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Israel Iran Conflict: भारत की अपील- कम करो तनाव, गल्फ में भारतीयों की सुरक्षा सबसे बड़ी चिंता

Israel Iran Conflict

Israel Iran Conflict: इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते संघर्ष के बीच भारत ने हालात को शांत करने के लिए तेज डी-एस्केलेशन यानी तनाव कम करने की अपील की है। सरकार के सूत्रों के मुताबिक, भारत इस पूरे घटनाक्रम को गंभीरता से देख रहा है और चाहता है कि हालात और न बिगड़ें।

सूत्रों ने बताया कि मौजूदा स्थिति बेहद संवेदनशील है और लगातार हमलों के कारण क्षेत्र में अस्थिरता बढ़ रही है। ऐसे में भारत की प्राथमिकता है कि सभी पक्ष बातचीत के जरिए तनाव को कम करें। (Israel Iran Conflict)

Israel Iran Conflict: खाड़ी क्षेत्र की स्थिरता पर भारत का फोकस

भारत ने साफ किया है कि उसकी सबसे बड़ी चिंता खाड़ी क्षेत्र की स्थिरता है। इसका सीधा संबंध वहां रह रहे भारतीय नागरिकों, व्यापार और समुद्री सुरक्षा से है। गल्फ देशों में बड़ी संख्या में भारतीय काम करते हैं और वहां की स्थिति का असर सीधे भारत पर पड़ता है।

सरकारी अधिकारियों के अनुसार, भारत के लिए जरूरी है कि इस क्षेत्र में शांति बनी रहे ताकि व्यापारिक गतिविधियां और ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित न हों। (Israel Iran Conflict)

भारतीय नागरिकों के लिए एडवाइजरी जारी

इजरायल और ईरान में भारतीय दूतावासों ने अपने नागरिकों के लिए एडवाइजरी जारी की है। इसमें लोगों को सतर्क रहने, गैर-जरूरी यात्रा से बचने और सुरक्षित स्थानों पर रहने की सलाह दी गई है।

तेहरान और तेल अवीव में मौजूद भारतीयों से कहा गया है कि वे स्थानीय प्रशासन के निर्देशों का पालन करें और किसी भी आपात स्थिति में दूतावास से संपर्क करें। गल्फ देशों में भी भारतीयों को सतर्क रहने के लिए कहा गया है। (Israel Iran Conflict)

फ्लाइट्स और ट्रैवल पर असर

मौजूदा हालात का असर हवाई सेवाओं पर भी पड़ा है। कई एयरलाइंस ने मध्य पूर्व के लिए अपनी उड़ानों को रोक दिया है या उनका रूट बदल दिया है। इजरायल का एयरस्पेस बंद होने के कारण कई फ्लाइट्स को डायवर्ट करना पड़ा।

इससे यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है और स्थिति सामान्य होने का इंतजार किया जा रहा है। (Israel Iran Conflict)

भारत की रणनीतिक संतुलन नीति

भारत इस पूरे मामले में संतुलन बनाए रखने की नीति पर चल रहा है। सरकार सभी पक्षों के साथ संवाद बनाए रखना चाहती है। सूत्रों के मुताबिक, भारत वॉशिंगटन, तेल अवीव और तेहरान के साथ बैक-चैनल बातचीत को भी बढ़ावा दे रहा है।

एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि भारत अपने हितों की रक्षा करते हुए सभी देशों के साथ संबंध बनाए रखना चाहता है। यही भारत की रणनीतिक ऑटोनॉमी यानी स्वतंत्र नीति का हिस्सा है। (Israel Iran Conflict)

हाल ही में अमेरिका और इजरायल ने ईरान पर हमले किए, जिसके बाद ईरान ने जवाबी कार्रवाई करते हुए मिसाइल हमले किए। इन हमलों की आवाज कई देशों तक सुनी गई और क्षेत्र में तनाव तेजी से बढ़ गया।

ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने अमेरिका और उसके सहयोगियों को निशाना बनाने की बात कही है। वहीं इजरायल ने इन हमलों को अपनी सुरक्षा के लिए जरूरी बताया है। (Israel Iran Conflict)

व्यापार और ऊर्जा सुरक्षा पर असर

भारत के लिए इस क्षेत्र का महत्व इसलिए भी ज्यादा है क्योंकि देश का बड़ा हिस्सा तेल आयात खाड़ी से होता है। अगर हालात बिगड़ते हैं तो इसका असर एनर्जी सप्लाई और कीमतों पर पड़ सकता है।

इसके अलावा अरब सागर और आसपास के समुद्री मार्ग भारत के व्यापार के लिए बेहद अहम हैं। ऐसे में वहां की सुरक्षा भी भारत के लिए प्राथमिकता बनी हुई है।

सूत्रों के अनुसार, भारत समुद्री सुरक्षा पर भी नजर बनाए हुए है। जरूरत पड़ने पर भारतीय नौसेना अपनी गतिविधियां बढ़ा सकती है ताकि समुद्री रास्तों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। (Israel Iran Conflict)

कई देशों ने जताई चिंता

इस पूरे घटनाक्रम पर दुनिया के कई देशों ने चिंता जताई है और शांति की अपील की है। भारत भी लगातार यही कह रहा है कि तनाव को जल्द से जल्द कम किया जाए और बातचीत के जरिए समाधान निकाला जाए।

भारत ने किसी भी पक्ष का खुलकर समर्थन नहीं किया है और अपनी पारंपरिक संतुलित विदेश नीति को जारी रखा है। (Israel Iran Conflict)

क्या VSHORADS बनेगा भारतीय सेना का नया ‘भरोसा’? ‘लो-लेवल डिफेंस शील्ड’ में कैसे Igla-S और Stinger को दे रहा कड़ी टक्कर

VSHORADS vs Stinger vs Igla

VSHORADS vs Stinger vs Igla: ओडिशा के चांदीपुर तट के पास इंटीग्रेटेड टेस्ट रेंज में हाल ही में डीआरडीओ ने बहुत कम दूरी की वायु रक्षा प्रणाली (VSHORADS) के तीन लगातार सफल फ्लाइट ट्रायल किए। यह परीक्षण “यूजर वैलिडेशन ट्रायल” के तौर पर किए गए, जिसमें फील्ड ऑपरेटर्स ने खुद टारगेट को पहचान कर मिसाइल दागी।

यह सिस्टम खास तौर पर कम ऊंचाई पर उड़ने वाले खतरों जैसे ड्रोन, हेलीकॉप्टर और दुश्मन के विमान को नष्ट करने के लिए बनाया गया है। इसे पैदल सैनिक अपने कंधे या पोर्टेबल लॉन्चर से दाग सकते हैं। इस तरह के सिस्टम को मैनपैड्स यानी मैन-पोर्टेबल एयर डिफेंस सिस्टम कहा जाता है।

VSHORADS vs Stinger vs Igla: तीनों ट्रायल में हर टारगेट हुआ तबाह

डीआरडीओ के अनुसार तीनों परीक्षणों के दौरान मिसाइल ने हाई-स्पीड हवाई टारगेट्स को सफलतापूर्वक इंटरसेप्ट किया और नष्ट कर दिया। ये टारगेट दुश्मन के एयरक्राफ्ट जैसे हालात को ध्यान में रखकर तैयार किए गए थे। अलग-अलग ऊंचाई, दूरी और स्पीड पर उड़ते लक्ष्यों को मिसाइल ने सटीक तरीके से मार गिराया।

इन परीक्षणों के दौरान टेलीमेट्री, इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल ट्रैकिंग सिस्टम और रडार जैसे आधुनिक उपकरणों से डेटा रिकॉर्ड किया गया। इस डेटा से यह पुष्टि हुई कि सिस्टम हर तरह के खतरे के खिलाफ प्रभावी है। इन ट्रायल्स में तीनों सेनाओं के प्रतिनिधि और डीआरडीओ के वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे। (VSHORADS vs Stinger vs Igla)

कैसे काम करता है यह सिस्टम

VSHORADS एक चौथी पीढ़ी का एडवांस्ड एयर डिफेंस सिस्टम है। इसमें ड्यूल वेवबैंड इमेजिंग इंफ्रारेड सीकर लगा है, जो बहुत छोटे और कम हीट सिग्नेचर वाले टारगेट्स को भी पहचान सकता है। इसका मतलब है कि यह ड्रोन जैसे छोटे लक्ष्यों को भी आसानी से ट्रैक कर सकता है।

इस मिसाइल में ड्यूल-थ्रस्ट सॉलिड रॉकेट मोटर लगी है, जो शुरुआत में तेज स्पीड देती है और फिर लगातार उड़ान बनाए रखती है। इसकी अधिकतम रेंज करीब 6 किलोमीटर तक है और यह लगभग 3.5 किलोमीटर की ऊंचाई तक टारगेट को मार सकता है। इसकी स्पीड करीब मैक 1.5 तक पहुंच जाती है।

इसमें मिनिएचराइज्ड रिएक्शन कंट्रोल सिस्टम भी है, जिससे यह हवा में तेजी से दिशा बदल सकती है। यह फीचर इसे ज्यादा मैन्यूवेरेबल बनाता है, यानी यह टारगेट को बेहतर तरीके से फॉलो कर सकती है।

पुराने सिस्टम की जगह लेगा नया VSHORADS

भारतीय सेनाओं में अभी तक इग्ला जैसे पुराने MANPADS सिस्टम इस्तेमाल किए जाते हैं। VSHORADS को इन्हीं पुराने सिस्टम की जगह लेने के लिए विकसित किया गया है। यह तकनीक के मामले में ज्यादा एडवांस्ड है और आधुनिक युद्ध की जरूरतों को ध्यान में रखकर बनाया गया है।

खास बात यह है कि यह सिस्टम पूरी तरह स्वदेशी है। इसे डीआरडीओ के रिसर्च सेंटर इमारत (RCI) ने अन्य लैब्स और इंडस्ट्री पार्टनर्स के साथ मिलकर विकसित किया है। इससे भारत की विदेशी हथियारों पर निर्भरता कम होगी। (VSHORADS vs Stinger vs Igla)

