HomeDefence NewsOp Mahadev LoRa Device: ऑपरेशन महादेव में LoRa का क्या रहा रोल?...

Op Mahadev LoRa Device: ऑपरेशन महादेव में LoRa का क्या रहा रोल? आतंकियों के सीक्रेट कम्यूनिकेशन को सुरक्षा बलों ने किस तरह किया ट्रैक?

भारतीय सुरक्षा एजेंसियों के पास ऐसी तकनीक है, जो इन उपकरणों के चालू होने पर उनकी अनुमानित लोकेशन (3-5 किलोमीटर के दायरे में) का पता लगा सकती है। लेकिन घने जंगलों में सटीक स्थान ढूंढना चुनौतीपूर्ण होता है...

रक्षा समाचार WhatsApp Channel Follow US

📍नई दिल्ली | 1 Aug, 2025, 3:21 PM

Op Mahadev LoRa Device: 22 अप्रैल को पहलगाम में आतंकी हमले के तीनों गुनहगारों को सुरक्षा बलों ने ऑपरेशन महादेव के जरिए अपने अंजाम तक पहुंचा दिया। इस हमले शामिल तीनों आतंकी पाकिस्तानी थे, जिससे यह भी साफ हुआ कि पाकिस्तान समर्थित आतंकी संगठन अभी भी घाटी में आतंक को हवा दे रहे हैं। ऑपरेशन महादेव में आतंकियों के पास से हथियारों का भारी जखीरा तो बरामद हुआ ही, साथ ही, इन आतंकियों के पास से LoRa कम्युनिकेशन डिवाइस, मोबाइल फोन और NADRA कार्ड जैसी चीजें मिलीं, जिसने सुरक्षा एजेंसियों को चौंका दिया।

TRF Terrorist Designation: आईएसआई और लश्कर की कठपुतली द रेजिस्टेंस फ्रंट पर बड़ी चोट! अमेरिका ने लगाया ग्लोबल टेरेरिस्ट का ठप्पा, पहलगाम हमले के बाद आईबी और रॉ पर मढ़े थे ये आरोप

Op Mahadev LoRa Device: क्या है लोरा (LoRa) डिवाइस?

लोरा (LoRa) का पूरा नाम लॉन्ग रेंज (Long Range) है। यह एक ऐसी वायरलेस कम्यूनिकेशन टेक्नोलॉजी है जो लो-पावर में भी लंबी दूरी तक कम्यूनिकेशन करने की क्षमता रखती है। यह तकनीक विशेष रूप से उन क्षेत्रों में उपयोगी है, जहां मोबाइल नेटवर्क या इंटरनेट की सुविधा नहीं होती। लोरा डिवाइस का उपयोग सामान्य रूप से स्मार्ट सिटी, कृषि, और औद्योगिक निगरानी जैसे क्षेत्रों में होता है, लेकिन आतंकी संगठन इसे सीक्रेट कम्यूनिकेशन के लिए भी इस्तेमाल कर रहे हैं। LoRa यानी Long Range कम्युनिकेशन डिवाइस बिना किसी मोबाइल नेटवर्क या इंटरनेट के कई किलोमीटर तक डेटा ट्रांसफर करने में सक्षम होती है।

आतंकवादियों के इसके इस्तेमाल करने की वजह है कि यह तकनीक बेहद कम बिजली में काम करती है, पकड़ में आसानी से नहीं आती और इसे साधारण से उपकरण में भी छिपाया जा सकता है। यही वजह है कि ऑपरेशन महादेव में इस डिवाइस की बरामदगी ने सुरक्षा एजेंसियों की नींद उड़ा दी है। लोरा डिवाइस सैटेलाइट फोन की तरह आसानी से पकड़ में नहीं आते, क्योंकि ये रेडियो फ्रीक्वेंसी पर काम करते हैं और मोबाइल नेटवर्क पर निर्भर नहीं होते। वहीं, आतंकी इन उपकरणों को विशेष रूप से बनाए गए एन्क्रिप्टेड रेडियो (encrypted radio) में इस्तेमाल करते हैं, जिससे उनके संदेशों को सुनना मुश्किल होता है।

यह भी पढ़ें:  Shaktibaan Artillery Regiments: क्या है भारतीय सेना की नई ‘शक्तिबाण’ रेजीमेंट? क्या होगा इसमें खास और पारंपरिक आर्टिलरी यूनिट से कैसे होगी अलग, पढ़ें Explainer

