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LUH पर नेवी चीफ के बयान का यह है पूरा सच, जानिए किस हेलिकॉप्टर पर दांव लगा रही नौसेना

एक इंटरव्यू में नेवी चीफ एडमिरल दिनेश के त्रिपाठी ने कहा था कि एलयूएच नौसेना की जरूरतों को पूरा नहीं करता। इसी बयान को कुछ जगहों पर इस तरह पेश किया गया कि मानों नौसेना ने एलयूएच को टेस्ट करने के बाद रिजेक्ट कर दिया हो...

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📍नई दिल्ली | 9 Jan, 2026, 8:53 PM

Indian Navy UH-M Helicopter: भारतीय नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश के त्रिपाठी के एक बयान के बाद रक्षा जगत में हलचल तेज हो गई थी। यह चर्चा शुरू हो गई थी कि भारतीय नौसेना ने हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड के बनाए लाइट यूटिलिटी हेलिकॉप्टर (एलयूएच) को खारिज कर दिया है। हालांकि, अब नौसेना से जुड़े सूत्रों ने इस पूरे मामले पर स्थिति साफ करते हुए कहा है कि नौसेना प्रमुख के बयान को गलत तरीके से समझा गया।

नौसेना सूत्रों के अनुसार, सच्चाई यह है कि एलयूएच कभी भी नौसेना के लिए बनाया ही नहीं गया था, इसलिए उसके नौसेना में शामिल होने या न होने का सवाल ही नहीं उठता। नौसेना की जरूरतें एलयूएच से बिल्कुल अलग हैं और नेवी चीफ के जवाब को गलत तरीके से पेश किया गया। (Indian Navy UH-M Helicopter)

Indian Navy UH-M Helicopter: एलयूएच क्यों नहीं है नौसेना के लिए उपयुक्त

सूत्रों के मुताबिक, भारतीय नौसेना को जिस यूटिलिटी हेलिकॉप्टर की जरूरत है, वह ट्विन-इंजन यानी दो इंजन वाला होना जरूरी है। समुद्र के ऊपर उड़ान के दौरान सुरक्षा सबसे बड़ा मुद्दा होता है। अगर सिंगल इंजन हेलिकॉप्टर में तकनीकी खराबी आ जाए, तो समुद्र में ऑपरेशन बेहद जोखिम भरा हो जाता है।

एचएएल का लाइट यूटिलिटी हेलिकॉप्टर एक सिंगल-इंजन प्लेटफॉर्म है। इसे खास तौर पर थल सेना और वायु सेना के लिए डिजाइन किया गया है, ताकि वह ऊंचाई वाले इलाकों, जैसे सियाचिन और पहाड़ी इलाकों में बेहतर प्रदर्शन कर सके। यही वजह है कि एलयूएच नौसेना की क्वालिटेटिव रिक्वायरमेंट्स पर खरा नहीं उतरता। (Indian Navy UH-M Helicopter)

नौसेना सूत्रों ने साफ किया कि एलयूएच को लेकर कोई औपचारिक नेवल इवैल्यूएशन हुआ ही नहीं था। कारण साफ था कि जब प्लेटफॉर्म की बुनियादी बनावट ही नौसेना की जरूरतों से मेल नहीं खाती, तो उसके ट्रायल या मूल्यांकन का कोई मतलब नहीं बनता। (Indian Navy UH-M Helicopter)

Indian Navy UH-M Helicopter: नेवी चीफ के बयान को गलत समझा

हाल ही में दिए गए एक इंटरव्यू में नेवी चीफ एडमिरल दिनेश के त्रिपाठी ने कहा था कि एलयूएच नौसेना की जरूरतों को पूरा नहीं करता। इसी बयान को कुछ जगहों पर इस तरह पेश किया गया कि मानों नौसेना ने एलयूएच को टेस्ट करने के बाद रिजेक्ट कर दिया हो।

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लेकिन नौसेना सूत्रों का कहना है कि यह बयान तकनीकी संदर्भ में था, न कि किसी औपचारिक रिजेक्शन के तौर पर। एलयूएच नौसेना की डिमांड लिस्ट में कभी रहा ही नहीं, इसलिए उसके खारिज होने की बात भी गलत है। (Indian Navy UH-M Helicopter)