डेवलपमेंट और ट्रायल्स का सफर

इस सिस्टम का विकास पिछले कुछ वर्षों से लगातार जारी है। 2022 में इसका पहला सफल टेस्ट हुआ था। इसके बाद 2023, 2024 और 2025 में कई सफल ट्रायल किए गए। हर बार सिस्टम में सुधार किया गया और इसे अंतिम डिप्लॉयमेंट कॉन्फ़िगरेशन तक पहुंचाया गया।

फरवरी 2026 के ये ट्रायल इस प्रक्रिया का अहम हिस्सा माने जा रहे हैं, क्योंकि इसमें फील्ड ऑपरेटर्स ने खुद सिस्टम का इस्तेमाल किया। इसका मतलब है कि अब यह सिस्टम असल ऑपरेशन के लिए तैयार हो रहा है।

आधुनिक युद्ध में क्यों है जरूरी 

आज के समय में युद्ध का तरीका तेजी से बदल रहा है। ड्रोन और लो-एल्टीट्यूड अटैक का खतरा बढ़ गया है। छोटे ड्रोन भी बड़े नुकसान पहुंचा सकते हैं। ऐसे में VSHORADS जैसे सिस्टम बेहद जरूरी हो जाते हैं, जो तुरंत प्रतिक्रिया देकर खतरे को खत्म कर सकें।

यह सिस्टम मल्टी-लेयर्ड एयर डिफेंस का हिस्सा होगा, यानी बड़े मिसाइल सिस्टम के साथ मिलकर काम करेगा। इससे देश की सुरक्षा और मजबूत होगी। (VSHORADS vs Stinger vs Igla)

VSHORADS vs Stinger: कैसे भारतीय सिस्टम दे रहा है कड़ी टक्कर

भारत का स्वदेशी VSHORADS और अमेरिका का FIM-92 Stinger, दोनों ही MANPADS (मैन-पोर्टेबल एयर डिफेंस सिस्टम) हैं, लेकिन दोनों की डिजाइन फिलॉसफी और इस्तेमाल का तरीका अलग है। आसान भाषा में समझें तो VSHORADS नई पीढ़ी का “स्मार्ट शिकारी” है, जबकि स्टिंगर तेज और हल्का हथियार है जो लंबे समय से युद्ध में साबित हो चुका है।

टेक्नोलॉजी में आगे: VSHORADS में है ये फीचर

VSHORADS की सबसे बड़ी ताकत उसका इमेजिंग इंफ्रारेड (IIR) सीकर है। यह सिर्फ गर्मी नहीं, बल्कि टारगेट की पूरी इमेज को पहचानता है। इसका फायदा यह है कि दुश्मन अगर फ्लेयर्स (डिकॉय) छोड़ता है, तो भी मिसाइल असली टारगेट को पहचान सकती है।

वहीं स्टिंगर में पारंपरिक इंफ्रारेड/अल्ट्रावायलेट ड्यूल-बैंड सीकर सीकर होता है, जिसे अपग्रेड किया गया है, लेकिन वह पूरी तरह इमेजिंग बेस्ड नहीं है। इन्फ्रारेड बैंड में टारगेट के इंजन की गर्मी को ट्रैक करता है। अल्ट्रावायलेट बैंड में यह टारगेट (एयरक्राफ्ट) यूवी “शैडो” (छाया) बनाता है, क्योंकि आसमान में सूरज की यूवी लाइट स्कैटर होती है और एयरक्राफ्ट उसमें ब्लॉक करता है। यानी टारगेट यूवी में “डार्क स्पॉट” या “शैडो” की तरह दिखता है। इसी वजह से आधुनिक ड्रोन या कम हीट वाले टारगेट के खिलाफ VSHORADS ज्यादा प्रभावी माना जा रहा है।

भारत का सिस्टम ज्यादा प्रासंगिक

VSHORADS की रेंज लगभग 6–7 किलोमीटर तक बताई जाती है, जबकि स्टिंगर की सामान्य रेंज करीब 4.8 किलोमीटर है। आज के युद्ध में ड्रोन, लो-फ्लाइंग मिसाइल और हेलीकॉप्टर बड़े खतरे हैं। VSHORADS को खास तौर पर इन्हीं टारगेट्स को ध्यान में रखकर डिजाइन किया गया है। इसका IIR सीकर इसे छोटे और कम दिखने वाले टारगेट्स के खिलाफ ज्यादा असरदार बनाता है।

मैन्यूवरेबिलिटी का खास फीचर

VSHORADS में मिनी रिएक्शन कंट्रोल सिस्टम (RCS) दिया गया है, जिससे यह हवा में तेजी से दिशा बदल सकता है। इसका मतलब है कि अगर टारगेट अचानक मूव करे, तो मिसाइल भी उसी हिसाब से तुरंत एडजस्ट हो जाती है। हालांकि स्टिंगर भी मैन्यूवरेबल है, लेकिन उसमें RCS जैसा एडवांस्ड सिस्टम नहीं है। इसलिए हाई-मैन्यूवरिंग टारगेट्स के खिलाफ VSHORADS को बढ़त मिलती है। (VSHORADS vs Stinger vs Igla)

पोर्टेबिलिटी में स्टिंगर आगे

स्टिंगर का सबसे बड़ा फायदा है उसका हल्का होना। इसका वजन करीब 15–16 किलो होता है और इसे एक सैनिक आसानी से कंधे पर रखकर चला सकता है। वहीं VSHORADS का पूरा सिस्टम करीब 40 किलो तक पहुंच सकता है (लॉन्चर सहित), इसलिए इसे ऑपरेट करना थोड़ा भारी और मुश्किल हो सकता है। हालांकि भविष्य में इसका शोल्डर-फायर्ड वर्जन भी आने की बात कही जाती है।

स्पीड vs स्मार्टनेस

स्टिंगर की स्पीड मैक 2+ तक जाती है, जो VSHORADS (लगभग Mach 1.5) से ज्यादा है। इसका मतलब है कि स्टिंगर टारगेट तक जल्दी पहुंच सकता है। लेकिन VSHORADS “स्मार्ट ट्रैकिंग” पर ज्यादा फोकस करता है। यानी यह जरूरी नहीं कि सबसे तेज हो, लेकिन यह टारगेट को ज्यादा सटीक तरीके से पकड़ता है। (VSHORADS vs Stinger vs Igla)

भारत के लिए सबसे बड़ा गेम-चेंजर

सबसे बड़ा फर्क यहीं आता है। VSHORADS पूरी तरह स्वदेशी (इंडिजिनस) है। इसका मतलब है कि भारत इसे अपने हिसाब से अपग्रेड कर सकता है, बड़े पैमाने पर बना सकता है और किसी विदेशी देश पर निर्भर नहीं रहेगा।

वहीं Stinger पूरी तरह आयातित सिस्टम है, जिसमें टेक्नोलॉजी ट्रांसफर नहीं मिलता। इसलिए इसकी संख्या सीमित रहती है और हर अपग्रेड के लिए बाहरी निर्भरता रहती है। (VSHORADS vs Stinger vs Igla)

Igla-S Vs VSHORADS: क्या स्वदेशी सिस्टम बनेगा सेना का ‘भरोसा’ 

भारतीय सेना के पास इग्ला-एस सिस्टम है, जो रूस से खरीदा हुआ है। भारतीय सेना इस पर काफी भरोसा करती है। इग्ला-एस और VSHORADS दोनों ही शॉर्ट रेंज एयर डिफेंस सिस्टम हैं, जिन्हें कम ऊंचाई पर उड़ने वाले खतरों जैसे हेलीकॉप्टर, ड्रोन, फाइटर जेट और क्रूज मिसाइल को मार गिराने के लिए बनाया गया है। लेकिन इन दोनों के बीच सबसे बड़ा फर्क उनकी टेक्नोलॉजी और समय के हिसाब से उनकी क्षमता में है। (VSHORADS vs Stinger vs Igla)

टेक्नोलॉजी और गाइडेंस सिस्टम

Igla-S में ड्यूल-बैंड इंफ्रारेड (IR) सीकर का इस्तेमाल होता है, जो इंजन की गर्मी के आधार पर टारगेट को ट्रैक करता है। यह फ्लेयर्स जैसे डिकॉय से कुछ हद तक बच सकता है, लेकिन इसकी क्षमता सीमित होती है। वहीं VSHORADS में इमेजिंग इंफ्रारेड (IIR) सीकर दिया गया है, जो टारगेट की पूरी इमेज पहचानता है। इसका फायदा यह है कि यह ड्रोन, लो-सिग्नेचर एयरक्राफ्ट और फ्लेयर्स जैसे धोखे को बेहतर तरीके से पहचान कर असली टारगेट को हिट कर सकता है।

रेंज, स्पीड और ऊंचाई

दोनों सिस्टम की रेंज लगभग समान है और करीब 6 किलोमीटर तक के टारगेट को मार सकते हैं। ऊंचाई की सीमा भी लगभग 3.5 किलोमीटर तक है। हालांकि स्पीड के मामले में इग्ला-एस थोड़ा आगे है, जो लगभग मैक 1.9 तक जा सकता है, जबकि VSHORADS की स्पीड करीब मैक 1.5 है। लेकिन VSHORADS अपनी एडवांस गाइडेंस और मैन्यूवरेबिलिटी से इस कमी को काफी हद तक कवर करता है। (VSHORADS vs Stinger vs Igla)

वजन और पोर्टेबिलिटी

इग्ला का सबसे बड़ा फायदा इसका हल्का होना है। इसका कुल वजन करीब 17–19 किलो है और इसे सैनिक सीधे कंधे पर रखकर चला सकता है। इसके मुकाबले VSHORADS का वजन ज्यादा है, करीब 40 किलो के आसपास, और अभी इसे ट्राइपॉड के साथ इस्तेमाल किया जाता है। इसलिए पोर्टेबिलिटी के मामले में इग्ला-एस ज्यादा आसान और तेज इस्तेमाल वाला सिस्टम है।

अगर पोर्टेबिलिटी और तुरंत इस्तेमाल की बात करें तो इग्ला अभी भी आगे है, क्योंकि यह हल्का और आसान है। लेकिन टेक्नोलॉजी, सटीकता और आधुनिक खतरों जैसे ड्रोन और लो-सिग्नेचर टारगेट्स से निपटने में SHORADS ज्यादा सक्षम है। यही वजह है कि इसे भविष्य का एयर डिफेंस सिस्टम माना जा रहा है। (VSHORADS vs Stinger vs Igla)

