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एयर चीफ ने IAF के घटते फाइटर स्क्वाड्रन पर जताई चिंता, बोले- बदलती दुनिया में मजबूत एयर पावर बेहद जरूरी

रिटायरमेंट से पहले अपनी आखिरी प्रेस कॉन्फ्रेंस में एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने स्वीकार किया कि भारतीय वायुसेना इस समय फाइटर स्क्वाड्रन की कमी का सामना कर रही है...

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📍नई दिल्ली | 3 Oct, 2026, 6:26 PM

IAF Fighter Squadron Shortage: भारतीय वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने कहा कि मौजूदा वैश्विक माहौल में सैन्य ताकत किसी भी देश की राष्ट्रीय शक्ति का अहम आधार बन चुकी है। उन्होंने कहा कि उन्होंने कहा कि अगर किसी देश के पास पर्याप्त सैन्य क्षमता नहीं है, तो वह बाहरी दबाव और मजबूरियों का सामना करने के लिए कमजोर पड़ सकता है।

उन्होंने चेतावनी दी कि भारतीय वायुसेना के लड़ाकू विमानों की संख्या में जो कमी है, वह अब भी चिंता का विषय बनी हुई है, भले ही वायुसेना बड़े स्तर पर आधुनिकीकरण की प्रक्रिया चला रही हो।

इस महीने रिटायरमेंट होने से पहले अपनी आखिरी प्रेस कॉन्फ्रेंस में एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने स्वीकार किया कि भारतीय वायुसेना इस समय फाइटर स्क्वाड्रन की कमी का सामना कर रही है। वायुसेना की स्वीकृत क्षमता 42 फाइटर स्क्वाड्रन की है, लेकिन वर्तमान में उसके पास केवल 29 स्क्वाड्रन हैं। हालांकि उन्होंने कहा कि एलसीए तेजस एमके-1ए, एलसीए एमके-2 और एएमसीए जैसे कार्यक्रम इस कमी को दूर करने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।

IAF Fighter Squadron Shortage: बदलते युद्ध में एयर पावर की बढ़ती अहमियत

3 अक्टूबर को 94वें वायुसेना दिवस की प्रेस कॉन्फ्रेंस में एयर चीफ ने कहा कि हाल के सालों में दुनिया भर में हुए संघर्षों ने यह साबित किया है कि एयर पावर आधुनिक युद्ध का सबसे प्रभावी हथियार बनकर उभरी है। उन्होंने कहा कि किसी भी देश के रणनीतिक उद्देश्यों को हासिल करने में वायु शक्ति की भूमिका लगातार बढ़ रही है।

उन्होंने ऑपरेशन सिंदूर का जिक्र करते हुए बताया कि इस अभियान में एयर पावर, प्रिसिजन हथियारों और लॉयटरिंग म्यूनिशन का इस्तेमाल किया गया। इन क्षमताओं के जरिए रनवे, हैंगर, कमांड एंड कंट्रोल सेंटर और अन्य महत्वपूर्ण सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया गया।

उनके अनुसार आधुनिक युद्ध केवल लड़ाकू विमानों तक सीमित नहीं है। अब लंबी दूरी के हथियार, नेटवर्क आधारित कमांड सिस्टम, एयर डिफेंस नेटवर्क और मानव रहित प्लेटफॉर्म भी युद्ध का अहम हिस्सा बन चुके हैं। (IAF Fighter Squadron Shortage)

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फाइटर जेट और ड्रोन दोनों की होगी भूमिका

एपी सिंह ने कहा कि भविष्य का युद्ध “मैनड बनाम अनमैन्ड” नहीं होगा। यानी लड़ाकू विमान और ड्रोन एक-दूसरे के विकल्प नहीं बल्कि पूरक होंगे।

उन्होंने स्पष्ट किया कि फाइटर एयरक्राफ्ट, यूएवी, लॉयटरिंग म्यूनिशन और अन्य प्लेटफॉर्म अपनी-अपनी भूमिका निभाते रहेंगे। किसी भी सैन्य अभियान की सफलता जॉइंट और इंटीग्रेटेड ऑपरेशन पर निर्भर करेगी।

