📍नई दिल्ली | 3 Oct, 2026, 5:13 PM
LCA Tejas Mk-1A Delivery: लाइट कॉम्बैट एयरक्राफ्ट तेजस मार्क-1ए कार्यक्रम को लेकर भारतीय वायुसेना और हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड के बीच 15 अक्टूबर को एक अहम समीक्षा बैठक होने जा रही है। सूत्रों के मुताबिक इस बैठक में फाइटर जेट की मौजूदा प्रोग्रेस, बचे हुए तकनीकी कार्य, परीक्षणों की स्थिति और डिलीवरी टाइमलाइन पर विस्तार से चर्चा होगी। वायुसेना इस बार कार्यक्रम की प्रगति को लेकर बेहद सख्त रुख अपनाए हुए है और तय मानकों से अब किसी तरह का समझौता नहीं किया जाएगा।
LCA Tejas Mk-1A Delivery: अंतिम चरण में पहुंच चुका है प्रोग्राम
रक्षा समाचार को सूत्रों ने बताया कि तेजस मार्क-1ए कार्यक्रम अब अंतिम चरण में पहुंच चुका है और कुल काम का 95 प्रतिशत से अधिक हिस्सा पूरा हो चुका है। अस्त्र मार्क-1 बियॉन्ड विजुअल रेंज मिसाइल का इंटीग्रेशन और ट्रायल भी पूरा हो चुका है। अब फोकस अंतिम उड़ान परीक्षणों, सॉफ्टवेयर वेरिफिकेशन, रडार परफॉर्मेंस और सर्टिफिकेशन प्रक्रिया पर है।
वायुसेना और एचएएल के बीच होने वाली यह समीक्षा बैठक केवल एक नियमित प्रोग्रेस मीटिंग नहीं मानी जा रही है। बल्कि यह उस कार्यक्रम की समीक्षा है, जिसका इंतजार भारतीय वायुसेना कई सालों से कर रही है।
सूत्रों के अनुसार वायुसेना इस बार स्पष्ट संदेश देना चाहती है कि अब कोई भी देरी स्वीकार नहीं की जाएगी। एचएएल के साथ लगातार कॉर्डिनेशन जारी है। एक वरिष्ठ वायुसेना अधिकारी ने बताया, “काम लगभग पूरा है। अब अंतिम कुछ टेक्निकल चीजों का ही काम बाकी है।
नए साल से पहले मिल सकती है पहली डिलीवरी
सूत्रों का कहना है कि अगर अंतिम परीक्षण और प्रमाणन समय पर पूरा हो गया तो नए साल से पहले पांच तेजस मार्क-1ए की पहली डिलीवरी मिल सकती है।
पहली डिलीवरी बेंगलुरु में होने की संभावना है। इसके बाद शुरुआती पांच विमानों का पहला बैच तमिलनाडु स्थित सुलूर एयर फोर्स स्टेशन भेजा जाएगा।
सुलूर पहले से ही तेजस मार्क-1 की दो स्क्वाड्रनों का बेस है। यहां नंबर-45 स्क्वाड्रन “फ्लाइंग डैगर्स” और नंबर-18 स्क्वाड्रन “फ्लाइंग बुलेट्स” तेजस का ऑपरेशन कर रही हैं। इसी कारण शुरुआती मार्क-1ए विमानों को भी वहीं तैनात करने की योजना बनाई गई है। (LCA Tejas Mk-1A Delivery)
एयर चीफ के कार्यकाल में डिलीवरी न होने का अफसोस
वायुसेना सूत्रों ने स्वीकार किया है कि उनकी इच्छा थी कि मौजूदा एयर चीफ मार्शल एपी सिंह के कार्यकाल के दौरान ही तेजस मार्क-1ए की पहली डिलीवरी हो जाए।
एक सूत्र ने कहा, “हम चाहते थे कि एयर चीफ मार्शल एपी सिंह के रहते यह उपलब्धि हासिल हो। देरी की वजह से ऐसा नहीं हो पाया। इसका अफसोस है।”
एयर चीफ मार्शल ने कहा कि यह परियोजना काफी लंबे समय से चल रही है और अब इसे तेजी से पूरा करने की जरूरत है। उन्होंने कहा, “हमें तेजस मार्क-1ए कार्यक्रम को क्लोज करना चाहिए और अगले चरणों की ओर बढ़ना चाहिए।”
बता दें कि 20 सितंबर को वीर गार्जियन-2026 के दौरान उन्होंने जोधपुर से खुद तेजस मार्क 1 की उड़ान भी भरी थी। (LCA Tejas Mk-1A Delivery)
प्रोडक्शन में तेजी का दिया भरोसा