11 जुलाई को मिला पहला सिग्नल

22 अप्रैल 2025 को पहलगाम के बैसारन क्षेत्र में हुए आतंकी हमले में 26 नागरिकों की मौत हुई थी। हमले के बाद सेना और पुलिस ने सुरागों को तलाशना शुरू किया। 11 जुलाई को पहली बार LoRa डिवाइस का एक रेडियो सिग्नल पकड़ा गया और 17 दिन बाद 27 जुलाई को उसी तरह का एक और सिग्नल श्रीनगर के बाहरी इलाके में स्थित महादेव पीक से आया। इसी तकनीकी जानकारी के आधार पर सुरक्षाबलों ने महादेव के जंगलों में सर्च ऑपरेशन शुरू किया। 28 जुलाई की सुबह जब आतंकियों को एक तंबू के नीचे आराम करते हुए पाया गया, तो उन्हें घेर लिया गया और कुछ ही घंटों में तीनों को ढेर कर दिया गया।

घने जंगलों में ढूंढना चुनौतीपूर्ण

LoRa डिवाइस की मदद से ये आतंकवादी पाकिस्तान में बैठे अपने आकाओं से संपर्क में थे। इस डिवाइस ने मोबाइल फोन से जोड़कर उन्होंने रेडियो फ्रिक्वेंसी के जरिए संदेश भेजे, जिससे ट्रैक करना मुश्किल था। हालांकि इसकी सीमाएं हैं। LoRa डिवाइस से सिर्फ सिग्नल की दिशा और सामान्य क्षेत्र का अंदाज़ा लगाना संभव होता है। लेकिन इतनी भी जानकारी सुरक्षाबलों के लिए काफी थी। भारतीय सुरक्षा एजेंसियों के पास ऐसी तकनीक है, जो इन उपकरणों के चालू होने पर उनकी अनुमानित लोकेशन (3-5 किलोमीटर के दायरे में) का पता लगा सकती है। लेकिन घने जंगलों में सटीक स्थान ढूंढना चुनौतीपूर्ण होता है।

NADRA कार्ड हुए बरामद

सूत्र बताते हैं कि ऑपरेशन महादेव के दौरान आतंकियों से मुठभेड़ के बाद जब तलाशी ली गई तो तीन मोबाइल फोन, तीन मोबाइल चार्जर, दो LoRa सेट, NADRA कार्ड की तस्वीरें, आधार कार्ड, 28-वॉट का सोलर चार्जर, GoPro हार्नेस, स्विस मिलिट्री पावर बैंक, एक M4 कार्बाइन राइफल, दो AK-47 राइफल, 17 राइफल ग्रेनेड और सिलाई का सामान, दवाइयां, स्टोव, सूखा राशन, और ढेर सारी चाय बरामद हुई। इनमें से NADRA कार्ड पाकिस्तान की नागरिक पहचान एजेंसी द्वारा जारी किए गए थे। इसका मतलब साफ था कि ये आतंकी पाकिस्तान के नागरिक थे और वहीं से प्रशिक्षित होकर भारत में घुसपैठ कर रहे थे। मोबाइल फोन से कई अहम जानकारियां मिलीं, जिनमें तस्वीरें, दस्तावेज, और कई ओवरग्राउंड वर्कस के मोबाइल नंबर शामिल थे। ये फोन फिलहाल राष्ट्रीय तकनीकी अनुसंधान संगठन (NTRO) की जांच में हैं, जो इनके डेटा का गहन विश्लेषण कर रहा है।

यह भी पढ़ें:  रूस ने शाहेद ड्रोन पर लगा दी यह घातक मिसाइल, इस नए इनोवेशन से उड़ गए यूक्रेन के होश

सूत्रों ने बताया कि पिछले कुछ सालों में, जम्मू-कश्मीर में आतंकियों और घुसपैठियों से LoRa डिवाइस बरामद हुए हैं। ये उपकरण पाकिस्तान में बैठे हैंडलर्स के साथ बातचीत के लिए इस्तेमाल किए जाते हैं। पिछले कुछ सालों में 50 से अधिक जवानों की हत्या करने वाले आतंकियों के पास लोरा डिवाइस मिले थे। वहीं, ये डिवाइस अक्सर सामान्य हार्डवेयर में छिपाए जाते हैं, ताकि इन्हें आसानी से न पहचाना जाए।

ऑपरेशन महादेव 28 जुलाई 2025 को जम्मू-कश्मीर के दाचीगाम जंगल में शुरू किया गया था, जिसमें भारतीय सेना, जम्मू-कश्मीर पुलिस, और केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) ने हिस्सा लिया था।