ड्रोन के बढ़ते इस्तेमाल पर उन्होंने कहा कि भारतीय वायुसेना के लिए यह कोई क्रांतिकारी बदलाव नहीं, बल्कि एक नेचुरल टेक्नोलॉजी डेवलपमेंट है। वायुसेना के पास पहले से विशेष ड्रोन यूनिट मौजूद हैं और फिलहाल अलग ड्रोन कमांड बनाने की कोई योजना नहीं है। (IAF Fighter Squadron Shortage)

ऑपरेशन सिंदूर से मिले अहम सबक

एयर चीफ ने कहा कि हाल के अभियानों ने यह दिखाया है कि इंटीग्रेटेड एयर डिफेंस और संयुक्त सैन्य कार्रवाई कितनी महत्वपूर्ण है।

उन्होंने बताया कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान विभिन्न प्लेटफॉर्म ने एक साथ काम किया। जहां एयर डिफेंस सिस्टम ने दुश्मन के हथियारों और विमानों को रोका, वहीं फाइटर जेट और प्रिसिजन हथियारों ने दुश्मन के महत्वपूर्ण सैन्य ढांचे को निशाना बनाया।

उन्होंने कहा कि आधुनिक युद्ध में सफलता केवल एक प्लेटफॉर्म से नहीं बल्कि पूरे नेटवर्क की क्षमता पर निर्भर करती है। (IAF Fighter Squadron Shortage)

वैश्विक संघर्षों से बदली सैन्य सोच

एपी सिंह ने कहा कि दुनिया में चल रहे युद्धों ने सैन्य योजनाओं को नए सिरे से सोचने पर मजबूर किया है। एयर एंड मिसाइल डिफेंस, एयर कमांड एंड कंट्रोल नेटवर्क, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और अनमैनड सिस्टम अब सैन्य रणनीति का अभिन्न हिस्सा बनते जा रहे हैं।

उन्होंने कहा कि हर नया संघर्ष सैन्य संगठनों को अपने कॉन्सैप्ट्स, टेक्नोलॉजी और फोर्स स्ट्रक्चर की समीक्षा करने का अवसर देता है।

ईरान से जुड़े मौजूदा संघर्ष पर पूछे गए सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि उसकी तुलना सीधे ऑपरेशन सिंदूर से नहीं की जा सकती क्योंकि दोनों परिस्थितियां और रणनीतियां अलग हैं। (IAF Fighter Squadron Shortage)

आत्मनिर्भरता पर वायुसेना का बड़ा जोर

एयर चीफ मार्शल ने कहा कि दुनिया भर में जारी संघर्षों के चलते कई देशों के हथियार भंडार और मिलिट्री सप्लाई चेन प्रभावित हुई हैं। ऐसे माहौल में आत्मनिर्भरता भारत के लिए विकल्प नहीं बल्कि आवश्यकता बन चुकी है।

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उन्होंने कहा कि भारतीय वायुसेना स्वदेशी रक्षा कार्यक्रमों को पूरा सपोर्ट दे रही है। इनमें एलसीए तेजस एमके-1ए, तेजस एमके-2, एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (एएमसीए), आकाश, आकाश-एनजी, ब्रह्मोस और अस्त्र जैसी प्रोजेक्ट शामिल हैं।

इसके अलावा एवॉक्स (एईडब्ल्यू एंड सी), इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सिस्टम, एचटीटी-40 ट्रेनर विमान, प्रचंड लाइट कॉम्बैट हेलीकॉप्टर, मल्टी रोल हेलीकॉप्टर और विभिन्न स्वदेशी रडार कार्यक्रमों पर भी तेजी से काम चल रहा है।

उनके अनुसार इन सभी प्रोजेक्ट्स का उद्देश्य भारत की डिफेंस इंडस्ट्री को मजबूत आधार देना है। (IAF Fighter Squadron Shortage)

