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भारत के अग्नि MIRV टेस्ट के पास क्यों मंडराता रहा चीन का ‘समुद्री जासूस’? हिंद महासागर में दिखी ड्रैगन की बेचैनी

सैटेलाइट इमेज और ट्रैकिंग डेटा के मुताबिक DA YANG HAO चीनी जहाज इस साल फरवरी में हिंद महासागर क्षेत्र में दाखिल हुआ था। इसके बाद यह अप्रैल में मॉरीशस के पास दिखाई दिया...

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📍नई दिल्ली | 11 May, 2026, 9:37 PM

China Spy Ship Agni MIRV Test: एक तरफ भारत जब एडवांस अग्नि मल्टीपल इंडिपेंडेंटली टारगेटेड री-एंट्री व्हीकल (MIRV) का हिंद महासागर में मिसाइल टेस्ट कर रहा था, तो उस दौरान एक चीनी रिसर्च वेसल उस इलाके में मौजूद थी। सैटेलाइट ट्रैकिंग मैप्स और ओपन सोर्स इंटेलिजेंस डेटा से पता चला कि यह जहाज 6 मई से 9 मई के बीच लगातार उसी समुद्री क्षेत्र के आसपास मौजूद रहा, जिसे भारत ने मिसाइल परीक्षण के लिए “डेंजर जोन” घोषित किया था।

हालांकि चीन की तरफ से इसे रिसर्च वेसल बताया गया, लेकिन इसका काम समुद्री रिसर्च के साथ-साथ इलेक्ट्रॉनिक इंटेलिजेंस और मिसाइल ट्रैकिंग से जुड़ी गतिविधियों पर नजर रखना है।

China Spy Ship Agni MIRV Test: क्या था भारत का अग्नि MIRV टेस्ट

भारत ने 8 मई को ओडिशा के डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम द्वीप से एडवांस अग्नि मिसाइल का सफल फ्लाइट ट्रायल किया। यह मिसाइल मल्टीपल इंडिपेंडेंटली टारगेटेड री-एंट्री व्हीकल यानी MIRV सिस्टम से लैस थी। यह मिसाइल कई अलग-अलग वारहेड लेकर जा सकती है और अलग-अलग लक्ष्यों पर हमला कर सकती है।

रक्षा मंत्रालय के मुताबिक मिसाइल को कई पेलोड्स के साथ लॉन्च किया गया और हिंद महासागर क्षेत्र में अलग-अलग जगहों पर मौजूद टारगेट्स को सफलतापूर्वक हिट किया गया।

इस टेस्ट में जमीन और समुद्र दोनों जगह मौजूद ट्रैकिंग सिस्टम्स ने मिसाइल की पूरी उड़ान को मॉनिटर किया। लॉन्च से लेकर पेलोड्स के इम्पैक्ट तक सभी डेटा रिकॉर्ड किए गए।

रक्षा विशेषज्ञों के मुताबिक यह टेस्ट केवल एक मिसाइल लॉन्च नहीं था, बल्कि भारत की न्यूक्लियर डिटरेंस क्षमता का बड़ा प्रदर्शन था।

MIRV तकनीक आखिर इतनी अहम क्यों है

MIRV तकनीक आधुनिक परमाणु रणनीति में बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है। सामान्य बैलिस्टिक मिसाइल में एक वारहेड होता है, लेकिन MIRV मिसाइल में कई वारहेड लगाए जा सकते हैं। ये वारहेड अंतरिक्ष में जाकर अलग-अलग दिशाओं में बंट जाते हैं और फिर अलग-अलग टारगेट्स की तरफ बढ़ते हैं।

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इसका सबसे बड़ा फायदा यह होता है कि दुश्मन का मिसाइल डिफेंस सिस्टम भ्रमित हो जाता है। अगर एक साथ कई वारहेड अलग-अलग दिशाओं से आएं, तो उन्हें रोकना बेहद मुश्किल हो जाता है। भारत के लिए यह तकनीक खास इसलिए भी मानी जा रही है क्योंकि चीन पहले से DF-41 जैसी MIRV क्षमता वाली मिसाइलें तैनात कर चुका है। इस टेस्ट के साथ भारत ने भी साफ संकेत दिया है कि वह केवल पारंपरिक बैलिस्टिक मिसाइलों तक सीमित नहीं रहना चाहता।

क्या कर रहा था चीन का जहाज?

