HomeLegal Policy Newsसीमा पर सोते हुए हुई सेना के अफसर की मौत, अदालत ने...

सीमा पर सोते हुए हुई सेना के अफसर की मौत, अदालत ने कहा- ‘लाइन ऑफ ड्यूटी’ पर हुई शहादत

पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने 10 फरवरी को सरकार की अपील खारिज कर दी और स्पष्ट किया कि इस मामले में मेजर सैनी की मौत को ड्यूटी से अलग नहीं माना जा सकता...

रक्षा समाचार WhatsApp Channel Follow US

📍चंडीगढ़ | 10 Feb, 2026, 12:42 PM

Liberalised Family Pension: पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट ने एक ऐसा फैसला सुनाया है, जिसका असर आने वाले समय में हजारों सैनिक परिवारों पर पड़ सकता है। अदालत ने साफ कहा है कि अगर कोई सैनिक या अधिकारी सरकार द्वारा घोषित ऑपरेशनल इलाके में तैनात है और उसी दौरान उसकी मौत हो जाती है, तो उसे “लाइन ऑफ ड्यूटी” यानी ड्यूटी पर हुई मौत माना जाएगा, चाहे मौत सोते समय ही क्यों न हुई हो।

यह मामला भारतीय सेना के अधिकारी मेजर सुशील कुमार सैनी से जुड़ा है। उनकी मौत मई 1991 में भारत-पाकिस्तान सीमा पर एक बंकर में हुई थी। उस समय वे “ऑपरेशन रक्षक” के तहत तैनात थे। यह इलाका सरकार द्वारा आधिकारिक रूप से ऑपरेशनल क्षेत्र घोषित था। (Liberalised Family Pension)

Liberalised Family Pension: क्या हुआ था उस रात?

12 मई 1991 की रात मेजर सैनी को सूचना मिली कि 25 बांग्लादेशी नागरिक सीमा पार कर पाकिस्तान जाने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने तुरंत अपने अधीनस्थ अधिकारी को निर्देश दिए। कार्रवाई हुई, लोगों को पकड़ा गया और स्थिति संभाल ली गई। रिपोर्ट मिलने के बाद मेजर सैनी अपने बंकर में आराम करने चले गए।

अगली सुबह लगभग सात बजे एक सैनिक ने उन्हें बेहोश पाया। तुरंत एम्बुलेंस से अमृतसर मिलिट्री अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। मौत का कारण “एक्यूट मायोकार्डियल इन्फार्क्शन” यानी तेज हार्ट अटैक बताया गया। वे पहले से हाई ब्लड प्रेशर की समस्या से जूझ रहे थे और लगातार ऑपरेशनल तनाव में थे। (Liberalised Family Pension)

यह भी पढ़ें:  Air Force Commanders Conclave: रक्षा मंत्री बोले- ऑपरेशन सिंदूर ने दिखाया कैसे वायु शक्ति बनी भारत की रणनीतिक ताकत

पेंशन को लेकर शुरू हुई कानूनी लड़ाई

मृत्यु के बाद उनकी पत्नी अनुराधा सैनी को सामान्य फैमिली पेंशन दी गई। लेकिन उन्होंने दावा किया कि उनके पति की मौत ऑपरेशनल तनाव के कारण हुई और इसे “बैटल कैजुअल्टी” माना जाना चाहिए। अगर ऐसा माना जाता है तो परिवार को “लिबरलाइज्ड फैमिली पेंशन” मिलती है, जो सामान्य पेंशन से ज्यादा होती है।

2023 में आर्मेड फोर्सेस ट्रिब्यूनल चंडीगढ़ ने अनुराधा सैनी के पक्ष में फैसला दिया। ट्रिब्यूनल ने कहा कि यह मौत मिलिट्री सर्विस से जुड़ी है और ऑपरेशन रक्षक के दौरान हुई है, इसलिए ज्यादा पेंशन दी जानी चाहिए।

केंद्र सरकार ने इस फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी। सरकार का तर्क था कि अधिकारी की मौत सोते समय हुई, इसलिए इसे ऑपरेशनल एक्टिविटी के दौरान हुई मौत नहीं माना जा सकता। (Liberalised Family Pension)

क्या कहा हाईकोर्ट ने?

पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने 10 फरवरी को सरकार की अपील खारिज कर दी और स्पष्ट किया कि इस मामले में मेजर सैनी की मौत को ड्यूटी से अलग नहीं माना जा सकता। अदालत ने अपने फैसले में कहा कि जिस क्षेत्र में मेजर सैनी तैनात थे, उसे सरकार ने पहले से अधिसूचित ऑपरेशनल एरिया घोषित किया हुआ था। यानी वह सामान्य शांति क्षेत्र नहीं, बल्कि सक्रिय सैन्य तैनाती वाला इलाका था।

कोर्ट ने यह भी माना कि कोर्ट ऑफ इंक्वायरी की रिपोर्ट में साफ उल्लेख है कि मेजर सैनी की मृत्यु मिलिट्री सर्विस से जुड़ी हुई थी। इसके अलावा उसी दिन उस इलाके में घुसपैठ की कोशिश की सूचना भी सामने आई थी, जिससे यह साबित होता है कि वहां ऑपरेशनल तनाव की स्थिति मौजूद थी। (Liberalised Family Pension)

यह भी पढ़ें:  Woman IAF pilot: दिल्ली हाईकोर्ट का ऐतिहासिक फैसला; महिला को एयरफोर्स पायलट के पद पर नियुक्त करे वायु सेना

अदालत ने 31 जनवरी 2001 को जारी सरकारी दिशा-निर्देशों का हवाला देते हुए कहा कि यह मामला “कैटेगरी ई(1)” के तहत आता है। इस कैटेगरी में उन मामलों को शामिल किया जाता है, जहां किसी विशेष रूप से घोषित ऑपरेशन या ऑपरेशनल क्षेत्र में तैनाती के दौरान सैनिक की मृत्यु होती है।

फैसले में अदालत ने साफ शब्दों में कहा कि जब कोई सैनिक ऐसे घोषित ऑपरेशनल क्षेत्र में तैनात होता है, तो उसे चौबीसों घंटे ड्यूटी पर माना जाता है। इसलिए उसकी मौत को ड्यूटी से अलग नहीं किया जा सकता। (Liberalised Family Pension)

क्यों अहम है यह फैसला?

अदालत के इस फैसले के बााद स्पष्ट हो गया है कि ऑपरेशनल क्षेत्र में तैनात सैनिक की जिम्मेदारी और जोखिम 24 घंटे का होता है। वह चाहे गश्त पर हो, बंकर में हो या आराम कर रहा हो- वह ड्यूटी पर ही माना जाएगा। (Liberalised Family Pension)

Author

  • News Desk

    रक्षा समाचार न्यूज डेस्क भारत की अग्रणी हिंदी रक्षा समाचार टीम है, जो Indian Army, Navy, Air Force, DRDO, रक्षा उपकरण, युद्ध रणनीति और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी विश्वसनीय और विश्लेषणात्मक खबरें पेश करती है। हम लाते हैं सटीक, सरल और अपडेटेड Defence News in Hindi। हमारा उद्देश्य है – "हर खबर, देश की रक्षा से जुड़ी।"

रक्षा समाचार WhatsApp Channel Follow US
News Desk
News Desk
रक्षा समाचार न्यूज डेस्क भारत की अग्रणी हिंदी रक्षा समाचार टीम है, जो Indian Army, Navy, Air Force, DRDO, रक्षा उपकरण, युद्ध रणनीति और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी विश्वसनीय और विश्लेषणात्मक खबरें पेश करती है। हम लाते हैं सटीक, सरल और अपडेटेड Defence News in Hindi। हमारा उद्देश्य है – "हर खबर, देश की रक्षा से जुड़ी।"

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Most Popular