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AMCA इंजन रेस में बड़ा मोड़! रिलायंस-रोल्स रॉयस की एंट्री, भारत का सबसे बड़ा एयरो इंजन मिशन शुरू

यह घोषणा ऐसे समय में हुई है जब भारत पांचवीं पीढ़ी के स्टील्थ फाइटर जेट एएमसीए को डेवलप करने के लिए स्वदेशी इंजन की तलाश में है और इस परियोजना को देश के सबसे महत्वपूर्ण रक्षा प्रोग्रामों में गिना जा रहा है...

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📍नई दिल्ली/लंदन | 14 Aug, 2026, 7:59 PM

AMCA indigenous engine: भारत के महत्वाकांक्षी एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (AMCA) प्रोग्राम को लेकर 14 अगस्त को एक बड़ा ऐलान हुआ। रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड और ब्रिटेन की एयरोस्पेस दिग्गज कंपनी रोल्स-रॉयस ने भारत के लिए स्वदेशी कॉम्बैट इंजन डेवलप करने के उद्देश्य से रणनीतिक साझेदारी की घोषणा की है।

दोनों कंपनियों ने कहा है कि वे एएमसीए प्रोग्राम के लिए एक संप्रभु और स्वदेशी लड़ाकू विमान इंजन के डिजाइन, डेवलपमेंट, मैन्युफैक्चरिंग और डिलीवरी की दिशा में साथ काम करने की संभावनाओं पर आगे बढ़ेंगी। इस साझेदारी का उद्देश्य केवल एक इंजन बनाना नहीं, बल्कि भारत में एक संपूर्ण एयरो-इंजन इकोसिस्टम तैयार करना है।

यह घोषणा ऐसे समय में हुई है जब भारत पांचवीं पीढ़ी के स्टील्थ फाइटर जेट एएमसीए को डेवलप करने के लिए स्वदेशी इंजन की तलाश में है और इस परियोजना को देश के सबसे महत्वपूर्ण रक्षा प्रोग्रामों में गिना जा रहा है।

AMCA indigenous engine: एएमसीए के लिए क्यों जरूरी है नया इंजन?

एएमसीए भारतीय वायुसेना की भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखकर डेवलप किया जा रहा पांचवीं पीढ़ी का स्टील्थ लड़ाकू विमान है। इस विमान को कम रडार सिग्नेचर, लंबी दूरी की मारक क्षमता, एडवांस्ड सेंसर और नेटवर्क-सेंट्रिक वॉरफेयर क्षमताओं के साथ डिजाइन किया जा रहा है।

फिलहाल एएमसीए एमके-1 वर्जन में अमेरिकी कंपनी जीई का एफ-414 इंजन इस्तेमाल करने की योजना है। यह इंजन लगभग 98 किलो न्यूटन थ्रस्ट पैदा करता है।

हालांकि एएमसीए एमके-2 के लिए अधिक ताकतवर इंजन की जरूरत होगी। विशेषज्ञों के अनुसार इसके लिए 110 से 130 किलो न्यूटन क्लास, यानी लगभग 120 किलो न्यूटन या उससे अधिक थ्रस्ट वाला इंजन जरूरी माना जा रहा है। इसी जरूरत को पूरा करने के लिए नया स्वदेशी इंजन डेवलप करने की प्रक्रिया चल रही है।

बनाएंगी एयरोस्पेस गैस टरबाइन कॉम्प्लेक्स

संयुक्त बयान में कहा गया कि दोनों कंपनियां भारत में एक समर्पित “एयरोस्पेस गैस टरबाइन कॉम्प्लेक्स” स्थापित करने की संभावनाओं पर विचार करेंगी।

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यह कॉम्प्लेक्स पावर और प्रोपल्शन टेक्नोलॉजी का सेंटर ऑफ एक्सीलेंस होगा। यहां इंजन डिजाइन, डेवलपमेंट, मैन्युफैक्चरिंग, टेस्टिंग, प्रोडक्शन और लाइफ-साइकिल सपोर्ट जैसी पूरी क्षमताएं डेवलप की जाएंगी।