सैटेलाइट इमेज और ट्रैकिंग डेटा के मुताबिक DA YANG HAO चीनी जहाज इस साल फरवरी में हिंद महासागर क्षेत्र में दाखिल हुआ था। इसके बाद यह अप्रैल में मॉरीशस के पास दिखाई दिया। फिर अप्रैल के आखिर तक यह भारत के पूर्वी समुद्री क्षेत्र के करीब पहुंच गया।

वहीं, 6 मई से 9 मई तक जहाज उसी इलाके के आसपास रुका रहा जहां भारत ने मिसाइल टेस्ट के लिए बंगाल की खाड़ी और हिंद महासागर के बड़े हिस्से में NOTMAR और एरियल वॉर्निंग जारी की थी।

यह जहाज पहले धीमी गति से “लॉइटरिंग” कर रहा था, यानी लगातार एक सीमित इलाके में घूम रहा था। फिर 10 मई के बाद वह आगे बढ़ गया।

रक्षा विश्लेषकों का मानना है कि चीन भारतीय मिसाइल टेस्ट से जुड़ा डेटा इकट्ठा करना चाहता था। हालांकि आधिकारिक तौर पर यह जहाज मिसाइल ट्रैकिंग शिप घोषित नहीं है, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि आधुनिक रिसर्च वेसल्स में ऐसे कई सेंसर और इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम होते हैं, जो मिसाइल लॉन्च से जुड़ी जानकारी रिकॉर्ड कर सकते हैं।

चीन क्यों रखता है भारत के मिसाइल टेस्ट पर नजर

भारत पिछले कुछ सालों से लगातार लंबी दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलों, हाइपरसोनिक टेक्नोलॉजी और न्यूक्लियर डिलीवरी सिस्टम्स पर तेजी से काम कर रहा है। चीन के लिए यह चिंता का विषय इसलिए भी है क्योंकि भारत की नई पीढ़ी की मिसाइलें अब केवल पाकिस्तान तक सीमित नहीं रहीं।

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अग्नि-5 जैसी मिसाइलें चीन के अंदर तक मौजूद रणनीतिक ठिकानों को निशाना बना सकती हैं। MIRV तकनीक जुड़ने के बाद एक ही मिसाइल कई शहरों या सैन्य ठिकानों पर हमला कर सकती है। इसी वजह से चीन भारतीय मिसाइलों की स्पीड, ट्रैजेक्टरी, वारहेड सेपरेशन और गाइडेंस सिस्टम को समझने की कोशिश करता है।

विशेषज्ञों के मुताबिक अगर किसी देश को मिसाइल की उड़ान से जुड़ा पर्याप्त डेटा मिल जाए, तो वह भविष्य में उसके खिलाफ डिफेंस सिस्टम विकसित कर सकता है।

हालांकि यह पहली बार नहीं है जब भारत के मिसाइल टेस्ट के दौरान चीनी जहाज दिखाई दिए हों। पिछले कुछ सालों में कई बार चीन के “रिसर्च वेसल” हिंद महासागर में एक्टिव दिखाई दिए हैं।

भारतीय सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि इनमें से कई जहाज “ड्यूल यूज” प्लेटफॉर्म होते हैं। यानी बाहर से वैज्ञानिक रिसर्च शिप दिखते हैं, लेकिन उनमें सैन्य निगरानी से जुड़े उपकरण भी लगे होते हैं। कुछ मामलों में भारत को अपने मिसाइल टेस्ट तक टालने पड़े थे क्योंकि चीनी जहाज संभावित ट्रैकिंग जोन में मौजूद थे।

