शिल्का, आकाश मिसाइल सिस्टम और अन्य एयर डिफेंस प्लेटफॉर्म से जुड़ी ट्रेनिंग दी जाती रही है। अब नई पीढ़ी के सिमुलेटर जुड़ने से ट्रेनिंग का लेवल और आधुनिक हो गया है। (Army Air Defence Centre Gopalpur)
VSHORADS सिमुलेटर से मिसाइल ऑपरेटरों की ट्रेनिंग
गोपालपुर में शामिल किया गया VSHORADS सिमुलेटर जवानों को कम दूरी की एयर डिफेंस मिसाइल सिस्टम चलाने का अभ्यास कराएगा। VSHORADS का इस्तेमाल कम ऊंचाई पर उड़ने वाले हेलीकॉप्टर, ड्रोन और अन्य हवाई टारगेट्स को निशाना बनाने के लिए किया जाता है।
इस सिमुलेटर में वास्तविक लॉन्चर जैसा मॉडल लगाया गया है। इसके सामने बड़ी स्क्रीन पर अलग-अलग प्रकार के हवाई टारगेट दिखाई देते हैं। जवान टारगेट की पहचान करते हैं, उसे लॉक करते हैं और फिर मिसाइल दागने की पूरी प्रक्रिया का अभ्यास करते हैं।
सूत्रों के अनुसार इसमें दिन और रात दोनों परिस्थितियों का अभ्यास कराया जा सकता है। साथ ही ड्रोन स्वॉर्म, कम ऊंचाई पर उड़ने वाले हेलीकॉप्टर और तेज गति वाले टारगेट्स को भी सिमुलेट किया जा सकता है।
एल-70 और अन्य सिस्टम्स की भी होती है ट्रेनिंग
गोपालपुर सेंटर में केवल नए मिसाइल सिस्टम्स की ही ट्रेनिंग नहीं दी जाती। यहां एल-70 एयर डिफेंस गन, शिल्का और अन्य एयर डिफेंस सिस्टम के ऑपरेशन की भी ट्रेनिंग दी जाती है।
वीडियो में एल-70 गन के लिए भी सिमुलेटर ट्रेनिंग उपलब्ध है, जहां जवान टारगेट की पहचान, ट्रैकिंग और फायर कंट्रोल की प्रक्रिया का अभ्यास करते हैं। हाल के सालों में एल-70 सिस्टम को आधुनिक सेंसर और काउंटर ड्रोन क्षमता के साथ अपग्रेड करने का काम भी किया गया है, जिसके अनुसार ट्रेनिंग को भी अपडेट किया जा रहा है। (Army Air Defence Centre Gopalpur)
“𝗙𝗼𝗿𝗴𝗶𝗻𝗴 𝘁𝗵𝗲 𝗙𝘂𝘁𝘂𝗿𝗲 𝗼𝗳 𝗔𝗶𝗿 𝗗𝗲𝗳𝗲𝗻𝗰𝗲.”
“𝗘𝗺𝗽𝗼𝘄𝗲𝗿𝗶𝗻𝗴 𝗔𝗶𝗿 𝗗𝗲𝗳𝗲𝗻𝗰𝗲 𝘄𝗶𝘁𝗵 𝗧𝗲𝗰𝗵𝗻𝗼𝗹𝗼𝗴𝘆-𝗗𝗿𝗶𝘃𝗲𝗻 𝗧𝗿𝗮𝗶𝗻𝗶𝗻𝗴 𝗳𝗼𝗿 𝗧𝗼𝗺𝗼𝗿𝗿𝗼𝘄’𝘀 𝗕𝗮𝘁𝘁𝗹𝗲𝗳𝗶𝗲𝗹𝗱.”
