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Explained: क्या होता है कर्नल ऑफ द रेजिमेंट? लेफ्टिनेंट जनरल राजीव घई को मिला भारतीय सेना का सबसे सम्मानित पद!

यह पद उस अधिकारी को दिया जाता है जिसका उस रेजिमेंट से गहरा रिश्ता रहा हो और जिसने अपने करियर में बेहतरीन सेवा दी हो। वह अधिकारी उस रेजिमेंट का सबसे वरिष्ठ और सम्मानित चेहरा बन जाता है...

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📍नई दिल्ली | 23 Mar, 2026, 9:39 PM

Colonel of the Regiment: भारतीय सेना में कई ऐसे पद होते हैं जो सिर्फ जिम्मेदारी नहीं, बल्कि परंपरा और सम्मान से भी जुड़े होते हैं। ऐसा ही एक खास पद है “कर्नल ऑफ द रेजिमेंट” (Colonel of the Regiment)। हाल ही में लेफ्टिनेंट जनरल राजीव घई ने कुमाऊं रेजिमेंट, नागा रेजिमेंट और कुमाऊं स्काउट्स के कर्नल ऑफ द रेजिमेंट का पद संभाला है। नाम भले ही “कर्नल” हो, लेकिन यह कोई सामान्य रैंक या फील्ड कमांड नहीं है, बल्कि परंपरा, सम्मान और नेतृत्व से जुड़ा एक खास पद है। ऐसे में समझना जरूरी है कि कर्नल ऑफ द रेजिमेंट वास्तव में क्या होता है और सेना में इसकी क्या अहमियत है। (Colonel of the Regiment)

Colonel of the Regiment: क्या होता है कर्नल ऑफ द रेजिमेंट

सरल शब्दों में समझें तो कर्नल ऑफ द रेजिमेंट कोई सामान्य सैन्य रैंक नहीं है। यह एक ऑनरेरी यानी सम्मानित और पारंपरिक पद होता है। इसका काम युद्ध में कमांड देना नहीं, बल्कि पूरी रेजिमेंट को एक परिवार की तरह जोड़कर रखना होता है।

यह पद उस अधिकारी को दिया जाता है जिसका उस रेजिमेंट से गहरा रिश्ता रहा हो और जिसने अपने करियर में बेहतरीन सेवा दी हो। वह अधिकारी उस रेजिमेंट का सबसे वरिष्ठ और सम्मानित चेहरा बन जाता है। (Colonel of the Regiment)

कैसे हुई इस पद की शुरुआत 

यह परंपरा ब्रिटिश दौर की सेना से शुरू हुई थी। उस समय रेजिमेंट्स को एक तरह से “छोटी-छोटी निजी सेना” की तरह माना जाता था। तब कर्नल ऑफ द रेजिमेंट उस यूनिट का सबसे बड़ा संरक्षक होता था, जिसे जवान अपने परिवार के मुखिया या पिता जैसा मानते थे।

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आजादी के बाद भारतीय सेना ने इस परंपरा को जारी रखा। आज भी हर बड़ी रेजिमेंट, जैसे कुमाऊं, गोरखा, सिख या राजपूताना राइफल्स, आर्टिलरी और आर्मर्ड कोर में यह पद होता है। आमतौर पर एक ही व्यक्ति पूरी रेजिमेंट की सभी बटालियनों के लिए कर्नल ऑफ द रेजिमेंट होता है। जैसे कुमाऊं रेजिमेंट, नागा रेजिमेंट और कुमाऊं स्काउट्स के लिए एक ही अधिकारी इस जिम्मेदारी को संभाल सकता है। (Colonel of the Regiment)

कैसे होती है नियुक्ति?

कर्नल ऑफ द रेजिमेंट का पद आमतौर पर चुनाव के जरिए तय होता है, लेकिन अंतिम फैसला सेना प्रमुख (चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ) की मंजूरी से होता है। इस प्रक्रिया में रेजिमेंट के वरिष्ठ अधिकारी हिस्सा लेते हैं। कर्नल और उससे ऊपर के अधिकारी वोट देते हैं, जबकि बटालियन के कमांडिंग ऑफिसर्स अपनी-अपनी यूनिट के जवानों का प्रतिनिधित्व करते हैं।

आमतौर पर उसी अधिकारी को चुना जाता है जो सबसे वरिष्ठ हो और जिसका उस रेजिमेंट से गहरा जुड़ाव रहा हो। यह अधिकारी ब्रिगेडियर, मेजर जनरल या लेफ्टिनेंट जनरल रैंक का होता है, और कभी-कभी जनरल भी हो सकता है।