दुश्मन की पनडुब्बियों के शिकारी आईएनएस अंजदीप की नौसेना में हुई एंट्री, नेवी चीफ बोले- समुद्र से तय होगी भारत की ताकत

Indian Navy INS Anjadip

INS Anjadip: भारतीय नौसेना ने 2026 में अपने पहले शिप को कमीशन किया। डॉल्फिन हंटर के नाम से मशहूर स्वदेशी रूप से तैयार युद्धपोत आईएनएस अंजदीप को चेन्नई में आधिकारिक तौर पर नौसेना में शामिल किया गया। यह जहाज एंटी-सबमरीन वारफेयर शैलो वॉटर क्राफ्ट है, जिसे खास तौर पर समुद्र में छिपी दुश्मन पनडुब्बियों का पता लगाने और उन्हें नष्ट करने के लिए डिजाइन किया गया है। नौसेना प्रमुख ने इस मौके पर कहा कि यह जहाज भारत की समुद्री ताकत को और मजबूत करेगा और आत्मनिर्भर भारत की दिशा में एक बड़ा कदम है।

INS Anjadip: भारत का समुद्र से पुराना रिश्ता

इस समारोह के दौरान नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश के त्रिपाठी ने कहा कि चेन्नई का यह ऐतिहासिक कोरमंडल तट भारत की समुद्री विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है। उन्होंने याद दिलाया कि करीब एक हजार साल पहले चोल साम्राज्य ने इसी तट से समुद्री यात्राएं शुरू की थीं। इससे साफ होता है कि भारत का समुद्र से रिश्ता बहुत पुराना और मजबूत रहा है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उस बयान का भी जिक्र किया, जिसमें कहा गया है कि भारत हमेशा से एक समुद्री सभ्यता रहा है और आज देश की सुरक्षा और तरक्की समुद्र से जुड़ी हुई है। (INS Anjadip)

Indian Navy INS Anjadip

पेट्या क्लास कॉर्वेट की जगह लेगा अंजदीप

आईएनएस अंजदीप पेट्या क्लास कॉर्वेट का आधुनिक उत्तराधिकारी है, जिसने 1972 से 2003 तक देश की सेवा की थी। यह नया जहाज उसी परंपरा को आगे बढ़ाता है। इसके नाम का भी खास महत्व है, क्योंकि अंजदीप एक द्वीप का नाम है, जो 1961 में गोवा मुक्ति अभियान के दौरान नौसेना की कार्रवाई का गवाह रहा था। इसी वजह से इस जहाज के नाम में बहादुरी और देशभक्ति की भावना जुड़ी हुई है। (INS Anjadip)

हिंद महासागर क्षेत्र का बढ़ता महत्व

नौसेना प्रमुख ने अपने संबोधन में कहा कि 21वीं सदी को समुद्री सदी माना जा रहा है और इसमें हिंद महासागर क्षेत्र की भूमिका बहुत अहम है। इस क्षेत्र में दुनिया की करीब 40 प्रतिशत आबादी रहती है और यहां से हर साल बड़ी संख्या में जहाज गुजरते हैं। दुनिया के तेल का बड़ा हिस्सा, कंटेनर ट्रैफिक और व्यापार इसी रास्ते से होता है। ऐसे में इस क्षेत्र की सुरक्षा बहुत जरूरी हो जाती है। (INS Anjadip)

रेड सी संकट और होरमुज जलडमरूमध्य का किया जिक्र

एडमिरल त्रिपाठी ने यह भी बताया कि आज के समय में समुद्र से जुड़े खतरे लगातार बढ़ रहे हैं। सतह, समुद्र के नीचे और हवा, तीनों क्षेत्रों में प्रतिस्पर्धा बढ़ रही है। कई बार जमीन पर होने वाले तनाव भी समुद्र तक पहुंच जाते हैं। ऐसे माहौल में छोटी सी घटना भी बड़े असर डाल सकती है। उन्होंने रेड सी संकट और होरमुज जलडमरूमध्य की स्थिति का उदाहरण देते हुए बताया कि कैसे एक जगह पर परेशानी होने से पूरी दुनिया के व्यापार और तेल की कीमतों पर असर पड़ता है। (INS Anjadip)

नेवी ने की 400 व्यापारिक जहाजों की मदद

नौसेना प्रमुख एडमिरल त्रिपाठी ने कहा कि भारतीय नौसेना ऐसे चुनौतीपूर्ण माहौल में लगातार अपनी भूमिका निभा रही है। अक्टूबर 2023 से अब तक नौसेना ने रेड सी क्षेत्र में करीब 400 व्यापारिक जहाजों को सुरक्षित रास्ता देने में मदद की है। इन जहाजों में करोड़ों टन तेल और सामान था, जिसकी कीमत अरबों डॉलर में है। इसके अलावा भारतीय नौसेना अन्य देशों की नौसेनाओं के साथ मिलकर भी काम कर रही है, जिससे समुद्री सुरक्षा को और मजबूत किया जा सके। (INS Anjadip)

तेजी से बढ़ रही नौसेना की ताकत

उन्होंने हाल ही में विशाखापत्तनम में हुए इंटरनेशनल फ्लीट रिव्यू और मिलन एक्सरसाइज का भी जिक्र किया, जिसमें कई देशों की नौसेनाओं ने हिस्सा लिया। यह भारत की बढ़ती समुद्री साझेदारी और सहयोग का संकेत है। साथ ही, भारतीय नौसेना ने जरूरत के समय अन्य देशों की मदद भी की है, जैसे म्यांमार में भूकंप के बाद राहत पहुंचाना और श्रीलंका में चक्रवात के दौरान सहायता देना।

नौसेना प्रमुख ने बताया कि आज भारतीय नौसेना हिंद महासागर क्षेत्र और उससे आगे तक अपनी मौजूदगी बनाए हुए है। नौसेना के जहाज लगातार निगरानी, एंटी-पाइरेसी ऑपरेशन और संयुक्त गश्त में लगे रहते हैं। इससे भारत की समुद्री सुरक्षा मजबूत होती है।

उन्होंने यह भी बताया कि भारतीय नौसेना तेजी से अपनी ताकत बढ़ा रही है। साल 2025 में 12 युद्धपोत और एक पनडुब्बी को शामिल किया गया, जबकि 2026 में करीब 15 और जहाज शामिल करने की योजना है। यह अब तक की सबसे तेज गति से जहाजों की कमीशनिंग मानी जा रही है। खास तौर पर पनडुब्बी रोधी यानी एंटी-सबमरीन क्षमता को मजबूत करने पर जोर दिया जा रहा है। आईएनएस अंजदीप इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। (INS Anjadip)

Indian Navy INS Anjadip

आईएनएस अंजदीप की खासियतें

यह जहाज आधुनिक सोनार सिस्टम, हल्के टॉरपीडो, एंटी-सबमरीन रॉकेट और एडवांस कॉम्बैट मैनेजमेंट सिस्टम से लैस है। इसे खास तौर पर तटीय इलाकों में तेजी और सटीकता के साथ ऑपरेशन करने के लिए डिजाइन किया गया है। इसमें शैलो वॉटर सोनार, हल्के टॉरपीडो, एंटी-सबमरीन रॉकेट और एडवांस कॉम्बैट मैनेजमेंट सिस्टम लगाया गया है। इसे खास तौर पर तटीय इलाकों में तेजी और सटीकता से ऑपरेशन करने के लिए डिजाइन किया गया है। यह जहाज दुश्मन की पनडुब्बियों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई करने में सक्षम है। (INS Anjadip)

आत्मनिर्भर भारत का मजबूत उदाहरण

नौसेना प्रमुख ने आत्मनिर्भरता पर जोर देते हुए कहा कि अब भारत केवल “मेक इन इंडिया” तक सीमित नहीं है, बल्कि “ट्रस्ट इन इंडिया” की दिशा में आगे बढ़ रहा है। इस जहाज का निर्माण भारत में ही हुआ है और इसमें देश के अलग-अलग हिस्सों की कंपनियों और विशेषज्ञों का योगदान रहा है। इसे कत्तुपल्ली में बनाया गया, डिजाइन कोलकाता से जुड़ा है और इसके सिस्टम गाजियाबाद में तैयार किए गए हैं। यह पूरे देश के सहयोग का उदाहरण है।

उन्होंने गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स और एलएंडटी जैसे संस्थानों की भी सराहना की, जिन्होंने मिलकर इस जहाज को समय पर तैयार किया। साथ ही, इस प्रोजेक्ट से जुड़े इंजीनियरों, कर्मचारियों और नौसेना की टीमों का भी धन्यवाद किया, जिनकी मेहनत से यह जहाज तैयार हो सका।

टीम को दी बधाई

नौसेना प्रमुख एडमिरल डिनेश त्रिपाठी ने अपने संबोधन के अंत में आईएनएस अंजदीप के कमांडिंग ऑफिसर और पूरी टीम को बधाई दी और कहा कि इस जहाज का आदर्श वाक्य “अद्वितीय शत्रु विध्वंसक” उन्हें हमेशा सतर्क रहने और देश की रक्षा के लिए तैयार रहने की प्रेरणा देगा। उन्होंने उम्मीद जताई कि यह जहाज भारतीय नौसेना की ताकत को और बढ़ाएगा और देश की समुद्री सीमाओं की सुरक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। (INS Anjadip)

पोखरण में वायुसेना ने दोहराई ऑपरेशन सिंदूर की पूरी स्ट्राइक प्लानिंग, आकाश और स्पाइडर ने दुश्मन को हमलों को किया नाकाम!