तेजस मार्क-1ए की डिलीवरी पर बोलते हुए एयर चीफ मार्शल ए.पी. सिंह ने कहा कि हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल) ने प्रोडक्शन स्पीड बढ़ाने का भरोसा दिया है। उन्होंने बताया कि एचएएल अब हर साल 24 विमान बनाने की क्षमता की दिशा में काम कर रहा है। उन्होंने कहा, “एचएएल की क्षमता अब 24 विमान प्रति वर्ष तक उत्पादन करने की बात कर रही है। इंजन सप्लाई शुरू होने के बाद उत्पादन में तेजी आएगी।”
उन्होंने यह भी बताया कि जीई इंजन की सप्लाई में देरी के कारण तेजस मार्क-1ए की डिलीवरी प्रभावित हुई थी, लेकिन अब स्थिति में सुधार हो रहा है। उनके मुताबिक, “इस वर्ष 12 इंजन मिलने की उम्मीद है और उसके बाद 20 से अधिक इंजन प्रति वर्ष देने का भरोसा दिया है।” (LCA Tejas Mk-1A Delivery)
हर साल 40 नए फाइटर जेटों की जरूरत
वायुसेना प्रमुख ने कहा कि भारतीय वायुसेना को अपनी मौजूदा स्क्वाड्रन संख्या बनाए रखने और भविष्य की जरूरतों को पूरा करने के लिए हर साल लगभग 36 से 40 नए फाइटर जेटों की जरूरत है। उन्होंने कहा कि यदि तेजस कार्यक्रम निर्धारित योजना के अनुसार आगे बढ़ता है, तो यह स्क्वाड्रन संख्या में गिरावट को रोकने और धीरे-धीरे लड़ाकू बेड़े को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाएगा। उन्होंने कहा, “अगर तेजस उत्पादन योजना के मुताबिक आगे बढ़ता है, तो यह हमारी संख्या में गिरावट को रोकने और धीरे-धीरे स्क्वाड्रन बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।” (LCA Tejas Mk-1A Delivery)
एचएएल ने तैयार कर लिए हैं 27 एयरफ्रेम
एचएएल के चेयरमैन और प्रबंध निदेशक रवि कुमार के अनुसार कंपनी ने 180 तेजस मार्क-1ए विमानों के ऑर्डर में से 27 एयरफ्रेम तैयार कर लिए हैं। जनरल इलेक्ट्रिक से एफ-404-आईएन20 इंजन की सप्लाई भी शुरू हो चुकी है। अब तक 11 इंजन मिल चुके हैं और शेष इंजन चरणबद्ध तरीके से आने हैं। बाकी 16 एयरफ्रेम कैनोपी इंजन लगाकर उड़ाए जा चुके हैं
रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह ने सितंबर 2026 में कहा था कि उपलब्ध इंजनों के साथ कई विमान उड़ान भर चुके हैं और साल के अंत तक एक पूरी स्क्वाड्रन के इंडक्शन का लक्ष्य रखा गया है।
हालांकि एयरफ्रेम तैयार होने और विमान की डिलीवरी होने में अंतर होता है। हर विमान को इंजन फिटमेंट, ग्राउंड टेस्ट, इंजन रन, फ्लाइट टेस्ट और अंतिम स्वीकार्यता प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है।
इससे पहले 22 सितंबर को तरंग शक्ति अभ्यास से जुड़ी एक ब्रीफिंग में वाइस चीफ एयर मार्शल आशुतोष दीक्षित ने एलसीए तेजस मार्क-1ए की इंडक्शन टाइमलाइन पर अपडेट दिया था। उन्होंने बताया था कि शुरुआत में देरी का मुख्य कारण इंजन की उपलब्धता थी, क्योंकि पर्याप्त इंजन समय पर नहीं मिल पाए थे। अब इंजन मिल चुके हैं और विमानों में लगाए जा चुके हैं।
उन्होंने बताया था कि वर्तमान में औपचारिक इंडक्शन से पहले व्यापक और गहन परीक्षण किए जा रहे हैं। केवल दो-तीन तकनीकी बिंदुओं का सत्यापन बाकी है। वायुसेना के अनुसार अगले एक-दो महीनों में ये प्रक्रियाएं पूरी हो सकती हैं, जिसके बाद तेजस मार्क-1ए के इंडक्शन का रास्ता साफ हो जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि भारतीय वायुसेना इस विमान के शामिल होने का बेसब्री से इंतजार कर रही है। (LCA Tejas Mk-1A Delivery)
तेजस मार्क-1ए में क्या है खास?
