📍नई दिल्ली | 22 Sep, 2026, 8:35 PM
LCA Tejas Mk-1A Induction: स्वदेशी लड़ाकू विमान एलसीए तेजस मार्क-1ए की डिलीवरी को लेकर वायुसेना के वाइस चीफ एयर मार्शल आशुतोष दीक्षित ने एलसीए मार्क-1ए का इंडक्शन अगले एक से दो महीने में शुरू हो सकता है। उन्होंने बताया कि शुरुआत में देरी की वजह इंजन की सप्लाई थी, लेकिन अब इंजन मिल चुके हैं और उन्हें विमानों में लगाया भी जा चुका है। फिलहाल विमान के अंतिम तकनीकी ट्रायल्स चल रहे हैं।
भारतीय वायुसेना लंबे समय से तेजस मार्क-1ए का इंतजार कर रही है। यह विमान देश में विकसित तेजस फाइटर जेट एमके-1 का एडवांस वर्जन है, जिसमें बेहतर एवियोनिक्स, आधुनिक रडार, इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर सिस्टम और नई ऑपरेशनल क्षमताएं शामिल हैं।
LCA Tejas Mk-1A Induction: इंजन सप्लाई में आई थी सबसे बड़ी बाधा
एयर मार्शल आशुतोष दीक्षित ने कहा कि शुरुआत में पर्याप्त संख्या में इंजन उपलब्ध नहीं हो पा रहे थे। इसी वजह से विमान की डिलीवरी और इंडक्शन में देरी हुई है।
उन्होंने कहा, “एचएएल इस विषय पर पहले ही स्पष्टीकरण दे चुका है। मैं सिर्फ इतना जोड़ना चाहूंगा कि शुरुआती देरी इंजन की वजह से हुई थी। हमें पर्याप्त इंजन नहीं मिल पा रहे थे। अब इंजन मिल गए हैं और उन्हें विमान में लगा भी दिया गया है।”
बता दें कि तेजस मार्क-1ए में जीई-404 इंजन का इस्तेमाल किया जा रहा है। इंजन सप्लाई में देरी के कारण हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल) तय समय पर विमान तैयार नहीं कर पा रहा था। पिछले दो सालों में इंजन डिलीवरी का मुद्दा तेजस कार्यक्रम की सबसे बड़ी चुनौती बना हुआ था।
LCA Tejas Mk1A: IAF Vice Chief Air Marshal Ashutosh Dixit said missile and radar integration is in the final phase. The IAF hopes to receive five aircraft from HAL within the next two months, giving a boost to the Mk1A induction timeline. #LCA #Tejas #Mk1A #IAF #HAL @IAF_MCC pic.twitter.com/abRLiGBriM
— Raksha Samachar | रक्षा समाचार 🇮🇳 (@RakshaSamachar) September 22, 2026
सिस्टम ट्रायल्स जारी
इंजन मिलने के बाद अब विमान के व्यापक ट्रायल्स किए जा रहे हैं। एयर मार्शल दीक्षित ने बताया कि इंडक्शन से पहले वायुसेना सभी तकनीकी मानकों की पुष्टि करना चाहती है।
उन्होंने कहा, “हम विमान के आधिकारिक इंडक्शन से पहले उचित और विस्तृत ट्रायल्स कर रहे हैं। केवल दो या तीन टेक्निकल पॉइंट्स का वेरिफिकेशन होना बाकी है। मुझे लगता है कि एक या दो महीने के भीतर इन तकनीकी मुद्दों को भी पूरा कर लिया जाएगा। इसके बाद विमान के इंडक्शन का रास्ता साफ हो जाएगा।”
उन्होंने रक्षा समाचार के सवाल के जवाब में बताया कि एचएएल ने इंटीग्रेशन का काम जल्द से जल्द पूरा करने के लिए एमके-1ए की सॉर्टिज की संख्या भी बढ़ाई है।
इन ट्रायल्स में फ्लाइट परफॉरमेंस, मिशन सिस्टम, वेपन इंटिग्रेशन, सेंसर कैपेबिलिटी और विभिन्न ऑपरेशनल परिस्थितियों में विमान की परफॉरमेंस की जांच शामिल है।
एयर मार्शल दीक्षित ने यह भी स्पष्ट किया कि भारतीय वायुसेना तेजस मार्क-1ए को जल्द अपने बेड़े में शामिल करना चाहती है। उन्होंने कहा, “हम भी एलसीए मार्क-1ए के इंडक्शन का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं।” (LCA Tejas Mk-1A Induction)
अस्त्र मिसाइल का इंटीग्रेशन भी फाइनल स्टेज में
वहीं, सूत्रों का कहना है कि पांच फाइटर जेट्स की डिलीवरी अगले दो महीने के भीतर मिल जाएगी। क्योंकि एचएएल को मिले बाकी पांच इंजन की अभी टेस्टिंग चल रही है।
सूत्रों का कहना है कि भारतीय वायुसेना के लिए बन रहे स्वदेशी लड़ाकू विमान एलसीए तेजस एमके-1ए में अस्त्र एमके-1 बियॉन्ड विजुअल रेंज (बीवीआर) एयर-टू-एयर मिसाइल के इंटीग्रेशन का काम भी अंतिम चरण में पहुंच गया है। अब ज्यादातर बड़े फायरिंग ट्रायल पूरे हो चुके हैं और फिलहाल विमान व मिसाइल के बीच फाइनल लेवल के सिस्टम और उड़ान परीक्षण किए जा रहे हैं।