चेतक हेलिकॉप्टर की जगह क्या आएगा

भारतीय नौसेना इस समय करीब 51 चेतक हेलिकॉप्टर ऑपरेट कर रही है, जिनमें से लगभग 45 अभी सर्विस कंडीशन में हैं। ये हेलिकॉप्टर कई दशक पुराने हैं और अब धीरे-धीरे अपनी टेक्निकल उम्र पूरी कर चुके हैं।

चेतक हेलिकॉप्टरों की जगह नौसेना को जिस नए प्लेटफॉर्म की जरूरत है, वह पूरी तरह मैरिटाइम ऑपरेशंस के लिए डिजाइन किया गया होना चाहिए। इसमें समुद्र में लैंडिंग, जहाज के डेक पर ऑपरेशन, साल्टी एटमोस्फियर से सुरक्षा और खराब मौसम में उड़ान जैसी क्षमताएं जरूरी हैं। (Indian Navy UH-M Helicopter)

एचएएल का नया प्लेटफॉर्म: यूएच-एम

नौसेना अब एचएएल द्वारा डेवलप किए जा रहे यूटिलिटी हेलिकॉप्टर– मरीन पर फोकस कर रही है। यह हेलिकॉप्टर खास तौर पर नौसेना की जरूरतों को ध्यान में रखकर डिजाइन किया जा रहा है।

सूत्रों के अनुसार, यूएच-एम एक डिजाइन एंड डेवलपमेंट केस है, क्योंकि इसकी जरूरतें एलयूएच से बिल्कुल अलग हैं। इसमें कई ऐसे फीचर्स शामिल किए जा रहे हैं, जो नौसेना के लिए जरूरी माने जाते हैं।

यूएच-एम में ट्विन-इंजन कॉन्फिगरेशन, बेहतर लैंडिंग गियर, एंटी-कोरोजन कोटिंग, फ्लोटेशन गियर, नेवी सेंसर्स/वेपंस इंटीग्रेशन, रोटर और टेल फोल्डिंग सिस्टम और मरीन एन्वायर्नमेंट को देखते हुए खास बदलाव किए जा रहे हैं। इसका मकसद यह है कि हेलिकॉप्टर आसानी से वॉरशिप्स के हैंगर में फिट हो सके और खुले समुद्र में सुरक्षित ऑपरेशन कर सके।

Indian Navy UH-M Helicopter: क्या होंगे UH-M में फीचर

सूत्रों ने बताया कि एलयूएच इस तरह डिजाइन किया गया है कि यह वॉरशिप्स, जैसे फ्रिगेट, डिस्ट्रॉयर और एयरक्राफ्ट कैरियर से आसानी से उड़ान भर सके और वहां सुरक्षित तरीके से लैंड कर सके। समुद्र में उड़ान जमीन की तुलना में ज्यादा चुनौतीपूर्ण होती है, इसलिए इस हेलिकॉप्टर में कई खास बदलाव किए गए हैं, जो इसे सामान्य हेलिकॉप्टरों से अलग बनाते हैं। (Indian Navy UH-M Helicopter)

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यूएच-एम में दो इंजन इसलिए जरूरी हैं कि समुद्र के ऊपर उड़ान के दौरान अगर एक इंजन में दिक्कत आ जाए, तो दूसरा इंजन हेलिकॉप्टर को सुरक्षित रख सकता है। यही वजह है कि नौसेना हमेशा ट्विन-इंजन हेलिकॉप्टर को प्राथमिकता देती है।

इस हेलिकॉप्टर का रोटर और टेल फोल्ड होने वाला है। इसका मतलब यह है कि उड़ान के बाद इसे मोड़कर जहाज के छोटे हैंगर में रखा जा सकता है। वॉरशिप्स पर जगह सीमित होती है, इसलिए यह सुविधा बेहद अहम मानी जाती है। फोल्ड होने के बाद इसकी चौड़ाई काफी कम हो जाती है, जिससे इसे स्टोर करना आसान हो जाता है। (Indian Navy UH-M Helicopter)

सथ ही, यूएच-एम को समुद्री माहौल को ध्यान में रखकर बनाया गया है। इसमें एंटी-कोरोजन कोटिंग दी गई है, ताकि नमक भरी हवा और समुद्र की नमी से हेलिकॉप्टर में जंग न लगे। इसके अलावा, इसका लैंडिंग गियर भी मजबूत बनाया गया है, ताकि जहाज के हिलते-डुलते डेक पर सुरक्षित टेकऑफ और लैंडिंग हो सके।