Operation Sindoor Vayu Shakti 2026

Operation Sindoor Vayu Shakti 2026: राजस्थान के पोखरण फील्ड फायरिंग रेंज में आयोजित ‘वायु शक्ति 2026’ अभ्यास के दौरान भारतीय वायुसेना ने ऑपरेशन सिंदूर से जुड़े अहम हिस्सों को दोबारा दुनिया के सामने पेश किया। इस दौरान वायुसेना ने अपनी प्रिसिजन स्ट्राइक क्षमता और इंटीग्रेटेड एयर डिफेंस फायरपावर का प्रदर्शन किया।

अभ्यास के दौरान वायुसेना ने दिखाया कि वह असली युद्ध जैसी परिस्थितियों में भी मुश्किल से मुश्किल ऑपरेशनों को आसानी से कर सकती है। इससे पहले राष्ट्रपति ने स्वदेशी लड़ाकू हेलीकॉप्टर एलसीएच ‘प्रचंड’ में उड़ान भी भरी।

Operation Sindoor Vayu Shakti 2026

Operation Sindoor Vayu Shakti 2026: इंटेलिजेंस से शुरू हुई एक्सरसाइज

इस बार वायु शक्ति अभ्यास को ऑपरेशन सिंदूर को फोकस में रखते हुए एक पूरी कहानी की तरह तैयार किया गया, जिसमें युद्ध जैसी स्थितियां बनाई गई। इसमें हवाई हमले, एयर डिफेंस, स्पेशल फोर्स ऑपरेशन और राहत-बचाव मिशन सभी को एक साथ दिखाया गया। कार्यक्रम की शुरुआत राष्ट्रगान और फ्लाईपास्ट से हुई, जिसमें चेतक हेलीकॉप्टरों ने तिरंगा और वायुसेना का झंडा लेकर उड़ान भरी। इसके बाद राफेल लड़ाकू विमान ने जोरदार सुपरसोनिक बूम साउंड के साथ उड़ान भरकर वहां सभी को अचरज में डाल दिया।

Operation Sindoor Vayu Shakti 2026

अभ्यास के दौरान ऑपरेशन सिंदूर की पूरी प्रक्रिया को चरणबद्ध तरीके से दिखाया गया। सबसे पहले इंटेलिजेंस, सर्विलांस और रिकॉनिसेंस यानी निगरानी और जानकारी जुटाने की प्रक्रिया को दर्शाया गया। इसमें रिमोटली पायलटेड एयरक्राफ्ट यानी ड्रोन का इस्तेमाल किया गया, जो दुश्मन की गतिविधियों पर नजर रखते हैं और जरूरी जानकारी जुटाते हैं।

Operation Sindoor Vayu Shakti 2026

Vayushakti 2026: राष्ट्रपति मुर्मू ‘प्रचंड’ हेलीकॉप्टर में भरेंगी उड़ान, पोखरण में देखेंगी एयरफोर्स का मेगा शो

इसके बाद दुश्मन के एयर डिफेंस सिस्टम को निष्क्रिय करने की कार्रवाई दिखाई गई। इसके लिए लॉइटरिंग म्यूनिशन यानी ऐसे ड्रोन का इस्तेमाल किया गया जो हवा में मंडराते हुए सही समय पर हमला कर सकते हैं। इस दौरान हार्पी ड्रोन का इस्तेमाल दिखाया गया, जिसे ऑपरेशन सिंदूर में भी इस्तेमाल किया गया था। (Operation Sindoor Vayu Shakti 2026)

Operation Sindoor Vayu Shakti 2026

आकाश, एल-70 की लाइव फायरिंग

अभ्यास में काउंटर अनमैन्ड एरियल सिस्टम यानी ड्रोन रोधी सिस्टम का भी प्रदर्शन किया गया। इसमें दुश्मन के ड्रोन जैसे टारगेट्स को पहचानकर उन्हें हवा में ही नष्ट करने की क्षमता का प्रदर्शन किया गया। इस दौरान एयर डिफेंस सिस्टम की ताकत भी दिखाई गई, जिसमें आकाश सरफेस टू एयर मिसाइल सिस्टम और स्पाइडर मिसाइल सिस्टम के साथ आर्मी की अपग्रेडेड एल-70 एयर डिफेंस गन, इजरायल से खरीदे स्पाइडर सिस्टम की लाइव फायरिंग भी की गई। अभ्यास में एम-777 हॉवित्जर का इस्तेमाल हुआ। इससे यह दिखाया गया कि भारतीय वायुसेना किस तरह अलग-अलग टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल कर हवाई खतरों से निपट सकती है। (Operation Sindoor Vayu Shakti 2026)

Operation Sindoor Vayu Shakti 2026

ऑपरेशन सिंदूर में वायुसेना ने आतंकी ठिकानों को बनाया निशाना

अभ्यास के दौरान यह भी बताया गया कि 7 मई 2025 की सुबह भारतीय वायुसेना ने आतंकवादी ठिकानों पर सटीक हमले किए थे। इसके बाद पाकिस्तान की तरफ से किए गए हवाई प्रयासों को भी नाकाम किया गया था। इस दौरान वायुसेना ने पुराने सोवियत मूल के सिस्टम्स के साथ-साथ आधुनिक और स्वदेशी प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल किया।

इनमें आकाश, एमआर-सैम, पिचोरा और ओसा-एके जैसे एयर डिफेंस सिस्टम शामिल थे, जिन्होंने दुश्मन के हवाई खतरों को रोकने में अहम भूमिका निभाई। (Operation Sindoor Vayu Shakti 2026)

Operation Sindoor Vayu Shakti 2026

S-400 की पावर का हुआ जिक्र

अभ्यास में S-400 एयर डिफेंस सिस्टम की क्षमता का भी जिक्र किया गया। बताया गया कि इस सिस्टम ने ऑपरेशन के दौरान लंबी दूरी पर दुश्मन के एयरक्राफ्ट को मार गिराया था। यह अब तक के सबसे लंबे दूरी के एयर किल में से एक माना जाता है। इस सिस्टम ने दुश्मन के एयर ऑपरेशन को काफी हद तक सीमित कर दिया था। (Operation Sindoor Vayu Shakti 2026)

Operation Sindoor Vayu Shakti 2026

130 एयरक्राफ्ट ने लिया हिस्सा

इस अभ्यास में 130 से ज्यादा एयरक्राफ्ट शामिल हुए। इनमें राफेल, सुखोई-30 एमकेआई, मिराज-2000, मिग-29, जगुआर, हॉक, एमआई-17, सी-130जे, सी-17, सी-295, एएलएच ध्रुव और एलसीएच प्रचंड जैसे विमान और हेलीकॉप्टर शामिल रहे। लड़ाकू विमानों ने दुश्मन के नकली ठिकानों पर सटीक हमले किए और आधुनिक हथियारों का इस्तेमाल दिखाया। हालांकि स्वदेशी तेजस विमान इस अभ्यास का हिस्सा नहीं बना, क्योंकि हाल ही में हुए एक रनवे हादसे के बाद उसका बेड़ा अस्थायी रूप से ग्राउंड कर दिया गया था। (Operation Sindoor Vayu Shakti 2026)

Operation Sindoor Vayu Shakti 2026

सी-295 विमान की रात में असॉल्ट लैंडिंग

अभ्यास में स्पेशल फोर्स ऑपरेशन भी शामिल थे। शाम के समय गरुड़ कमांडो और पैरा स्पेशल फोर्स को हेलीकॉप्टर से उतारा गया, जिन्होंने शहर जैसी स्थिति में ऑपरेशन और बंधकों को छुड़ाने का अभ्यास किया। इसके बाद सी-130 और पहली बार सी-295 विमान ने रात के समय असॉल्ट लैंडिंग कर जवानों को निकालने का प्रदर्शन किया। इसके अलावा सी-130जे सुपर हरक्यूलिस विमान ने छोटे रनवे पर लैंडिंग कर गरुड़ कमांडो को एक सिमुलेटेड युद्ध क्षेत्र में उतारा और कुछ ही मिनटों में वहां से वापस उड़ान भर ली।

Operation Sindoor Vayu Shakti 2026

इसके दौरान अटैक हेलीकॉप्टरों ने पूरे इलाके को सुरक्षित किया, जिससे यह दिखाया गया कि युद्ध के दौरान अलग-अलग यूनिट्स किस तरह मिलकर काम करती हैं। (Operation Sindoor Vayu Shakti 2026)

अभ्यास के अंत में सी-17 ग्लोबमास्टर विमान ने फ्लेयर्स छोड़े और फ्लाईपास्ट किया और ड्रोन शो के जरिए वायुसेना की उपलब्धियों को दिखाया गया। ‘अचूक, अभेद्य और सटीक’ के मूल मंत्र के साथ हुए इस अभ्यास में वायुसेना ने अपनी पूरी ताकत और तैयारियों का प्रदर्शन किया।

Operation Sindoor Vayu Shakti 2026
Drone Show

हेलीकॉप्टरों ने दिखाई ताकत

अभ्यास में एमआई-17 हेलीकॉप्टर से स्पाइक एनएलओएस मिसाइल दागी गई, जो करीब 50 किलोमीटर दूर तक टारगेट को निशाना बना सकती है। इसके अलावा रुद्र, प्रचंड, चेतक, एएलएच एमके-4, चिनूक और अपाचे जैसे हेलीकॉप्टरों ने भी अलग-अलग मिशन में हिस्सा लिया।

इन सभी प्लेटफॉर्म्स ने मिलकर वायुसेना की मल्टी-रोल क्षमता को दर्शाया, जिसमें हमला, सपोर्ट और लॉजिस्टिक्स सभी शामिल हैं। (Operation Sindoor Vayu Shakti 2026)

विदेशी पत्रकार भी रहे मौजूद

इस बड़े अभ्यास को देखने के लिए करीब 30 विदेशी पत्रकारों को आमंत्रित किया गया था। यह पहल विदेश मंत्रालय और रक्षा मंत्रालय की ओर से की गई थी, ताकि भारत की सैन्य क्षमता और स्वदेशी रक्षा तकनीक को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर दिखाया जा सके। इन पत्रकारों ने नौसेना की इंटरनेशनल फ्लीट रिव्यू और थलसेना के रेगिस्तानी क्षेत्र में हुए ‘अग्नि वर्षा’ अभ्यास को भी देखा। (Operation Sindoor Vayu Shakti 2026)

21वीं सदी की जंग के लिए कैसे तैयार होंगे लीडर? आर्मी वॉर कॉलेज, महू में सेना ने बताया फॉर्मूला