The #ArmyAirDefenceCentre, #GopalpurMilitaryStation is… pic.twitter.com/QGF2UWMFv6
— SuryaCommand_IA (@suryacommand) July 10, 2026
वर्चुअल शूटिंग सिमुलेटर पर फायरिंग का अभ्यास
इसके अलावा गोपालपुर में एक वर्चुअल शूटिंग सिमुलेटर है। इसे इस तरह बनाया गया है कि सैनिक बिना असली गोलियां चलाए युद्ध जैसी परिस्थितियों में फायरिंग का अभ्यास कर सकें। अगर किसी एयर डिफेंस पोजीशन पर दुश्मन के कमांडो, आतंकवादी, ड्रोन ऑपरेटर या छोटे हथियारों से लैस हमलावर पहुंच जाएं, तो सैनिकों को राइफल से भी मुकाबला करना पड़ सकता है। ऐसे हालात के लिए यह सिमुलेटर उन्हें पहले से तैयार करता है।
इस सिस्टम में असली राइफल जैसी दिखने वाली ट्रेनिंग राइफल का इस्तेमाल किया जाता है। जब सैनिक निशाना लगाता है और ट्रिगर दबाता है, तो कंप्यूटर तुरंत रिकॉर्ड करता है कि गोली सही जगह लगी या नहीं। इस सिमुलेटर की सबसे बड़ी खूबी यह है कि इसमें बिना असली गोली चलाए बार-बार अभ्यास किया जा सकता है। अलग-अलग हालात, मौसम, स्थान और खतरे कुछ ही मिनटों में बदले जा सकते हैं। इससे सैनिक वास्तविक ऑपरेशन से पहले कई तरह की परिस्थितियों में अभ्यास कर लेते हैं और उनकी प्रतिक्रिया क्षमता पहले से बेहतर हो जाती है।
ड्राइविंग सिमुलेटर से मिलेगी असली जैसी ट्रेनिंग
नए ड्राइविंग सिमुलेटर का उद्देश्य मिलिट्री व्हीकल्स को मुश्किल हालात कठिन परिस्थितियों में सुरक्षित और तेज तरीके से चलाने का अभ्यास कराना है। इसमें सैनिकों को अलग-अलग तरह की सड़कें, पहाड़ी रास्ते, बारिश, कोहरा, रात का समय और लिमिटेड विजिबिलिटी जैसी परिस्थितियों में वाहन चलाने का अनुभव कराया जाता है।
इस सिस्टम में मोशन प्लेटफॉर्म लगाया गया है, जिससे चालक को वाहन के हिलने-डुलने का भी असली अनुभव मिलता है। इसके साथ बड़े डिजिटल डिस्प्ले पर पूरा रास्ता दिखाई देता है। ट्रेनिंग के दौरान अचानक आने वाले खतरों, सड़क अवरोधों और हवाई खतरे जैसी स्थितियां भी बनाई जाती हैं, ताकि चालक तुरंत प्रतिक्रिया देना सीख सके। (Army Air Defence Centre Gopalpur)
हर अभ्यास का डिजिटल विश्लेषण
इन सिमुलेटरों में हर ट्रेनिंग सेशन का पूरा रिकॉर्ड तैयार किया जाता है। सिस्टम यह दर्ज करता है कि सैनिक ने टारगेट को पहचानने में कितना समय लिया, कब निर्णय लिया और उसकी प्रतिक्रिया कितनी सटीक रही।
इसके बाद प्रशिक्षकों को पूरी रिपोर्ट मिलती है। इसी आधार पर जवानों के स्किल्स का विश्लेषण किया जाता है और उन्हें आगे की ट्रेनिंग दी जाती है। इससे प्रशिक्षण अधिक प्रभावी और व्यक्तिगत जरूरतों के अनुसार बनाया जा सकता है।
तकनीक आधारित ट्रेनिंग पर बढ़ रहा जोर
भारतीय सेना पिछले कुछ वर्षों से तकनीक आधारित प्रशिक्षण पर विशेष ध्यान दे रही है। इसका उद्देश्य केवल हथियार चलाना सिखाना नहीं, बल्कि जवानों को ऐसी परिस्थितियों के लिए तैयार करना है जहां उन्हें कुछ सेकंड के भीतर सही निर्णय लेना पड़ सकता है।
दरअसल आधुनिक सिमुलेटर से बार-बार अभ्यास इसलिए कराया जा सकता है क्योंकि इससे मिसाइलों और गोला-बारूद की खपत कम होती है, प्रशिक्षण की लागत घटती है और जवानों को अधिक सुरक्षित वातावरण में जटिल परिस्थितियों का अनुभव मिलता है।
आर्मी एयर डिफेंस सेंटर द्वारा जारी जानकारी के अनुसार इन नए सिमुलेटरों का मुख्य उद्देश्य सैनिकों को तकनीक आधारित, मिशन उन्मुख और वास्तविक परिस्थितियों के अनुरूप प्रशिक्षण देना है। इसमें तकनीकी दक्षता, ऑपरेशनल कौशल और निर्णय लेने की क्षमता पर विशेष जोर दिया गया है। (Army Air Defence Centre Gopalpur)
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हरेंद्र चौधरी रक्षा पत्रकारिता (Defence Journalism) में सक्रिय हैं और RakshaSamachar.com से जुड़े हैं। वे लंबे समय से भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना से जुड़ी रणनीतिक खबरों, रक्षा नीतियों और राष्ट्रीय सुरक्षा से संबंधित मुद्दों को कवर कर रहे हैं। पत्रकारिता के अपने करियर में हरेंद्र ने संसद की गतिविधियों, सैन्य अभियानों, भारत-पाक और भारत-चीन सीमा विवाद, रक्षा खरीद और ‘मेक इन इंडिया’ रक्षा परियोजनाओं पर विस्तृत लेख लिखे हैं। वे रक्षा मामलों की गहरी समझ और विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण के लिए जाने जाते हैं।


