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भारतीय सेना की नई ‘कौटिल्य’ एप रखेगी हथियारों से राशन तक सब पर नजर, कमांडरों को मिलेगा रियल टाइम इंटेलिजेंस

भारतीय सेना की तरफ से एक्स पर दी जानकारी के मुताबिक, “भारतीय सेना ने ‘कौटिल्य’ नाम की नई एप्लिकेशन लॉन्च की है, जिसका उद्देश्य स्ट्रक्चर्ड डेटा जेनरेशन को मजबूत करना और एआई-रेडी डिजिटल इकोसिस्टम तैयार करना है...

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📍नई दिल्ली | 24 May, 2026, 2:44 PM

Indian Army Kautilya App: भारतीय सेना ने डिजिटल वारफेयर और मॉडर्न मिलिट्री मैनेजमेंट की तरफ कदम बढ़ाते हुए हाल ही में नई एआई बेस्ड एप्लिकेशन “कौटिल्य” लॉन्च की है। यह एप भारतीय सेना के लिए एक एडवांस कमांड इंटेलिजेंस प्लेटफॉर्म की तरह काम करेगी। सेना का कहना है कि इसका मकसद डेटा को तेजी से जुटाना, उसका विश्लेषण करना और कमांडरों को तुरंत सही जानकारी उपलब्ध कराना है, ताकि फैसले जल्दी और बेहतर तरीके से लिए जा सकें।

भारतीय सेना की तरफ से एक्स पर दी जानकारी के मुताबिक, “भारतीय सेना ने ‘कौटिल्य’ नाम की नई एप्लिकेशन लॉन्च की है, जिसका उद्देश्य स्ट्रक्चर्ड डेटा जेनरेशन को मजबूत करना और एआई-रेडी डिजिटल इकोसिस्टम तैयार करना है।

यह एप्लिकेशन सोर्स लेवल पर टैबलेट आधारित डेटा एंट्री को सपोर्ट करती है और भारतीय सेना के दूसरे डेटा प्लेटफॉर्म्स के साथ इंटीग्रेट होकर काम करती है।

एआई एनेबल्ड डैशबोर्ड्स और एनएलपी आधारित इंटरफेस से लैस ‘कौटिल्य’ भारतीय सेना में बेहतर एनालिटिक्स, रियल टाइम डिसीजन मेकिंग और एडमिनिस्ट्रेटिव एफिशिएंसी बढ़ाने में मदद करेगी।”

Indian Army Kautilya App: चाणक्य के नाम पर रखा गया ‘कौटिल्य’

इस एप का नाम प्राचीन भारतीय रणनीतिकार और अर्थशास्त्री चाणक्य यानी कौटिल्य के नाम पर रखा गया है। चाणक्य को रणनीति, प्रशासन और खुफिया व्यवस्था का बड़ा विशेषज्ञ माना जाता है। भारतीय सेना ने इस नाम के जरिए पारंपरिक रणनीतिक सोच और आधुनिक टेक्नोलॉजी को जोड़ने की कोशिश की है।

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सेना के अधिकारियों के मुताबिक यह प्लेटफॉर्म “डेटा टू डिसीजन” यानी डेटा से तुरंत फैसले लेने की क्षमता बढ़ाने के लिए बनाया गया है। इसका इस्तेमाल ऑपरेशनल प्लानिंग से लेकर प्रशासनिक कामों तक किया जाएगा।

कैसे काम करेगी यह एप

“कौटिल्य” एप कई अलग-अलग स्रोतों से जानकारी इकट्ठा कर सकती है। इसमें टैबलेट इनपुट, फील्ड रिपोर्ट, स्कैन किए गए डॉक्यूमेंट, हैंडरिटन रिपोर्ट और डिजिटल फाइलें शामिल हैं।

मैदान में मौजूद जवान और अधिकारी सीधे टैबलेट के जरिए डेटा दर्ज कर सकेंगे। इससे कागजी काम कम होगा और जानकारी तुरंत सिस्टम तक पहुंच जाएगी। सेना का मानना है कि इससे रिपोर्टिंग में देरी कम होगी और यूनिट्स के बीच बेहतर कॉर्डिनेशन बनेगा।

यह एप भारतीय सेना के पहले से मौजूद कई डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के साथ भी जुड़ सकती है। इसमें सैनिकों की जानकारी, हथियारों का रिकॉर्ड, ट्रेनिंग स्टेटस, राशन सप्लाई, उपकरणों की स्थिति और ऑपरेशनल रेडिनेस से जुड़ा डेटा शामिल रहेगा। (Indian Army Kautilya App)

एआई डैशबोर्ड से मिलेगी रियल टाइम जानकारी

“कौटिल्य” की सबसे बड़ी खासियत इसका एआई एनेबल्ड डैशबोर्ड माना जा रहा है। इस डैशबोर्ड के जरिए कमांडर एक ही जगह पर कई तरह की जानकारी देख सकेंगे।

उदाहरण के तौर पर किसी यूनिट की ट्रेनिंग स्थिति, हथियारों की उपलब्धता, रसद व्यवस्था, गोला-बारूद की स्थिति और ऑपरेशनल तैयारी की जानकारी तुरंत मिल सकेगी।

सेना के मुताबिक इससे “सिचुएशनल अवेयरनेस” बेहतर होगी। यानी किसी इलाके या यूनिट की स्थिति को समझने में आसानी होगी और फैसले तेजी से लिए जा सकेंगे।