Military Leadership Seminar

Military Leadership Seminar: मध्य प्रदेश के महू में स्थित आर्मी वॉर कॉलेज में 26 और 27 फरवरी को लीडरशिप सेमिनार 2026 आयोजित किया गया। यह दो दिन का कार्यक्रम आर्मी ट्रेनिंग कमांड यानी एआरटीआरएसी के तहत हुआ। सेमिनार की शुरुआत आर्मी वॉर कॉलेज के कमांडेंट ने की, जबकि मुख्य भाषण एआरटीआरएसी के प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल देवेंद्र शर्मा ने दिया। इस कार्यक्रम में करीब 1000 लोग शामिल हुए, जिनमें सेवा में मौजूद और रिटायर्ड सैन्य अधिकारी भी थे।

इस सेमिनार की खास बात यह रही कि इसमें सिर्फ सेना ही नहीं, बल्कि अलग-अलग क्षेत्रों के विशेषज्ञ भी शामिल हुए। इनमें न्यायपालिका, शिक्षा, कूटनीति, रक्षा रिसर्च, उद्योग और थिंक टैंक से जुड़े लोग शामिल थे। इससे नेतृत्व और नैतिकता जैसे मुद्दों पर अलग-अलग नजरिए सामने आए, जो आज के समय में सेना के लिए बहुत जरूरी माने जाते हैं।

इस सेमिनार का विषय था 21वीं सदी के लिए सैन्य नेतृत्व को तैयार करना, जिसमें नैतिकता और मूल्यों पर खास ध्यान दिया गया। आज के बदलते माहौल में, जहां नई तकनीक, सूचना युद्ध और अलग-अलग तरह के ऑपरेशन हो रहे हैं, वहां सेना के नेताओं के लिए सिर्फ ताकत ही नहीं, सही फैसले लेने की क्षमता और नैतिक सोच भी जरूरी मानी गई।

Military Leadership Seminar

पहले दिन लीडरशिप जर्नल 2026 जारी किया गया और पूर्व सैनिकों को सम्मानित किया गया। इसके बाद अलग-अलग सत्रों में यह चर्चा हुई कि एक अच्छा नेता कैसे बने, मिशन और नैतिकता के बीच संतुलन कैसे रखा जाए और जिम्मेदारी को सही तरीके से कैसे निभाया जाए। दूसरे दिन काउंटर इंसर्जेंसी और काउंटर टेररिज्म जैसे ऑपरेशन में नेतृत्व की भूमिका, नई तकनीक के दौर में आने वाली चुनौतियां और नई पीढ़ी को सैन्य मूल्य सिखाने पर बात की गई।

यह सेमिनार दिखाता है कि भारतीय सेना अपने नेताओं को बेहतर बनाने और उन्हें सही दिशा देने के लिए लगातार काम कर रही है। साथ ही, आर्मी वॉर कॉलेज इस दिशा में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।

राफेल के Source Code पर क्यों मचा बवाल, क्या भारत लगा पाएगा अस्त्र और रूद्रम जैसी स्वदेशी मिसाइलें?

Rafale Source Code Explained

Rafale Source Code Explained: भारत और फ्रांस के बीच 114 राफेल फाइटर जेट की नई डील को लेकर चर्चा चल रही है। 114 अतिरिक्त राफेल जेट्स की खरीद को प्रारंभिक मंजूरी यानी एक्सेप्टेंस ऑफ नेसेसिटी – एओएन दी जा चुकी है। यह डील करीब 3.25 लाख करोड़ रुपये की है। लेकिन इस बार मुद्दा सिर्फ फाइटर जेट खरीद का नहीं, बल्कि उसके “सोर्स कोड” को लेकर है। रिपोर्ट्स में कहा गया है कि फ्रांस राफेल के कुछ महत्वपूर्ण सॉफ्टवेयर का सोर्स कोड भारत को देने के लिए तैयार नहीं है। इसके बाद सवाल उठने लगे हैं कि क्या इससे भारत की ऑपरेशनल क्षमता पर असर पड़ेगा और क्या भारत अपनी स्वदेशी मिसाइलों जैसे अस्त्र और ब्रह्मोस एनजी को राफेल पर लगा पाएगा या नहीं।

यह पूरा मामला इसलिए भी अहम है 114 अतिरिक्त राफेल फाइटर जेट खरीद को अब तक की सबसे बड़ी डिफेंस डील कहा जा रहा है। इसके साथ ही नौसेना के लिए 26 राफेल-मरीन भी पहले ही तय किए जा चुके हैं। 114 राफेल में से 18 राफेल सीधे फ्रांस से फ्लाई अवे कंडीशन में 2030 तक आएंगे, जबकि बाकी बचे 90-96 राफेल मेक इन इंडिया के तहत भारत में असेंबल या निर्मित होंगे। भारत में बने राफेल की डिलीवरी 2031-2032 से शुरू हो सकती है। (Rafale Source Code Explained)

Rafale Source Code Explained: क्या होता है राफेल का सोर्स कोड

राफेल फाइटर जेट का सोर्स कोड उसके सॉफ्टवेयर सिस्टम का मूल हिस्सा होता है। यही सॉफ्टवेयर जेट के रडार, सेंसर, हथियार और मिशन कंप्यूटर को कंट्रोल करता है। आसान भाषा में समझें तो यह जेट का “दिमाग” होता है।

फ्रांस की कंपनी दसॉ एविएशन और थेल्स ने इस सॉफ्टवेयर को कई सालों में डेवलप किया है। इसलिए इसे वे अपनी “प्रोप्राइटरी टेक्नोलॉजी” मानते हैं। इसी कारण फ्रांस किसी भी देश को पूरा सोर्स कोड देने से बचता है।

रिपोर्ट्स के अनुसार, अगर पूरा सोर्स कोड नहीं मिलता है तो खरीदने वाला देश खुद से जेट के सॉफ्टवेयर में बदलाव नहीं कर सकता और उसे हर बदलाव के लिए निर्माता पर निर्भर रहना पड़ता है। जिसके लिए कंपनी अलग से रकम वसूलती है या कई बार इनकार भी कर देती है। (Rafale Source Code Explained)

क्या फ्रांस ने मना किया सोर्स कोड के लिए

सूत्रों के मुताबिक फ्रांस का कहना है कि राफेल के कोर सिस्टम जैसे SPECTRA इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर सूट और मिशन सॉफ्टवेयर अत्यंत संवेदनशील हैं। इन्हें साझा करना राष्ट्रीय सुरक्षा और इंडस्ट्री के हितों के खिलाफ हो सकता है। बता दें कि दुनिया में कोई भी जेट बनाने वाली कंपनी सोर्स कोड मुहैया नहीं कराती है।

इसी वजह से फ्रांस केवल सीमित एक्सेस देने के पक्ष में है, जिसे API यानी एप्लीकेशन प्रोग्रामिंग इंटरफेस कहा जाता है। इसका मतलब यह है कि भारत को पूरा सोर्स कोड नहीं मिलेगा, लेकिन सिस्टम के साथ काम करने के लिए जरूरी इंटरफेस उपलब्ध कराया जाएगा। (Rafale Source Code Explained)

API मॉडल क्या है और कैसे काम करता है

API मॉडल को आसान भाषा में “प्लग एंड प्ले” सिस्टम कहा जा सकता है। इसमें जेट के मूल सॉफ्टवेयर को छुए बिना नए हथियार या सिस्टम को जोड़ा जा सकता है।

इस मॉडल में भारतीय इंजीनियर सीधे सॉफ्टवेयर को नहीं बदलते, बल्कि एक इंटरफेस के जरिए अपने सिस्टम को जोड़ते हैं। इससे सुरक्षा भी बनी रहती है और जरूरत के हिसाब से बदलाव भी संभव होता है।

सूत्रों का कहना है कि भारतीय इंजीनियरों को जरूरी इंटरफेस (डेटा लिंक, रडार कम्युनिकेशन, कॉम्बैट मैनेजमेंट सिस्टम) तक बिना कोर सॉफ्टवेयर को छेड़े नियंत्रित एक्सेस मिलेगा।

यूएई जैसे देश पहले ही इस मॉडल का इस्तेमाल कर रहे हैं और उन्होंने अपने हथियारों को राफेल के साथ जोड़ने में सफलता हासिल की है। (Rafale Source Code Explained)

क्या अस्त्र-रूद्रम मिसाइल राफेल पर लग सकेंगी?

सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या भारत की स्वदेशी अस्त्र-रूद्रम मिसाइलें राफेल पर लगाई जा सकेंगी। इस पर रक्षा सूत्रों के अनुसार जवाब हां है। अस्त्र बियोंड-विजुअल-रेंज एयर टू एयर मिसाइल है।

भारत और फ्रांस के बीच चल रही बातचीत में यह तय किया जा रहा है कि भारत को अपने हथियार राफेल पर लगाने की अनुमति मिलेगी। इसके लिए API और सॉफ्टवेयर अपग्रेड का इस्तेमाल किया जाएगा।

राफेल पर अस्त्र मिसाइल लगाने की तैयारी पहले से ही चल रही है। भारतीय नौसेना के लिए जो 26 राफेल-मरीन विमान खरीदे जा रहे हैं, उनकी डील में ही अस्त्र एमके1 मिसाइल का इंटीग्रेशन शामिल किया गया है। इन विमानों की डिलीवरी साल 2028 से शुरू होने की योजना है। (Rafale Source Code Explained)

वहीं भारतीय वायुसेना के मौजूदा और आने वाले राफेल विमानों पर भी अस्त्र एमके1 और अस्त्र एमके2 दोनों मिसाइलों को लगाने की योजना है। इसके लिए 2028 से ट्रायल्स शुरू होंगे, जिनमें अलग-अलग चरण होंगे जैसे कैरिज टेस्ट, कैप्टिव टेस्ट, रिलीज और लाइव फायरिंग। इन सभी परीक्षणों के लिए एक राफेल विमान को खास तौर पर फ्लाइंग टेस्ट बेड के तौर पर इस्तेमाल किया जाएगा।

