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Hanle-Chumar Road: रंग लाई बीआरओ की मेहनत, लद्दाख में 17,200 फीट ऊंचाई पर बनी 91 किमी लंबी ऑल वेदर रोड जनता के लिए खुली

लद्दाख जैसे कठिन भौगोलिक इलाके में सड़क बनाना आसान नहीं होता। यहां का मौसम बेहद शुष्क है, तापमान अक्सर शून्य से कई डिग्री नीचे चला जाता है और ऑक्सीजन का स्तर भी कम हो जाता है। ऐसे हालात में बीआरओ ने इस सड़क का निर्माण किया और दिखाया कि भारतीय इंजीनियरिंग क्षमता कितनी मजबूत है...

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📍नई दिल्ली/लेह | 24 Sep, 2025, 1:38 PM

Hanle-Chumar Road: लद्दाख के दुर्गम रास्तों के बीच बॉर्डर रोड्स ऑर्गनाइजेशन के प्रोजेक्ट हिमांक के तहत बनी हानले-चुमार रोड को जनता के लिए खोल दिया गया है। यह सड़क कुल 91 किलोमीटर लंबी है और 14,500 फीट से लेकर 17,200 फीट तक की ऊंचाई पर बनी है। इस मार्ग पर स्थित साल्सा ला पास को पार करना रोड इंजीनियरिंग की एक बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है। बता दें कि प्रोजेक्ट हिमांक 1985 से चल रहा है।

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यह सड़क भारत-चीन सीमा लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल के करीब स्थित है। इस सड़क के बन जाने के बाद चुमार सेक्टर तक आवाजाही आसान हो गई है। इस मार्ग से भारतीय सेना को सैनिकों, हथियारों और रसद सामग्री की सप्लाई में बड़ी मदद मिलेगी। 2020 के गलवान संघर्ष के बाद से लद्दाख में सड़क और पुलों का नेटवर्क तेजी से बनाया जा रहा है। हानले-चुमार रोड इस रणनीतिक प्रयास का अहम हिस्सा है।

हाई-एल्टीट्यूड सड़कें बनाने में सामान्य से ज्यादा वक्त लगता है। क्योंकि लद्दाख जैसे क्षेत्र में जहां काम केवल गर्मियों (मई से अक्टूबर) में ही संभव होता है।

वहीं सेना के साथ आम लोग भी इस सड़क का इस्तेमाल कर सकेंगे। यह मार्ग कई पर्यटन स्थलों को जोड़ता है जहां अभी तक बेहद कठिन रास्तों से ही पहुंचा जा सकता था। इस सड़क के जरिए पर्यटक अब आसानी से हानले हान्ले वेधशाला, क्यूं त्सो लेक, चिलिंग त्सो लेक और आगे त्सो मोरिरी लेक तक पहुंच सकेंगे। हानले ऑब्जर्वेटरी दुनिया की सबसे ऊंचाई पर स्थित वेधशालाओं में से एक है, जहां रात का आसमान तारों से भरा हुआ दिखाई देता है। वहीं, यह सड़क के बनने के बाद अब पर्यटक भी इस अनुभव का आनंद दे सकेंगे।

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लद्दाख जैसे कठिन भौगोलिक इलाके में सड़क बनाना आसान नहीं होता। यहां का मौसम बेहद शुष्क है, तापमान अक्सर शून्य से कई डिग्री नीचे चला जाता है और ऑक्सीजन का स्तर भी कम हो जाता है। ऐसे हालात में बीआरओ ने इस सड़क का निर्माण किया और दिखाया कि भारतीय इंजीनियरिंग क्षमता कितनी मजबूत है। प्रोजेक्ट हिमांक पहले भी उमलिंग ला पास पर 19,024 फीट की ऊंचाई पर दुनिया की सबसे ऊंची सड़क बनाकर रिकॉर्ड कायम कर चुका है।

वहीं इस रोड के बनने से स्थानीय लोगों को भी फायदा होगा। अब गांवों तक सामान की सप्लाई आसान होगी। स्थानीय किसान और हस्तशिल्प कलाकार अपने उत्पादों को बड़े बाजारों तक पहुंचा पाएंगे। स्वास्थ्य और शिक्षा जैसी सुविधाएं भी इन इलाकों में तेजी से पहुंचेंगी। साथ ही पर्यटन बढ़ने से होमस्टे, गाइड और स्थानीय परिवहन सेवाओं को बढ़ावा मिलेगा।

हानले-चुमार रोड का उद्घाटन ऑपरेशन सिंदूर के दौरान हुआ था, जिसमें 50 बड़े इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स का लोकार्पण किया गया था। इनमें से 16 प्रोजेक्ट्स लद्दाख में पूरे किए गए हैं। इनकी कुल लागत लगभग 947 करोड़ रुपये है। इनमें कई महत्वपूर्ण सड़कें और छह बड़े पुल भी शामिल हैं। साथ ही, हनले में एक विशेष एम्युनिशन स्टोरेज साइट और सड़कों पर नई इंटरलॉकिंग कंक्रीट ब्लॉक तकनीक का इस्तेमाल भी किया गया है, जिससे सर्दियों में सड़कें टिकाऊ बनी रह सकें।

साल्सा ला पास से गुजरेगी सड़क

इस सड़क का सबसे चुनौतीपूर्ण हिस्सा सालसा ला पास है। यह पास 17,200 फीट की ऊंचाई पर स्थित है और यहां पर मौसम अचानक बदल जाता है। बर्फबारी और तेज हवाओं के बीच सड़क निर्माण बेहद कठिन था। बीआरओ ने कठिन परिश्रम और आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल करके इस रास्ते को तैयार किया, जो अब पूरे साल इस्तेमाल किया जा सकेगा।

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