साधारण भाषा में सवाल पूछ सकेंगे अधिकारी

इस एप में नेचुरल लैंग्वेज प्रोसेसिंग यानी एनएलपी तकनीक भी जोड़ी गई है। इसकी मदद से अधिकारी सामान्य भाषा में सवाल पूछ सकेंगे।

अगर कोई अधिकारी पूछता है कि “यूनिट एक्स की रेडिनेस रिपोर्ट दिखाओ” या “गोला-बारूद की स्थिति क्या है”, तो सिस्टम बड़े डेटा को तुरंत समझकर आसान तरीके से जवाब देगा।

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रक्षा विशेषज्ञों के मुताबिक यह सुविधा मैनुअल डेटा सर्च का समय कम करेगी और कमांडरों को तेजी से जरूरी जानकारी उपलब्ध कराएगी। (Indian Army Kautilya App)

फील्ड एरिया में भी करेगा काम

भारतीय सेना ने इस एप को फील्ड ऑपरेशंस को ध्यान में रखते हुए डिजाइन किया है। सिस्टम में “आउटपोस्ट मोड” और “सिक्योर चैनल” जैसी सुविधाएं दी गई हैं।

यह एप सीमित इंटरनेट या कठिन इलाकों में भी काम कर सकती है। स्कैन डॉक्यूमेंट और ओसीआर तकनीक की मदद से कागजों को डिजिटल डेटा में बदला जा सकेगा।

सेना का कहना है कि इससे सीमा क्षेत्रों और ऑपरेशनल इलाकों में डेटा मैनेजमेंट आसान होगा।

सेना के डिजिटल बदलाव का हिस्सा

भारतीय सेना पिछले कुछ वर्षों से डिजिटल मॉडर्नाइजेशन पर तेजी से काम कर रही है। “कौटिल्य” उसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।

सेना ने 2026 को “ईयर ऑफ नेटवर्किंग एंड डेटा सेंट्रिसिटी” घोषित किया है। इसका मकसद सेना को नेटवर्क आधारित और डेटा-सेंट्रिक फोर्स में बदलना है।

इससे पहले सेना “ईयर ऑफ टेक्नोलॉजी एब्जॉर्प्शन” जैसे अभियान भी चला चुकी है। अब फोकस आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, बिग डेटा, ऑटोमेशन और स्मार्ट मिलिट्री सिस्टम्स पर बढ़ रहा है। (Indian Army Kautilya App)

ऑपरेशन और प्रशासन दोनों में मदद

सेना सूत्रों के मुताबिक “कौटिल्य” केवल बैटल फील्ड के लिए नहीं है। इसका इस्तेमाल प्रशासनिक कामों में भी किया जाएगा।

इससे सैनिकों का रिकॉर्ड, ट्रांसफर, लॉजिस्टिक्स, राशन, उपकरणों की मरम्मत और ट्रेनिंग मैनेजमेंट जैसे काम आसान हो सकते हैं।

अगर किसी यूनिट में किसी उपकरण की कमी हो या मरम्मत की जरूरत हो, तो सिस्टम तुरंत अलर्ट दे सकेगा। इससे समय पर कार्रवाई करना आसान होगा।

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डेटा सिक्योरिटी पर भी फोकस

भारतीय सेना ने इस प्लेटफॉर्म में डेटा सिक्योरिटी पर भी खास ध्यान दिया है। सिस्टम सुरक्षित डिजिटल चैनल पर काम करेगा और संवेदनशील जानकारी को सुरक्षित रखने के लिए अलग-अलग सुरक्षा स्तर बनाए गए हैं।

रक्षा मामलों के जानकारों का कहना है कि आधुनिक युद्ध में डेटा और साइबर सुरक्षा बहुत महत्वपूर्ण हो गई है। इसलिए सेना ऐसे प्लेटफॉर्म तैयार कर रही है जो तेज भी हों और सुरक्षित भी। (Indian Army Kautilya App)

आधुनिक युद्ध में डेटा की बढ़ती भूमिका

रक्षा विशेषज्ञों के मुताबिक आज का युद्ध केवल हथियारों का नहीं, बल्कि डेटा और सूचना का भी है। जिस सेना के पास ज्यादा तेज और सही जानकारी होगी, वह फैसले भी तेजी से ले सकेगी।

इसी वजह से दुनिया की बड़ी सेनाएं एआई, मशीन लर्निंग और डेटा एनालिटिक्स जैसी तकनीकों पर तेजी से काम कर रही हैं। भारतीय सेना भी अब उसी दिशा में आगे बढ़ रही है।

“कौटिल्य” को भारतीय सेना के लिए एक ऐसे डिजिटल प्लेटफॉर्म के तौर पर देखा जा रहा है, जो अलग-अलग सोर्सेज से जानकारी लेकर उसे तुरंत उपयोगी फैसलों में बदलने में मदद करेगा। (Indian Army Kautilya App)

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    हरेंद्र चौधरी रक्षा पत्रकारिता (Defence Journalism) में सक्रिय हैं और RakshaSamachar.com से जुड़े हैं। वे लंबे समय से भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना से जुड़ी रणनीतिक खबरों, रक्षा नीतियों और राष्ट्रीय सुरक्षा से संबंधित मुद्दों को कवर कर रहे हैं। पत्रकारिता के अपने करियर में हरेंद्र ने संसद की गतिविधियों, सैन्य अभियानों, भारत-पाक और भारत-चीन सीमा विवाद, रक्षा खरीद और ‘मेक इन इंडिया’ रक्षा परियोजनाओं पर विस्तृत लेख लिखे हैं। वे रक्षा मामलों की गहरी समझ और विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण के लिए जाने जाते हैं।

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