एक बार नियुक्ति होने के बाद यह पद लंबे समय तक रहता है। अक्सर अधिकारी इसे जीवनभर निभाता है या तब तक जब तक वह खुद इसे छोड़ न दे।

हाल ही में लेफ्टिनेंट जनरल राजीव घई ने यह जिम्मेदारी संभाली है। उन्होंने यह पद ईस्टर्न कमांड के कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल राम चंदर तिवारी से लिया है, जो पहले इस रेजिमेंट के कर्नल ऑफ द रेजिमेंट थे। (Colonel of the Regiment)

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क्या करता है कर्नल ऑफ द रेजिमेंट

कर्नल ऑफ द रेजिमेंट (CoR) कोई लड़ाई लड़ने या यूनिट चलाने वाला पद नहीं होता। यानी वह रोजमर्रा की कमान नहीं संभालता। उसका काम एक मार्गदर्शक, संरक्षक और परिवार के मुखिया की तरह होता है।

सबसे पहले, वह रेजिमेंट की परंपरा और इतिहास को संभालकर रखता है। रेजिमेंट ने कौन-कौन सी लड़ाइयां लड़ीं, कौन से सम्मान जीते, उसका वॉर क्राई क्या है, यूनिफॉर्म और बैज कैसे हैं- इन सब चीजों को वह जीवित रखता है। साथ ही रेजिमेंटल सेंटर और म्यूजियम को भी आगे बढ़ाने में मदद करता है।

दूसरी बड़ी जिम्मेदारी होती है सैनिकों और उनके परिवारों का ख्याल रखना। इसमें सिर्फ ड्यूटी पर तैनात जवान ही नहीं, बल्कि रिटायर्ड सैनिक, शहीदों के परिवार और वेटरन्स भी शामिल होते हैं। उनकी पेंशन, इलाज, बच्चों की पढ़ाई या नौकरी जैसी जरूरतों को लेकर वह उच्च अधिकारियों से बात करता है और मदद की कोशिश करता है। (Colonel of the Regiment)

तीसरी भूमिका है मोराल यानी मनोबल और एकता बढ़ाना। वह पूरी रेजिमेंट को एक परिवार की तरह जोड़कर रखता है। अलग-अलग कार्यक्रमों जैसे रेजिमेंटल डे, रीयूनियन या परेड में शामिल होकर जवानों का हौसला बढ़ाता है और युवा अफसरों को दिशा देता है।

इसके अलावा, वह रेजिमेंट का प्रतिनिधित्व भी करता है। बड़े समारोहों में शामिल होता है, नए अफसरों की कमीशनिंग या प्रमोशन के समय मार्गदर्शन देता है और रेजिमेंट की तरफ से सेना मुख्यालय या रक्षा मंत्रालय में अपनी बात रखता है।

सबसे खास बात यह है कि कर्नल ऑफ द रेजिमेंट होने के कारण वह ऊपर के स्तर पर रेजिमेंट के हितों की आवाज उठाने में सक्षम होता है। जैसे बेहतर ट्रेनिंग, नए हथियार या अच्छी पोस्टिंग से जुड़े मुद्दों पर वह अपने विचार रख सकता है। (Colonel of the Regiment)

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इतना खास क्यों है यह पद

कर्नल ऑफ द रेजिमेंट का पद इसलिए खास है क्योंकि यह रैंक से भी ऊपर का सम्मान होता है। एक अधिकारी चाहे कितना भी बड़ा पद संभाल रहा हो, लेकिन अगर वह अपनी रेजिमेंट का कर्नल ऑफ द रेजिमेंट बनता है, तो यह उसके करियर का सबसे गौरवपूर्ण क्षण माना जाता है।

यह पद उस अधिकारी के अनुभव, नेतृत्व और रेजिमेंट के साथ उसके जुड़ाव का प्रतीक होता है। (Colonel of the Regiment)

लेफ्टिनेंट जनरल राजीव घई की नई जिम्मेदारी

हाल ही में लेफ्टिनेंट जनरल राजीव घई ने इस पद को संभाला है। उन्होंने कुमाऊं रेजिमेंट, नागा रेजिमेंट और कुमाऊं स्काउट्स के कर्नल ऑफ द रेजिमेंट के रूप में जिम्मेदारी ली है।

उन्होंने इस मौके पर कहा कि उन्हें इन वीर और गौरवशाली रेजिमेंट्स का नेतृत्व करने पर गर्व है। उन्होंने अपने पूर्व अधिकारी के योगदान की भी सराहना की और कहा कि वह इस परंपरा को आगे बढ़ाएंगे। (Colonel of the Regiment)

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