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ऑपरेशन सिंदूर के बाद बदली भारत की वॉर स्ट्रैटेजी! बना रहा जॉइंट आईएसआर और टारगेटिंग डॉक्ट्रिन, समझें क्या है ये

लेफ्टिनेंट जनरल मिनवाला ने बताया कि आईएसआर का मतलब होता है इंटेलिजेंस, सर्विलांस और रिकॉनिसेंस। आसान भाषा में समझें तो इसका मतलब है दुश्मन की जानकारी जुटाना, उस पर लगातार नजर रखना और उसकी गतिविधियों की टोह लेना...

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📍जयपुर | 7 May, 2026, 5:13 PM

Operation Sindoor Joint Doctrine: भारतीय सेना अब युद्ध की तैयारी केवल सीमा पर सैनिक और हथियार तैनात करके नहीं कर रही, बल्कि पूरा फोकस “जॉइंट वॉरफेयर” पर है। ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारत ने अपनी मिलिट्री स्ट्रैटेजी में बड़े बदलाव शुरू कर दिए हैं। इसी कड़ी में इंटीग्रेटेड डिफेंस स्टाफ यानी आईडीएस के डिप्टी चीफ लेफ्टिनेंट जनरल जुबिन ए मिनवाला ने खुलासा किया है कि भारत अब जॉइंट आईएसआर डॉक्ट्रिन और जॉइंट टारगेटिंग डॉक्ट्रिन पर तेजी से काम कर रहा है।

ऑपरेशन सिंदूर का एक साल पूरा होने पर जयपुर में आयोजित विशेष प्रेस ब्रीफिंग के दौरान उन्होंने बताया कि भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना अब अलग-अलग नहीं, बल्कि एक साझा नेटवर्क के जरिए युद्ध लड़ने की तैयारी कर रही हैं। उनका कहना था कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान इसी तरह के तालमेल ने भारत को तेजी से और सटीक कार्रवाई करने में मदद की।

Operation Sindoor Joint Doctrine: क्या है जॉइंट आईएसआर डॉक्ट्रिन

लेफ्टिनेंट जनरल मिनवाला ने बताया कि आईएसआर का मतलब होता है इंटेलिजेंस, सर्विलांस और रिकॉनिसेंस। आसान भाषा में समझें तो इसका मतलब है दुश्मन की जानकारी जुटाना, उस पर लगातार नजर रखना और उसकी गतिविधियों की टोह लेना। अब तक सेना, नौसेना और वायुसेना अपने-अपने सिस्टम के जरिए यह काम करती थीं। कई बार जानकारी अलग-अलग जगहों पर रहती थी, जिससे फैसले लेने में समय लगता था।

नई जॉइंट आईएसआर डॉक्ट्रिन का मकसद इन सभी सिस्टम्स को एक साथ जोड़ना है। इसका मतलब यह है कि अब सैटेलाइट, ड्रोन, रडार, जासूसी विमान, समुद्री निगरानी सिस्टम और खुफिया एजेंसियों से मिलने वाली जानकारी एक ही नेटवर्क में आएगी। इससे युद्ध क्षेत्र की पूरी तस्वीर रियल टाइम में तीनों सेनाओं को एक साथ दिखाई देगी।

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कैसे काम करेगा यह सिस्टम

इस नई व्यवस्था में कई तरह की तकनीकों को जोड़ा जा रहा है। इसमें स्पेस बेस्ड निगरानी के लिए सैटेलाइट इमेजरी और इलेक्ट्रॉनिक इंटेलिजेंस का इस्तेमाल होगा। आसमान से निगरानी के लिए एडवांस ड्रोन, एडब्ल्यूएसीएस विमान और रिकॉनिसेंस एयरक्राफ्ट काम करेंगे। जमीन और समुद्र में रडार, सोनार और अन्य निगरानी सिस्टम लगाए जाएंगे। इसके साथ साइबर और इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सिस्टम को भी नेटवर्क से जोड़ा जाएगा। इस पूरी व्यवस्था का मकसद दुश्मन की गतिविधियों का जल्दी पता लगाना और तुरंत जवाब देने की क्षमता बढ़ाना है।

Operation Sindoor Joint Doctrine 1
Lieutenant General Zubin A. Minwalla

ऑपरेशन सिंदूर से मिला बड़ा सबक

लेफ्टिनेंट जनरल मिनवाला ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारत ने महसूस किया कि आधुनिक युद्ध केवल बंदूक और मिसाइल से नहीं लड़े जाते। उन्होंने बताया कि उस दौरान अलग-अलग एजेंसियों से मिलने वाली जानकारी को तेजी से जोड़ना और सही समय पर कार्रवाई करना सबसे बड़ा चुनौतीपूर्ण काम था।

उनके मुताबिक, “ऑपरेशन सिंदूर ने दिखाया कि मल्टी डोमेन ऑपरेशन कितना जरूरी हो चुका है।” उन्होंने कहा कि आज युद्ध केवल जमीन, हवा और समुद्र तक सीमित नहीं है। अब साइबर स्पेस, डेटा नेटवर्क और सूचना युद्ध भी उतने ही अहम हो चुके हैं।

