📍नई दिल्ली | 23 Sep, 2026, 8:39 PM
SAT-SAAW glide bomb: रक्षा मंत्रालय ने भारत डायनामिक्स लिमिटेड (बीडीएल) के साथ 810.79 करोड़ रुपये के अनुबंध पर हस्ताक्षर किए हैं। इस समझौते के तहत भारतीय वायुसेना के लिए 160 सैटेलाइट स्मार्ट एंटी एयरफील्ड वेपन (SAT-SAAW) खरीदे जाएंगे। डीआरडीओ का बनाया यह स्वदेशी प्रिसिजन गाइडेड ग्लाइड बम दुश्मन के एयरबेस, रनवे, बंकर और मिलिट्री स्ट्रक्चर को सुरक्षित दूरी से निशाना बनाने में सक्षम है। नई दिल्ली में रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह की मौजूदगी में हुए इस समझौते को भारतीय वायुसेना की स्ट्राइक क्षमता बढ़ाने और रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को मजबूत करने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।
यह सौदा “बाय इंडियन – इंडिजेनसली डिजाइन्ड, डेवलप्ड एंड मैन्युफैक्चर्ड” कैटेगरी के तहत किया गया है, जिसका मतलब है कि हथियार का डिजाइन, विकास और निर्माण भारत में ही होगा।
क्या है SAT-SAAW glide bomb?
SAT-SAAW यानी सैटेलाइट स्मार्ट एंटी एयरफील्ड वेपन एक प्रिसिजन गाइडेड ग्लाइड बम है। यह हवा से जमीन पर मार करने वाला ऐसा हथियार है, जिसे लड़ाकू विमान से छोड़ने के बाद यह बिना इंजन के अपने पंखों की मदद से टारगेट की ओर बढ़ता है।
इसका मुख्य उद्देश्य दुश्मन के एयरबेस, रनवे, टैक्सी ट्रैक, एयरक्राफ्ट शेल्टर, कमांड सेंटर, बंकर और अन्य महत्वपूर्ण मिलिट्री स्ट्रक्चर्स को नष्ट करना है। यह हथियार लंबी दूरी से छोड़ा जा सकता है, जिससे हमला करने वाले विमान को दुश्मन की एयर डिफेंस रेंज में जाने की जरूरत नहीं पड़ती।
यही वजह है कि इसे स्टैंड-ऑफ वेपन की श्रेणी में रखा जाता है। स्टैंड-ऑफ वेपन ऐसे हथियार होते हैं जिन्हें सुरक्षित दूरी से दागकर टारगेट को निशाना बनाया जाता है। (SAT-SAAW glide bomb)
कैसे काम करता है यह स्मार्ट हथियार?
SAT-SAAW को लड़ाकू विमान से रिलीज करने के बाद इसके फोल्डिंग विंग्स खुल जाते हैं। इसके बाद यह हवा में ग्लाइड करते हुए टारगेट की ओर बढ़ता है।
इस हथियार में सैटेलाइट नेविगेशन और इनर्शियल नेविगेशन सिस्टम का इस्तेमाल किया जाता है। इनर्शियल नेविगेशन सिस्टम लगातार इसकी स्थिति, दिशा और रफ्तार को मापता रहता है, जबकि सैटेलाइट बेस्ड नेविगेशन सिस्टम इसे टारगेट तक पहुंचने में मदद करता है।
हथियार के अंदर मौजूद मिशन कंप्यूटर लगातार फ्लाइट पाथ की गणना करता है और जरूरी सुधार करता रहता है। इसके कारण यह टारगेट पर अत्यधिक सटीकता के साथ हमला कर सकता है। (SAT-SAAW glide bomb)
किन विमानों से किया जा सकता है लॉन्च?
भारतीय वायुसेना के कई प्लेटफॉर्म इस हथियार को इस्तेमाल कर सकते हैं। SAT-SAAW को जगुआर, हॉक और सुखोई-30 एमकेआई जैसे विमानों से लॉन्च किया जा सकता है। सुखोई-30 एमकेआई जैसे भारी लड़ाकू विमान एक मिशन में कई SAT-SAAW लेकर उड़ान भर सकते हैं।
इससे एक ही सॉर्टी के दौरान कई अलग-अलग टारगेट्स पर हमला कर सकते हैं। वायुसेना के मौजूदा बेड़े के साथ इसका इंटीग्रेशन एक बड़ी बात मानी जा रही है। (SAT-SAAW glide bomb)
🇮🇳🎯 Breaking: Major Firepower Boost for IAF: MoD Signs ₹811 Crore SAT-SAAW Contract with BDL…
Ministry of Defence has signed an Rs 810.79 crore contract with Bharat Dynamics Limited (BDL) for the procurement of 160 Satellite Smart Anti-Airfield Weapons (SAT-SAAW) for the… pic.twitter.com/LeHeRQZmio— Raksha Samachar | रक्षा समाचार 🇮🇳 (@RakshaSamachar) September 23, 2026
एयरफील्ड पर हमला क्यों होता है महत्वपूर्ण?