कंपनियों के अनुसार इस पहल का उद्देश्य भारत में एंड-टू-एंड एयरो इंजन क्षमता डेवलप करना है ताकि भविष्य में देश को महत्वपूर्ण सैन्य इंजन तकनीकों के लिए बाहरी देशों पर निर्भर न रहना पड़े।

रिलायंस इंडस्ट्रीज के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर अनंत अंबानी ने कहा कि भारत की रणनीतिक स्वायत्तता के लिए महत्वपूर्ण तकनीकों में आत्मनिर्भरता जरूरी है।

उन्होंने कहा कि रोल्स-रॉयस की इंजन तकनीक और रिलायंस की तकनीक, उत्पादन और बड़े प्रोजेक्ट संभालने की क्षमता को मिलाकर भारत में एक मजबूत एयरो-इंजन इकोसिस्टम बनाया जा सकता है।

अनंत अंबानी ने कहा कि यह पहल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आत्मनिर्भर डेवलप भारत के विजन की दिशा में योगदान है। (AMCA indigenous engine)

रोल्स-रॉयस ने बताया बड़ा कदम

रोल्स-रॉयस पीएलसी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी तुफान एरगिनबिलगिच ने इस साझेदारी को भारत के एयरोस्पेस क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण बताया।

उन्होंने कहा कि रोल्स-रॉयस के पास एडवांस इंजीनियरिंग और इंजन विकास का एक सदी से अधिक का अनुभव है। वहीं रिलायंस भारत के सबसे बड़े औद्योगिक समूहों में शामिल है। दोनों की ताकत को मिलाकर देश में आत्मनिर्भर एयरोस्पेस इकोसिस्टम को मजबूत किया जा सकता है।

एएमसीए इंजन रेस में बड़ा मुकाबला

रोल्स-रॉयस की यह घोषणा ऐसे समय आई है जब एएमसीए इंजन प्रोग्राम को लेकर वैश्विक प्रतिस्पर्धा अपने अंतिम चरण में मानी जा रही है।

फ्रांस की सफरान कंपनी पहले से ही गैस टरबाइन रिसर्च एस्टैब्लिशमेंट (GTRE) के साथ जॉइंट वेंचर का प्रस्ताव दे चुकी है। रक्षा क्षेत्र में चर्चा रही है कि साफरान का प्रस्ताव सरकारी मंजूरी के काफी करीब पहुंच चुका था।

दूसरी ओर अमेरिकी कंपनी जीई भी शुरुआत में दौड़ में शामिल थी, लेकिन एफ-414 इंजन की लागत और अन्य मुद्दों के कारण उसकी स्थिति कमजोर बताई जा रही थी।

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रोल्स-रॉयस ने इससे पहले भारत को 100 प्रतिशत टेक्नोलॉजी ट्रांसफर और बौद्धिक संपदा अधिकारों से जुड़ा व्यापक प्रस्ताव भी दिया था। यही कारण है कि यह नई साझेदारी एएमसीए इंजन प्रोग्राम में महत्वपूर्ण मानी जा रही है। (AMCA indigenous engine)

पूरी तरह नया होगा इंजन डिजाइन

रक्षा क्षेत्र से जुड़े सूत्रों के अनुसार प्रस्तावित इंजन किसी पुराने इंजन का रिवाइज्ड वर्जन नहीं होगा। यह एक “क्लीन-शीट डिजाइन” होगा, यानी शुरुआत से तैयार किया जाने वाला नया इंजन। इसे विशेष रूप से एएमसीए की जरूरतों को ध्यान में रखकर डेवलप किया जाएगा।

प्रस्तावित इंजन का शुरुआती थ्रस्ट 110 से 120 किलो न्यूटन के बीच रखा जा सकता है। डिजाइन को इस तरह डेवलप करने की बात कही गई है कि भविष्य में इसे 140 किलो न्यूटन तक अपग्रेड किया जा सके।

भारत को इस इंजन पर डिजाइन अथॉरिटी, कॉन्फिगरेशन कंट्रोल और लाइफ-साइकिल ओनरशिप मिलने की भी चर्चा है। (AMCA indigenous engine)

एयरोस्पेस गैस टरबाइन कॉम्प्लेक्स क्या होगा?