अस्त्र मिसाइल पहले ही सुखोई-30 एमकेआई और तेजस जैसे भारतीय फाइटर जेट्स पर सफलतापूर्वक लगाई जा चुकी है। उसी तकनीक और अनुभव का उपयोग अब राफेल पर भी किया जाएगा, जिससे इस प्रक्रिया को आगे बढ़ाना आसान हो जाता है। (Rafale Source Code Explained)

इस प्रक्रिया में फ्रांसीसी कंपनियां भी शामिल होंगी, जो सॉफ्टवेयर को इस तरह अपडेट करेंगी कि राफेल के रडार और सिस्टम के साथ अस्त्र मिसाइल सही तरीके से काम कर सके।

राफेल के नए वर्जन और उनकी क्षमता

भारत के पास अभी राफेल का F3-R वर्जन है, जिसमें भारत-विशेष कई सुधार किए गए हैं। नए सौदे में जो 114 राफेल आने हैं, वे F4 स्टैंडर्ड के होंगे, जो पहले से ज्यादा आधुनिक माने जाते हैं।

इसके बाद इन्हें भविष्य में F5 स्टैंडर्ड तक अपग्रेड किया जा सकता है, जिसमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, नेटवर्क आधारित युद्ध और ड्रोन के साथ काम करने जैसी क्षमताएं शामिल होंगी।

इन नए विमानों में भारत की जरूरत के अनुसार कई बदलाव भी किए जाएंगे, जिनमें कम्युनिकेशन सिस्टम, डेटा लिंक और हथियार इंटीग्रेशन शामिल है। (Rafale Source Code Explained)

मेक इन इंडिया और इंडिजिनाइजेशन

इस डील का एक बड़ा हिस्सा “मेक इन इंडिया” से जुड़ा है। योजना के अनुसार 114 में से 18 विमान सीधे फ्रांस से आएंगे, जबकि बाकी 96 भारत में असेंबल किए जाएंगे।

शुरुआत में लगभग 30 प्रतिशत इंडिजिनस कंटेंट रहेगा, जिसे धीरे-धीरे बढ़ाकर 60 प्रतिशत तक ले जाने की योजना है। भारत चाहता है कि यह आंकड़ा 50 प्रतिशत से ज्यादा हो।

इसके लिए भारतीय कंपनियों की भागीदारी बढ़ाई जाएगी और टेक्नोलॉजी ट्रांसफर पर भी जोर दिया जा रहा है। (Rafale Source Code Explained)

सॉफ्टवेयर और नेटवर्क वॉरफेयर की भूमिका

आज के समय में फाइटर जेट सिर्फ हथियारों से नहीं, बल्कि सॉफ्टवेयर और डेटा नेटवर्क से भी ताकतवर बनते हैं। राफेल में सॉफ्टवेयर डिफाइंड रेडियो (SDR) जैसी तकनीक होती है, जिससे अलग-अलग प्लेटफॉर्म आपस में जुड़कर काम कर सकते हैं।

इससे रियल टाइम में जानकारी साझा होती है और कई प्लेटफॉर्म मिलकर एक ही लक्ष्य पर हमला कर सकते हैं। इसे नेट-सेंट्रिक वॉरफेयर कहा जाता है।

भारत चाहता है कि नए राफेल जेट भारतीय और विदेशी दोनों तरह के सिस्टम के साथ आसानी से जुड़ सकें, ताकि ऑपरेशन में तेजी और सटीकता बनी रहे। (Rafale Source Code Explained)

राफेल के अलावा भी, डीआरडीओ इसी तरह के स्वदेशी सॉफ्टवेयर सिस्टम डेवलप करने पर काम कर रहा है, ताकि भारत अपनी तकनीक पर ज्यादा नियंत्रण रख सके।

उदाहरण के तौर पर, हाल ही में लॉन्च किया गया इंडियन रेडियो सॉफ्टवेयर आर्किटेक्चर (IRSA) स्टैंडर्ड 1.0 इस तरह बनाया गया है कि भारत में बने सॉफ्टवेयर-डिफाइंड रेडियो अलग-अलग सैन्य प्लेटफॉर्म पर आसानी से एक साथ काम कर सकें।

इस तरीके से भारत महंगे विदेशी प्लेटफॉर्म को एक फिक्स सिस्टम की तरह नहीं, बल्कि एक फ्लेक्सिबल सिस्टम की तरह इस्तेमाल कर रहा है, जिसमें जरूरत के हिसाब से बदलाव किए जा सकते हैं। इससे आज के समय में, जहां सॉफ्टवेयर की तेजी और अपडेट बहुत अहम हो गए हैं, भारत अपनी सैन्य क्षमता को मजबूत बनाए रख सकता है। (Rafale Source Code Explained)

ऑपरेशन सिंदूर के बाद बढ़ी जरूरत

मई 2025 में हुए ऑपरेशन सिंदूर के बाद यह मुद्दा और ज्यादा चर्चा में आया। कुछ विशेषज्ञों का मानना था कि अगर भारत के पास पूरा सॉफ्टवेयर कंट्रोल होता तो वह तेजी से बदलाव कर सकता था।

हालांकि भारत सरकार ने आधिकारिक तौर पर इस तरह की किसी कमी को स्वीकार नहीं किया है। फिर भी, इस अनुभव के बाद भारत अब ज्यादा टेक्नोलॉजी कंट्रोल चाहता है। (Rafale Source Code Explained)

कई देशों के पास है राफेल

भारत लंबे समय से फ्रांस का बड़ा रक्षा साझेदार रहा है। कई देशों जैसे मिस्र, कतर और ग्रीस ने भी राफेल खरीदे हैं, लेकिन वे ज्यादातर फ्रांसीसी हथियारों पर निर्भर रहते हैं।

भारत की खासियत यह है कि वह अपने स्वदेशी हथियारों को इन प्लेटफॉर्म पर जोड़ना चाहता है। इसी वजह से सोर्स कोड और सॉफ्टवेयर एक्सेस का मुद्दा अहम हो गया है।

फ्रांस भी भारत के साथ सहयोग बढ़ाने के पक्ष में है, लेकिन वह अपनी कोर टेक्नोलॉजी को सुरक्षित रखना चाहता है। (Rafale Source Code Explained)

पहली बार सामने आया S-400 का फायरिंग वीडियो, ऑपरेशन सिंदूर में किया था 300 किमी एयर किल

S-400 Air Defence System
S-400 Air Defence System

S-400 Air Defence: भारतीय वायुसेना ने 26 फरवरी को पहली बार S-400 एयर डिफेंस सिस्टम की फायरिंग का वीडियो सार्वजनिक किया है। यह वीडियो वायु शक्ति-2026 अभ्यास से पहले जारी किया गया है और इसमें सिस्टम के काम करने के तरीके को दिखाया गया है। वीडियो में एक खास कैप्शन “longest ever air kill recorded in military history” भी दिखाया गया है, जिसे ऑपरेशन सिंदूर से जोड़ा जा रहा है।

यह वीडियो रक्षा समाचार के सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर साझा किया गया है, जिसमें “Enemy may be out of reach, but is never out of sight” जैसे संदेश भी शामिल हैं। यह वीडियो वास्तविक ऑपरेशन का नहीं, बल्कि प्रमोशनल और ट्रेनिंग फुटेज बताया गया है। (S-400 Air Defence)

S-400 Air Defence: वीडियो में क्या दिखाया गया

वीडियो में सबसे पहले रडार को एक दुश्मन विमान को ट्रैक करते हुए दिखाया गया है। इसके बाद एयर डिफेंस सिस्टम एक्टिवेट होता है और मिसाइल लॉन्च की जाती है। मिसाइल को हवा में उड़ते हुए दिखाया गया है, जिससे सिस्टम की क्षमता का प्रदर्शन होता है।

इस वीडियो का मकसद S-400 सिस्टम की कार्यक्षमता और वायुसेना की तैयारी को दिखाना है। इसमें पूरे प्रोसेस को सरल तरीके से प्रस्तुत किया गया है, ताकि आम लोग भी इसे समझ सकें। (S-400 Air Defence)

ऑपरेशन सिंदूर की दिलाई याद

इस वीडियो में “longest ever air kill” का जिक्र ऑपरेशन सिंदूर से जुड़ा माना जा रहा है। यह ऑपरेशन मई 2025 में किया गया था, जिसमें भारतीय वायुसेना ने पाकिस्तान के भीतर कई टारगेट्स पर कार्रवाई की थी।

रिपोर्ट्स के अनुसार, इसी ऑपरेशन के दौरान S-400 सिस्टम का इस्तेमाल करते हुए लगभग 300 किलोमीटर दूर एक पाकिस्तानी विमान को मार गिराया गया था। इसे सतह से हवा में मार करने वाले सिस्टम के जरिए अब तक की सबसे लंबी दूरी का किल माना जा रहा है।

वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने भी पहले कहा था कि इस ऑपरेशन में लंबी दूरी से सटीक हमला किया गया था और इसके स्पष्ट सबूत मौजूद हैं। (S-400 Air Defence)

S-400 सिस्टम की खूबियां

एस-400 ट्रायम्फ एक लंबी दूरी का सतह से हवा में मार करने वाला मिसाइल सिस्टम है, जिसे रूस से लिया गया है। यह सिस्टम एक साथ कई टारगेट्स को ट्रैक और निशाना बना सकता है। इसकी अधिकतम रेंज लगभग 400 किलोमीटर तक बताई जाती है।

भारत ने इस सिस्टम को 2021 से अपने बेड़े में शामिल करना शुरू किया था। अब तक कई स्क्वाड्रन तैनात किए जा चुके हैं। यह सिस्टम दुश्मन के फाइटर जेट, ड्रोन और मिसाइल को हवा में ही नष्ट करने की क्षमता रखता है।

ऑपरेशन सिंदूर के दौरान इस सिस्टम ने दुश्मन के विमानों की गतिविधियों पर असर डाला और उन्हें दूरी बनाए रखने के लिए मजबूर किया। (S-400 Air Defence)

वायु शक्ति-2026 से जुड़ा वीडियो

यह वीडियो वायु शक्ति-2026 अभ्यास के प्रमोशन के लिए जारी किया गया है। यह अभ्यास 27 फरवरी को राजस्थान के पोखरण में आयोजित किया जाएगा, जहां भारतीय वायुसेना अपनी फायरपावर और ऑपरेशनल क्षमता का प्रदर्शन करेगी।