आतंकियों के पास मिले आधार कार्ड

इस ऑपरेशन में भारतीय सुरक्षा एजेंसियों ने टेक्निकल सर्विलांस का भी इस्तेमाल किया था। केवल ह्यूमन इंटेलिजेंस पर भरोसा करने के बजाय उन्होंने सैटेलाइट इमेजरी, LoRa और सैटेलाइट फोन के रेडियो सिग्नल, और ड्रोन से निगरानी जैसी आधुनिक तकनीकों का सहारा लिया। साथ ही आतंकियों की लोकेशन पुख्ता करने के लिए हीट सिग्नेचर ड्रोन का भी इस्तेमाल किया गया।

वहीं, हर बार जब कोई कम्यूनिकेशन डिवाइस एक्टिव होती, उसका सिग्नल ट्रैक कर लिया जाता और उस इलाके में सर्च अभियान चलाया जाता। यह ऑपरेशन बेहद चुनौतीपूर्ण था क्योंकि महादेव का इलाका घने जंगलों, गुफाओं और ऊंची पहाड़ियों से घिरा हुआ है।

एक और अहम बात जो सामने आई, वह थी आतंकियों के पास से मिले भारतीय आधार कार्ड। ये कार्ड श्रीनगर और गांदरबल के नामों से थे। इससे यह आशंका और गहराई कि पाकिस्तान से आने वाले आतंकी भारतीय ओवर ग्राउंड वर्कर्स (OGWs) की मदद से या तो फर्जी आधार कार्ड बनवा लेते हैं या खरीद लेते हैं, ताकि वे स्थानीय दिखें और चेकपोस्ट पर शक न हो। सूत्रों का कहना है कि आतंकियों की यह रणनीति सुरक्षा बलों के लिए एक बड़ी सुरक्षा चुनौती बनती जा रही है।

यह भी पढ़ें:  Lt Kashish Methwani: मिस इंडिया से भारतीय सेना में अफसर बनीं कशिश मेथवानी, फोटो में देखें ब्यूटी क्वीन से लेफ्टिनेंट तक का सफर

गृहमंत्री अमित शाह ने लोकसभा में बताया था कि मारे गए तीनों आतंकी वही थे, जिन्होंने अप्रैल में बैसारन घाटी में नरसंहार किया था। उनकी पहचान चार चश्मदीदों ने की गई, जिनमें बैसारन हमले में बचे हुए लोग और दो स्थानीय लोग शामिल थे, जिन्होंने आतंकियों को शरण दी थी। आतंकियों में शामिल थे सुलेमान शाह (लश्कर-ए-तैयबा का ट्रेनिंग सेंटर मुरिदके से प्रशिक्षित कमांडर), हामिद अफगानी (अफगान मूल का आतंकी) और जिबरान (जो पहले भी Z-मोर सुरंग पर हमले में शामिल रहा था)।

Author

  • Herry Photo

    हरेंद्र चौधरी रक्षा पत्रकारिता (Defence Journalism) में सक्रिय हैं और RakshaSamachar.com से जुड़े हैं। वे लंबे समय से भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना से जुड़ी रणनीतिक खबरों, रक्षा नीतियों और राष्ट्रीय सुरक्षा से संबंधित मुद्दों को कवर कर रहे हैं। पत्रकारिता के अपने करियर में हरेंद्र ने संसद की गतिविधियों, सैन्य अभियानों, भारत-पाक और भारत-चीन सीमा विवाद, रक्षा खरीद और ‘मेक इन इंडिया’ रक्षा परियोजनाओं पर विस्तृत लेख लिखे हैं। वे रक्षा मामलों की गहरी समझ और विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण के लिए जाने जाते हैं।

रक्षा समाचार WhatsApp Channel Follow US
हरेंद्र चौधरी
हरेंद्र चौधरी
हरेंद्र चौधरी रक्षा पत्रकारिता (Defence Journalism) में सक्रिय हैं और RakshaSamachar.com से जुड़े हैं। वे लंबे समय से भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना से जुड़ी रणनीतिक खबरों, रक्षा नीतियों और राष्ट्रीय सुरक्षा से संबंधित मुद्दों को कवर कर रहे हैं। पत्रकारिता के अपने करियर में हरेंद्र ने संसद की गतिविधियों, सैन्य अभियानों, भारत-पाक और भारत-चीन सीमा विवाद, रक्षा खरीद और ‘मेक इन इंडिया’ रक्षा परियोजनाओं पर विस्तृत लेख लिखे हैं। वे रक्षा मामलों की गहरी समझ और विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण के लिए जाने जाते हैं।

Most Popular