रोल्स-रॉयस ने 2026 की शुरुआत में एयरो गैस टरबाइन कॉम्प्लेक्स का विचार सामने रखा था। अब रिलायंस इस योजना में संभावित औद्योगिक साझेदार के रूप में जुड़ा है।

इस कॉम्प्लेक्स में इंजन के डिजाइन से लेकर परीक्षण, उत्पादन और रखरखाव तक की पूरी व्यवस्था डेवलप करने का लक्ष्य रखा गया है।

सिर्फ रक्षा क्षेत्र ही नहीं, बल्कि सिविल एविएशन, नए पावर सिस्टम और भविष्य की प्रोपल्शन तकनीकों पर भी यहां काम किया जा सकेगा। (AMCA indigenous engine)

रिलायंस की एयरोस्पेस सेक्टर में बढ़ती मौजूदगी

रिलायंस पहले से ही रक्षा और एयरोस्पेस क्षेत्र में सक्रिय है। नागपुर के मिहान क्षेत्र में दसॉ रिलायंस एयरोस्पेस लिमिटेड (DRAL) के माध्यम से राफेल और फाल्कन 2000 विमानों के कई एयरोस्ट्रक्चर तैयार किए जाते हैं। इनमें विंग्स, फ्यूजलेज सेक्शन और अन्य महत्वपूर्ण हिस्से शामिल हैं।

इसके अलावा थेल्स के साथ भी रिलायंस की साझेदारी है, जहां इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर और नेविगेशन सिस्टम से जुड़े कार्य किए जाते हैं।

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हालांकि गैस टरबाइन आधारित लड़ाकू विमान इंजन के डिजाइन और निर्माण में यह रिलायंस की पहली बड़ी एंट्री मानी जा रही है। (AMCA indigenous engine)

कावेरी इंजन प्रोग्राम से मिला अनुभव

भारत लंबे समय से स्वदेशी लड़ाकू विमान इंजन डेवलप करने का प्रयास कर रहा है। जीटीआरई द्वारा डेवलप कावेरी इंजन प्रोग्राम इसी दिशा में शुरू किया गया था।

हालांकि कावेरी इंजन तेजस लड़ाकू विमान के लिए आवश्यक परफॉरमेंस स्टैंडर्ड्स को पूरी तरह हासिल नहीं कर सका, लेकिन इस प्रोजेक्ट ने भारत को गैस टरबाइन तकनीक के क्षेत्र में महत्वपूर्ण अनुभव दिया।

हाल के वर्षों में कावेरी के आफ्टरबर्निंग संस्करण पर भी प्रगति दर्ज की गई है। एएमसीए इंजन प्रोग्राम को उसी तकनीकी अनुभव की अगली कड़ी के रूप में देखा जा रहा है। (AMCA indigenous engine)

भारत के लिए क्यों अहम है यह प्रोजेक्ट?

फाइटर जेट इंजन को दुनिया की सबसे मुश्किल मिलिट्री टेक्नोलॉजी में गिना जाता है। अमेरिका, रूस, ब्रिटेन, फ्रांस और चीन जैसे कुछ चुनिंदा देशों के पास ही पूरी तरह स्वदेशी लड़ाकू विमान इंजन डेवलप करने की क्षमता है।

एएमसीए इंजन प्रोग्राम को राष्ट्रीय एयरो इंजन मिशन का हिस्सा माना जा रहा है। इसकी अनुमानित लागत 5 अरब डॉलर से अधिक है। (AMCA indigenous engine)

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    हरेंद्र चौधरी रक्षा पत्रकारिता (Defence Journalism) में सक्रिय हैं और RakshaSamachar.com से जुड़े हैं। वे लंबे समय से भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना से जुड़ी रणनीतिक खबरों, रक्षा नीतियों और राष्ट्रीय सुरक्षा से संबंधित मुद्दों को कवर कर रहे हैं। पत्रकारिता के अपने करियर में हरेंद्र ने संसद की गतिविधियों, सैन्य अभियानों, भारत-पाक और भारत-चीन सीमा विवाद, रक्षा खरीद और ‘मेक इन इंडिया’ रक्षा परियोजनाओं पर विस्तृत लेख लिखे हैं। वे रक्षा मामलों की गहरी समझ और विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण के लिए जाने जाते हैं।

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