क्या है जॉइंट टारगेटिंग डॉक्ट्रिन

लेफ्टिनेंट जनरल मिनवाला ने जॉइंट टारगेटिंग डॉक्ट्रिन को भी विस्तार से समझाया। उन्होंने कहा कि पहले तीनों सेनाएं अपने-अपने लक्ष्य तय करती थीं। लेकिन अब एक जॉइंट टारगेटिंग सिस्टम बनाया जा रहा है।

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इसका मतलब यह होगा कि सेना, नौसेना और वायुसेना मिलकर तय करेंगी कि कौन सा लक्ष्य सबसे महत्वपूर्ण है और उस पर हमला किस हथियार या प्लेटफॉर्म से करना सबसे प्रभावी होगा।

उदाहरण के तौर पर अगर किसी दुश्मन एयरबेस पर हमला करना है, तो पहले आईएसआर सिस्टम उसके बारे में जानकारी जुटाएगा। इसके बाद यह तय किया जाएगा कि वहां ब्रह्मोस मिसाइल इस्तेमाल करनी है, ड्रोन हमला करना है या लड़ाकू विमान भेजना है। इसके बाद हमले के असर का आकलन भी उसी नेटवर्क के जरिए किया जाएगा।

छह चरणों में होगा पूरा ऑपरेशन

भारतीय सेना अब अंतरराष्ट्रीय मानकों के मुताबिक एक नई “जॉइंट टारगेटिंग साइकिल” पर काम कर रही है। इसमें सबसे पहले ऑपरेशन का उद्देश्य तय किया जाएगा। फिर दुश्मन के लक्ष्यों की पहचान होगी। इसके बाद यह तय किया जाएगा कि कौन सा हथियार सबसे सही रहेगा। उसके बाद कमांड स्तर पर मंजूरी मिलेगी और फिर मिशन को अंजाम दिया जाएगा। आखिर में यह जांचा जाएगा कि हमला कितना सफल रहा।

डेटा बेस्ड वॉरफेयर की तरफ बढ़ रहा भारत

लेफ्टिनेंट जनरल मिनवाला ने बताया कि ऑपरेशन सिंदूर में आईएसीसीएस और आकाशतीर जैसे सिस्टम को एक साथ जोड़कर इस्तेमाल किया गया। इससे पूरे एयर स्पेस की एक संयुक्त तस्वीर तैयार हुई और खतरे की पहचान तेजी से हो सकी। उन्होंने कहा कि भारत अब “नेटवर्क सेंट्रिक वॉरफेयर” से आगे बढ़कर “डेटा सेंट्रिक वॉरफेयर” की दिशा में जा रहा है।

इसका मतलब है कि भविष्य के युद्धों में सबसे बड़ी ताकत केवल हथियार नहीं, बल्कि सही समय पर सही डेटा होगा। मल्टी सेंसर इनपुट, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और रियल टाइम डेटा फ्यूजन के जरिए युद्ध के दौरान फैसले तेजी से लिए जाएंगे।

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लेफ्टिनेंट जनरल मिनवाला ने कहा कि भारतीय सेनाएं अब ऐसे सिस्टम बना रही हैं, जहां हर प्लेटफॉर्म और हर एजेंसी एक साझा नेटवर्क से जुड़ी हो।

उन्होंने बताया कि पिछले एक साल में कई ट्राई सर्विस एक्सरसाइज और वॉर गेमिंग अभ्यास किए गए हैं। इन अभ्यासों का मकसद यही है कि युद्ध के समय सेना, नौसेना और वायुसेना बिना किसी देरी के एक साथ काम कर सकें। उन्होंने कहा कि भारतीय तटरक्षक बल, बीएसएफ, डीआरडीओ, एनटीआरओ और दूसरी एजेंसियों के साथ भी तालमेल मजबूत किया गया है। उनके मुताबिक, आधुनिक युद्ध में केवल एक सेना नहीं, बल्कि पूरे राष्ट्र की संयुक्त शक्ति काम करती है।

India Developing Joint ISR and Targeting Doctrine After Operation Sindoor, Reveals Lt Gen Minwalla

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  • Herry Photo

    हरेंद्र चौधरी रक्षा पत्रकारिता (Defence Journalism) में सक्रिय हैं और RakshaSamachar.com से जुड़े हैं। वे लंबे समय से भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना से जुड़ी रणनीतिक खबरों, रक्षा नीतियों और राष्ट्रीय सुरक्षा से संबंधित मुद्दों को कवर कर रहे हैं। पत्रकारिता के अपने करियर में हरेंद्र ने संसद की गतिविधियों, सैन्य अभियानों, भारत-पाक और भारत-चीन सीमा विवाद, रक्षा खरीद और ‘मेक इन इंडिया’ रक्षा परियोजनाओं पर विस्तृत लेख लिखे हैं। वे रक्षा मामलों की गहरी समझ और विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण के लिए जाने जाते हैं।

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