इस अभ्यास में एस-400 के अलावा अन्य एयर डिफेंस सिस्टम जैसे आकाश, स्पाइडर और काउंटर ड्रोन सिस्टम भी शामिल किए जाएंगे। कार्यक्रम में विभिन्न प्रकार के फाइटर जेट, हेलीकॉप्टर और मिसाइल सिस्टम हिस्सा लेंगे।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगी और इससे पहले वे प्रचंड हेलीकॉप्टर में उड़ान भी भरेंगी। (S-400 Air Defence)

वीडियो के जरिए वायुसेना ने अपनी तैयारी और क्षमता को दिखाने की कोशिश की है। इसमें “Infallible, Impervious and Precise” जैसी टैगलाइन का इस्तेमाल किया गया है, जो सटीकता और ताकत का संकेत देती है।

इस वीडियो के जरिए वायुसेना ने यह भी दिखाया है कि आधुनिक युद्ध में लंबी दूरी से खतरे को पहचानना और उसे समय रहते खत्म करना कितना जरूरी है। (S-400 Air Defence)

Vayushakti 2026: राष्ट्रपति मुर्मू ‘प्रचंड’ हेलीकॉप्टर में भरेंगी उड़ान, पोखरण में देखेंगी एयरफोर्स का मेगा शो

Vayushakti 2026- LCH Prachand
LCH Prachand

Vayushakti 2026: भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू 27 फरवरी को राजस्थान के जैसलमेर दौरे पर रहेंगी। वे भारतीय वायुसेना के बड़े फायरपावर अभ्यास वायु शक्ति-2026 में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगी। इस दौरान वे स्वदेशी लाइट कॉम्बैट हेलीकॉप्टर प्रचंड में उड़ान भी भरेंगी। यह पहली बार होगा जब कोई राष्ट्रपति कॉम्बैट हेलीकॉप्टर में को-पायलट के तौर पर उड़ान भरेंगी।

राष्ट्रपति 26 फरवरी की शाम को जैसलमेर पहुंचेंगी, जहां उनका स्वागत राज्यपाल हरिभाऊ बागड़े और मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा करेंगे। इसके बाद अगले दिन सुबह उनका कार्यक्रम शुरू होगा।

Vayushakti 2026: ‘प्रचंड’ में उड़ान का कार्यक्रम

27 फरवरी की सुबह राष्ट्रपति जैसलमेर एयर फोर्स स्टेशन से लाइट कॉम्बैट हेलीकॉप्टर प्रचंड में सॉर्टी लेंगी। यह उड़ान एक तरह का एरियल सर्वे होगी, जिसमें वे पोखरण फील्ड फायरिंग रेंज और आसपास के चांधन इलाके का हवाई निरीक्षण करेंगी। इस उड़ान की अवधि करीब 20 से 30 मिनट रहने की संभावना है।

यह हेलीकॉप्टर पूरी तरह से भारत में डेवलप किया गया है और इसे कठिन परिस्थितियों में ऑपरेशन के लिए तैयार किया गया है। प्रचंड हेलीकॉप्टर ऊंचाई वाले इलाकों और रेगिस्तानी क्षेत्र दोनों में प्रभावी तरीके से काम कर सकता है।

प्रचंड हेलीकॉप्टर की खासियत

लाइट कॉम्बैट हेलीकॉप्टर प्रचंड को हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड ने डेवलप किया है। यह हेलीकॉप्टर लगभग 5.8 टन वजन का है और इसकी अधिकतम गति करीब 280 किलोमीटर प्रति घंटा है। इसकी रेंज 550 किलोमीटर से ज्यादा बताई जाती है।

इसमें आधुनिक हथियार लगाए जा सकते हैं, जिनमें एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइल, 70 एमएम रॉकेट और 20 एमएम गन शामिल हैं। हेलीकॉप्टर में ट्विन इंजन, आर्मर्ड कॉकपिट और आधुनिक एवियोनिक्स सिस्टम भी मौजूद हैं, जिससे यह युद्ध के दौरान सुरक्षित और प्रभावी रहता है।

वायुसेना के जवानों से मुलाकात

उड़ान के बाद राष्ट्रपति एयर फोर्स स्टेशन पर मौजूद वायुसेना के अधिकारियों और जवानों से बातचीत करेंगी। इस दौरान वे उनकी तैयारियों और अनुभवों के बारे में जानकारी लेंगी।

इसके बाद वे पोखरण फील्ड फायरिंग रेंज के चांधन क्षेत्र में जाएंगी, जहां वायु शक्ति-2026 का मुख्य कार्यक्रम आयोजित होगा।

वायु शक्ति-2026 का आयोजन

वायु शक्ति-2026 का मुख्य कार्यक्रम 27 फरवरी को शाम 4:40 बजे शुरू होगा। इसमें भारतीय वायुसेना अपनी पूरी ताकत का प्रदर्शन करेगी। इस अभ्यास में फाइटर जेट, हेलीकॉप्टर और ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट मिलकर विभिन्न प्रकार के ऑपरेशन दिखाएंगे।

कार्यक्रम में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल अनिल चौहान, तीनों सेनाओं के प्रमुख और कई विदेशी प्रतिनिधि भी मौजूद रहेंगे। इस पूरे कार्यक्रम का लाइव प्रसारण डीडी न्यूज और वायुसेना के सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर किया जाएगा।

अभ्यास में दिखेगी आधुनिक युद्ध क्षमता

इस अभ्यास में भारतीय वायुसेना दिन, शाम और रात तीनों समय के ऑपरेशन दिखाएगी। इसमें प्रिसिजन स्ट्राइक, एयर डिफेंस, हेलिबोर्न ऑपरेशन और राहत एवं बचाव मिशन जैसे कई पहलुओं को शामिल किया गया है।

इस आयोजन में ऑपरेशन सिंदूर के अनुभवों को भी शामिल किया गया है, जिसमें लंबी दूरी से सटीक हमले और मल्टी-डोमेन ऑपरेशन की क्षमता दिखाई गई थी।

Vayushakti 2026 की फुल ड्रेस रिहर्सल में दुश्मन के सभी टारगेट हुए तबाह! ऑपरेशन सिंदूर के बाद IAF का जबरदस्त फायरपावर शो

Vayushakti 2026

Vayushakti 2026: राजस्थान के पोखरण फील्ड फायरिंग रेंज में भारतीय वायुसेना का सबसे बड़ा फायरपावर डेमो ‘वायु शक्ति 2026’ अब अपने आखिरी फेज में पहुंच गया है। 26 फरवरी को हुई फुल ड्रेस रिहर्सल में वायुसेना ने अपनी पूरी तैयारी का प्रदर्शन किया, जिसमें सभी टारगेट सफलतापूर्वक न्यूट्रलाइज कर दिए गए। इसके साथ ही वायुसेना 27 फरवरी को होने वाले मुख्य कार्यक्रम के लिए पूरी तरह तैयार है।

यह अभ्यास भारतीय वायुसेना की ऑपरेशनल क्षमता, सटीकता और तुरंत जवाबी कार्रवाई को दिखाने के लिए आयोजित किया जाता है। इस बार का आयोजन खास इसलिए भी है क्योंकि इसमें आधुनिक युद्ध की सभी परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए दिन, शाम और रात तीनों समय के ऑपरेशन्स को शामिल किया गया है। खास बात यह है कि ऑपरेशन सिंदूर के बाद वायुसेना पहली बार इतने बड़े स्तर पर एक्सरसाइज का आयोजन कर रही है। वायु शक्ति की फुल ड्रेस रिहर्सल 24 फरवरी को आयोजित की गई थी, जिसमें फाइटर जेट, हेलीकॉप्टर और ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट ने मिलकर कई तरह के मिशन पूरे किए। (Vayushakti 2026)

रक्षा समाचार ने सबसे पहले बताया था कि देश के पश्चिमी मोर्चे पर भारतीय वायुसेना बड़े अभ्यास की तैयारी कर रही है, जिसके लिए नोटम– नोटिस टू एयरमैन भी जारी किया गया था।

Vayushakti 2026: सभी प्रमुख एयरक्राफ्ट शामिल

इस अभ्यास में भारतीय वायुसेना ने अपने लगभग सभी प्रमुख एयरक्राफ्ट को शामिल किया है। इसमें राफेल, सुखोई-30 एमकेआई, मिराज-2000, मिग-29, जगुआर और हॉक जैसे फाइटर जेट शामिल हैं। इनके साथ-साथ एएन-32, सी-130जे, सी-17 ग्लोबमास्टर और सी-295 जैसे ट्रांसपोर्ट विमान भी इस अभ्यास का हिस्सा हैं। हेलीकॉप्टरों में अपाचे, एलसीएच प्रचंड, एमआई-17, चिनूक और एएलएच जैसे प्लेटफॉर्म शामिल हैं।

वायु शक्ति 2026 में कुल मिलाकर 77 फाइटर विमान, 43 हेलीकॉप्टर और 8 ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट हिस्सा ले रहे हैं। इस दौरान करीब 277 हथियारों का इस्तेमाल किया जाएगा, जिनमें लगभग 12,000 किलो विस्फोटक शामिल हैं। अभ्यास के लिए 23 अलग-अलग टारगेट तैयार किए गए हैं, जो जमीन और हवा दोनों तरह के खतरों को दर्शाते हैं। (Vayushakti 2026)

फुल ड्रेस रिहर्सल में रात-दिन ऑपरेशन

फुल ड्रेस रिहर्सल के दौरान वायुसेना ने दिन से लेकर रात तक लगातार ऑपरेशन किए। सभी टारगेट्स को सटीक तरीके से निशाना बनाया गया। इस दौरान हेलीकॉप्टरों ने रॉकेट फायरिंग और प्रिसिजन स्ट्राइक का प्रदर्शन किया, जबकि फाइटर जेट्स ने हाई स्पीड अटैक मिशन पूरे किए।