हिंद महासागर में चीन की बढ़ती गतिविधियां

पिछले एक साल में चीन ने हिंद महासागर क्षेत्र में अपनी मौजूदगी तेजी से बढ़ाई है। रक्षा अधिकारियों के मुताबिक किसी भी समय औसतन 3 से 4 चीनी रिसर्च या सर्विलांस जहाज हिंद महासागर में सक्रिय रहते हैं।

इनमें “Shi Yan 6” जैसे जहाज भी शामिल हैं, जिन्हें हाल ही में बंगाल की खाड़ी के पास देखा गया था। भारतीय एजेंसियों का मानना है कि ये जहाज केवल समुद्री रिसर्च नहीं कर रहे, बल्कि भारत की नौसैनिक गतिविधियों, पनडुब्बी मूवमेंट और मिसाइल टेस्ट्स पर भी नजर रखते हैं।

हाइपरसोनिक तकनीक ने बढ़ाई चीन की चिंता

अग्नि MIRV टेस्ट के अगले ही दिन डीआरडीओ ने हाइपरसोनिक स्क्रैमजेट इंजन का भी सफल लंबी अवधि वाला टेस्ट किया। यह टेस्ट करीब 1200 सेकंड तक चला। हाइपरसोनिक हथियार मैक 5 से ज्यादा स्पीड पर उड़ते हैं। इतनी तेज रफ्तार पर मिसाइलों को इंटरसेप्ट करना बेहद कठिन हो जाता है।

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रक्षा विशेषज्ञों के मुताबिक MIRV और हाइपरसोनिक टेक्नोलॉजी का एक साथ आगे बढ़ना भारत की रणनीतिक क्षमता में बड़ा बदलाव माना जा रहा है। चीन पहले से DF-17 और दूसरे हाइपरसोनिक सिस्टम्स पर काम कर रहा है। भारत अब इस रेस में तेजी से आगे बढ़ता दिखाई दे रहा है।

अग्नि-5 और पाकिस्तान की अबाबील मिसाइल में क्या है फर्क

पाकिस्तान भी “अबाबील” नाम की MIRV क्षमता वाली मिसाइल का दावा करता रहा है। लेकिन रक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि भारत और पाकिस्तान की तकनीक में बड़ा अंतर है। बताया जाता है कि अग्नि-5 अपने वारहेड्स को वायुमंडल के बाहर अलग करता है, जिससे वे अलग-अलग दिशाओं में जाकर टारगेट हिट कर सकते हैं।

जबकि पाकिस्तान की अबाबील मिसाइल में वारहेड सेपरेशन काफी देर से होता है। इस वजह से उसे ट्रैक करना अपेक्षाकृत आसान माना जाता है।

भारत के न्यूक्लियर ट्रायड को मिल रही मजबूती

भारत लंबे समय से “न्यूक्लियर ट्रायड” यानी जमीन, हवा और समुद्र तीनों तरह से से परमाणु जवाबी हमला करने की क्षमता विकसित कर रहा है। अग्नि-5 MIRV टेस्ट को इसी दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।

भारत पहले ही अरिहंत क्लास न्यूक्लियर सबमरीन और के-4 जैसी सबमरीन लॉन्च बैलिस्टिक मिसाइलों पर काम कर चुका है। अब MIRV क्षमता जुड़ने के बाद भारत की सेकंड स्ट्राइक कैपेबिलिटी और मजबूत मानी जा रही है।

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    रक्षा समाचार न्यूज डेस्क भारत की अग्रणी हिंदी रक्षा समाचार टीम है, जो Indian Army, Navy, Air Force, DRDO, रक्षा उपकरण, युद्ध रणनीति और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी विश्वसनीय और विश्लेषणात्मक खबरें पेश करती है। हम लाते हैं सटीक, सरल और अपडेटेड Defence News in Hindi। हमारा उद्देश्य है – "हर खबर, देश की रक्षा से जुड़ी।"

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