तेजस मार्क-1ए भारतीय वायुसेना का एडवांस मल्टीरोल फाइटर जेट है। इसे मौजूदा तेजस मार्क-1 की तुलना में अधिक सक्षम बनाया गया है।
इसमें एडवांस्ड एईएसए रडार, आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर सूट, बेहतर मिशन कंप्यूटर, डिजिटल एवियोनिक्स और लंबी दूरी के हथियारों को संचालित करने की क्षमता दी गई है।
विमान में स्वदेशी अस्त्र मार्क-1 मिसाइल को भी जोड़ा गया है। यह बियॉन्ड विजुअल रेंज एयर-टू-एयर मिसाइल है, जो पायलट को लंबी दूरी से दुश्मन के विमान को निशाना बनाने की क्षमता देती है। (LCA Tejas Mk-1A Delivery)
रडार और सॉफ्टवेयर पर चल रहा अंतिम काम
कार्यक्रम के अंतिम चरण में सबसे ज्यादा ध्यान रडार और मिशन सिस्टम पर दिया जा रहा है।
रक्षा सचिव ने हाल ही में बताया था कि स्वदेशी एलसीए तेजस मार्क-1ए कार्यक्रम जारी रहेगा। राफेल की अतिरिक्त खरीद से यह कार्यक्रम नहीं रुकेगा। यह स्पाइरल डेवलपमेंट मॉडल पर चलेगा, जिसमें स्वदेशी रडार और हथियार चरणबद्ध तरीके से जोड़े जाएंगे।
उन्होंने यह भी कहा था कि रडार इंटीग्रेशन का काम 90 से 95 प्रतिशत तक पूरा हो चुका है। कुछ परफॉर्मेंस संबंधी मुद्दों पर अभी काम चल रहा है। उन्होंने यह भी साफ किया कि इंजन लगने भर से डिलीवरी नहीं होती। ग्राउंड चेक, इंजन रन, उड़ान परीक्षण और स्वीकार्यता प्रक्रिया पूरी होनी जरूरी है।
सूत्रों के मुताबिक किसी भी आधुनिक फाइटर जेट में रडार, मिशन कंप्यूटर, इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर सिस्टम और हथियारों के बीच सही तालमेल बेहद जरूरी होता है। यही कारण है कि अंतिम सॉफ्टवेयर वैरिफिकेशन और उड़ान परीक्षणों में समय लग रहा है। (LCA Tejas Mk-1A Delivery)
180 विमानों का है ऑर्डर
तेजस मार्क-1ए भारतीय वायुसेना के सबसे बड़े स्वदेशी फाइटर जेट कार्यक्रमों में से एक है। फरवरी 2021 में 83 विमानों का पहला कॉन्ट्रैक्ट लगभग 48,000 करोड़ रुपये में हुआ था।
इसके बाद सितंबर 2025 में 97 अतिरिक्त विमानों का दूसरा कॉन्ट्रैक्ट लगभग 62,370 करोड़ रुपये में दिया गया।
दोनों ऑर्डरों को मिलाकर कुल 180 विमान भारतीय वायुसेना को मिलने हैं। इनमें सिंगल-सीटर फाइटर और ट्विन-सीटर ट्रेनर दोनों शामिल हैं।
बता दें कि भारतीय वायुसेना लंबे समय से स्क्वाड्रन संख्या की कमी का सामना कर रही है। स्वीकृत संख्या 42 स्क्वाड्रन है, जबकि वर्तमान संख्या इससे काफी कम है।
मिग-21 विमानों के रिटायरमेंट के बाद यह अंतर और बढ़ गया है। वायुसेना लगातार कह रही है कि देश को हर साल 36 से 40 नए फाइटर जेटों की जरूरत है। (LCA Tejas Mk-1A Delivery)
Author
हरेंद्र चौधरी रक्षा पत्रकारिता (Defence Journalism) में सक्रिय हैं और RakshaSamachar.com से जुड़े हैं। वे लंबे समय से भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना से जुड़ी रणनीतिक खबरों, रक्षा नीतियों और राष्ट्रीय सुरक्षा से संबंधित मुद्दों को कवर कर रहे हैं। पत्रकारिता के अपने करियर में हरेंद्र ने संसद की गतिविधियों, सैन्य अभियानों, भारत-पाक और भारत-चीन सीमा विवाद, रक्षा खरीद और ‘मेक इन इंडिया’ रक्षा परियोजनाओं पर विस्तृत लेख लिखे हैं। वे रक्षा मामलों की गहरी समझ और विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण के लिए जाने जाते हैं।