किसी भी आधुनिक युद्ध में एयरबेस सबसे महत्वपूर्ण मिलिट्री एसेट्स में गिने जाते हैं। लड़ाकू विमान, फ्यूल स्टोरेज, हथियार डिपो, रडार नेटवर्क और कमांड सेंटर आमतौर पर एयरबेस से जुड़े होते हैं।
यदि किसी एयरफील्ड का रनवे क्षतिग्रस्त हो जाए तो वहां से विमान उड़ान नहीं भर सकते। इससे दुश्मन की एयर पावर पर सीधा असर पड़ता है।
SAT-SAAW को इसी उद्देश्य को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। इसकी मदद से रनवे पर गहरे गड्ढे बनाए जा सकते हैं या एयरबेस के महत्वपूर्ण बेसिक इंफ्रास्ट्रक्चर को नुकसान पहुंचाया जा सकता है।
लंबी दूरी से हमला करने की क्षमता के कारण यह हथियार दुश्मन की एयर डिफेंस सिस्टम से सुरक्षित दूरी बनाए रखते हुए ऑपरेशन को अंजाम देने में मदद करता है। (SAT-SAAW glide bomb)
ऑपरेशन सिंदूर में पाकिस्तान के कई एयरबेस को बनाया था टारगेट
मई 2025 में हुए ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारतीय वायुसेना ने पाकिस्तान के कई अहम एयरबेस को निशाना बनाया था। इनमें सरगोधा स्थित मुशफ एयरबेस भी शामिल था। इस हमले में भारत ने ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल का इस्तेमाल किया था। हमले के बाद सामने आई सैटेलाइट तस्वीरों में रनवे पर बड़े गड्ढे साफ दिखाई दिए थे। रनवे पर दो जगह बेहद सटीक हमला किया गया था। यह हमला इतना जबदस्त था कि सिंदूर के 16 महीने बाद इस साल सितंबर तक पाकिस्तान रनवे की पूरी तरह मरम्मत नहीं कर पाया था। पहले किए गए रिपेयर पैच भी हटाने पड़े और कई हिस्सों में दोबारा खुदाई करनी पड़ी।
ऑपरेशन सिंदूर में ब्रह्मोस को सुखोई-30 एमकेआई लड़ाकू विमान से लॉन्च किया गया था।
अब भारतीय वायुसेना ने SAT-SAAW को शामिल किया है। हालांकि ब्रह्मोस और SAT-SAAW में मुख्य अंतर यह है कि ब्रह्मोस एक भारी, महंगी और लंबी दूरी की मिसाइल है, जबकि SAT-SAAW एक अपेक्षाकृत हल्का और कम लागत वाला ग्लाइड बम है। इसकी मारक क्षमता लगभग 100 किलोमीटर तक है और एक विमान इसे अधिक संख्या में लेकर जा सकता है। (SAT-SAAW glide bomb)
डीआरडीओ ने बनाया
इस प्रोजेक्ट की सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि डीआरडीओ ने इस हथियार को पूरी तरह भारतीय जरूरतों को ध्यान में रखते हुए डेवलप किया है।
रक्षा मंत्रालय के अनुसार SAT-SAAW में लगभग 60 प्रतिशत स्वदेशी सामग्री का इस्तेमाल किया जाएगा। इसके साथ कई महत्वपूर्ण सब-सिस्टम का भी स्वदेशीकरण किया जा रहा है।
इनमें इनिशियल मेजरमेंट यूनिट, लॉन्ग इम्पैक्ट डिले फ्यूज और ट्विन स्टोर कैरियर जैसे प्रमुख उपकरण शामिल हैं।
इनिशियल मेजरमेंट यूनिट हथियार की स्थिति और दिशा का सटीक आकलन करती है। लॉन्ग इम्पैक्ट डिले फ्यूज टारगेट पर प्रभाव के बाद विस्फोट का समय कंट्रोल करता है। वहीं ट्विन स्टोर कैरियर की मदद से विमान एक साथ दो हथियार लेकर उड़ान भर सकता है।
वहीं, भारत डायनामिक्स लिमिटेड पहले से कई मिसाइल और हथियार प्रणालियों का उत्पादन कर रही है। अब SAT-SAAW का उत्पादन भी बीडीएल के जिम्मे होगा। (SAT-SAAW glide bomb)
कब तक मिलेगी वायुसेना को डिलीवरी?
रक्षा मंत्रालय के अनुसार इसकी डिलीवरी दो चरणों में होगी। पहला चरण वित्तीय वर्ष 2027-28 के दौरान पूरा किया जाएगा, जबकि शेष हथियारों की सप्लाई 2028-29 में की जाएगी।
160 हथियारों की यह खेप भारतीय वायुसेना को विभिन्न ऑपरेशनल जरूरतों के लिए उपलब्ध कराई जाएगी। इससे वायुसेना के पास पर्याप्त संख्या में प्रिसिजन गाइडेड एयर-टू-ग्राउंड हथियार मौजूद होंगे। (SAT-SAAW glide bomb)
Author
हरेंद्र चौधरी रक्षा पत्रकारिता (Defence Journalism) में सक्रिय हैं और RakshaSamachar.com से जुड़े हैं। वे लंबे समय से भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना से जुड़ी रणनीतिक खबरों, रक्षा नीतियों और राष्ट्रीय सुरक्षा से संबंधित मुद्दों को कवर कर रहे हैं। पत्रकारिता के अपने करियर में हरेंद्र ने संसद की गतिविधियों, सैन्य अभियानों, भारत-पाक और भारत-चीन सीमा विवाद, रक्षा खरीद और ‘मेक इन इंडिया’ रक्षा परियोजनाओं पर विस्तृत लेख लिखे हैं। वे रक्षा मामलों की गहरी समझ और विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण के लिए जाने जाते हैं।





