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पूर्व DGMO राजीव घई बोले- दुनिया के लिए गोल्ड स्टैंडर्ड बन गया ऑपरेशन सिंदूर

लेफ्टिनेंट जनरल घई ने कहा कि दुनिया के कई हिस्सों में लंबे समय तक युद्ध चल रहे हैं, लेकिन भारत ने ऑपरेशन सिंदूर में अलग रणनीति अपनाई...

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📍जयपुर | 7 May, 2026, 2:37 PM

Operation Sindoor anniversary: ऑपरेशन सिंदूर की पहली वर्षगांठ पर पूर्व डीजीएमओ लेफ्टिनेंट जनरल राजीव घई ने बड़ा बयान देते हुए कहा कि इस ऑपरेशन के दौरान पाकिस्तान ने खुद भारत से सैन्य कार्रवाई रोकने की अपील की थी। उन्होंने कहा कि भारत ने बहुत सोच-समझकर और सटीक तरीके से कार्रवाई को अंजाम दिया, अपने लक्ष्य हासिल किए और फिर संघर्ष को आगे बढ़ाने के बजाय रोक दिया।

लेफ्टिनेंट जनरल राजीव घई उस समय मिलिट्री ऑपरेशंस के डायरेक्टर जनरल (डीजीएमओ) थे, जब भारत ने पहलगाम आतंकी हमले के बाद ऑपरेशन सिंदूर शुरू किया था। जयपुर में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने पूरे ऑपरेशन की रणनीति, तीनों सेनाओं के तालमेल और स्वदेशी रक्षा क्षमता पर विस्तार से बात की।

उन्होंने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर ने यह साबित कर दिया कि “आत्मनिर्भर भारत” सिर्फ एक नारा नहीं है, बल्कि यह भारत की सैन्य ताकत को कई गुना बढ़ाने वाला कदम है। उनके मुताबिक, आज भारत के 65 प्रतिशत से ज्यादा रक्षा उपकरण देश में ही बनाए जा रहे हैं।

Operation Sindoor anniversary: “पाकिस्तान ने खुद कहा, अब रोक दीजिए”

लेफ्टिनेंट जनरल घई ने कहा कि दुनिया के कई हिस्सों में लंबे समय तक युद्ध चल रहे हैं, लेकिन भारत ने ऑपरेशन सिंदूर में अलग रणनीति अपनाई।

उन्होंने कहा, “हमने सटीक और सीमित कार्रवाई की। अपने लक्ष्य हासिल किए और फिर संघर्ष रोक दिया। जब पाकिस्तान बातचीत के लिए मजबूर हुआ और उसने हमसे रुकने की अपील की, तब हमने सैन्य कार्रवाई रोकने का फैसला लिया।”

उनके मुताबिक, भारत ने ऐसा जवाब दिया जिससे दुश्मन की जोखिम लेने की क्षमता कमजोर हो गई और उसका कमांड एंड कंट्रोल सिस्टम प्रभावित हुआ। लेकिन भारत ने संघर्ष को लंबे युद्ध में बदलने से बचाया।

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9 स्टैंड-ऑफ प्रिसीजन स्ट्राइक हुई

लेफ्टिनेंट जनरल घई ने बताया कि कुल 9 स्टैंड-ऑफ प्रिसीजन स्ट्राइक की गई थीं। इनमें 7 हमले भारतीय सेना ने और 2 हमले भारतीय वायुसेना ने किए थे।

उन्होंने कहा कि सभी हमले पूरी सटीकता और सही समय पर किए गए। इनका मकसद पाकिस्तान और पीओके में मौजूद आतंकवादी इंफ्रास्ट्रक्चर को बड़ा नुकसान पहुंचाना था।

“किसी भी सुरक्षित ठिकाने का भ्रम तोड़ा”

पूर्व डीजीएमओ ने कहा कि इन हमलों ने साफ संदेश दिया कि आतंकियों के लिए कोई भी ठिकाना सुरक्षित नहीं है।
उन्होंने बताया कि भारतीय सेनाओं ने रियल टाइम इंटेलिजेंस और साझा ऑपरेशन प्लान के आधार पर कार्रवाई की। इससे हर हमला ज्यादा प्रभावी बना।

उनके मुताबिक, “ऑपरेशन सिंदूर सिर्फ सेना का ऑपरेशन नहीं था, बल्कि यह तीनों सेनाओं का संयुक्त अभियान था, जिसमें जमीन, हवा और समुद्र – तीनों क्षेत्रों की ताकत का इस्तेमाल किया गया।”

ब्रह्मोस और आकाश जैसे सिस्टम ने निभाई अहम भूमिका

लेफ्टिनेंट जनरल घई ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर में इस्तेमाल किए गए कई हथियार और सिस्टम भारत में बने थे। उन्होंने कहा कि ब्रह्मोस मिसाइल, आकाश एयर डिफेंस सिस्टम, एडवांस सर्विलांस सिस्टम और इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर उपकरणों ने इस अभियान में निर्णायक भूमिका निभाई।

उन्होंने बताया कि स्वदेशी हथियारों का फायदा यह होता है कि सेना अपनी जरूरत के हिसाब से उन्हें इस्तेमाल कर सकती है और सप्लाई चेन पर भी पूरा नियंत्रण रहता है।

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खुफिया एजेंसियों और साइबर यूनिट्स की भी बड़ी भूमिका

ऑपरेशन सिंदूर के दौरान सिर्फ सेना ही नहीं, बल्कि कई दूसरी एजेंसियों ने भी अहम भूमिका निभाई। लेफ्टिनेंट जनरल घई ने कहा कि खुफिया एजेंसियों ने सटीक जानकारी उपलब्ध कराई, जिससे लक्ष्य तय करने में मदद मिली। उन्होंने यह भी बताया कि साइबर और इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर यूनिट्स लगातार सक्रिय रहीं और सूचना के मोर्चे पर भारत की बढ़त बनाए रखी।

उनके मुताबिक, सरकार ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी माहौल संभाला और देश के अंदर सुरक्षा व्यवस्था तथा जनता का भरोसा बनाए रखा।

“तीनों सेनाओं का तालमेल बड़ी ताकत बना”

प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने बार-बार “जॉइंटनेस” यानी तीनों सेनाओं के तालमेल पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि सेना, वायुसेना और नौसेना ने साझा स्थिति की जानकारी, साझा इंटेलिजेंस और रियल टाइम फैसलों के आधार पर काम किया।

उनके मुताबिक, यही वजह रही कि ऑपरेशन तेज, सटीक और प्रभावी बना। उन्होंने कहा कि शीर्ष स्तर पर स्पष्ट नेतृत्व और नीचे ऑपरेशनल स्तर पर सेना को मिली स्वतंत्रता, ऑपरेशन की सफलता की बड़ी वजह थी।

“अब दुनिया इसे गोल्ड स्टैंडर्ड मान रही”

लेफ्टिनेंट जनरल घई ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर को अब दुनिया सैन्य और रणनीतिक योजना के “गोल्ड स्टैंडर्ड” के रूप में देख रही है। उन्होंने कहा कि इस पूरे अभियान में सरकार, सेना, खुफिया एजेंसियां, बीएसएफ, साइबर संस्थान और दूसरी एजेंसियां एक साथ काम कर रही थीं। उनके मुताबिक, यह “होल ऑफ गवर्नमेंट अप्रोच” का उदाहरण था, जहां हर संस्था ने मिलकर काम किया और पूरे ऑपरेशन को सफल बनाया।

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