इस हेलिकॉप्टर में आगे की तरफ नोज-माउंटेड रडार लगाया गया है, जो समुद्र की निगरानी, टारगेट की पहचान, सर्च एंड रेस्क्यू और मौसम की जानकारी देने में मदद करेगा। यह रडार डीआरडीओ के सहयोग से डेवलप किया जा रहा है। यूएच-एम का इस्तेमाल सैनिकों और सामान को एक जगह से दूसरी जगह ले जाने, घायल जवानों को निकालने, खोज-बचाव अभियान और जरूरत पड़ने पर लिमिटेड कॉम्बैट रोल्स के लिए भी किया जा सकेगा। (Indian Navy UH-M Helicopter)

कब आएगा UH-M का पहला प्रोटोटाइप

नवंबर 2025 में एचएएल के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर डीके सुनील कहा था कि यूएच-एम का पहला प्रोटोटाइप तैयार हो चुका है। उन्होंने बताया कि इस हेलिकॉप्टर की पहली उड़ान 2025-26 वित्तीय वर्ष में होने की योजना है। इसके बाद सर्टिफिकेशन, नौसेना के यूजर ट्रायल और कड़े परीक्षण किए जाएंगे, ताकि यह पूरी तरह ऑपरेशनल जरूरतों पर खरा उतर सके। (Indian Navy UH-M Helicopter)

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एचएएल की योजना के मुताबिक, यूएच-एम की पहली डिलीवरी 2027 से शुरू हो सकती है। सभी ट्रायल्स पूरे होने और उत्पादन की रफ्तार बढ़ने के बाद 2027 से 2030 के बीच इसे बड़ी संख्या में नौसेना में शामिल किया जाएगा। भारतीय नौसेना पहले चरण में करीब 60 यूएच-एम हेलिकॉप्टर लेने की योजना बना रही है। यह खरीद बाय-इंडियन आईडीडीएम श्रेणी के तहत होगी। (Indian Navy UH-M Helicopter)

हालांकि नौसेना के पास एमएच-60आर जैसे बड़े और ताकतवर हेलिकॉप्टर भी हैं, लेकिन वे भारी और खास लड़ाकू भूमिकाओं के लिए हैं। जबकि यूएच-एमका रोल उनसे अलग होगा। यह रोजमर्रा के नौसैनिक कामों, लॉजिस्टिक सपोर्ट और तेज मिशनों में अहम भूमिका निभाएगा।

ध्रुव का मैरिटाइम वर्जन बनेगा नौसेना की रीढ़!

यूएच-एम को कई जानकार एएलएच ध्रुव का मैरिटाइम वर्जन भी मानते हैं। एचएएल पहले से ही ध्रुव हेलिकॉप्टर के अलग-अलग वेरिएंट बना चुका है और अब उसी अनुभव के आधार पर नौसेना के लिए नया प्लेटफॉर्म तैयार किया जा रहा है।

सूत्रों का कहना है कि यूएच-एम का इस्तेमाल चेतक हेलिकॉप्टरों की जगह किया जाएगा और यह पूरी तरह मेक इन इंडिया सोच के अनुरूप होगा। इससे नौसेना को इंपोर्ट पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा और घरेलू रक्षा उद्योग को भी मजबूती मिलेगी। (Indian Navy UH-M Helicopter)

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    हरेंद्र चौधरी रक्षा पत्रकारिता (Defence Journalism) में सक्रिय हैं और RakshaSamachar.com से जुड़े हैं। वे लंबे समय से भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना से जुड़ी रणनीतिक खबरों, रक्षा नीतियों और राष्ट्रीय सुरक्षा से संबंधित मुद्दों को कवर कर रहे हैं। पत्रकारिता के अपने करियर में हरेंद्र ने संसद की गतिविधियों, सैन्य अभियानों, भारत-पाक और भारत-चीन सीमा विवाद, रक्षा खरीद और ‘मेक इन इंडिया’ रक्षा परियोजनाओं पर विस्तृत लेख लिखे हैं। वे रक्षा मामलों की गहरी समझ और विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण के लिए जाने जाते हैं।

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