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का बढ़ रहा इस्तेमाल

एयर चीफ ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआई धीरे-धीरे वायुसेना की विभिन्न प्रणालियों में शामिल हो रही है। हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि एआई केवल मदद देगी। अंतिम फैसला लेने की जिम्मेदारी इंसानों के पास ही रहेगी। उन्होंने इसे “एआई ऑगमेंटेड फोर्स” की दिशा में बढ़ता कदम बताया। (IAF Fighter Squadron Shortage)

मानवीय सहायता में भी अहम भूमिका

एपी सिंह ने कहा कि भारतीय वायुसेना की भूमिका केवल युद्धक अभियानों तक सीमित नहीं है। देश में बाढ़, प्राकृतिक आपदा और अन्य आपात स्थितियों में राहत कार्यों में भी वायुसेना लगातार योगदान देती रही है।

उन्होंने बताया कि भारत के अलावा कई विदेशी देशों में भी मानवीय सहायता और निकासी अभियानों में वायुसेना ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। युगांडा, वेनेजुएला, फिलीपींस, मेडागास्कर, थाईलैंड, क्यूबा और जमैका जैसे देशों में भारतीय वायुसेना सहायता मिशन चला चुकी है। (IAF Fighter Squadron Shortage)

एयर डिप्लोमेसी भी बनी रणनीतिक ताकत

एयर फोर्स चीफ ने कहा कि आज एयर डिप्लोमेसी भारत की रणनीतिक साझेदारियों का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुकी है। भारतीय वायुसेना विभिन्न देशों के साथ द्विपक्षीय और बहुपक्षीय सैन्य अभ्यासों में हिस्सा ले रही है। उन्होंने कहा कि मौजूदा समय में चल रहा तरंग शक्ति अभ्यास इसका बड़ा उदाहरण है।

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इन अभ्यासों के जरिए भारतीय वायुसेना अपने सहयोगी देशों के साथ ऑपरेशन अनुभव साझा करती है और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी उपस्थिति मजबूत बनाती है। (IAF Fighter Squadron Shortage)

थिएटर कमांड पर बोले एयर चीफ

थिएटर कमांड के मुद्दे पर एपी सिंह ने कहा कि भारतीय वायुसेना इस कॉन्सैप्ट के खिलाफ नहीं है। हालांकि उन्होंने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर और हाल के अभियानों से मिले अनुभवों को ध्यान में रखते हुए इसके स्ट्रक्चर को अंतिम रूप दिया जाना चाहिए। उनका मानना है कि किसी भी नई व्यवस्था को लागू करने से पहले हालिया सैन्य अनुभवों का अध्ययन जरूरी है। (IAF Fighter Squadron Shortage)

हर समय तैयार हैं वायुसेना के विमान

अपने संबोधन के दौरान एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने कहा कि भारतीय वायुसेना देश की सुरक्षा के लिए 24 घंटे और साल के 365 दिन तैयार रहती है।

उन्होंने कहा कि चाहे देश में त्योहार हो, कोई संकट हो या अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तनावपूर्ण स्थिति, वायुसेना के विमान और ऑपरेटर लगातार सतर्क रहते हैं। उनका मुख्य उद्देश्य देश के हवाई क्षेत्र की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। (IAF Fighter Squadron Shortage)

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    हरेंद्र चौधरी रक्षा पत्रकारिता (Defence Journalism) में सक्रिय हैं और RakshaSamachar.com से जुड़े हैं। वे लंबे समय से भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना से जुड़ी रणनीतिक खबरों, रक्षा नीतियों और राष्ट्रीय सुरक्षा से संबंधित मुद्दों को कवर कर रहे हैं। पत्रकारिता के अपने करियर में हरेंद्र ने संसद की गतिविधियों, सैन्य अभियानों, भारत-पाक और भारत-चीन सीमा विवाद, रक्षा खरीद और ‘मेक इन इंडिया’ रक्षा परियोजनाओं पर विस्तृत लेख लिखे हैं। वे रक्षा मामलों की गहरी समझ और विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण के लिए जाने जाते हैं।

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