इस अभ्यास में आर्मी के साथ जॉइंट ऑपरेशन भी शामिल रहा। इसमें एम777 हॉवित्जर गन और एल70 एयर डिफेंस गन का इस्तेमाल किया गया। इसके अलावा स्पेशल फोर्सेस ने भी अपनी भूमिका निभाई। अनमैन्ड सिस्टम यानी ड्रोन और काउंटर ड्रोन सिस्टम को भी इस अभ्यास में शामिल किया गया, जिससे आधुनिक युद्ध की तैयारी को दिखाया गया। (Vayushakti 2026)

27 फरवरी को होगा मुख्य कार्यक्रम

वायु शक्ति 2026 का मुख्य कार्यक्रम 27 फरवरी को शाम 4:40 बजे शुरू होगा। इसमें 43 अलग-अलग सेगमेंट में ऑपरेशन्स का प्रदर्शन किया जाएगा। यह कार्यक्रम शाम 5:10 बजे से लेकर रात 7:45 बजे तक चलेगा।

इस कार्यक्रम की मुख्य अतिथि राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू होंगी। जानकारी के मुताबिक, वे कार्यक्रम से पहले स्वदेशी एएलएच हेलीकॉप्टर में उड़ान भी भरेंगी। मौसम खराब होने की स्थिति में 28 फरवरी को रिजर्व डे रखा गया है। (Vayushakti 2026)

ऑपरेशन सिंदूर की दिखेगी झलक

इस अभ्यास में ऑपरेशन सिंदूर की सफलता को भी दिखाया जाएगा। यह ऑपरेशन मई 2025 में किया गया था, जिसमें वायुसेना ने लंबी दूरी से सटीक हमले कर दुश्मन के ठिकानों को निशाना बनाया था। वायु शक्ति 2026 में उसी तरह की क्षमताओं का प्रदर्शन किया जाएगा, जिसमें मल्टी-डोमेन ऑपरेशन और एयर सुपीरियरिटी पर जोर रहेगा।

तेजस की भागीदारी पर संशय

इस बार के अभ्यास में एलसीए तेजस को शामिल किए जाने की उम्मीद थी, लेकिन फुल ड्रेस रिहर्सल में यह विमान नजर नहीं आया। रिपोर्ट्स के अनुसार, मुख्य कार्यक्रम में भी इसकी भागीदारी को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। हालांकि बाकी सभी प्रमुख प्लेटफॉर्म इस अभ्यास में हिस्सा ले रहे हैं। (Vayushakti 2026)

मानवीय सहायता और राहत मिशन भी शामिल

वायु शक्ति 2026 सिर्फ युद्ध क्षमता दिखाने तक सीमित नहीं है। इसमें ह्यूमैनिटेरियन असिस्टेंस एंड डिजास्टर रिलीफ यानी आपदा के समय राहत और बचाव कार्यों की क्षमता भी दिखाई जाएगी। इसमें एयरलिफ्ट, रेस्क्यू और इवैक्यूएशन ऑपरेशन शामिल हैं, जो देश और विदेश दोनों जगहों पर किए जा सकते हैं।

महिला पायलट भी अहम भूमिका में

इस अभ्यास की एक खास बात यह भी है कि इसमें महिला पायलटों को भी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां दी गई हैं। वे हाई विजिबिलिटी मिशन में हिस्सा ले रही हैं और फाइटर और हेलीकॉप्टर ऑपरेशन का हिस्सा हैं। (Vayushakti 2026)

पूरे आयोजन की जिम्मेदारी साउथ वेस्ट एयर कमांड पर

इस बड़े आयोजन की योजना और संचालन की जिम्मेदारी साउथ वेस्ट एयर कमांड को दी गई है। इसमें कई सिविल और डिफेंस मेहमानों के साथ विदेशी प्रतिनिधियों को भी आमंत्रित किया गया है। (Vayushakti 2026)

क्या है भारतीय वायुसेना की Kalari Leap Exercise? जब लक्षद्वीप में एयरफोर्स, कोस्ट गार्ड और स्पेशल फोर्स एक साथ उतरे मिशन पर

Kalari Leap Exercise

Kalari Leap Exercise: भारतीय वायुसेना की दक्षिण एयर कमांड ने हाल ही में ‘कलारी लीप’ नाम की जॉइंट मैरिटाइम एक्सरसाइज का आयोजन किया था। जिसे लक्षद्वीप और मिनिकॉय द्वीपसमूह में सफलतापूर्वक पूरा किया गया। इस अभ्यास में भारतीय वायुसेना के साथ आर्म्ड फोर्सेस स्पेशल ऑपरेशंस डिवीजन और इंडियन कोस्ट गार्ड की टीमें भी शामिल रहीं। यह अभ्यास समुद्री इलाकों में तेज और सटीक ऑपरेशन करने की क्षमता को परखने के लिए आयोजित किया गया था।

Kalari Leap Exercise: क्या है कलारी लीप?

‘कलारी लीप’ नाम के पीछे भी एक खास अर्थ है। यह नाम केरल की पारंपरिक मार्शल आर्ट ‘कलरिपयट्टू’ से लिया गया है, जो ताकत, संतुलन और तेज कार्रवाई का प्रतीक मानी जाती है। इसी भावना को ध्यान में रखते हुए इस अभ्यास का नाम रखा गया, ताकि एयर, समुद्र और जमीन तीनों क्षेत्रों में एक साथ काम करने की क्षमता को दिखाया जा सके।

इस अभ्यास का मुख्य उद्देश्य जॉइंट प्लानिंग, रैपिड फोर्स प्रोजेक्शन और प्रिसिजन एक्जीक्यूशन को टेस्ट करना था। आसान शब्दों में कहें तो यह देखा गया कि कैसे अलग-अलग फोर्स मिलकर कितनी तेजी से किसी मिशन को प्लान कर सकती हैं, कितनी जल्दी फोर्स को मौके पर पहुंचा सकती हैं और कितनी सटीकता से ऑपरेशन को पूरा कर सकती हैं। यह अभ्यास खास तौर पर ऐसे समुद्री इलाकों के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है, जहां भौगोलिक हालात चुनौतीपूर्ण होते हैं।

अभ्यास के दौरान कई तरह के ऑपरेशन किए गए। इसमें एयरबोर्न और एयर-लैंडेड इंसर्शन शामिल था, जिसमें सैनिकों को हवाई मार्ग से टारगेट एरिया में उतारा गया। इसके अलावा हेलीकॉप्टर के जरिए स्पेशल मिशन भी किए गए, जिन्हें हेलिबोर्न ऑपरेशन कहा जाता है। समुद्र से तट पर हमला करने की तैयारी के लिए एम्फीबियस असॉल्ट की भी प्रैक्टिस की गई। (Kalari Leap Exercise)

एंटी-शिप स्ट्राइक का अभ्यास

इसके साथ ही एंटी-शिप स्ट्राइक का अभ्यास किया गया, जिसमें दुश्मन के जहाजों को निशाना बनाने की प्रक्रिया को परखा गया। समुद्र में किसी आपात स्थिति से निपटने के लिए सर्च एंड रेस्क्यू यानी खोज और बचाव अभियान भी इस अभ्यास का हिस्सा रहा। इन सभी ऑपरेशन्स को इस तरह डिजाइन किया गया था कि वास्तविक परिस्थितियों के करीब अनुभव मिल सके।

इस एक्सरसाइज में भारतीय वायुसेना ने कई अहम एसेट्स का इस्तेमाल किया। इसमें एएन-32 ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट, एमआई-17 वी5 हेलीकॉप्टर और सुखोई-30 एमकेआई फाइटर जेट शामिल रहे। एएन-32 का इस्तेमाल सैनिकों को ले जाने और मेडिकल इवैक्यूएशन के लिए किया गया। वहीं, सुखोई-30 एमकेआई फाइटर जेट ने मैरिटाइम स्ट्राइक मिशन में हिस्सा लिया। (Kalari Leap Exercise)

इंडियन कोस्ट गार्ड भी हुआ शामिल

इंडियन कोस्ट गार्ड ने भी इस अभ्यास में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। कोस्ट गार्ड के जहाज, जेमिनी बोट्स और डोर्नियर 228 एयरक्राफ्ट का इस्तेमाल किया गया। डोर्नियर विमान ने सर्च एंड रेस्क्यू मिशन में मदद की और फाइटर जेट्स को गाइड करने का काम भी किया। इसके अलावा स्पेशल फोर्स के जवानों ने कॉम्बैट फ्री फॉल यानी पैराशूट जंप के जरिए इंसर्शन किया और एम्फीबियस ऑपरेशन में भाग लिया।

इस अभ्यास का एक अहम हिस्सा मास कैजुअल्टी मैनेजमेंट ड्रिल भी रहा। इसमें घायल सैनिकों को तेजी से निकालने और इलाज के लिए एयरलिफ्ट करने की प्रक्रिया का अभ्यास किया गया। अगत्ती से तिरुवनंतपुरम तक एएन-32 एयरक्राफ्ट के जरिए मरीजों को ले जाने का अभ्यास किया गया, जिससे मेडिकल रिस्पॉन्स सिस्टम को भी मजबूत किया जा सके। (Kalari Leap Exercise)

एयर डिफेंस सिस्टम और नेटवर्क के साथ मिलकर करे काम

‘कलारी लीप’ अभ्यास में एक और महत्वपूर्ण पहलू यह रहा कि इसे इस तरह डिजाइन किया गया था कि यह मौजूदा एयर डिफेंस सिस्टम और नेटवर्क के साथ मिलकर काम कर सके। इसमें एंटी-जैमिंग और एडवांस कम्युनिकेशन सिस्टम का भी इस्तेमाल किया गया, ताकि ऑपरेशन के दौरान किसी तरह की रुकावट न आए।

यह अभ्यास यह दिखाने के लिए आयोजित किया गया था कि भारतीय सशस्त्र बल द्वीपीय क्षेत्रों में एक साथ मिलकर ऑपरेशन करने में सक्षम हैं। इसमें एयर, मैरिटाइम और स्पेशल ऑपरेशंस का पूरा तालमेल देखने को मिला। अभ्यास के दौरान सभी फोर्सेस ने मिलकर जटिल ऑपरेशन्स को अंजाम दिया और अपनी तैयारी का प्रदर्शन किया। (Kalari Leap Exercise)