अस्त्र एमके-1 भारत में विकसित एक लंबी दूरी की बीवीआर एयर-टू-एयर मिसाइल है, जिसे डीआरडीओ ने डेवलप किया है। इस मिसाइल की रेंज लगभग 110 किलोमीटर है, जबकि अपग्रेडेड वर्जन में इसकी रेंज करीब 160 किलोमीटर तक है।
मार्च 2025 में तेजस एमके-1 प्रोटोटाइप से अस्त्र मिसाइल का सफल परीक्षण किया गया था। इस दौरान मिसाइल ने 100 किलोमीटर से अधिक दूरी पर टारगेट को सटीक रूप से निशाना बनाया था। इसके बाद जनवरी 2026 में डीआरडीओ ने जानकारी दी कि तेजस ने लगभग 140 किलोमीटर दूरी पर टारगेट का पता लगाया और करीब 110 किलोमीटर की दूरी से अस्त्र मिसाइल दागकर टारगेट को नष्ट कर दिया।
तेजस एमके-1ए में नया एईएसए रडार, आधुनिक एवियोनिक्स, इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सिस्टम और कई अन्य सुधार किए गए हैं। इन्हीं बदलावों के चलते अस्त्र मिसाइल के लिए कुछ सॉफ्टवेयर मॉडिफिकेशन और सिस्टम ट्यूनिंग की जरूरत पड़ी। मिसाइल और विमान के मिशन कंप्यूटर के बीच डेटा एक्सचेंज, टारगेट इनफॉमेशन और लॉन्च सीक्वेंस को नए सिस्टम के अनुरूप बनाया गया।
सूत्रों ने उम्मीद जताई कि तेजस एमके-1ए पर अस्त्र एमके-2 का इंटीग्रेशन लगभग 2027 के आसपास शुरू होने की उम्मीद है। इस मिसाइल की रेंज 220 से 240 किलोमीटर के बीच है। फिलहाल इसका इंटीग्रेशन सबसे पहले सुखोई-30 एमकेआई पर किया जा रहा है।
अस्त्र का इस्तेमाल दुश्मन के लड़ाकू विमान को ऐसी दूरी से मार गिराने के लिए किया जाता है, जहां पायलट टारगेट को आंखों से नहीं देख सकता। टारगेट की पहचान और ट्रैकिंग विमान के रडार और मिसाइल के गाइडेंस सिस्टम के जरिए होती है।
सूत्रों ने बताया कि वर्तमान में मुख्य ध्यान कैप्टिव कैरिज ट्रायल पर है। इस परीक्षण में मिसाइल को विमान के नीचे लगाकर उड़ान भरी जाती है, लेकिन उसे दागा नहीं जाता। इसका उद्देश्य यह जांचना होता है कि उड़ान के दौरान मिसाइल का वजन, एरोडायनैमिक्स इफैक्ट और विमान के स्ट्रक्चर पर उसका क्या असर पड़ता है। (LCA Tejas Mk-1A Induction)
एएसआरएएएम मिसाइल पर भी तेजी से काम
अस्त्र के अलावा तेजस एमके-1ए में ब्रिटेन की एएसआरएएएम (एडवांस्ड शॉर्ट रेंज एयर-टू-एयर मिसाइल) का इंटीग्रेशन भी तेजी से चल रहा है। जुलाई 2026 में एएसआरएएएम के ट्विन लॉन्चर से सिंगल और डबल दोनों प्रकार की सफल फायरिंग की गई थी।
यह मिसाइल नजदीकी हवाई मुकाबले के लिए इस्तेमाल की जाती है, जबकि अस्त्र लंबी दूरी के हवाई युद्ध के लिए है। दोनों के साथ तेजस की लड़ाकू क्षमता काफी बढ़ जाती है। (LCA Tejas Mk-1A Induction)
एचएएल ने सॉफ्टवेयर चुनौतियों का किया था खुलासा
इससे पहले 18 सितंबर को हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड के चेयरमैन और प्रबंध निदेशक रवि कुमार ने भी तेजस मार्क-1ए कार्यक्रम की ताजा स्थिति पर जानकारी दी थी।
रवि कुमार ने कहा था कि विमान में कई सॉफ्टवेयर इंटीग्रेशन चुनौतियां भी सामने आई हैं। उन्होंने बताया कि ट्रायल्स के दौरान कई सिस्टम में बदलाव और सुधार किए जा रहे हैं।
उन्होंने कहा, “डिलीवरी तभी हो सकती है जब विमान पूरी तरह तैयार हो। अभी हम उस स्थिति तक नहीं पहुंचे हैं। हम लगातार काम कर रहे हैं और जल्द समस्याओं का समाधान कर लेंगे।”
उन्होंने समयसीमा बताने से इनकार करते हुए कहा, “ट्रायल्स के दौरान कई तरह के इश्यू सामने आते हैं। इसमें काफी सॉफ्टवेयर शामिल है और उस सॉफ्टवेयर में बदलाव करने पड़ रहे हैं। इसी कारण मैं कोई निश्चित समयसीमा नहीं दे रहा हूं।” (LCA Tejas Mk-1A Induction)
Author
हरेंद्र चौधरी रक्षा पत्रकारिता (Defence Journalism) में सक्रिय हैं और RakshaSamachar.com से जुड़े हैं। वे लंबे समय से भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना से जुड़ी रणनीतिक खबरों, रक्षा नीतियों और राष्ट्रीय सुरक्षा से संबंधित मुद्दों को कवर कर रहे हैं। पत्रकारिता के अपने करियर में हरेंद्र ने संसद की गतिविधियों, सैन्य अभियानों, भारत-पाक और भारत-चीन सीमा विवाद, रक्षा खरीद और ‘मेक इन इंडिया’ रक्षा परियोजनाओं पर विस्तृत लेख लिखे हैं। वे रक्षा मामलों की गहरी समझ और विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण के लिए जाने जाते हैं।





